राजनीति
लखनऊ में 104 दिनों में कोविड-19 का एक भी मामला नहीं
लखनऊ में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। 104 दिनों में यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश की राजधानी में एक भी मामला सामने नहीं आया है।
यह अप्रैल 2021 के ठीक उलट है, जब दूसरी लहर ने शहर को अपनी चपेट में ले लिया था।
अप्रैल और मई 2021 में, 1.5 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए थे और 1,200 से अधिक लोग कोविड-19 के चलते मारे गए थे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ के कार्यालय से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पिछले 24 घंटों में शहर में किसी भी नमूने में कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
तीन मौजूदा मरीज ठीक हो गए हैं, जिससे सक्रिय मामलों की संख्या 36 हो गई है।
इससे पहले, 21 दिसंबर, 2021 को लखनऊ में शून्य मामले दर्ज किए गए थे।
हालांकि, उसके बाद, कुछ दिनों के भीतर, तीसरी लहर शुरू हो गई और 9 जनवरी तक, प्रतिदिन सामने आने वाले मामलों की संख्या 1,000 का आंकड़ा पार कर गई थी।
तीसरी लहर, जो दूसरी की तुलना में बहुत कम गंभीर थी, 20 जनवरी को 3,643 मामलों के साथ चरम पर पहुंच गई थी, जिसके बाद लगातार गिरावट देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
हूती ने रियाद हवाई अड्डे पर ‘सटीक’ हमले का दावा किया

हूती विद्रोहियों ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने एक बार फिर सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अहम सैन्य ठिकानों पर ‘सटीक’ हमला किया है।
हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने एक्स पोस्ट में कहा कि हूती बलों ने हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। इसके साथ ही उन्होंने देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशनों पर कई ड्रोन हमले करने का भी दावा किया।
इसके कुछ देर बाद अगली पोस्ट में उन्होंने कहा, यमनी सशस्त्र बलों ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग करते हुए दो अलग-अलग सैन्य अभियान चलाए। इन अभियानों में अदन गवर्नरेट के सलाह अल-दीन क्षेत्र और लाहिज गवर्नरेट के अल-वहात क्षेत्र में मौजूद सऊदी की सैन्य टुकड़ियों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया। हमले बिल्कुल सटीक रहे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारी नुकसान हुआ। साथ ही, उनके कई वाहन और हथियारों के गोदाम नष्ट हो गए और जलकर खाक हो गए।”
यह बयान तब आया, जब कुछ घंटे पहले ही सऊदी बलों ने घोषणा की थी कि उन्होंने हूती की ओर से रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरस्पेट कर नष्ट कर दिया है। यमन में लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि इसके जवाब में उन्होंने यमन की राजधानी सना में दो मिसाइल लॉन्च साइटों पर हमला किया।
हूती ने रविवार को किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ-साथ खमीस मुशैत में किंग खालिद एयरबेस और जाजान में एक नौसैनिक अड्डे पर भी हमले करने का दावा किया। हूती ने सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन पर आरोप लगाया कि उसने पिछले 24 घंटों में यमन पर कम से कम 56 हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में होदेइदाह, लाहिज, अमरान, सादा, अल-जौफ, ताइज और इब प्रांत शामिल हैं।
सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमलों में अब तक दो भारतीय नागरिक मारे गए हैं। 10-11 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक भारतीय की मौत हुई थी।
वहीं, 21 अक्टूबर को दम्माम एयरपोर्ट हमले में भी एक भारतीय की जान चली गई थी। दम्माम एयरपोर्ट हमले में दो अन्य भारतीय घायल हुए थे। इसके अलावा, शैबा ऑयल फील्ड में ड्रोन का मलबा गिरने से एक भारतीय घायल हुआ था।
राजनीति
सर्बिया संसदीय चुनाव: छात्र आंदोलन ने पलटी बाजी, अलेक्जेंडर वुसिच ने स्वीकारी हार

राष्ट्रपति पद छोड़कर संसदीय चुनाव के जरिए सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे अलेक्जेंडर वुसिच ने रविवार को अपनी हार स्वीकार कर ली। शुरुआती चुनावी अनुमानों के मुताबिक, छात्र समर्थित उम्मीदवारों के गठबंधन को संसद में बहुमत मिलने की संभावना है। यह चुनाव वुसिच की सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकले छात्र समूह के बीच मुकाबले के रूप में देखा गया।
पोलिंग एजेंसियों इप्सोस और सीईएसआईडी (सीईएसआईडी) द्वारा जारी शुरुआती अनुमानों के अनुसार, “स्टूडेंट लिस्ट — स्टूडेंट्स विन” को 52 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह आंकड़ा वुसिच के नेतृत्व वाले गठबंधन “अलेक्जेंडर वुसिच — यूनाइटेड सर्बिया” से काफी आगे है, जिसे 39.3 प्रतिशत वोट मिले हैं।
सिंहुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि वुसिच ने बेलग्रेड में अपनी पार्टी के मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि शुरुआती नतीजों के आधार पर यह स्पष्ट है कि उनकी पार्टी चुनाव हार गई है और ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने जीत हासिल की है। उन्होंने अनुमान जताया कि छात्र समर्थित सूची को संसद की 250 सीटों में से 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को लगभग 105 सीटें मिलने की उम्मीद है।
वुसिच ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि स्ट्रैटिफाइड सैंपल (स्तरीकृत नमूने) के आधार पर यह साफ है कि हम ये चुनाव हार गए हैं। स्टूडेंट लिस्ट जीत गया है। उनके पास 135 से 140 सीटें होंगी, और हमारे पास लगभग 105 सीटें होंगी।”
वुसिच के अनुमानों के अनुसार, छात्रों के समर्थन वाली सूची को लगभग 22 लाख (2.2 मिलियन) वोट मिले, जबकि उनके गठबंधन को लगभग 17.2 लाख (1.72 मिलियन) वोट मिले।
‘स्टूडेंट लिस्ट’ के मुख्यालय में जीत का जश्न शुरू होते ही, प्रमुख उम्मीदवार रादोमिर साइचिक (बेलग्रेड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और सर्बियाई एकेडमी ऑफ साइंसेज एंड आर्ट्स के सदस्य) ने इसे सर्बियाई नागरिकों के लिए एक ऐतिहासिक जीत करार दिया।
साइचिक ने कहा, “आज रात लोगों की आवाज सुनी गई है।” उन्होंने बताया कि शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि ‘स्टूडेंट लिस्ट’ सभी मतदान केंद्रों पर स्पष्ट रूप से आगे चल रही है।
उन्होंने कहा, “यह डर पर साहस की जीत है, उदासीनता पर उम्मीद की जीत है, और इस विश्वास की जीत है कि सर्बिया के विचार अलग हो सकते हैं और उसे अलग होना ही चाहिए… यह जीत किसी एक व्यक्ति की निजी उपलब्धि नहीं है, बल्कि हम सबकी है।”
इस बात पर जोर देते हुए कि जनता के चुनावी फैसले का “हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए,” साइचिक ने अपने समर्थकों से शांति और गरिमा के साथ जश्न मनाने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से यह भी कहा कि वे किसी उकसावे में न आएं और न ही किसी तरह के विवाद में पड़ें।
रविवार को हुए मतदान से सर्बिया की संसद (जो एक-सदनीय है) की सभी 250 सीटों के नतीजे तय हुए, जिनमें बहुमत के लिए 126 सीटों की जरूरत थी।
करीब 64.5 लाख मतदाता 8,392 मतदान केंद्रों पर वोट डालने के पात्र थे, और इस चुनाव में 18 चुनावी सूचियां (पार्टियां/गठबंधन) मैदान में थीं। मतदान केंद्र रात 8 बजे (1900 जीएमटी) बंद हो गए, हालांकि जो मतदाता उस समय तक कतार में लग चुके थे, उन्हें वोट डालने की अनुमति दी गई।
यह नतीजा सर्बिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, जहां 2012 से वुसिच और उनकी पार्टी एसएनएस का दबदबा रहा है। संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने के लिए वुसिच ने 27 सितंबर को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, और अब दिसंबर के अंत तक नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव होना जरूरी है।
इस चुनाव की पृष्ठभूमि नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुई एक दर्दनाक दुर्घटना से जुड़ी है। स्टेशन पर कंक्रीट की छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को लेकर सवाल उठाए।
समय के साथ आंदोलन को छात्रों के अलावा समाज के अन्य वर्गों का भी समर्थन मिलने लगा। छात्र समूह ने संसद की सभी 250 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची तैयार की, जिसमें शिक्षाविदों, खिलाड़ियों और किसानों सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया। आंदोलन का उद्देश्य भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, अर्थव्यवस्था में सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का था।
अपनी हार स्वीकार करते वुसिच ने कहा कि उन्होंने आधिकारिक नतीजे आने से पहले ही अनुमानित परिणामों की घोषणा करने का फैसला किया, ताकि उनके समर्थकों को किसी तरह की अनिश्चितता न रहे और उन दावों को भी गलत साबित किया जा सके जिनमें कहा जा रहा था कि वे अपनी चुनावी हार मानने से इनकार कर देंगे।
उन्होंने अपने गुट की संभावित हार के लिए विरोध प्रदर्शनों को मिल रहे विदेशी समर्थन को जिम्मेदार ठहराया और इस नतीजे को “एक क्रांति की पुष्टि” करार दिया।
वुसिच ने अपने समर्थकों का धन्यवाद किया और वादा किया कि उनका राजनीतिक आंदोलन एकजुट रहेगा और विपक्ष में रहकर अपना काम जारी रखेगा।
ये अनुमान 2012 में सत्ता में आने के बाद से एसएनएस के लिए सबसे बड़ा चुनावी झटका हैं। साथ ही, ये नतीजे छात्रों के समर्थन वाले इस आंदोलन को ऐसी स्थिति में लाते हैं जहां वे संसद में अकेले अपने दम पर बहुमत हासिल कर सकते हैं।
राजनीति
यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां आपस में टकराईं, कई घायल

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के काफिले में शामिल गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिससे कई लोग घायल हो गए। हालांकि, राहुल गांधी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
बताया जा रहा है कि यह हादसा हलियापुर इलाके में 91वें किलोमीटर के माइलस्टोन के पास हुआ, जहां काफिले की पांच गाड़ियां और एक एंबुलेंस आपस में टकरा गईं। इस घटना में घायल होने वालों में पार्टी कार्यकर्ता, अधिकारी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। घायलों की संख्या और उन्हें कितनी चोटें आई हैं, अभी तक यह नहीं पता चला है।
राहुल गांधी सोमवार को उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। उन्हें सुल्तानपुर की एक विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश होना है। यह मामला मानहानि से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। ये कथित टिप्पणियां 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले बेंगलुरु में एक चुनावी रैली के दौरान की गई थीं।
सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अमित शाह के बारे में राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। तब से इस मामले की सुनवाई सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में चल रही है।
इस मामले में सोमवार को अदालत अपना फैसला सुनाने वाली है। शिकायतकर्ता के वकील संतोष कुमार पांडे ने बताया कि फैसला सुनाए जाने के दौरान राहुल गांधी को खुद अदालत में मौजूद रहना होगा। इससे पहले, अतिरिक्त सिविल जज शुभम वर्मा ने फैसला सुनाने के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की थी।
सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के अनुसार, राहुल गांधी के अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक लखनऊ से सुल्तानपुर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने और सुबह 10 बजे तक पहुंचने की उम्मीद थी।
पुलिस ने अदालत परिसर के अंदर और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
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