अंतरराष्ट्रीय समाचार
द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सऊदी अरब और इराक के बीच बातचीत
इराकी प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-काधेमी ने बगदाद में सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन अल सउद से मुलाकात की और इस दौरान दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने और मध्य-पूर्व में विकास की गतिविधियों पर चर्चा की। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक, उनके कार्यालय की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया कि अल-काधेमी ने सऊदी के मंत्री और उनके साथ आए प्रतिनिधियों को महत्व देते हुए कहा कि “सऊदी अरब, इराक का सच्चा साथी है।”
अल-काधेमी ने कहा, “इराक को दोनों देशों के बीच समृद्ध विरासत के आधार पर विशिष्ट ऐतिहासिक संबंध बनाने की उम्मीद है।”
बयान के मुताबिक, बगदाद पहुंचे सऊदी के प्रमुख राजनयिक ने कहा कि उनके देश को सऊदी अरब के साम्राज्य में अल-काधेमी के आगामी दौरे का बेसब्री से इंतजार है जिससे दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग मजबूत होगा और इससे दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों को भी सक्रिय किया जा सकेगा।
बयान के मुताबिक, अल-काधेमी ने सऊदी के प्रतिनिधियों के साथ आर्थिक सहयोग के विषय पर भी चर्चा की ताकि दोनों देशों में तेल के उत्पादन में सामंजस्यता हासिल किया जा सके जिससे इराक पर आर्थिक बोझ कम हो, जो वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कम कीमतों का मार झेल रही है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दुनिया को युद्ध नहीं, कूटनीति से समाधान चाहिए: एस जयशंकर

भारत ने जी-20 देशों से अनुरोध किया है कि विभिन्न संघर्षों के समाधान का रास्ता डिप्लोमेसी यानी कूटनीति से निकाला जाए। उन्होंने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित होने से बचाने के लिए ठोस प्रयास करने का आग्रह किया है।
अमेरिका के अटलांटा में शनिवार को जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारतीय पत्रकारों से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत अपने प्रयासों में अमेरिका के साथ तालमेल बिठा रहा है। उन्होंने उत्पादन नेटवर्क को भौगोलिक रूप से और अधिक विविध बनाने पर भी जोर दिया और उम्मीद जताई कि दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले यह समूह किसी आम सहमति पर पहुंच जाएगा।
इन चर्चाओं में भारत का संदेश स्पष्ट था कि संघर्षों की कीमत केवल सीधे तौर पर शामिल देशों को ही नहीं, बल्कि अन्य देशों को भी चुकानी पड़ रही है, खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) को। भारत की प्राथमिकताओं में कूटनीति, आपूर्ति सुरक्षा और किसी एक उत्पादन केंद्र पर निर्भरता को कम करना शामिल थे।
भारत रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ लगातार संपर्क में है। इन बातचीत का उद्देश्य काला सागर में अनाज की आवाजाही बहाल करना, नागरिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को रोकने के रास्ते तलाशना है।
उन्होंने कहा, “युद्ध को खत्म करने के लिए, अंतहीन युद्धों का सिलसिला रुकना चाहिए।”
जयशंकर ने कहा कि अटलांटा में हुई बैठक उपयोगी और खुली चर्चा का मंच रही। इसमें भू-राजनीतिक हालात, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े मुद्दों पर तीन सत्र आयोजित किए गए। पहले दो सत्र शुक्रवार को हुए, जबकि आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा शनिवार को हुई।
जयशंकर ने कहा कि भू-राजनीतिक चर्चा के दौरान दो बड़े संघर्षों के वैश्विक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया गया। भारत ने स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई से इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इसके बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता तलाशना होगा।
उन्होंने कहा, “भारत स्वयं इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, और बैठक में दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों ने भी भारत के प्रयासों का उल्लेख किया।”
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्धों को समाप्त करने की दिशा में प्रयास होने चाहिए। संघर्षों का असर खाद्य, ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति पर पड़ता है, जिसका सबसे अधिक दबाव विकासशील देशों पर आता है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत की पहल का ब्योरा देते हुए जयशंकर ने बताया, “भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है। इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर शुरू करना तथा ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमलों को रोकने की संभावनाएं शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत ने रूस और यूरोपीय देशों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। काला सागर से अनाज की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। रूस और यूक्रेन दोनों ही वैश्विक बाजार में अनाज के बड़े निर्यातक हैं। ऐसे में निर्यात प्रभावित होने का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो अपनी खाद्य जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं।
जयशंकर के मुताबिक, ग्लोबल साउथ के देशों की चिंता इसलिए भी अधिक है, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध अनाज के बड़े खरीदार हैं। भारत चाहता है कि अनाज की आपूर्ति फिर सामान्य हो सके, ताकि खाद्य सुरक्षा पर संकट और गहरा न हो।
ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के सवाल को उन्होंने बातचीत का सबसे जटिल पहलू बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के लिए ऊर्जा ढांचे का अर्थ अलग-अलग है। किसी के लिए इसमें तेल रिफाइनरी शामिल है, तो किसी के लिए बिजली ग्रिड और ईंधन की आपूर्ति करने वाले जहाज भी इसी दायरे में आते हैं।
जयशंकर ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी पक्षों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं है, लेकिन भारत उन्हें एक साथ लाने और साझा रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस विषय पर बातचीत की है। वह स्वयं मॉस्को और कीव की यात्रा कर चुके हैं। अटलांटा में भी उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की।
भारत यूक्रेन के संपर्क में भी है और अमेरिका के साथ समन्वय बनाए हुए है। हालांकि, जयशंकर ने बातचीत की मौजूदा स्थिति या उसके विस्तृत ब्योरे को सार्वजनिक करने से परहेज किया।
ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा के दौरान भारत ने बाजार में पैदा हो रही विकृतियों और ऊर्जा आपूर्ति को राजनीतिक हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा प्रवाह का राजनीतिकरण नुकसानदेह है और इसका सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की कमी और आपूर्ति में रुकावट का सामना करने वाले देशों के लिए यह गंभीर चुनौती है। भारत ने जी-20 के मंच पर इस समस्या को स्वीकार करने और इसके समाधान के लिए कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।
खाद्य सुरक्षा पर चर्चा में अनाज की आपूर्ति के अलावा उर्वरकों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठा। जयशंकर ने बताया कि उर्वरकों की आपूर्ति में व्यवधान का संबंध काला सागर के साथ-साथ खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र से भी है। इन क्षेत्रों में अस्थिरता का असर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के मुद्दे पर भारत ने उत्पादन और विनिर्माण के केंद्रों को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में विकसित करने की जरूरत बताई। जयशंकर ने कहा कि दुनिया को किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उत्पादन और आपूर्ति के सीमित केंद्र बाधित होते हैं तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। युद्ध और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाएं भी ऐसी ही चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
भारत ने यह भी आगाह किया कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को राजनीतिक दबाव बनाने या दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति से बचना होगा। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन केंद्र विकसित करना सबसे बेहतर रास्ता है।
जी-20 बैठक में सर्वसम्मत साझा बयान जारी नहीं होने के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि अभी नेताओं का शिखर सम्मेलन होना बाकी है। दिसंबर में होने वाली बैठक से पहले सदस्य देशों के बीच साझा सहमति बनाने के प्रयास तेज होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि जी-20 देश कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साझा जमीन तलाश सकेंगे। इसके लिए प्रयास किए जाएं तो सहमति बनना संभव है।
जयशंकर ने ब्रिक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग परिस्थितियों और सदस्य देशों के बावजूद वहां महत्वपूर्ण प्रतिभागी साझा बयान पर सहमत हुए थे। भारत जी-20 में भी इसी तरह की सहमति बनाने के प्रयासों का समर्थन करेगा।
अटलांटा में बैठक के दौरान जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय और छोटे समूहों में बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा ध्रुवीकृत वैश्विक माहौल में भारत की यह क्षमता महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रख सकता है और उनके बीच मतभेद कम करने में योगदान दे सकता है।
जी-20 बैठक से इतर भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी शनिवार सुबह क्वाड की बैठक की। इस साल यह चारों देशों के विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी। इससे पहले नई दिल्ली और मनीला में भी उनकी मुलाकात हुई थी।
जयशंकर ने कहा कि चारों देशों ने माना कि क्वाड के कामकाज में आगे बढ़ने के लिए उपयोगी प्रगति हुई है। आने वाले समय में इस समूह की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना को नई दिशा देने के साथ इसके एजेंडे का विस्तार करने पर भी विचार किया जाएगा।
अमेरिका को लेकर पहले की गई अपनी टिप्पणियों पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “वे टिप्पणियां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अलग संदर्भ में हुई बातचीत का हिस्सा थीं। अटलांटा में विदेश मंत्रियों की बैठक का माहौल और उद्देश्य अलग थे।”
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम में कही जाने वाली बात उसके संदर्भ और वहां मौजूद श्रोताओं के अनुरूप होती है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कैलिफोर्निया के शॉपिंग मॉल में गोलीबारी, 1 की मौत और 6 घायल

कैलिफोर्निया के शॉपिंग मॉल में ताबड़तोड़ हुई गोलीबारी ने एक शख्स की जान ले ली जबकि छह अन्य घायल हो गए।
स्थानीय पुलिस के हवाले से सिंहुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि, शुक्रवार को कैलिफोर्निया के फेयरफील्ड स्थित एक शॉपिंग मॉल में ये गोलीबारी हुई। फेयरफील्ड पुलिस विभाग प्रमुख डैन मार्शल ने सोलानो टाउन सेंटर मॉल में हुई घटना को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
उन्होंने बताया कि स्थानीय समयानुसार रात 8:30 बजे (शनिवार 0330 जीएमटी, भारतीय समयानुसार सुबह 9 बजे) उन्हें सोलानो टाउन सेंटर के अंदर स्थित ‘स्पिरिट हैलोवीन’ स्टोर में गोलीबारी की सूचना मिली, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे।
पुलिस बयान के अनुसार, एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोगों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं इस दिल दहला देने वाली घटना के पीड़ितों के परिवारों के साथ हैं।”
कैलिफोर्निया हाईवे पेट्रोल ने ट्रैफिक कंट्रोल करने और शॉपिंग सेंटर की इमारतों को खाली कराने में स्थानीय पुलिस की मदद की।
जांचकर्ता चश्मदीदों से पूछताछ कर रहे हैं और संदिग्ध की पहचान करने की कोशिश में जुटे हैं। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल पर अभी भी जांच चल रही है। साथ ही, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई जानकारी हो, तो वे विभाग से संपर्क करें।
मार्शल ने कहा कि जांचकर्ता “इस भयानक गोलीबारी के लिए जिम्मेदार संदिग्ध या संदिग्धों की पहचान करने के लिए पूरी लगन से काम कर रहे हैं।”
एनबीसी न्यूज के अनुसार, जब हमलावर ने गोलीबारी शुरू की, तब उनकी (मारे गए शख्स की) पत्नी स्टोर के अंदर थीं, लेकिन वह अन्य लोगों के साथ इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास द्वार) से बाहर निकलने में कामयाब रहीं। वो अपने घर पहुंच गईं और फिलहाल सदमे में है। पत्नी ने बताया कि उन्होंने “पांच जोरदार धमाके” सुने थे।
यह घटना मिशिगन के मैडिसन हाइट्स में ‘स्पिरिट हैलोवीन’ स्टोर के अंदर एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या किए जाने के कुछ घंटों बाद हुई।
मैडिसन हाइट्स पुलिस विभाग ने एक बयान जारी कर बताया, “डेट्रॉइट का रहने वाला 21 वर्षीय एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।”
पुलिस ने बताया कि आरोपी हमलावर को वहां मौजूद लोगों की मदद से हिरासत में ले लिया गया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भूटान की हिमनद झील के फटने से बंगाल-असम में बाढ़ की चेतावनी, प्रशासन सतर्क

उत्तर-पश्चिमी भूटान में शिंताफू झील के फटने से पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है। अधिकारी इन दोनों राज्यों की ओर बहने वाली नदियों के किनारे स्थित संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रहे हैं।
यह घटना गुरुवार शाम भूटान के गासा जिले में हुई। इससे गासा त्साचू में मौजूद बुनियादी ढाँचा बह गया। गासा त्साचू, मो छू नदी के पास स्थित एक लोकप्रिय प्राकृतिक गर्म पानी का स्रोत है। बाढ़ का पानी पहुँचने से पहले ही इस इलाके को खाली करा लिया गया था, इसलिए किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
मो छू नदी के उद्गम स्थल पर स्थित शिंताफू झील, भूटान की उन 17 हिमनद झीलों (ग्लेशियल लेक्स) में से एक है, जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना गया है। इससे पहले 26 अगस्त 2021 को भी गासा त्साचू को अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा था, जब उफान पर बह रही मो छू नदी ने अपना रास्ता बदलकर गर्म पानी के स्रोत की ओर रुख कर लिया था।
रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ का पानी पुनाखा जोंग से लगभग आठ किलोमीटर दूर, काबेसा गेवोग के श्रीगंग इलाके से आगे निकल गया है, जिससे नदी के निचले इलाकों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भूटान ने पश्चिम बंगाल और असम के प्रशासन को इस हिमालयी देश की सीमा से लगे जिलों के लिए संभावित खतरे के बारे में सतर्क कर दिया है। असम का धुबरी जिला और पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग पहाड़ियां, अलीपुरद्वार तथा जलपाईगुड़ी को संवेदनशील इलाकों के रूप में चिह्नित किया गया है।
पश्चिम बंगाल में, कूच बिहार प्रशासन ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क कर दिया है। यह नदी उत्तरी भूटान से निकलती है और उस नदी प्रणाली का हिस्सा है, जो हिमालयी क्षेत्र से पानी को असम में ब्रह्मपुत्र नदी तक पहुंचाती है।
अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
अलीपुरद्वार जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित कुमार शॉ ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। आईएएनएस से बात करते हुए, एसपी शॉ ने गुरुवार को कहा, “लोग थोड़े घबराए हुए हैं। मेरी सभी से अपील है कि किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। हम अलर्ट मोड पर हैं, प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और सभी एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, इसलिए कोई समस्या नहीं है। हमें उम्मीद है कि हम कोई समाधान निकाल लेंगे और जनता को हो रही परेशानियों को दूर कर देंगे।”
इस अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भूटान में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुनाखा के गुमा गेवोग के अंतर्गत डोचुखा-जोमलिंगथांग-रित्सा चिवोग इलाके में इस साल की शुरुआत में लगाए गए सौर-ऊर्जा संचालित सिंचाई लिफ्टिंग सिस्टम को मो छू नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के कारण आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है।
एक स्थानीय नेता ने बताया कि सिंचाई प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया है, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि नुकसान कितना हुआ है।
इस बीच, बाढ़ के साथ बहकर आए मलबे ने जोमलिंगथांग इलाके में पुनाखा-गासा राजमार्ग के एक हिस्से को ढक दिया है, जिससे सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है।
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लेशियर झील के फटने से आई बाढ़) तब होती है, जब ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी झील में जमा पानी अचानक बाहर निकल आता है – अक्सर ऐसा किसी प्राकृतिक बांध के टूटने के कारण होता है। ऐसी घटनाएं भारी बारिश, भूस्खलन, हिमस्खलन, भूकंप या ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण हो सकती हैं।
मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पीछे हटने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है, जिससे ग्लेशियर झीलों की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। पानी का अचानक बाहर निकलना एक शक्तिशाली बाढ़ का रूप ले सकता है, जिससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, बुनियादी ढांचे और कृषि भूमि को खतरा पैदा हो सकता है।
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