राजनीति
नरेश उत्तम फिर बने सपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष
समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर नरेश उत्तम पटेल को अपना प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसकी घोषणा बुधवार को लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में चल रहे पार्टी के प्रदेश सम्मेलन के बीच की गई। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने नरेश उत्तम पटेल को प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा राज्य के सम्मेलन के दौरान की। उन्होंने बताया कि चार सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पत्र लिखकर मुझे निर्वाचन का अधिकारी बनाया था। यूपी के लिए दो सेटों में केवल एक ही नाम आया नरेश उत्तम का। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इसकी घोषणा के समय मंच पर सपा मुखिया अखिलेश यादव मौजूद थे।
इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद पार्टी का ध्वज फहराया गया।
सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष धर्मेद्र सोलंकी ने स्वागत गीत के साथ समाजवादी मंच का स्वागत किया। सम्मेलन में वरिष्ठ नेता आजम खां शामिल नहीं हो सके। स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण वह दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हैं। आजम के बेटे अब्दुल्ला भी सम्मेलन में मौजूद नहीं थे। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अखिलेश यादव के नाम पर मुहर लगनी तय है।
पार्टी कार्यालय से लेकर रमाबाई अंबेडकर मैदान तक सड़क के दोनों तरफ सपाई झंडे लगाए गए हैं। जगह-जगह बैनर पोस्टर के साथ कटआउट भी लगाए गए हैं।
सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रदेशभर से करीब 15 हजार से अधिक प्रतिनिधि राजधानी पहुंचे हैं। राज्य सम्मेलन के अगले दिन 29 सितंबर को राष्ट्रीय अधिवेशन होगा, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के साथ ही पार्टी अपनी दशा व दिशा तय करेगी। प्रांतीय एवं राष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर सपा नेताओं में जबरदस्त जोश है।
इस दौरान राजनीतिक व आर्थिक प्रस्ताव पास कराया जाएगा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर संगठन और जनता की ताकत से भाजपा को सत्ता को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया जाएगा।
सम्मेलन की खास बात यह है कि ज्यादातर कटआउट पर सिर्फ अखिलेश यादव नजर आ रहे हैं। कुछ में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और आजम खां, प्रो. रामगोपाल सहित अन्य स्थानीय नेताओं की तस्वीर लगी है, लेकिन ये कटआउट इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि यह सम्मेलन पूरी तरह से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर केंद्रित है।
राजनीति
आजम पर ईडी की कार्रवाई को लेकर अखिलेश बोले-विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही सरकार

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खां से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी विरोधी तथा स्कूल बंद करवाने वाले भाजपा नेताओं की ओर से विरोधियों के खिलाफ ईडी की छापेमारी की जा रही है जबकि भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही है।
अखिलेश यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईडी की कार्रवाई के जरिए भाजपा अपने बचे हुए साम्प्रदायिक समर्थकों को संतुष्ट करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों और अनियमितताओं का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा।
सपा प्रमुख ने अपने ट्वीट में लिखा कि शिक्षा, शिक्षक व शिक्षार्थी विरोधी, स्कूलबंद करवाने वाले भाजपाई और उनके संगी-साथी यूनिवर्सिटी बनानेवालों के खिलाफ ईडी की छापेमारी कर रहे हैं जिससे कि उनके 1-2% बचे हुए साम्प्रदायिक संकीर्ण सोच के कुतर्की समर्थकों को संतुष्ट कर पाएं जबकि उन भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जो निम्नांकित आपराधिक कांडों में संलिप्त हैं।
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावा मामले से लेकर सत्ता के संरक्षण में सजातीय अपराधियों, कोडीन कफ सिरप की तस्करी और भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र भी किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा कार्यकाल में निर्मित बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बदहाल, हिचकोले खाते पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गड्ढायुक्त कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे, ग्रीन कॉरीडोर दरारी, खटपट सड़कें, गिरते पुल, ढहती टंकियां, निर्मित टपकती छतें, स्टेशन की दीवार जैसी घटनाओं को लेकर भी सरकार पर हमला बोला।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में दूसरे राज्यों में पकड़े जाने वाले भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का भी जिक्र किया। इसके अलावा सपा प्रमुख ने महाकुंभ में कथित तौर पर की गई हेराफेरी, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के नाम पर कथित बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार और अस्वीकृत भूमि पर अवैध निर्माण करने वाले भाजपा के जनप्रतिनिधियों पर भी आरोप लगाए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी दुर्व्यवहार और दुर्वचनों पर प्रचार की पुताई करके 7,000 करोड़ रुपए में हिस्सा बांट रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
वित्त मंत्री सीतारमण के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल चौथे आईएसएमआर सम्मेलन में भाग लेने के लिए सिंगापुर के लिए हुआ रवाना

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (आईएसएमआर) में भाग लेने के लिए बुधवार को सिंगापुर रवाना हो गई हैं। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं।
वर्ष 2022 में स्थापित भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन दोनों देशों के बीच एक उच्चस्तरीय आर्थिक तंत्र है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग की समीक्षा करना और साझेदारी के नए क्षेत्रों की पहचान करना है।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इस बार का सम्मेलन छह प्रमुख क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेगा, जिनमें उन्नत विनिर्माण, कनेक्टिविटी, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य एवं औषधि, कौशल विकास और सतत विकास शामिल हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उभरते अवसरों पर भी चर्चा की जाएगी।
आईएसएमआर दोनों देशों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां वे विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का आकलन कर सकते हैं और आर्थिक भागीदारी को और गहरा करने के उपायों पर विचार कर सकते हैं। भारत और सिंगापुर के बीच निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सेवाओं और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में पहले से मजबूत संबंध हैं, जिन्हें और विस्तार देने पर इस बैठक में विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।
इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर सम्मेलन से पहले ही मंगलवार को सिंगापुर पहुंच चुके थे। भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका स्वागत करते हुए कहा कि चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के लिए विदेश मंत्री का सिंगापुर आगमन दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, आईएसएमआर भारत और सिंगापुर के बीच पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा नए और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसका पहला सम्मेलन वर्ष 2022 में आयोजित किया गया था। इसके बाद दूसरा सम्मेलन अगस्त 2024 में सिंगापुर में और तीसरा सम्मेलन अगस्त 2025 में नई दिल्ली में आयोजित हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल में भारत के पूर्व सैनिकों से संवाद करेंगे सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ

भारत के थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा का आज अंतिम दिन है। जनरल सेठ अपनी इस यात्रा में नेपाल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। यात्रा के अंतिम दिन वह नेपाल के पोखरा में आयोजित पूर्व सैनिक रैली में शामिल होने जा रहे हैं। इस दौरान वे वीर नारियों और वीरता पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करेंगे।
जनरल धीरज सेठ यहां भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के साथ भी संवाद करेंगे। इसके बाद वे बुधवार को ही स्वदेश लौट आएंगे। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना व ऐतिहासिक रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है। जनकपुर-अयोध्या व लुम्बिनी-बोधगया का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव यहां के लोगों के रिश्तों को एक अलग गहराई प्रदान करता है। यह एक ऐसा संबंध है जिसकी दुनिया में कोई दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है। वहीं भारत व नेपाल की साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आधारित है।
गौरतलब है कि थल सेना प्रमुख की यह नेपाल यात्रा 17 अगस्त को प्रारंभ हुई थी। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भारत व नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी संबंधों, सहयोग एवं समन्वय को सुदृढ़ करना था। यहां हुई विभिन्न बैठकों के दौरान भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने और सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
वहीं, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना से जुड़े खिलाड़ियों का भी उत्साहवर्धन किया है। सेना प्रमुख व भारतीय सेना के सभी रैंकों ने सूबेदार नरेंद्र (मुक्केबाजी) और सूबेदार अरविंद सिंह (रोइंग) को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर तथा सूबेदार छोटे लाल यादव (मुक्केबाजी) को द्रोणाचार्य पुरस्कार मिलने पर हार्दिक बधाई दी है।
सेना ने अपने एक संदेश में बताया कि पुणे स्थित सेना पैरालंपिक नोड को खेलों, विशेष रूप से पैरा-खेलों के प्रोत्साहन और विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2025 से भी सम्मानित किया गया है। ये प्रतिष्ठित सम्मान खेल प्रतिभाओं को निखारने और उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करने के प्रति भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
भारतीय सेना का कहना कि युद्धभूमि से लेकर खेल के मैदान तक, सेना उत्कृष्टता, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र की सेवा करती रहेगी।
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