राष्ट्रीय समाचार
मुंबई मसाला: जस्टिस एएस ओका का प्रेस क्लब में विनम्र दौरा
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से सेवानिवृत्त हुए जस्टिस एएस ओका ने प्रेस क्लब में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम खचाखच भरा था और आकर्षक नीता कोल्हटकर ने उनका परिचय कराया। उनकी सबसे खास बात उनकी सादगी थी। वे बिल्कुल सही समय पर फीके नीले रंग की मारुति बलेनो में पहुँचे। क्रैकजैक बिस्कुट और चाय के साथ उन्होंने ठाणे में बिताए अपने दिनों को याद किया। दरअसल, ठाणे से उनके कई दोस्त “महामहिम” का अभिवादन करने आए थे। व्याख्यान अपने आप में दिलचस्प था और कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कुछ प्रश्न पूछने पर सहमति जताई। उन्होंने कुछ कठिन प्रश्नों सहित सभी प्रश्नों के तत्परता से उत्तर दिए।
बॉम्बे हाई कोर्ट के जज के रूप में, बाद में कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में और अंततः सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में ओका ने खुद को एक ईमानदार, ज्ञानी और मेहनती व्यक्ति के रूप में स्थापित किया, जिसमें निष्पक्षता की गहरी भावना थी। उन्हें बिना पर्याप्त तैयारी के उनके सामने आने वाले वकीलों से कभी कोई परेशानी नहीं हुई। वह उन्हें तुरंत फटकार लगाते थे। लेकिन अगर कोई वकील पूरी तैयारी के साथ पेश होता, तो उसे धैर्यपूर्वक सुनवाई और तर्कसंगत आदेश की गारंटी होती थी। काश ओका सर जैसे और भी जज होते।
नयापन ही खेल का नाम है। अब बंद पड़े लिबर्टी सिनेमा के सामने लिबर्टी रेस्टोरेंट सदियों से मौजूद है (क्या इसे पहले कामत का नाम नहीं कहा जाता था?)। यह अपने सादे, बिना किसी लाग-लपेट वाले उडुपी शाकाहारी खाने के लिए जाना जाता था। अब इसने अपने मेन्यू में बेन्ने डोसा, थट्टे इडली, नीर डोसा, पूंडु डोसा, वेंगया डोसा, जिनी डोसा वगैरह शामिल कर लिए हैं। हाल ही में, मुझे एक सहकर्मी को पास के बॉम्बे अस्पताल में छोड़ना पड़ा और कई सालों बाद लिबर्टी जाने का फैसला किया। बेन्ने डोसा वाकई लाजवाब था। इसे बिल्कुल बेंगलुरु में बनाए जाने वाले तरीके से बनाया गया था। बांद्रा और खार के कुछ आउटलेट भी बेन्ने डोसा परोस रहे हैं। लेकिन लिबर्टी में मिलने वाले डोसे की कोई बराबरी नहीं है।
मक्खन शुद्ध है और डोसा हरी और लाल चटनी और एक कटोरी स्वादिष्ट सांबर के साथ परोसा जाता है। बेन्ने डोसा कई प्रकार के होते हैं। उनके पास घी मसाला, घी पोडी, लहसुन रोस्ट बेन्ने डोसा हैं। मैंने एक सादा बेन्ने डोसा और एक करुवप्पेलै थाट इडली ऑर्डर की, जो करी पत्ता पाउडर के साथ छिड़की हुई एक चपटी इडली होती है। वे अप्पे (पनियारम), बिस्किट अंबाडे, उल्टा मसाला डोसा, पूंडु डोसा (लहसुन), कैकरी उत्तपम और थायिर इडली जैसे विशिष्ट कर्नाटकी व्यंजन भी परोसते हैं। मैंने मेनू कार्ड पर आंध्र डोसा भी देखा। फ़िल्टर ‘कापी’ असली था। चाट, उत्तर भारतीय और चीनी व्यंजन, मिल्कशेक और मिठाइयों की भी एक अद्भुत रेंज उपलब्ध है।
कीमतें वाजिब हैं और सेवा बेहद तेज़। खुद ही देख लीजिए। मैं गारंटी देता हूँ कि आपके स्वाद कलिकाएँ नाच उठेंगे। इस बीच, मिर्ची एंड माइम रेस्टोरेंट के बंद होने की खबरें वाकई दुखद हैं। इस रेस्टोरेंट ने 80 से ज़्यादा मूक-बधिर कर्मचारियों को नौकरी दी थी। मैंने कुछ समय पहले पवई में उनके रेस्टोरेंट में खाना खाया था और कर्मचारियों द्वारा दी गई खामोश सेवा से बहुत प्रभावित हुआ था। खाना, ज़ाहिर है, दिलचस्प था। काश रेस्टोरेंट एसोसिएशन अपने सदस्यों से इन प्रशिक्षित कर्मचारियों को अपने यहाँ काम पर रखने के लिए कहता।
राष्ट्रीय समाचार
असम सरकार 1 हजार प्रगतिशील किसानों को 1-1 लाख रुपए का इनाम देगी : सीएम हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार इस साल ‘मुख्यमंत्री कृषि उत्कृष्टता पुरस्कार’ के तहत 1,000 प्रगतिशील और शिक्षित किसानों को 1-1 लाख रुपए का पुरस्कार देकर सम्मानित करेगी।
मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का मकसद पढ़े-लिखे युवाओं को खेती को एक अच्छे और आधुनिक करियर विकल्प के तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरमा ने कहा, “हमें पढ़े-लिखे युवाओं को भी खेती की ओर आकर्षित करना होगा। इसलिए हमने इस साल 1,000 प्रगतिशील और पढ़े-लिखे किसानों को सम्मानित करने का फैसला किया है। पुरस्कार पाने वाले किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी सरकार की अलग-अलग योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि सरकार की योजना इस पहल के तहत अगले पांच साल में 10,000 किसानों को सम्मानित करने की है। यह कार्यक्रम आधुनिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने, खेती से जुड़े रिसर्च को मजबूत करने और उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित होगा, ताकि किसान ज्यादा आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने युवाओं से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों को एक ही प्रशासनिक ढांचे के तहत लाने के लिए एक खास ‘युवा कल्याण विभाग’ बनाने की योजना की भी घोषणा की।
प्रस्तावित विभाग नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी), नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस), रोजगार एक्सचेंज और शिक्षा क्षेत्र में युवाओं से जुड़ी पहलों को एक ही छत के नीचे लाएगा। उम्मीद है कि इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के आसपास यानी 17 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 2 अक्टूबर से 31 जनवरी तक ‘प्रोजेक्ट सद्भावना 2’ शुरू करेगी, जिसका मकसद पेंडिंग सरकारी फाइलों की पहचान करना और उन्हें निपटाना है। अलग-अलग विभागों, डायरेक्टरेट और डिप्टी कमिश्नर के दफ्तरों में तीन लाख से अधिक फाइलें पेंडिंग हैं।
एक खास पोर्टल के जरिए नागरिक पेंडिंग मामलों की जानकारी दे सकेंगे, जिन्हें फिर कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। 2021 में पिछली बार यह काम मैन्युअल तरीके से किया गया था, जबकि मौजूदा मुहिम में पेंडिंग मामलों को बेहतर ढंग से ट्रैक और एनालाइज करने के लिए ई-फाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
राजनीति
अरुणाचल सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर ओवैसी के सवाल, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण

एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन की गतिविधियों और भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को रोके जाने की खबरों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार से सीमा पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और देश को पूरी जानकारी देने की मांग की है।
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार की लगातार चुप्पी के कारण वह अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर स्थिति को लेकर अपने सवाल दोहरा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलओ) ने हाल में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम को उस इलाके में जाने से रोका है, जहां जवान पहले नियमित रूप से गश्त करते रहे हैं।
एआईएमआईएम प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम द्वारा इलाके में बनाए गए किसी अस्थायी ढांचे को नष्ट किया है। इसके अलावा उन्होंने पूछा कि क्या चीन ने उन क्षेत्रों में टेंट लगाए हैं, जहां पहले भारतीय पेट्रोलिंग टीम जाती थी और जो भारत के क्षेत्र में आते हैं।
ओवैसी ने इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश की सीमा को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। उन्होंने कहा था कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि सीमा पर वास्तव में क्या हो रहा है। उनके मुताबिक, अब तक सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी अपर्याप्त और अस्पष्ट है।
अगले पोस्ट में एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने लिखा था, ‘एक तरफ सीमा पर यह सब हो रहा है, हम अगले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नई दिल्ली आने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। क्या चीनी सैनिकों से डील करने की यह हमारी नीति है, जो हमारे इलाके में टेंट गाड़ रहे हैं और हमारे गश्त को रोक रहे हैं? या हमने वो सभी शर्तें स्वीकार कर ली हैं, जो बीजिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘सामान्य’ बनाने के लिए हमारे सामने रखी हैं?’
बता दें कि ओवैसी के सवाल ऐसे समय में सामने आए हैं जब अरुणाचल प्रदेश से लगी चीन सीमा पर चीनी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता बरतने और सीमा की स्थिति पर देश को स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। साथ ही उनके सवालों ने भारतीय क्षेत्र में कथित चीनी गतिविधियों और सीमा पर गश्त से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राजनीति
लखीसराय भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया शोक, पीएम बोले- मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ

बिहार के लखीसराय जिले के अशोकधाम मंदिर में सोमवार को हुई भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया, “बिहार के लखीसराय जिले में भगदड़ की दुर्घटना में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं शोक-संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं और घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में भगदड़ से हुई मौतों से दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द स्वस्थ हों। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है।”
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में हुई घटना हृदयविदारक है। इस दुःखद हादसे से मन व्यथित है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने एवं शोकाकुल परिजनों को कठिन घड़ी में संबल देने की प्रार्थना करता हूं।”
बिहार सरकार में मंत्री श्रेयसी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “लखीसराय की हृदयविदारक घटना में 7 महिलाओं के निधन से मन अत्यंत व्यथित है। प्रभु दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान दें, परिजनों को धैर्य तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें।”
जदयू नेता राजीव रंजन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह बेहद दुखद घटना है और कई श्रद्धालुओं की मौत की खबर दिल दहला देने वाली है। एसडीपीओ ने कुछ अफवाहों का जिक्र किया है, लेकिन जब तक सरकार पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक पक्ष नहीं रखती, तब तक कुछ भी पक्के तौर पर कहना ठीक नहीं होगा।”
बता दें कि भगदड़ में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है और 12 से ज्यादा लोग घायल हैं। बिहार सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
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