अपराध
मुंबई क्राइम ब्रांच ने नामी कार डिजाइनर दिलीप छाबरिया को किया गिरफ्तार
नामी कार डिजाइनर दिलीप छाबरिया को मुंबई क्राइम ब्रांच ने सोमवार शाम को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि दिलीप छाबरिया कार मॉडिफिकेशन स्टूडियो DC के फाउंडर भी हैं। दिलीप छाबरिया के खिलाफ 19 दिसंबर को एमआईडीसी पुलिस में आईपीसी के सेक्शन 420, 465, 467, 468, 471, 120 बी और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में केस को जांच के लिए उसे क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) को ट्रांसफर कर दिया गया, जो इन दिनों फर्जी टीआरपी केस की भी जांच कर रही है।

पुलिस ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मशहूर कार डिज़ाइनर दिलीप छाबड़िया एक ही नंबर के रेजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर की कई गाड़ियां बना रहे थे।इतना ही नहीं वे कई NBFC बैंकों से वो अपनी ही बनाई गाड़ियां खुद ही ग्राहक बनकर खरीद भी रहे थे। जिसके बाद उसे तीसरी पार्टी को बेच रहे थे। अब तक कि जांच में पुलिस ने पाया है कि ऐसी 127 गाड़ियां अब तक बेची गई हैं। जिसमें से करीब 90 गाडियां जाँच के दायरे में हैं। गाड़ियों में लगे इम्पोर्टेड इंजन की भी जांच की जा रही है। कि क्या इसे खरीदते समय लगने वाले टैक्स को बचाने की कोशिश की गई है या नहीं। क्राइम ब्रांच को शक है कि यह सब जीएसटी और दूसरे टैक्स को बचाने के लिए किया गया हो सकता है।
मुंबई क्राइम ब्रांच के जॉइंट सीपी मिलिंद भारंबे ने बताया कि इंडिया की पहली स्पोर्ट्स कार डीसी अवंती से संबंधित मामले में चीटिंग और फॉर्जरी केस दर्ज हुआ है। एक सूचना मिली थी कि इस तरह की कार ताज होटल के पास आने वाली है। जब गाड़ी को पकड़ा गया तो सेम नंबर की गाड़ी तमिलनाडु और हरियाणा में भी निकली। जिसके बाद जांच शुरू हुई। डीसी डिजाईन प्राइवेट लिमटेड कंपनी ने सेम इंजन नंबर और चेचिस नंबर की गाडियां कई लोगों को बेंची हैं। कंपनी ने 127 गाड़ियों की मैन्यूैक्चरिंग की है। जिसमें से 90 गाडियां बेची हैं। खास बात यह है कि इसमें जिस कंपनी ने गाड़ी बेची है उसी ने फिर बाद में खरीदा भी है। कई मल्टीनेशनल कंपनियों से लोन लेने की बात भी सामने आई है।
अपराध
पालघर पुलिस ने एक दशक के अलगाव के बाद परिवार का पुनर्मिलन कराया

पालघर: अधिकारियों ने रविवार को बताया कि लंबे समय से लंबित मामलों को फिर से खोलने और सुलझाने के लिए चलाए गए एक विशेष अभियान के बाद पुलिस ने एक दशक पहले लापता हुए एक व्यक्ति को उसके परिवार से सफलतापूर्वक मिला दिया है।
प्रवीण पवार (39) के रूप में पहचाने गए इस व्यक्ति ने अपने माता-पिता के साथ विवाद के बाद 2016 में पालघर जिले में अपना घर छोड़ दिया था। तब से, उसके परिवार द्वारा उसे खोजने के प्रयासों के बावजूद, वह लापता रहा मूल रूप से अहिल्यानगर के निवासी पवार, जब लापता हुए थे, तब पालघर जिले के विक्रमगढ़ स्थित एक अस्पताल में कार्यरत थे। घर छोड़ने के बाद उन्होंने अपने परिवार से सभी संपर्क तोड़ दिए, जिससे लगभग 10 वर्षों तक उनके ठिकाने के बारे में परिवार को अनिश्चितता बनी रही।
यह सफलता ऑपरेशन मुस्कान-14 के तहत मिली, जो पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख द्वारा लापता बच्चों और वयस्कों का पता लगाने के लिए पुराने और अनसुलझे मामलों की फिर से जांच करने के लिए शुरू किया गया एक विशेष कार्यक्रम है। इस अभियान के तहत, पुलिस टीमों ने पवार के मामले को फिर से खोला और आधुनिक जांच तकनीकों का उपयोग करते हुए नए सुरागों का पीछा करना शुरू किया
वाडा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर दत्तात्रेय किंद्रे ने कहा कि तकनीकी जांच, मानवीय खुफिया जानकारी और सोशल मीडिया ट्रैकिंग की मदद से पवार का शनिवार को दिल्ली में पता लगाया गया पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पवार की सुरक्षित वापसी और उनके माता-पिता के साथ पुनर्मिलन सुनिश्चित करने के लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इस मामले को ऑपरेशन मुस्कान की एक बड़ी सफलता बताया गया है, जो इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे नए सिरे से की गई जांच और तकनीक लंबे समय से भूले हुए लापता व्यक्तियों के मामलों को सुलझाने में मदद कर सकती है
अपराध
वसई में 30 वर्षीय व्यक्ति की सीलबंद पानी की टंकी में मानव खोपड़ी मिली

वसई: वसई के नवपाड़ा इलाके में एक 30 साल पुरानी इमारत की सीलबंद पानी की टंकी के अंदर से एक मानव खोपड़ी और कई हड्डियां मिलने के बाद सनसनी फैल गई है। इस भयावह खोज ने स्थानीय लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह किसी लंबे समय से भुला दिए गए हत्याकांड का मामला है या किसी अनुष्ठान का। यह घटना मानिकपुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में घटी। पुराने टैंक को तोड़ने का काम सौंपे गए श्रमिकों को कंक्रीट स्लैब तोड़ने के बाद कंकाल के अवशेष मिले
सूचना मिलते ही मानिकपुर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और प्रारंभिक जांच (पंचनामा) शुरू की। विस्तृत विश्लेषण के लिए फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। अधिकारियों ने पाया है कि अवशेष अधूरे हैं, जिससे मामला और भी पेचीदा हो गया है।
सहायक पुलिस आयुक्त, उमेश माने पाटिल ने मौजूदा स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया:
“यह इमारत 30 साल पुरानी है और टैंक भी इतने ही समय से बंद था। मरम्मत के लिए मजदूर जब इमारत की पटिया तोड़ रहे थे, तब उन्हें एक कंकाल और एक खोपड़ी मिली। सूचना मिलते ही हम तुरंत मौके पर पहुंचे। फिलहाल जांच जारी है।”
इस खोज ने इलाके में अटकलों का दौर शुरू कर दिया है। कंकाल के अवशेष आंशिक होने के कारण पुलिस
हत्या जैसे कई पहलुओं की जांच कर रही है: क्या वर्षों पहले किसी की हत्या करके उसे टैंक में छिपा दिया गया था?
क्या इसका संबंध “भानमती” (काला जादू) या अन्य अंधविश्वासी अनुष्ठानों से हो सकता है?
क्या यह ऐतिहासिक दुर्घटना है? दिलचस्प बात यह है कि इस इमारत का एक दुखद इतिहास है; दो साल पहले गैस रिसाव के कारण दम घुटने से दो से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी।
फिलहाल, इमारत से जुड़ी चॉल में करीब आठ से दस लोग रहते हैं। पुलिस ने पुष्टि की है कि मृतक की पहचान और मौत का कारण फोरेंसिक रिपोर्ट जारी होने के बाद ही पता चल पाएगा मानिकपुर पुलिस ने जनता को आश्वासन दिया है कि वे इन कंकाल अवशेषों के पीछे के रहस्य को सुलझाने के लिए सभी संभावित सुरागों की जांच कर रहे हैं
अपराध
बिहार: एनआईटी की तैयारी कर रही छात्रा की मौत मामले में सरकार ने की सीबीआई जांच की अनुशंसा

पटना, 31 जनवरी : बिहार की राजधानी पटना के एक छात्रावास में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया है।
इसकी जानकारी सार्वजनिक करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को सोशल नेटवर्किंग साइट पर पोस्ट में लिखा, “बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार से पटना में हुई नीट छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को सीबीआई से जांच का आग्रह किया है। घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए।”
दरअसल, यह पूरा मामला पटना के छात्रावास का है और घटना के करीब एक पखवारे गुजर जाने के बाद भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। बता दें कि पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में बीते दिनों नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा कमरे में बेहोश पाई गई थी। गंभीर हालत में उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या का मामला बताया। हालांकि, परिजन ने आरोप लगाया कि उसके साथ हॉस्टल में यौन उत्पीड़न हुआ और फिर हत्या कर दी गई।
छात्रा जहानाबाद जिले के शकूराबाद थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। सरकार ने इस मामले में पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की है। इसके बाद इस जांच में सीआईडी का भी सहयोग लिया गया। इधर, मृत छात्रा के परिजनों ने एसआईटी की जांच पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस सही दिशा में जांच नहीं कर रही है।
शुक्रवार को पीड़िता की मां की पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के साथ मुलाकात हुई थी। उसके बाद उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पुलिस बिक गई है। यहां उनकी बेटी को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। इस मामले को लेकर प्रदेश की सियासत भी गर्म रही। विपक्ष इसे लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करती रही है।
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