राजनीति
1 करोड़ से अधिक लोग ‘पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ से हुए लाभान्वित : पीएम मोदी
New Delhi : Prime Minister Narednra Modi addresses a programme marking 20 years of completion of SWAGAT initiative in Gujarat through video conferencing onThursday, April 27, 2023. (Photo:IANS/Video Grab)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि जब से “पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना” की शुरुआत हुई है, तब से लेकर अब तक इस योजना के अंतर्गत 1 करोड़ से भी अधिक लोग अपना पंजीकरण करवा चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर कई पोस्ट किए। जिसमें उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न भागों में इस योजना के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से अब तक 5 लाख लोग इस योजना का फायदा उठाने के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं।
पीएम मोदी ने कहा, अब तक जिन लोगों ने इस योजना का फायदा उठाने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, उन्हें भी रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह योजना ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करने के साथ-साथ घरों के लिए बिजली के खर्च में पर्याप्त कटौती का वादा करती है। इसके साथ ही यह पर्यावरण के लिए जीवन शैली को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने और एक बेहतर ग्रह में योगदान देने के लिए तैयार है।”
यह योजना 2 किलोवाट क्षमता तक के सिस्टम के लिए सौर इकाई लागत का 60 प्रतिशत और 2 से 3 किलोवाट क्षमता के सिस्टम के लिए अतिरिक्त सिस्टम लागत का 40 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करती है। सब्सिडी को 3 किलोवाट क्षमता तक सीमित कर दिया गया है।
इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि 300 यूनिट तक बिजली खपत करने के लाभार्थी 15 हजार रुपए तक बचा सकेंगे।
इच्छुक उपभोक्ता को योजना के लिए आवेदन करने के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। यह राज्य और बिजली वितरण कंपनी का चयन करके करना होगा।
यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 फरवरी को 75,021 करोड़ की लागत से लॉन्च की गई थी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत-वियतनाम साझेदारी से निर्यात, निवेश और विनिर्माण को मिलेगा बड़ा बढ़ावा: उद्योग मंडल

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को ‘उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ तक पहुंचाया गया है। राष्ट्रीय उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने गुरुवार को कहा कि इससे भारत को महत्वपूर्ण कच्चे संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलेगी और निर्यात, निवेश तथा सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि को लंबे समय में बड़ा लाभ होगा।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि यह द्विपक्षीय साझेदारी आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने, विनिर्माण सहयोग, डिजिटल संपर्क और तकनीकी साझेदारी के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करती है।
उन्होंने कहा कि नए द्विपक्षीय समझौते भारत की ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, दवा निर्यात विस्तार, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के विकास तथा महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण जैसी पहलों के अनुरूप हैं।
दुर्लभ खनिज और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग से भारत को इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा विनिर्माण के लिए जरूरी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे आपूर्ति सुरक्षा और उन्नत विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
दवा क्षेत्र में नियामकीय सहयोग से भारतीय जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिन्हें पहले से ही प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल है।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एआई और आईटी सेवाओं में तकनीकी सहयोग से वैश्विक डिजिटल मूल्य शृंखला में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
कृषि निर्यात, पर्यटन, विमानन, शहरी बुनियादी ढांचा और स्मार्ट सिटी विकास जैसे क्षेत्रों को भी इस साझेदारी से लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पीएचडीसीसीआई के महासचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि इस यात्रा के परिणाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को और मजबूत करते हैं, क्योंकि इससे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रणनीतिक सहयोग का विस्तार होगा।
उन्होंने कहा कि वियतनाम के साथ बढ़ा सहयोग संपर्क व्यवस्था, व्यापारिक मजबूती और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करेगा।
नई रणनीतिक साझेदारी के तहत दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान दुर्लभ खनिज, डिजिटल भुगतान, दवा उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन, संस्कृति, शहरी विकास, शिक्षा और तकनीकी सहयोग समेत कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश भारतीय अंगूर और अनार तथा वियतनामी ड्यूरियन और चकोतरा जैसे कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को आसान बनाएंगे।
वियतनाम ने अपनी आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन तथा निर्यात जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से अधिक उत्पाद आयात करने की प्रतिबद्धता जताई है।
दोनों पक्षों ने मानक अनुपालन प्रमाणन सहित ऐसा अनुकूल नियामकीय वातावरण तैयार करने के उपाय तलाशने पर सहमति जताई, जिससे दोनों देशों की कंपनियों के लिए कारोबार करना आसान हो सके।
राष्ट्रीय समाचार
भारत एआई के चलते टेक्नोलॉजी पर खर्च में अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ देगा: रिपोर्ट

भारतीय कंपनियों के टेक्नोलॉजी पर खर्च में 2026 में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है, इसमें से 40-45 प्रतिशत एआई और टेक ट्रांसफॉरमेशन से जुड़ा होने की उम्मीद है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आईटी खर्च में वृद्धि वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के लिए अनुमानित 4-6 प्रतिशत वृद्धि से कहीं अधिक रहने की उम्मीद है।
पिछले 12-18 महीनों में खर्च में तेजी आई है और अगले 2-3 वर्षों तक यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है, जो संरचनात्मक रूप से मजबूत निवेश चक्र को दिखाता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय उद्यम अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक क्षमता निर्माण, विशेष रूप से एआई प्लेटफॉर्म और डेटा आधुनिकीकरण के लिए आवंटित कर रहे हैं। भारत में टेक्नोलॉजी बजट का 50-60 प्रतिशत पूंजीगत व्यय होता है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 20-30 प्रतिशत है।
भारतीय कंपनियों के पूंजीगत व्यय का 30 प्रतिशत हिस्सा एआई प्लेटफॉर्म और डेटा आधुनिकीकरण पर खर्च किया गया।
टेक्नोलॉजी खर्च में कोर एप्लिकेशन आधुनिकीकरण (25 प्रतिशत), क्लाउड और आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर (25 प्रतिशत) और साइबर सुरक्षा (20 प्रतिशत) प्रमुख है, जो मूलभूत क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2026 के टेक्नोलॉजी बजट का लगभग 40 प्रतिशत परिवर्तनकारी पहलों के लिए आवंटित किए जाने की उम्मीद है, जिसमें एआई और डेटा-आधारित परिवर्तन लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार होंगे।
अनुमान है कि अगले 12 महीनों में लगभग 60 प्रतिशत सीआईओ उच्च-प्रभाव वाले एआई रोडमैप को प्राथमिकता देंगे।
रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 72 प्रतिशत मुख्य सूचना अधिकारियों ने पुरानी तकनीकी खामियों को परिवर्तन में सबसे बड़ी बाधा बताया, इसके बाद अगली पीढ़ी के क्षेत्रों में कौशल की कमी (57 प्रतिशत) और नई तकनीक से जुड़ी पहलों पर निवेश पर अप्रमाणित प्रतिफल (49 प्रतिशत) का स्थान रहा।
लगभग 90 प्रतिशत बिजनेस लीडर्स ने संकेत दिया कि वर्तमान डेटा आधार और एआई की परिपक्वता पूरे उद्यम में विस्तार के लिए पर्याप्त नहीं है।
राष्ट्रीय समाचार
ऑपरेशन सिंदूर का स्पष्ट संदेश, आतंकियों का कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं

ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि संभवत भारत की सामरिक यात्रा का एक निर्णायक क्षण था। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर यह संदेश दिया है। सेना के मुताबिक इस अभियान को भारत ने बेहद सोच-समझकर और स्पष्ट रणनीतिक दृष्टि के साथ शुरू किया। नियंत्रण रेखा तथा पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार मौजूद आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया।
भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि हमलें का समय पूरी तरह सटीक था, ऑपरेशन सिंदूर ने पूर्ण आश्चर्य उत्पन्न किया और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तथा पाकिस्तान के भीतर स्थापित आतंकवादी ठिकानों को भारी क्षति पहुंचाई। इस ऑपरेशन से यह स्पष्ट संदेश गया कि अब आतंकियों का कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं बचा है। इसके साथ ही पाकिस्तान द्वारा भारत के सैन्य ढांचे और ठिकानों को निशाना बनाने के सभी प्रयास एक सुविचारित और मजबूत वायु रक्षा संरचना के कारण विफल हो गए।
भारत ने अत्यंत कम समय में एक जटिल बहु-आयामी अभियान की योजना बनाई, उसे क्रियान्वित किया और सफलतापूर्वक पूरा भी किया। इस पूरे अभियान ने भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को भी प्रदर्शित किया। इस्तेमाल किए गए हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रॉकेट, मिसाइलों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का बड़ा हिस्सा भारत में विकसित और निर्मित था। ब्रह्मोस, आकाश, उन्नत निगरानी एवं लक्ष्यीकरण प्रणालियों के साथ स्वदेशी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स ने इस अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं का संयुक्त अभियान था। इसमें थल, वायु और समुद्री क्षमताओं का एकीकृत उपयोग किया गया। इसमें साझा परिस्थितिजन्य जागरूकता, सामान्य परिचालन एवं खुफिया तस्वीर तथा वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता शामिल थी। कुल नौ स्टैंडऑफ प्रिसीजन स्ट्राइक की गईं, जिनमें सात भारतीय सेना और दो भारतीय वायु सेना द्वारा अंजाम दी गईं।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि वास्तव में एक फोर्स मल्टीप्लायर है। आज भारत के 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित किए जा रहे हैं। सटीकता, अनुपातिकता और उद्देश्य की स्पष्टता के साथ यह अभियान एक राष्ट्र के संकल्प, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का प्रतीक बनकर सामने आया।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि शुरुआत से ही सरकार ने सशस्त्र बलों को स्पष्ट उद्देश्य दिए। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक ऑपरेशनल लचीलापन भी प्रदान किया। तय लक्ष्य थे-आतंकवादी तंत्र को नष्ट और कमजोर करना, दुश्मन द्वारा योजना बनाने की क्षमता को बाधित करना तथा इन ठिकानों से भविष्य में होने वाली आक्रामकता को रोकना। ऑपरेशन सिंदूर में ये लक्ष्य पूरी स्पष्टता के साथ निर्धारित किए गए थे। वहीं सशस्त्र बलों को इस अभियान की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक संसाधन और स्वतंत्रता सौंपी गई।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि शीर्ष स्तर पर दृढ़ दिशा और परिचालन स्तर पर पेशेवर स्वायत्तता तथा लचीलापन, यही पिछले वर्ष हमारी सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी साबित हुआ। उन्होंने बताया कि इससे सेना को तेजी से परिस्थितियों के अनुसार ढलने, विभिन्न अभियानों के बीच तालमेल स्थापित करने, समन्वय बढ़ाने और बहु-आयामी युद्धक्षेत्र में निर्णायक प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिली।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के विकसित हो रहे ‘समग्र दृष्टिकोण’ को भी रेखांकित किया, जो युद्धक्षेत्र में अत्यंत सटीक समन्वय के साथ दिखाई दिया। सरकार के सर्वोच्च कार्यालयों और मंत्रालयों, खुफिया एजेंसियों, साइबर एवं सूचना अभियान संस्थानों तथा सीमा सुरक्षा बल जैसी सीमा-रक्षक अर्धसैनिक इकाइयों ने सशस्त्र बलों के साथ मिलकर कार्य किया। परिणामस्वरूप यह अभियान सैन्य और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से विश्व स्तर पर एक गोल्ड स्टैंडर्ड के रूप में देखा जाने लगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के इस दौर में भारत ने तीव्र और सटीक प्रहार किए, अपने स्पष्ट रूप से निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त किया और उसके बाद शत्रु के बातचीत के लिए विवश होने तथा संघर्ष विराम का अनुरोध करने पर सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया। इन उद्देश्यों को एक संतुलित, सीमित लेकिन तीव्र सैन्य कार्रवाई के माध्यम से प्राप्त किया गया। दुश्मन की जोखिम उठाने की क्षमता को बदल दिया गया और उसकी कमान एवं नियंत्रण प्रणाली को बाधित कर दिया। यह सब कुछ भारत को बिना किसी लंबे युद्ध या संघर्ष में उलझाए किया गया।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के दुष्परिणाम हम देख ही रहे हैं। भारत का यह संतुलित दृष्टिकोण हमारी रणनीतिक संस्कृति की परिपक्वता और सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता को दर्शाता है। अंतत इस अभियान ने प्रत्येक क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी तय की। खुफिया एजेंसियों ने वह सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जो प्रिसीजन टार्गेटिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी। साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाइयों ने सूचना क्षेत्र में बढ़त बनाए रखी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय माहौल, आंतरिक सुरक्षा और जनता के विश्वास को प्रभावी ढंग से संभाला। वहीं सशस्त्र बलों ने अत्यधिक अनुशासन, सटीकता और न्यूनतम सहायक क्षति के साथ अभियान के सैन्य चरण को अंजाम दिया। सेना का मानना है कि यह बहु-एजेंसी और बहु-आयामी समन्वय भविष्य के अभियानों के लिए एक आदर्श मॉडल बना रहेगा।
सेना के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था बल्कि यह केवल शुरुआत थी। भारत की आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई जारी रहेगी। एक वर्ष बाद आज हम केवल उस अभियान को ही नहीं, बल्कि उसके पीछे निहित सिद्धांत को भी याद करते हैं। भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा दृढ़ता, पेशेवर क्षमता और सर्वोच्च जिम्मेदारी के साथ करता रहेगा।
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