राष्ट्रीय समाचार
हिमाचल के कुल्लू में भूस्खलन से गिरे कई घर
कुल्लू: एक चौंकाने वाली घटना में, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के कारण कई इमारतें ढह गईं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि कुल्लू जिले में भूस्खलन और भारी बारिश के कारण एक के बाद एक इमारतें ढह रही हैं. राज्य पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश से जूझ रहा है। राज्य में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं लगातार हो रही हैं. इलाके में भूस्खलन के कारण कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं. राज्य में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राजमार्ग और परिवहन भी प्रभावित हुआ है
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भयानक वीडियो में दिख रहा है कि भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद आनी में नए बस स्टैंड के पास की इमारतें ढह गईं। इमारतों के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है. प्रभावित इलाके में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है. पुलिस के साथ बचाव अभियान दल मौके पर पहुंच गया है और इलाके में बचाव एवं राहत कार्य शुरू कर दिया है। घायलों और जान गंवाने वाले लोगों की संख्या अभी तक अज्ञात है.
कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण कुल्लू-मनाली राजमार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया। भारी बारिश के बाद राजमार्ग पर लगभग सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं और राजमार्ग पर लगभग 5-10 किलोमीटर तक यातायात जाम होने की भी सूचना है। भारी बारिश के कारण राजमार्ग पर फंसे लोगों ने भोजन और पानी की कमी की शिकायत की और अधिकारियों से जल्द से जल्द राजमार्ग को साफ करने की अपील भी की। जिले में भारी बारिश के बाद हाईवे से वैकल्पिक मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया। अधिकारियों ने कहा कि राजमार्ग साफ होने तक यातायात की आवाजाही निलंबित कर दी गई है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य को “प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र” घोषित कर दिया है। राज्य सरकार ने भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से राज्य को हुए नुकसान का आंकड़ा भी जारी किया. हिमाचल प्रदेश सरकार ने कहा कि 24 जून को राज्य में मानसून के आगमन के बाद से बारिश के कारण 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। राज्य में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई इमारतें और राजमार्ग बह गए हैं।
राजनीति
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक लड़ाई में ‘बेबी-ममता’ की नजदीकियों से वामपंथियों के बीच बेचैनी बढ़ी

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ पूरे देश में एक गठबंधन बनाने के लिए विपक्ष के बीच दिख रही एकजुटता शायद अभी तक शीर्ष नेतृत्व से नीचे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक नहीं पहुंची है। हाल ही में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी सीपीआईएम के महासचिव एमए बेबी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के बीच दिखी नजदीकी ने खबरों के अनुसार वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) के कुछ हिस्सों में एक असहज बहस छेड़ दी है।
ऐसा लगता है कि नई दिल्ली में रविवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक की रैली की एक तस्वीर सामने आने के बाद यह विवाद और भड़क गया है। इस तस्वीर में ‘बेबी’ (एमए बेबी) ममता बनर्जी के कान में कुछ फुसफुसाते हुए दिख रहे हैं, और ममता मुस्कुराते हुए उनकी बात ध्यान से सुन रही हैं।
कुछ समय पहले तक ऐसी तस्वीर की कल्पना करना भी मुश्किल था, और लोग इसे नापसंद भी करते। ऐसा इसलिए है क्योंकि ममता का एकमात्र राजनीतिक लक्ष्य पश्चिम बंगाल में वामपंथियों (लेफ्ट) के गढ़ को तोड़ना था। उन्होंने 2011 में यह हासिल भी कर लिया—कांग्रेस पार्टी छोड़ने के लगभग 13 साल बाद जब उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक इरादों पर सवाल उठाए थे।
इस विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि क्या वामपंथी दल, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कड़ा राजनीतिक संघर्ष जारी रखते हुए भाजपा से भी प्रभावी ढंग से लड़ सकते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल में?
कम्युनिस्टों के बीच एक विचारधारा यह है कि भाजपा से लड़ने के लिए वामपंथी दलों को अपने ‘दुश्मन के दुश्मन’ के साथ हाथ मिला लेना चाहिए, भले ही वे क्षेत्रीय स्तर पर उनके विरोधी ही क्यों न हों।
इस विचार का समर्थन करने वाले लोग बताते हैं कि वामपंथियों का एकजुट होना तभी संभव हो पाया, जब सीपीआईएम की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ने ‘सांप्रदायिक ताकतों’ के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
वे यह भी मानते हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) से समर्थन वापस लेने के बाद ही वामपंथियों के जनाधार में गिरावट शुरू हुई। हालांकि, इस विचार का कड़ा विरोध भी हो रहा है। विरोध करने वालों का तर्क है कि पश्चिम बंगाल में जब ममता बनर्जी अपने चरम पर थीं, तब कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बावजूद वे उन्हें चुनौती देने में विफल रहे थे।
एक और पहलू यह है कि केरल में वामपंथी गठबंधन का सीधा मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन से है। जमीनी स्तर पर हो रही चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी का एक धड़ा इस नई राजनीतिक दिशा को वरिष्ठ मार्क्सवादी नेता और पूर्व महासचिव प्रकाश करात की रणनीतिक सोच से दूर जाने के रूप में देख रहा है।
सालों तक, बंगाल के वामपंथी नेताओं का यही मानना रहा है कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वामपंथी नेताओं का तर्क था कि ममता बनर्जी के साथ किसी भी तरह का राजनीतिक समझौता करने से उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान कमजोर होगी और उनके कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा होगा, खासकर ऐसे राज्य में, जहां पार्टी का आरोप रहा है कि ममता के शासन में उनके समर्थकों पर अत्याचार किए गए हैं। पर्यवेक्षकों का मानना है कि सीपीआईएम प्रमुख बनने के बाद से, बेबी ने ‘भाजपा-विरोधी एकता’ को मजबूत करने पर काफी जोर दिया है। इस दौरान, ‘इंडिया’ ब्लॉक के दायरे में ममता बनर्जी के साथ उनकी बातचीत काफी ‘सौहार्दपूर्ण’ रही है।
भारतीय राजनीति में भाजपा एक प्रमुख ताकत बनी हुई है, लेकिन संसद में सीपीआईएम की मौजूदगी अब पहले की तुलना में बहुत कम रह गई है। ऐसे हालात में पार्टी के भीतर कई लोगों का मानना है कि विपक्ष की एकता अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत बन गई है, लेकिन पार्टी के कट्टर समर्थकों को डर है कि इन तस्वीरों और संदेशों से यह संकेत जा सकता है कि सीपीआईएम तृणमूल के प्रति अपना विरोध नरम कर रही है।
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड में सांसदों-विधायकों पर लंबित आपराधिक मामलों में जांच एजेंसियों की सुस्ती पर हाई कोर्ट नाराज, सीबीआई से पूछे सवाल

झारखंड हाई कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में सुनवाई तेज करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अदालत ने विशेष रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से गवाहों को समय पर पेश नहीं कर पाने और जांच से जुड़े दस्तावेज जुटाने में हो रही देरी पर सवाल किए।
झारखंड में फिलहाल सांसदों और विधायकों के खिलाफ 11 आपराधिक मामले लंबित हैं। न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय की पीठ में बुधवार को इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों का ट्रायल लंबे समय से लंबित है। ऐसे मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर होनी चाहिए, ताकि उनका निपटारा अनावश्यक रूप से नहीं टले।
अदालत ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दस्तावेज जुटाने में ही काफी समय लग जाता है। इसके अलावा, गवाहों को अदालत में पेश करने के मामले में भी अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है। इससे मुकदमों की सुनवाई प्रभावित होती है और उनके निपटारे में देरी होती है।
सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ पुराने मामलों में गवाह अपने दिए गए पते पर नहीं मिल रहे हैं। इस कारण उन्हें अदालत में पेश करने और उनकी गवाही दर्ज कराने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। एजेंसी ने इसे सुनवाई में देरी की एक वजह बताया। मामलों की वास्तविक स्थिति और सुनवाई की प्रगति का आकलन करने के लिए हाई कोर्ट ने दो प्रमुख मामलों का पूरा रिकॉर्ड संबंधित निचली अदालत से तलब किया है।
इन रिकॉर्ड के जरिए अदालत यह देखना चाहती है कि मुकदमों की सुनवाई किस स्तर पर है और किन कारणों से उनमें देरी हो रही है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों को सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करने और उनके शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए हैं।
राजनीति
इंसाफ रैली में राहुल गांधी बोले-‘पंजाब में ऐसी सरकार चाहिए, जो जनता के लिए काम करे’

लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पंजाब में ‘इंसाफ रैली’ में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और पंजाब की ‘आप’ सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब को ऐसी सरकार चाहिए जो यहां की जनता के लिए काम करे।
राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब की सरकार दिल्ली से नहीं चलाई जा सकती। कांग्रेस पार्टी जब सरकार में होती है तो यहां सरकार पंजाब से ही चलाई जाती है। हमारा मुख्यमंत्री पंजाब का मुख्यमंत्री होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकार में पंजाब को न हिंदुस्तान का गृह मंत्री चलाता है और न ही दिल्ली का पूर्व मुख्यमंत्री चलाता है। आज दिल्ली से पंजाब की सरकार चलाई जा रही है। आधी लगाम अमित शाह ने और आधी केजरीवाल ने पकड़ रखी है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप के धमकाने पर मोदी ने 5 मिनट के अंदर यूएस डील साइन कर दी। इस बारे में कैबिनेट तक को जानकारी नहीं दी गई और न ही किसी ब्यूरोक्रेट को बताया गया। मोदी ने हिंदुस्तान के किसानों और एमएसएमई का डेटा ट्रंप के हवाले कर दिया।
राहुल ने कहा कि अमित शाह लॉ एंड ऑर्डर की बात करते हैं लेकिन पूरा देश जानता है, उन्होंने जेल में गैंगस्टर्स पाल रखे हैं। अमित शाह बताएं कि मणिपुर में क्या स्थिति है क्योंकि वहां की कानून व्यवस्था के चलते नरेंद्र मोदी मणिपुर भी नहीं जा सकते।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को नशे में झोंकने वाली ‘आप’ सरकार को माफ नहीं किया जा सकता। प्रदेश की जनता इन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता जरूर दिखाएगी। उन्होंने कहा कि भगवंत मान जब सांसद थे तो हमारे पास बैठकर चुटकुले सुनाते थे। भगवंत मान का शराब पीना उनका व्यक्तिगत मामला है लेकिन अगर पंजाब नशे से लड़ना चाहता है, तो यहां का मुख्यमंत्री हर शाम नशा नहीं कर सकता।
राहुल ने कहा कि पंजाब में नशा सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां ‘आप’ सरकार बनी और पंजाब के लोगों ने उनमें अपना भरोसा दिखाया। ‘आप’ सरकार का वादा था कि हम पंजाब से नशा मिटा देंगे। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि इस सरकार ने पंजाब के किस कोने से नशा मिटा दिया क्योंकि सच यही है कि ये लोग नशा नहीं हटा सकते।
राहुल गांधी ने गायक सिद्धू मूसेवाला को भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि सिद्धू मूसेवाला एक डायनामिक और टैलेंटेड युवा थे। मैं जब पहली बार उससे मिला, तब मैं उसे जानता नहीं था। मुझे सिर्फ ये बताया गया था कि वो एक अच्छा लड़का है, म्यूजिशियन है और कांग्रेस में आना चाहता है।
उन्होंने कहा कि जब मैंने उसका गाना 295 सुना, तब जाना कि पंजाब का एक बेहतरीन म्यूजिशियन राजनीति में आ रहा है। वो पंजाब के लिए बड़े काम कर सकते थे क्योंकि उसके अंदर पंजाब की आवाज थी, जिसे वो अपने गानों के जरिए दुनिया के सामने रखता था। इस बीच सिद्धू को धमकियां मिलने लगी थीं लेकिन फिर भी उसकी सिक्योरिटी हटा दी गई और एक दिन सबके सामने दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी गई। जो सिद्धू मूसेवाला के साथ हुआ, वो पंजाब में फैशन बन चुका है। जिस सोच ने सिद्धू मूसेवाला को मार डाला, वही सोच आज पंजाब के हर कोने में घूम रही है।
अंत में राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब के भाइयों और बहनों, आप सभी पंजाब में ऐसी सरकार बनाइए जो आपके लिए काम करे। ऐसी सरकार बनाइए जो नशा खत्म करे, एमएसएमई तैयार करे, युवाओं को रोजगार दे और किसानों की रक्षा करे। आप सब पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाइए।
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