राजनीति
अफगानिस्तान मामले में भारत के सामने कई बड़ी चुनौतियां और अवसर

पूरी दुनिया में चीन की आक्रामकता की गूंज बनी हुई है और इसके बीच दक्षिण एशिया एक और बड़े झटके की तैयारी कर रहा है। इसका केंद्र भारत का पड़ोसी अफगानिस्तान है। काबुल से आने वाले झटके इस्लामाबाद से होकर गुजरेंगे और दिल्ली से टकराएंगे। लेकिन इनकी तीव्रता कितनी होगी, यह अभी ज्ञात नहीं है। यह भी एक सवाल है कि भारत किस हद तक इसके लिए तैयार है।
इसकी शुरुआत 29 फरवरी को हुई जब अमेरिका ने लगभग 19 साल बाद युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी के लिए कतर के दोहा में तालिबान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। अजीब बात यह है कि अफगानिस्तान के भविष्य को प्रभावित करने वाले इस करार में अफगान सरकार को ही शामिल नहीं किया गया।
अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौता एक मिथ्या नाम बना हुआ है। इस समझौते की भावना के विपरीत, तालिबान ने हमले बढ़ा दिए हैं और हिंसा ने देश को और तीव्रता से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। काबुल में एक अस्पताल के प्रसूति वार्ड से गुरुद्वारे तक, नंगरहार में एक जनाजे से लेकर पक्तिया की एक अदालत तक, हर कहीं हिंसा हुई है। और, दर्जनों अफगान सुरक्षा जांच चौकियां भी जहां हमलों में सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है।
अफगान सरकार अपनी ओर से सौदे के विभिन्न प्रावधानों को लागू कर रही है। इसमें तालिबान कैदियों की रिहाई शामिल है। साथ ही, राष्ट्रपति अशरफ गनी ने दोहा में अंतर-अफगान वार्ता में शामिल होने के लिए प्रतिबद्धता भी जताई है।
दोहा में तालिबान का राजनीतिक कार्यालय है, जहां अमेरिका-तालिबान के बीच इसी साल फरवरी में समझौते पर बातचीत हुई थी। अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जाल्मे खलीलजाद ने अफगानिस्तान में शांति के लिए अंतर-अफगान वार्ता, हिंसा को कम करने और कैदियों की रिहाई के लिए पाकिस्तान सहित विभिन्न पक्षों से लगातार संपर्क बनाए रखा है। अफगान नेताओं के साथ अपनी हालिया वार्ता में खलीलजाद ने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान में शांति का अर्थ क्षेत्र में शांति है और अमेरिका इसमें निवेश करने के लिए तैयार है।
लेकिन, तालिबान ने जिस व्यापक स्तर पर हिंसा फैलाई है, उसे देखते हुए राष्ट्र का भविष्य अंधकारमय दिख रहा है। यह समझना मुश्किल नहीं है कि तालिबान ने देश भर में अपने घातक हमलों को क्यों बढ़ाया है। वह अमेरिका की वापसी के बाद देश पर पूर्ण प्रभुत्व चाहता है। वल्र्ड ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के व्यापक हनन ने भविष्य के समझौतों का तालिबान द्वारा पालन करने की इच्छा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
दो प्रमुख राष्ट्रों अमेरिका और अफगानिस्तान के अलावा, क्षेत्र में एक ऊंची दांव लगाने वाला खिलाड़ी पाकिस्तान भी है जो आतंकी संगठनों को पर्दे के पीछे से आश्रय और समर्थन देता रहा है। उसने आतंकी समूहों के माध्यम से संसाधन-संपन्न लेकिन अस्थिर पड़ोसी अफगानिस्तान पर हमलों को अंजाम दिलाकर इसे नियंत्रित करने और लगातार संकटों में बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने साथ ही भारत को क्षेत्र से अलग रखने के लिए काफी प्रयास किए हैं।
अफगानिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप पाकिस्तान के बिलकुल उलट है। भारत ने युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण और यहां लोकतंत्र को बढ़ावा देने में अफगान लोगों की मदद के लिए दो अरब डालर की सहायता दी है। भारत ने बांधों, बिजली स्टेशनों, सड़कों, अस्पतालों का निर्माण किया है। साथ ही अफगान लोगों को प्रशासन और सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया है।
अफगानिस्तान में इस अभूतपूर्व घटनाक्रम के बीच खलीलजाद सहित कई लोग भारत से तालिबान से बात करने का आग्रह कर रहे हैं। यही विचार अफगानिस्तान के लिए रूस के राष्ट्रपति के विशेष दूत जमीर काबुलोव का भी है। अब बड़ा सवाल यह है कि भारत उस तालिबान को कैसे देखता है, जिसे उसने दो दशक तक दूर बनाए रखा है।
भारत, अफगानिस्तान को एक लोकतांत्रिक देश के रूप में देखता है जहां लोग सरकार का चुनाव करते हैं, जबकि तालिबान को अभी भी एक आतंकवादी समूह, सत्ता का भूखा और एक पाकिस्तानी कठपुतली के रूप में देखता है। भारतीय सोच अभी भी अच्छे पुराने जमाने के सिद्धांत से संचालित होती है जिसमें एक आदर्श अफगानिस्तान में सभी जनजातियां मिलकर चुनाव कराती हैं, जहां आतंकवादी समूह अपने हथियार छोड़ देते हैं और अफगानिस्तान के लोग भारतीय समर्थन से सड़कों, बांधों, स्कूलों और अस्पतालों के साथ विकास मार्ग पर बढ़ते हैं।
लेकिन, अफगानिस्तान में अविश्वसनीय हिंसा के कारण भारत के इस सपने का पूरा होना अभी असंभव की तरह दिख रहा है। यह जरूर है कि इन असंभावनाओं के बीच अभी भी यह संभव है कि भारत तालिबान के साथ बात करने के लिए कोई रास्ता अपनाए।
तालिबान ने भारत के प्रति सामंजस्यपूर्ण संकेत दिए हैं जो आश्चर्यजनक है। उसने पहले ही कहा है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 का रद्द होना भारत का आंतरिक मामला है। साथ ही, एक से अधिक बार कहा है कि वह भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार है। यहां तक कि अफगानिस्तान सरकार ने संकेत दिया है कि भारत को अंतर-अफगान वार्ता में शामिल होना चाहिए क्योंकि वह हमेशा से अफगानिस्तान में शांति का समर्थन करता रहा है। वह चाहती है कि भारत तालिबान के विरोध को छोड़ दे और शांति प्रक्रिया को ताकत दे।
जबकि चारों ओर से शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका का आह्वान किया जा रहा है, इसका विरोध भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान की तरफ से आया है, जो अभी भी अपनी चालों को चलने में व्यस्त है। वह खुद को अफगान शांति प्रक्रिया में अमेरिका का एक सहयोगी बता रहा है, लेकिन अफगानिस्तान और भारत के हितों पर हमला करने के लिए विभिन्न आतंकवादी समूहों को आश्रय और प्रशिक्षण देना जारी रखे हुए है।
हालांकि, भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि अफगान युद्ध के मैदान में सक्रिय आतंकी समूह अब बदल रहे हैं। तालिबान भारत को सकारात्मक संकेत दे रहा है जबकि आतंकवादी समूह हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तान की सोच को अपनाए हुए है।
अफगानिस्तान में तेजी से बदलते घटनाक्रम ने भारत के लिए ऐसे व्यापक अवसर उपलब्ध करा दिए हैं जिसमें वह क्षेत्र से अपनी गैर-मौजूदगी को छोड़ दे और वार्ता में शामिल हो। यह अवसर बता रहे हैं कि अमेरिका के जाने के बाद अफगानिस्तान में एक बड़ी भारतीय भूमिका का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। अफगानिस्तान थिएटर के विभिन्न खिलाड़ियों को पता है कि वार्ता में भारत का रुख केवल शांति और अफगानिस्तान के लोगों के दृष्टिकोण के हिसाब से होगा।
अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में कोई स्थायी दोस्त और कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता है। लोग विकसित होते हैं, संस्थाएं बदलती हैं लेकिन शांति फिर भी वह लक्ष्य बनी रहती है जिसे हासिल किया जाना चाहिए। भारत ने लाखों अफगान लोगों के लिए इस लक्ष्य का पीछा किया है। इसे अब नहीं छोड़ना चाहिए।
(यह सामग्री इंडिया नैरेटिव डॉट काम के साथ एक व्यवस्था के तहत प्रस्तुत की जा रही है)
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कनाडा में भारतीय नागरिक की चाकू घोंपकर हत्या

ओटावा, 5 अप्रैल। कनाडा के ओटावा के निकट रॉकलैंड इलाके में एक भारतीय नागरिक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की। कनाडा में भारतीय दूतावास ने शनिवार सुबह घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है।
भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवार को सहायता देने का भी ऐलान किया।
दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “ओटावा के निकट रॉकलैंड में चाकू घोंपने से एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत से हम बहुत दुखी हैं। पुलिस ने बताया है कि एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है। हम शोक संतप्त परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए स्थानीय सामुदायिक संघ के माध्यम से निकट संपर्क में हैं।”
हालांकि चाकू मारने की घटना का विवरण अभी भी अस्पष्ट है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि यह घटना सुबह-सुबह क्लेरेंस-रॉकलैंड क्षेत्र में हुई।
अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि क्या यह वही मामला है जिसका उल्लेख भारतीय दूतावास ने किया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हत्या की चल रही जांच के तहत ओन्टारियो प्रांतीय पुलिस (ओपीपी) ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है।
पुलिस ने रॉकलैंड निवासियों को भी चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्हें सलाह दी गई है कि वे कानून प्रवर्तन की गतिविधियों में वृद्धि की अपेक्षा करें, जबकि अधिकारी अपराध से जुड़ी परिस्थितियों की जांच जारी रखेंगे।
कनाडा स्थित दूतावास ने जनता को आश्वासन दिया कि वह इस कठिन समय में पीड़ित परिवार को सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर रहा है।
चाकू घोंपने के पीछे का मकसद अभी भी स्पष्ट नहीं है और जांच जारी है। दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने का वादा किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परिवार को उनकी ज़रूरत के मुताबिक सहायता मिले और मामले से जुड़ी आगे की कार्रवाई में मदद मिले।
महाराष्ट्र
मुंबई से आकर कई चोरियां करने वाला चोर गिरफ्तार

मुंबई: पुलिस ने मिलिंद पुलिस स्टेशन की सीमा में चोरी करने वाले एक चोर को गिरफ्तार करने का दावा किया है, जिसके खिलाफ मुंबई में चोरी और सेंधमारी के कई मामले दर्ज हैं। मुंबई जोन 7 के डीसीपी विजय कांत सागरे ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि आरोपी फ्लाइट से चोरी करने के इरादे से मुंबई आया था और उसने कई 5 घरों में सेंध लगाई थी।
उसके खिलाफ नेहरू नगर, मिलिंद, अलवे, नवी मुंबई में चोरी के मामले दर्ज हैं। दो किलो वजन के डेढ़ लाख चांदी के आभूषण कुल 15 लाख रुपये जब्त किये गये हैं. अपराधी राजेश के खिलाफ डोंबिवली, विष्णु नगर, विषाई, विठ्ठलवाड़ी, मानपारा, पैन पुलिस स्टेशनों में भी पीछा करने के मामले दर्ज हैं।
आरोपी ने बताया कि वह 13 मार्च 2025 को हवाई जहाज से वाराणसी से मुंबई आया और 15 दिनों में पांच घरों में लूटपाट की.
राष्ट्रीय समाचार
देश के समुद्री इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कर रही काम: पीएम मोदी

New Delhi : Prime Minister Narednra Modi addresses a programme marking 20 years of completion of SWAGAT initiative in Gujarat through video conferencing onThursday, April 27, 2023. (Photo:IANS/Video Grab)
नई दिल्ली, 5 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि सरकार देश के समुद्री क्षेत्र और बंदरगाहों को मजबूत करना जारी रखेगी, जो भारत की प्रगति और समृद्धि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘राष्ट्रीय समुद्री दिवस’ के अवसर पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा, “हम भारत के समृद्ध समुद्री इतिहास और राष्ट्र निर्माण में इस क्षेत्र द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत पहले के समय में एक मान्यता प्राप्त समुद्री शक्ति था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद के दौर में समुद्री क्षेत्र की अनदेखी की गई।
हालांकि, पिछले 10 वर्षों के दौरान न्यू इंडिया ने समुद्री क्षेत्र में कई नई उपलब्धियां हासिल की हैं और सरकार देश के समुद्री इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश के प्रमुख बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता दोगुनी हो गई है और बंदरगाहों तक कनेक्टिविटी में सुधार के लिए हजारों किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया गया है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सरकार के “समृद्धि के लिए बंदरगाह और प्रगति के लिए बंदरगाह” के मंत्र के साथ समुद्री क्षेत्र में बड़े बदलाव लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा “उत्पादकता के लिए बंदरगाह” के नए मंत्र को समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए भी आगे बढ़ाया गया है।
पीएम मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ‘कोस्टल शिपिंग’ को विकसित करने के लिए कई नए कदम उठा रही है। यह बयान गुरुवार को लोकसभा द्वारा अनुमोदित ‘कोस्टल शिपिंग बिल’ की पृष्ठभूमि में दिया गया।
इस विधेयक का उद्देश्य भारतीय तटीय जल (कोस्टल वॉटर) के भीतर व्यापार में लगे जहाजों को रेगुलेट करना है। इस विधेयक का उद्देश्य कोस्टल शिपिंग के रेगुलेशन से संबंधित कानून को कंसोलिडेट और संशोधित करना, तटीय व्यापार (कोस्टल ट्रेड) को बढ़ावा देना और घरेलू भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
विधेयक यह सुनिश्चित करेगा कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और वाणिज्यिक जरूरतों के लिए देश के नागरिकों के स्वामित्व और संचालन वाले तटीय बेड़े (कोस्टल फ्लीट) से लैस हो।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने की रणनीति के तहत देश के अंतरदेशीय जलमार्गों को भी विकसित किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास ने दिखाया है कि जब भी भारत का समुद्री क्षेत्र मजबूत हुआ है, देश और दुनिया दोनों को इसका लाभ मिला है।
उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण तथ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार देश के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से लगातार काम कर रही है।
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