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Saturday,03-October-2026
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महाराष्ट्र सरकार ने केवल आधार के आधार पर जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए; देरी से हुए पंजीकरण की सख्त जांच के आदेश दिए

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मुंबई: महाराष्ट्र में विलंबित जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आधार कार्ड को दस्तावेज नहीं माना जाएगा और जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 के बाद केवल आधार कार्ड के माध्यम से बनाए गए सभी जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिए जाएंगे, राज्य राजस्व विभाग द्वारा जारी एक नोटिस में यह जानकारी दी गई है।

सरकार ने यह फैसला फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आधार कार्ड का इस्तेमाल करके जारी किए गए सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों को रद्द करने का आदेश दिया है।

अब तक ये प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्व विभाग द्वारा 16 सूत्रीय सत्यापन दिशा-निर्देश में कहा गया है कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में 11 अगस्त, 2023 को किए गए संशोधन के बाद उप तहसीलदार द्वारा जारी आदेशों को वापस लिया जाए तथा वापस लिए गए आदेश का सत्यापन सक्षम प्राधिकारी या जिला कलेक्टर के स्तर पर कराया जाए।

चूंकि राज्य में निलंबित लंबित आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है, इसलिए सभी संबंधित कार्यालयों की जाँच की जाए और लोक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, जो आवेदन इस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार नहीं हैं, उन्हें तत्काल रद्द किया जाए और नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) पोर्टल पर उनकी प्रविष्टि तुरंत हटा दी जाए, ऐसा दिशानिर्देशों में कहा गया है।

दिशानिर्देशों के अनुसार, आधार कार्ड को किसी भी विषय या मामले के साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है, और लंबित आवेदन की जांच के दौरान आधार संख्या और जन्म तिथि प्रमाण पत्र के बीच कोई विसंगति पाए जाने पर पुलिस शिकायत दर्ज की जानी चाहिए।

नोटिस में अमरावती, सिल्लोड, अकोला, संभाजीनगर शहर, लातूर, अंजनगांव सुर्जी, अचलपुर, पुसाद, परभणी, बीड, गेवराई, जालनाक्सी, अर्धपुर और परली सहित बड़ी संख्या में अनधिकृत जन्म-मृत्यु के मामलों वाले 14 क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है और सभी संबंधित तहसीलदारों/पुलिस स्टेशनों को मामलों की “गंभीरता से जांच” करने के लिए कहा गया है।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि तहसीलदारों द्वारा दिए गए आदेश के बाद सभी संबंधित नगर पालिकाओं/नगरपालिकाओं को विलंबित जन्म रिकॉर्ड का मिलान करना चाहिए।

यह देखा गया है कि कुछ कार्यालयों द्वारा प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए हैं, जबकि तहसीलदारों ने विलंबित जन्म अभिलेख लेने के आदेश नहीं दिए हैं। अतः उक्त प्रमाण-पत्रों के सत्यापन हेतु सभी संबंधित नगर पालिकाओं/नगरपालिकाओं के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

कई तहसीलदार कार्यालयों ने बिना किसी स्कूल प्रमाण पत्र या जन्मतिथि या स्थान के प्रमाण के, केवल आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में स्वीकार करके आवेदकों को जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए हैं। विलंबित जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जारी आदेश त्रुटिपूर्ण हैं और ऐसे आदेशों पर पुनर्विचार करना कार्यपालक मजिस्ट्रेट या तहसीलदार की ज़िम्मेदारी है।

कार्यपालक मजिस्ट्रेट और उपखंड अधिकारी को विसंगतियों की सूची बनाकर पुलिस को देनी होगी। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए।

तहसीलदार या उप-विभागीय कार्यालय को ऐसे व्यक्तियों की सूची तुरंत प्रस्तुत करनी होगी, यदि केवल आधार कार्ड को मूल जन्म प्रमाण पत्र के लिए मूल महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है, और उन लोगों की सूची जिनकी जन्मतिथि आवेदक द्वारा आवेदन में दी गई जानकारी या साक्ष्य से भिन्न है, पुलिस स्टेशन को। जिस तहसील में कोई पुलिस शिकायत नहीं की गई है या कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, वहां जन्मतिथि में ऐसी विसंगतियों के लिए आवेदक के खिलाफ मामला दर्ज करना तहसीलदार की जिम्मेदारी है, जो जालसाजी या धोखाधड़ी है।

नोटिस में आगे कहा गया है कि जिन जन्म प्रमाण-पत्र आदेशों को रद्द किया गया है, उनके लिए तहसीलदार और स्थानीय स्वशासन निकायों के अधिकारी आपस में समन्वय स्थापित कर आवेदक से इन सभी मूल आदेशों की प्रति प्राप्त करें। यदि यह मूल प्रमाण-पत्र वापस नहीं किया जाता है, तो स्थानीय पुलिस की सहायता ली जाए।

नोटिस में कहा गया है कि संभागीय आयुक्तों को जिला कलेक्टर, सभी संबंधित तहसीलदारों, सभी संबंधित नगर निगमों/नगर पालिकाओं/जिला परिषदों/पुलिस के साथ समन्वय में उनकी अध्यक्षता में एक दिवसीय बैठक आयोजित करने के लिए कहा गया है।

Monsoon

बिहार का मौसम: बाढ़ से 6.65 लाख लोग प्रभावित, 13 ज़िलों में येलो अलर्ट

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बिहार में मॉनसून सक्रिय है और मौसम विभाग ने सोमवार को 13 ज़िलों में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस अलर्ट में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुज़फ़्फ़रपुर, मधुबनी, दरभंगा, वैशाली, समस्तीपुर और सुपौल शामिल हैं। सुपौल, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और दरभंगा—इन चार ज़िलों में भारी बारिश का अनुमान है। कुछ इलाकों में 30 किमी/घंटा की रफ़्तार से तेज़ हवाएं चलने और बिजली गिरने की भी संभावना है। मौसम केंद्र ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधान रहने की सलाह दी है। पिछले 24 घंटों में बिहार के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है। मुंगेर में 73 मिमी, पटना में 68 मिमी, बांका में 67 मिमी, मुज़फ़्फ़रपुर में 65 मिमी और जमुई व सिवान में 55-55 मिमी बारिश दर्ज की गई।

हाल की बारिश के बावजूद, इस सीज़न में अब तक बिहार में कुल बारिश में 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्य में 820.9 मिमी बारिश की उम्मीद के मुकाबले 531.3 मिमी बारिश हुई है। रविवार को पटना में 68 मिमी बारिश हुई। सोमवार को राजधानी में बादल छाए रहने की उम्मीद है, हालांकि लगातार भारी बारिश की संभावना कम है। कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। बारिश कम होने पर उमस और तापमान बढ़ सकता है, जबकि आने वाले हफ़्ते में तापमान में कोई खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने के साथ-साथ नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। नेपाल और उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे बाढ़ का पानी अब 18 ज़िलों और लगभग 6.65 लाख लोगों को प्रभावित कर रहा है। गंगा नदी बक्सर से भागलपुर तक खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.75 मीटर ऊपर पहुँच गया है; खबरों के अनुसार, बाढ़ का पानी पटना के दक्षिणी हिस्सों में सुरक्षात्मक तटबंधों के ऊपर से बह रहा है या उन्हें तोड़कर रिहायशी इलाकों में घुस रहा है। बाढ़ ने कई जगहों पर परिवहन व्यवस्था को भी बाधित किया है; पानी ने पटना-गया रेलवे सेक्शन, बिहटा-सरमेरा एन एच 78 और मोकामा नेशनल हाईवे को प्रभावित किया है। सोन नदी के कारण भी बिहटा ब्लॉक के नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ आ गई है, जिससे लगभग 20,000 लोग प्रभावित हुए हैं और कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक पूरे बिहार में बारिश असमान रहने की संभावना है, जिसमें अलग-अलग इलाकों में स्थानीय स्तर पर बादल छाने और हल्की बारिश होने के आसार हैं।

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राष्ट्रीय

मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुए के अंतरराष्ट्रीय तस्कर रहेंगे जेल में

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भोपाल, 11 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुआ की तस्करी करने वाले आरोपी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि सागर के अपर सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपील खारिज करते हुए सजा और अर्थ दंड को बरकरार रखा है। दरअसल, स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने अत्यंत दुर्लभ जलीय जीव रेड-क्राउंड रूफ कछुओं की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी के मामले में शेखर दास और मोहम्मद सुल्तान को गिरफ्तार किया था, जिस पर उन्होंने अपील की थी।

इस अपील को विशेष न्यायालय द्वारा खारिज किया गया है। सजा एवं अर्थदंड को बरकरार रखा है। न्यायालय ने आरोपियों की अपील को निरस्त करते हुए उन दोनों को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी किए हैं। दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग की संयुक्त टीम ने वर्ष 2017 में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं उसके पारिस्थितिकी क्षेत्र से दुर्लभ लाल तिलकधारी कछुओं तथा पैंगोलिन शल्क की तस्करी का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा थे, जो चंबल नदी से इन दुर्लभ कछुओं को एकत्र कर कोलकाता तथा भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से विदेशों में अवैध रूप से भेजता था। गिरोह द्वारा वन्यजीव तस्करी के साथ हवाला के जरिये अवैध वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क भी संचालित किया जा रहा था।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, बयानों और जांच रिपोर्ट के आधार पर विशेष न्यायालय सागर ने 29 मार्च 2022 को दोनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधन 2022) के उल्लंघन का दोषी पाते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध आरोपियों ने अपील की थी।

अपीलीय न्यायालय ने एसटीएसएफ द्वारा की गई विवेचना और प्रस्तुत साक्ष्यों को तथ्यपरक मानते हुए कहा कि विशेष न्यायालय के निर्णय में कोई वैधानिक त्रुटि नहीं है। अपीलीय न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपीलें निरस्त कर उन्हें सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं।

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दुर्घटना

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर चार वाहनों की टक्कर, 18 अमरनाथ यात्री हुए घायल

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जम्मू, 13 जुलाई: रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सोमवार को भीषण सड़क हादसा हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इस सड़क हादसे में अमरनाथ यात्रा के 18 यात्री घायल हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, रामबन के चंदरकोट में लंगर पॉइंट पर पहलगाम जा रहे काफिले में शामिल दो एसआरटीसी बसों, एक कार और एक प्राइवेट बस की टक्कर हो गई।

अधिकारियों के मुताबिक, पहले एसआरटीसी की बस (जेके 01वाई-1044) दूसरी एसआरटीसी (जेके 01 वाई-1052) बस से टकरा गई। टक्कर की वजह से दूसरी बस एक कार (जेके21के-8115) से जा टकराई और फिर उस कार ने एक प्राइवेट बस (जेके02 सीएल-5499) को टक्कर मार दी। 4 वाहनों में टक्कर के कारण 18 अमरनाथ यात्री घायल हो गए।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी 18 घायल तीर्थयात्रियों को इलाज के लिए तुरंत रामबन के ज़िला अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि सभी को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत स्थिर है।

अभी तक 10 घायलों की पहचान हुई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले कमलेश राजपूत के 23 वर्षीय बेटे हर्ष राजपूत, सुरेश गुप्ता के 18 वर्षीय बेटे विशाल गुप्ता, हीरा लाल शंकर के 23 वर्षीय बेटे पंकज सुवनकर, महाराष्ट्र के यवतमाल के जीवन मोवाडे के 29 वर्षीय बेटे सुहास जीवन मोवाडे, राजस्थान के गंगानगर के रतन के 45 वर्षीय बेटे भारत भूषण, शिव के 51 वर्षीय बेटे विनोद कुमार घायल हुए हैं। वहीं, राजस्थान के बीकानेर के सत्तासर के रतन, राजस्थान के विनोद बागला की 48 वर्षीय पत्नी किरण, पंजाब के अक्षय कुमार की 50 वर्षीय पत्नी सीमा रानी, ​​राजस्थान के शिव रतन के 67 वर्षीय बेटे पवन कुमार और राजस्थान के जनता सिंघा के 41 वर्षीय बेटे गंगा सिन्हा भी हादसे में घायल हुए हैं। बाकी 8 घायलों की पहचान अभी नहीं हो पाई है।

हादसे के बाद जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक कुछ देर के लिए प्रभावित हुआ। पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और आगे की जांच चल रही है।

3 जुलाई को शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा 57 दिनों के बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहारों के साथ संपन्न होगी। इस साल की यात्रा शुरू होने के बाद से, कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में 2.45 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं।

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