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Saturday,26-September-2026
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मोबाइल कारोबार से बाहर निकलने के बाद एलजी अपने स्टोर पर एप्पल डिवाइस बेचेगी

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LG

दक्षिण कोरिया का चौथा सबसे बड़ा समूह एलजी समूह जाहिर तौर पर एप्पल के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों ने मंगलवार को कहा, अफवाहों के बीच कि उसके इलेक्ट्रॉनिक्स सहयोगी अमेरिकी टेक टाइटन के उत्पादों को अपनी कंपनी में रिटेल दुकानें पर बेच सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक एलजी ने हाल ही में लाइफकेयर पर आईफोन, आईपैड और अन्य एप्पल उत्पादों के लिए एक विशेष प्रचार किया, जो समूह के कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग मॉल है।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित तौर पर पहली बार था कि समूह ने अपने कर्मचारी खरीद कार्यक्रम के लिए किसी अन्य स्मार्टफोन निर्माता से मोबाइल उपकरणों की पेशकश की।

यह कदम उन अटकलों के बीच आया है कि एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स मोबाइल कारोबार से प्रस्थान के बाद देश भर में अपने 400 स्टोरों पर स्थानीय उपभोक्ताओं को एप्पल उत्पाद बेच सकती है।

अप्रैल में, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने घोषणा की कि वह वर्षों के नुकसान के बाद जुलाई तक स्मार्टफोन व्यवसाय से हट जाएगा।

उद्योग के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि एलजी समूह अपने भविष्य के विकास के लिए एप्पल के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना चाहता है। समूह पहले से ही एप्पल को डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल सहित इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स प्रदान कर रहा है।

हाल ही में, मैग्ना इंटरनेशनल इंक, एलजी मैग्ना ई-पॉवरट्रेन कंपनी के साथ इसके इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के संयुक्त उद्यम को एप्पल के संभावित सेल्फ-ड्राइविंग कार विकास से जोड़ा गया है।

समूह की दूरसंचार इकाई एलजी यूप्लस ने भी आईफोन का उपयोग करने वाले कर्मचारियों के लिए एप्पल आईओएस के साथ संगत एक कार्यालय कार्य प्रणाली विकसित करना शुरू कर दिया है।

मोबाइल व्यवसाय से एलजी के बाहर निकलने के बाद, एप्पल दक्षिण कोरियाई स्मार्टफोन बाजार में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है, जो कि इसके कट्टर सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रभुत्व है।

एप्पल ने हाल ही में एलजी स्मार्टफोन के साथ उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए दक्षिण कोरिया में एक ट्रेड-इन प्रोग्राम लॉन्च किया था।

व्यापार

भारतीय शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों से लाल निशान में खुला, फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव

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कमजोर वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में खुला। सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 628 अंक या 0.84 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,199 और निफ्टी 207 अंक या 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,299 पर था।

शुरुआती कारोबार में गिरावट का नेतृत्व फाइनेंशियल स्टॉक्स कर रहे थे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 2-2 प्रतिशत की कमजोरी के साथ लूजर्स थे। निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मेटल, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी कंजप्शन और निफ्टी एनर्जी के साथ करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे।

सेंसेक्स पैक में टेक महिंद्रा, सन फार्मा, एचसीएल टेक, टीसीएस और इन्फोसिस गेनर्स थे। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एमएंडएम, भारती एयरटेल और इटरनल लूजर्स थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 606 अंक या 0.97 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 61,808 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 147 अंक या 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,844 पर था।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत का 102 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना और यूएस के 10-साल के बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 5.11 प्रतिशत हो जाना बाजार के लिए नकारात्मक है। जब तक ये दो ग्लोबल चुनौतियां बनी रहेंगी, तब तक मार्केट में तेजी से रिकवरी की संभावना कम ही दिखती है। हाल के मार्केट ट्रेंड में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर लगातार फोकस बना हुआ है। इन सेगमेंट में ग्रोथ शेयरों में लगातार खरीदारी हो रही है, भले ही उनका वैल्यूएशन ज्यादा है।

उन्होंने आगे कहा कि इन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी घरेलू लिक्विडिटी का आना ही इस सेगमेंट के मजबूत बने रहने का मुख्य कारण है। वहीं, सही वैल्यूएशन के बावजूद लार्ज-कैप शेयर सुस्त पड़े हैं। यह ट्रेंड बदलेगा, लेकिन इसका समय कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड के ट्रेंड पर निर्भर करेगा।

ज्यादातर वैश्विक बाजार में कमजोरी देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार भी बुधवार को लाल निशान में बंद हुए थे।

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व्यापार

भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

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भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।

जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”

जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।

इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।

राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।

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व्यापार

सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

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सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

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