अंतरराष्ट्रीय
लीड्स की हार भारत को अगले दो टेस्ट में बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगी : कार्तिक
भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक का मानना है कि इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट में मिली हार भारत को अगले दो मुकाबलों में बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगी। कार्तिक ने द टेलेग्राफ के लिए लिखे कॉलम में कहा, “पिछली बार भारत 100 रन के भीतर ऑलआउट हुआ था तो उसने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेहतरीन तरीके से वापसी की थी। इस हिसाब से उनका थोड़ा इतिहास रहा है कि वह गिर कर वापसी करते हैं। लीड्स की हार उन्हें अगले दो टेस्ट में बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगी।”
उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि लीड्स का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। लेकिन भारतीयों में काफी अनुभव और गुणवत्ता है जिससे वह वापसी कर सकते है।”
कार्तिक ने कहा, “जब भारत ने 2007 में इंग्लैंड में सीरीज जीती थी तो अनिल कुंबले हमारे एकमात्र बल्लेबाज थे जिन्होंने सीरीज में शतक लगाया था। लेकिन पांच अर्धशतक भी थे जिसमें महेंद्र सिंह धोनी और मेरे 90 रन थे।”
उन्होंने कहा, “विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे भारत के तीन सबसे ज्यादा अनुभवी बल्लेबाज हैं और पांच मैचों में इन्होंने सिर्फ एक बार अर्धशतक लगाया है। लेकिन द ओवल से अच्छे रन बनाने के लिए कोई ग्राउंड हो सकता है क्या?”
अंतरराष्ट्रीय
‘इजरायल के विनाश की बात बर्दाश्त नहीं’, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान पर भड़के पीएम नेतन्याहू; दी चेतावनी

तेल अवीव, 10 अप्रैल : ईरान के साथ अमेरिका के सीजफायर की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह पर बड़ा हमला कर दिया। इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई। वहीं दोनों पक्षों के बीच सीजफायर की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल के इस हमले को लेकर कुछ ऐसा कहा जिससे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भड़क उठे।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि इजरायल के विनाश की बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजरायल को खत्म करने का आह्वान बहुत बुरा है। यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर उस सरकार से जो शांति के लिए न्यूट्रल आर्बिटर होने का दावा करती है।”
दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा “इजरायल बुरा है और इंसानियत के लिए श्राप है। इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, लेबनान में नरसंहार हो रहा है। इजरायल बेगुनाह नागरिकों को मार रहा है, पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान, खून-खराबा लगातार जारी है।”
इजरायल के खिलाफ आग उगलते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, “मैं उम्मीद और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने फिलिस्तीनी धरती पर इस कैंसर जैसे राज्य का निर्माण किया है, वे यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाएं और उन्हें नरक में जलाएं।”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बीते दिन इजरायल के हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि इजरायल के हमले के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से फोन पर बातचीत की।
पीएम शहबाज ने एक्स पर लिखा, “मैंने आज शाम लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से बात की। मैंने लेबनान के खिलाफ इजरायल के लगातार हमले की कड़ी निंदा की और इन दुश्मनी की वजह से लेबनान में हजारों लोगों की जान जाने पर दुख जताया। मैंने इस्लामाबाद में होने वाली ईरान-अमेरिका बातचीत के जरिए बातचीत को आसान बनाने समेत शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को फिर से सुनिश्चित किया।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का शुक्रिया जिन्होंने पाकिस्तान की शांति की कोशिशों की सराहना की और लेबनान और उसके लोगों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों को तुरंत खत्म करने के लिए हमारे लगातार समर्थन की जरूरत पर जोर दिया।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय इजरायली कार्रवाई इस इलाके में शांति और स्थिरता बनाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को कमजोर करती है और अंतरराष्ट्रीय कानून और बुनियादी मानवीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लेबनान के खिलाफ इजरायल के हमलों को खत्म करने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की अपील करता है।
बता दें, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद, इजरायल ने लेबनान पर एक दिन का सबसे बड़ा हमला किया, जिसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए और 1,100 से ज्यादा घायल हुए।
अंतरराष्ट्रीय
विदेशों में चीन को टक्कर देने के लिए निजी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा अमेरिका

वॉशिंगटन, 10 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका को वैश्विक बाजारों में अपने निजी क्षेत्र को अधिक आक्रामक तरीके से उतारना चाहिए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने वाणिज्यिक कूटनीति को अमेरिकी विदेश नीति की “मुख्य आधारशिला” बताया।
आर्थिक जुड़ाव को भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक वैश्विक स्थिरता दोनों के केंद्र में रखते हुए लैंडाउ ने तर्क दिया कि वाशिंगटन को अपने व्यवसायों को विदेशों में प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से सक्रिय करना होगा।
उन्होंने अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल प्रॉस्पेरिटी फोरम में अपने संबोधन में कहा, “हर दिन मैं जिस एक सवाल के साथ उठता हूँ…वह यह है कि हम कैसे सुनिश्चित करें कि अमेरिकी निजी क्षेत्र दुनिया के हर कोने में चीनी संस्थाओं को पछाड़ रहा हो?”
लैंडाउ ने स्वीकार किया कि कई देश अमेरिकी कंपनियों को पसंद करते हैं, लेकिन चीन की निरंतर मौजूदगी और वित्तीय सहायता के कारण अक्सर उसकी ओर रुख करते हैं। उन्होंने कहा, “आप किसी चीज़ को ‘कुछ नहीं’ से नहीं हरा सकते। चीनी यहाँ मौजूद हैं… अमेरिकी निजी क्षेत्र कहाँ है?”
उन्होंने तर्क दिया कि वाशिंगटन को उन बाधाओं को दूर करना होगा-जैसे जोखिम की धारणा, जानकारी की कमी और जटिल नियम जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में निवेश से रोकती हैं। उन्होंने कहा, “हम कुछ जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर आंक सकते हैं,” और जोड़ा कि सरकार को कंपनियों की मदद करनी चाहिए ताकि वे “जोखिमों का सही आकलन” कर सकें और “उन्हें कम कर सकें।”
उनके दृष्टिकोण के केंद्र में “तीन स्तंभों” वाली वाणिज्यिक कूटनीति है: निर्यात बाजारों का विस्तार, अमेरिकी निवेश को विदेशों में बढ़ावा देना और अमेरिका में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करना।
लैंडाउ ने कहा, “समग्र उद्देश्य यह है कि हम अपने देश को अधिक समृद्ध बनाएं” और जोर दिया कि आर्थिक जुड़ाव शून्य-योग खेल नहीं है। पूरी बात यह है कि ऐसे ‘विन-विन’ समाधान खोजे जाएं जो दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाएं।
उन्होंने इस आलोचना को भी खारिज किया कि मजबूत वाणिज्यिक फोकस से अमेरिकी विदेश नीति अत्यधिक लेनदेन आधारित हो जाती है। उन्होंने कहा, “सभी संबंध किसी न किसी पारस्परिक लाभ की भावना पर आधारित होते हैं।”
लैंडाउ ने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध अमेरिका की भागीदारी का “स्वाभाविक केंद्र” बना हुआ है, जिसका कारण निकटता और आपूर्ति श्रृंखला का एकीकरण है।
उन्होंने वेनेजुएला को दीर्घकालिक अवसर के रूप में बताया, इसे “बहुत, बहुत समृद्ध देश” कहा, जिसकी अर्थव्यवस्था में तेज गिरावट आई है।
विस्तृत रूप से उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक विकास राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों को स्थिर करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, “आर्थिक समृद्धि लगभग सभी संघर्षों का प्रमुख तत्व है,” और उदाहरण दिए जहाँ निवेश परियोजनाओं ने राजनीतिक विभाजन को कम करने में मदद की।
वैश्विक संघर्षों पर लैंडाउ ने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में “स्थायी और प्रभावी युद्धविराम” की दिशा में काम कर रहा है और जोड़ा कि वाशिंगटन ने विरोधियों की क्षमताओं को कम करने के अपने सैन्य उद्देश्यों को “प्रभावी रूप से हासिल” कर लिया है।
उन्होंने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी तक पहुंच के महत्व पर भी जोर दिया, इसे “पूरे तंत्र की जीवनरेखा” बताया।
उन्होंने सरकार और व्यवसायों के बीच बेहतर समन्वय की अपील की। उन्होंने कॉर्पोरेट नेताओं के लिए अपने संदेश का वर्णन करते हुए कहा, “मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ जिससे आपका काम आसान हो?”
इस फोरम में नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के बीच यह बढ़ती सहमति भी सामने आई कि वैश्विक विकास के लिए निजी पूंजी बेहद महत्वपूर्ण होगी। वक्ताओं ने कहा कि उभरते बाजारों में अधिकांश नई नौकरियां सरकारों से नहीं बल्कि निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है।
हाल के वर्षों में अमेरिका ने पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ आर्थिक रणनीति पर अधिक जोर दिया है, खासकर चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के जवाब में। वाशिंगटन ने विदेशी निवेश को समर्थन देने और जोखिम प्रबंधन के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन जैसे साधनों का विस्तार किया है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका को दी चेतावनी- ‘नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया खत्म करने से रोके ट्रंप’

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तेहरान, 10 अप्रैल : ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को खत्म करने की इजाजत न दे। अराघची ने कहा कि 40 दिनों की लड़ाई के बाद एक अहम सीजफायर हुआ है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री अराघची ने कहा, “नेतन्याहू का ‘क्रिमिनल ट्रायल’ रविवार को फिर से शुरू हो रहा है। लेबनान समेत पूरे इलाके में सीजफायर करने से उन्हें जेल भेजने में तेजी आएगी।
उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका पीएम नेतन्याहू को डिप्लोमेसी खत्म करने देता है, तो यह आखिरकार उसकी मर्जी होगी। हमें लगता है कि यह बेवकूफी होगी, लेकिन हम इसके लिए तैयार हैं।
इस बीच, ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने एक्स पर लिखा कि समय खत्म हो रहा है और इस बात पर जोर दिया कि लेबनान और रेजिस्टेंस एक्सिस सीजफायर के अविभाज्य हिस्से हैं।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयानों के हवाले से बताया कि गुरुवार को भी, अराघची ने अपने रूसी, फ्रेंच, स्पैनिश और जर्मन समकक्षों के साथ अलग-अलग फोन कॉल पर सीजफायर पर चर्चा की।
अराघची ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से कहा कि ईरान ने जिम्मेदारी भरा रवैया अपनाया है और अगर अमेरिका अपने वादे पूरे करता है, तो सीजफायर के तहत दो हफ्ते के लिए वादा के तहत होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा।
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ एक कॉल में, अराघची ने इजरायली सीजफायर उल्लंघन और लेबनान पर हमलों पर अफसोस जताया। इसके साथ ही उन्होंने इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की अपील की। बैरोट ने सीजफायर का स्वागत किया और लेबनान के खिलाफ इजरायली हमलों को रोकने की जरूरत पर जोर दिया।
स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने ईरान पर हुए हमलों को “गैर-कानूनी” बताया और सभी पार्टियों से डिप्लोमैटिक रास्ते पर बने रहने की अपील की।
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर बुधवार को लागू हो गया और इस हफ्ते के आखिर में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता शुरू होने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की चर्चा है कि ईरानी पक्ष का नेतृत्व मोहम्मद बागेर कलीबाफ ईरान की संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) करेंगे।
इजरायल ने कहा है कि सीजफायर में लेबनान का झगड़ा शामिल नहीं है, इस बात पर ईरान और मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद, इजरायल ने लेबनान पर बहुत बड़ा हमला किया, जिसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए और 1,100 से ज्यादा घायल हुए।
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