राजनीति
चारा घोटाले के डोरंडा केस में भी लालू दोषी करार, 21 फरवरी को होगा सजा का ऐलान
सीबीआई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को डोरंडा केस में भी दोषी करार दिया है..अदालत 21 फरवरी को लालू को इस मामले में सजा सुनाएगी…इस मामले में सीबीआई ने 2005 में चार्जशीट दाखिल की थी..
इस मामले में लालू पर डोरंडा के कोषागार से1995-96 में 139.5 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप था…इस मामले में कुल 170 आरोपी थे..जिनमें से 55 आरोपियों की मौत हो चुकी है..चारा घोटाले का यह पांचवा मामला है..जिसमें लालू यादव को दोषी करार दिया गया है…
अब सबकी नजरे सजा पर है..अगर अदालत लालू को तीन साल से कम की सजा सुनाती है तो उन्हे वहीं से बेल मिल जाएगी..लेकिन अगर सजा तीन साल से अधिक होती है तो उन्हे ऊपरी कोर्ट में जमानत के लिए जाना पड़ेगा…फिर जमानत की प्रक्रिया लंबी चल सकती है…फिलहाल लालू को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है…
इसके पहले चारा घोटाले के चार मुकदमों में अदालत ने लालू प्रसाद यादव को कुल मिलाकर साढ़े 27 साल की सजा दी है, जबकि एक करोड़ रुपए का जुर्माना भी उन्हें भरना पड़ा। बहुचर्चित चारा घोटाले के इस पांचवें मामले में रांची के डोरंडा थाने में वर्ष 1996 में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। बाद में सीबीआई ने यह केस टेकओवर कर लिया। मुकदमा संख्या आरसी-47 ए/96 में शुरूआत में कुल 170 लोग आरोपी थे। इनमें से 55 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि सात आरोपियों को सीबीआई ने सरकारी गवाह बना लिया। दो आरोपियों ने अदालत का फैसला आने के पहले ही अपना दोष स्वीकार कर लिया। छह आरोपी आज तक फरार हैं।
इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में अभियोजन की ओर से कुल 575 लोगों की गवाही कराई गई, जबकि बचाव पक्ष की तरफ से 25 गवाह पेश किये गये। इस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कुल 15 ट्रंक दस्तावेज अदालत में पेश किये थे। पशुपालन विभाग में हुए इस घोटाले में सांढ़, भैस, गाय, बछिया, बकरी और भेड़ आदि पशुओं और उनके लिए चारे की फर्जी तरीके से ट्रांसपोटिर्ंग के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध रूप से निकासी की गयी। जिन गाड़ियों से पशुओं और उनके चारे की ट्रांसपोटिर्ंग का ब्योरा सरकारी दस्तावेज में दर्ज किया था, जांच के दौरान उन्हें फर्जी पाया गया। जिन गाड़ियों से पशुओं को ढोने की बात कही गयी थी, उन गाड़ियों के नंबर स्कूटर, मोपेड, मोटरसाइकिल के निकले।
चारा घोटाले के ये मामले 1990 से 1996 के बीच के हैं। बिहार के सीएजी (मुख्य लेखा परीक्षक) ने इसकी जानकारी राज्य सरकार को समय-समय पर भेजी थी लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। सीबीआई ने अदालत में इस आरोप के पक्ष में दस्तावेज पेश किये कि मुख्यमंत्री पर रहे लालू यादव ने पूरे मामले की जानकारी रहते हुए भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कई साल तक वह खुद ही राज्य के वित्त मंत्री भी थे, और उनकी मंजूरी पर ही फर्जी बिलों के आधार राशि की निकासी की गयी। चारा घोटाले के चार मामलों में सजा होने के चलते राजद सुप्रीमो को आधा दर्जन से भी ज्यादा बार जेल जाना पड़ा। इन सभी मामलों में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिली है।
महाराष्ट्र
मुंबई: किरीट सौम्या ने गोवंडी शिवाजी नगर में अवैध स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, स्कूल जिहाद का आरोप, इलाके में तनाव

मुंबई; भाजपा नेता कीरत सौम्या ने मुंबई के गोविंद शिवाजी नगर बेगुन में 64 गैर-कानूनी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गोविंद के अपने दौरे के दौरान कीरत सौम्या ने उस गैर-कानूनी स्कूल का भी मुआयना किया जिसमें स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। स्कूल की हालत बहुत खराब है और इसके जर्जर होने की वजह से एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है क्योंकि चार मंजिला इस गैर-कानूनी स्कूल में क्लास 1 से 4 तक की क्लासें चलती हैं। ऐसे में अगर स्कूल में कोई एक्सीडेंट होता है तो जान जाने का खतरा है। स्कूलों का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कीरत सौम्या ने कहा कि ये गैर-कानूनी स्कूल सरकारी जमीन पर हैं और ऐसे में इन स्कूलों पर मुस्लिम माफिया का कब्जा है। यह एक तरह का लैंड जिहाद है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस स्कूल को बनाया गया है, उसके खिलाफ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एजुकेशन डिपार्टमेंट में शिकायत दर्ज कराई गई है और अगले हफ्ते इन गैर-कानूनी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आज क्रेट सौम्या के साथ बीएमसीएम ईस्ट वार्ड के स्टाफ और एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी भी मौजूद थे। क्रेट सौम्या ने एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी को निर्देश दिया कि वे पता लगाएं कि इस गैर-कानूनी स्कूल को एजुकेशन डिपार्टमेंट से इस तरह से परमिशन कैसे मिली। संबंधित विभाग ने इसके खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। जिस बिल्डिंग में यह स्कूल चल रहा है, वह बहुत खतरनाक हालत में है। जब क्रेट सौम्या से पूछा गया कि क्या वह मुसलमानों के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन लैंड माफिया और जिहादी सोच वाले लोगों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में बच्चे पढ़ रहे हैं, वे मुस्लिम लैंड माफिया के हैं और उनमें कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में इसका जिम्मेदार कौन होगा? उन्होंने इस बारे में शिक्षा विभाग से भी पूछा, जिस पर शिक्षा विभाग के अधिकारी ने कहा कि इस बारे में स्कूल प्रशासन को नोटिस भेजा गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है, जिसके बाद सोमवार और शनिवार तक इस बारे में कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, क्रेट सौम्या ने बीएमसी के कर्मचारियों से पूछा कि यहां स्कूल कैसे बना और फिर कार्रवाई की मांग की। क्रेट सौम्या के दौरे को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। क्रेट सौम्या के दौरे के मद्देनजर इलाके में तनाव फैल गया था। बीएमसी के मुताबिक, शहर में 164 स्कूल गैर-कानूनी हैं और ये बिना इजाजत वाले स्कूल हैं। सबसे ज़्यादा गैर-कानूनी स्कूल गोविंद (64) और कुर्ला (12) में हैं, जिनमें चार मराठी मीडियम स्कूल भी शामिल हैं। क्रेट सौम्या ने स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद जब उनसे पूछा गया कि अगर स्कूल बंद हो गया तो इन बच्चों के भविष्य का क्या होगा, तो उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग इन बच्चों को दूसरे स्कूलों में ट्रांसफर कर देगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
वैश्विक एआई दौड़ के बीच गूगल एन्थ्रोपिक में 40 अरब डॉलर तक का करेगा निवेश

अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दौड़ में बड़ा दांव खेलते हुए एआई कंपनी एन्थ्रोपिक में 40 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना बनाई है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां एडवांस एआई मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से निवेश कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्तावित निवेश में शुरुआती तौर पर 10 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा, जो एन्थ्रोपिक के 380 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर आधारित होगा। इसके बाद बाकी 30 अरब डॉलर का निवेश कंपनी के प्रदर्शन से जुड़े लक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
यह निवेश दोनों कंपनियों के बीच पहले से चल रही साझेदारी को और मजबूत करता है। इस साझेदारी के तहत गूगल, एन्थ्रोपिक को क्लॉड इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है और उसके एआई मॉडल, खासकर क्लॉड सीरीज तक पहुंच देता है।
इसके अलावा, एन्थ्रोपिक, गूगल के कस्टम टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (टीपीयू) का इस्तेमाल करता है, जो पारंपरिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) का एक विकल्प हैं।
एआई टूल्स की बढ़ती मांग के कारण कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी को देखते हुए एन्थ्रोपिक ने हाल ही में गूगल और ब्रॉडकॉम के साथ मिलकर 5 गीगावाट कंप्यूट क्षमता हासिल की है और इसे आगे और बढ़ाने की योजना है।
दिलचस्प बात यह है कि साझेदारी के बावजूद दोनों कंपनियां एआई बाजार में एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी भी हैं। गूगल के जेमिनी मॉडल, एन्थ्रोपिक के एआई मॉडल्स को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
गूगल ने 2023 में पहली बार एन्थ्रोपिक में 300 मिलियन डॉलर का निवेश किया था, जिससे उसे लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली थी। बाद में यह निवेश 3 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया और डील से पहले उसकी हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत बताई जा रही थी।
एन्थ्रोपिक की स्थापना 2021 में ओपन एआई के पूर्व शोधकर्ताओं ने की थी, और इसके क्लॉड मॉडल्स को तेजी से लोकप्रियता मिली है। कंपनी की सालाना आय 30 अरब डॉलर के पार पहुंच चुकी है।
इससे पहले अमेजन भी एन्थ्रोपिक में 5 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है और 20 अरब डॉलर तक के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता जता चुका है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
2028 तक चांद पर वापसी का लक्ष्य, ‘नासा’ ने तय किए तीन बड़े मिशन

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी नई स्पेस रणनीति के तीन बड़े लक्ष्य तय किए हैं, जिनमें 2028 तक इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजना, वहां स्थायी बेस बनाना और लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल गतिविधियों का विस्तार करना शामिल हैं।
नासा के प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने कहा कि यह रणनीति अमेरिका की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप है और तेजी से बदलते वैश्विक प्रतिस्पर्धी माहौल में अमेरिका की लीडरशिप को मजबूत करने के लिए बनाई गई है।
आइजकमैन ने साफ शब्दों में कहा, “हमारा लक्ष्य चंद्रमा पर वापसी करना, लॉन्च की संख्या बढ़ाना और 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है।” उन्होंने बताया कि यह नासा के निकट भविष्य के मिशनों का मुख्य फोकस है।
उन्होंने आगे कहा कि एजेंसी सिर्फ चंद्रमा तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां लंबी अवधि के लिए इंसानी मौजूदगी स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके लिए सरकार और निजी कंपनियां मिलकर काम करेंगी। इस योजना में लैंडर, रोवर, पावर सिस्टम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी जैसी जरूरी चीजें शामिल होंगी, ताकि चंद्रमा पर लगातार ऑपरेशन संभव हो सके।
नासा की रणनीति का तीसरा अहम हिस्सा लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ाना है। इसके तहत प्राइवेट स्पेस स्टेशन को बढ़ावा दिया जाएगा और उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार किए जाएंगे। आइजकमैन ने कहा, “हम उद्योग के साथ मिलकर कमर्शियल एस्ट्रोनॉट मिशन और उससे जुड़ी कमाई के अवसरों को बढ़ाना चाहते हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि नासा अब अपने संसाधनों के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव कर रहा है। एजेंसी बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स से हटकर छोटे, फोकस्ड और परिणाम देने वाले निवेश पर ध्यान दे रही है। उन्होंने माना कि पहले कई मिशनों में लागत बढ़ने और देरी जैसी समस्याएं सामने आई हैं, जिससे सुधार की जरूरत महसूस हुई।
आइजकमैन ने कहा, “हम ऐसे प्रोग्राम नहीं बना सकते जो इतने बड़े हों कि फेल न हो सकें, लेकिन इतने महंगे भी हों कि सफल ही न हो पाएं।” उन्होंने कहा कि नासा को खर्च के बजाय परिणामों पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने लॉन्च की संख्या बढ़ाने का भी जिक्र किया और कहा कि मिशनों के बीच ज्यादा अंतराल प्रगति को धीमा कर देता है। हाल ही में हुए आर्टेमिस II मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब कार्यक्रम सही तरीके से लागू होते हैं, तो बड़े परिणाम सामने आते हैं। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर घुमाकर सुरक्षित वापस लाया गया था।
उन्होंने कहा, “हमने दुनिया को फिर से चंद्रमा दिखाया और इंसानियत को पृथ्वी का नया नजरिया दिया।”
नई योजना के तहत नासा सैटेलाइट लॉन्च और अर्थ ऑब्जर्वेशन जैसे कामों के लिए निजी कंपनियों पर ज्यादा निर्भर करेगा, जबकि खुद डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन और न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे जटिल मिशनों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
हालांकि, इस रणनीति पर सांसदों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रस्तावित बजट में पिछले साल की तुलना में करीब 23 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे इन लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
स्पेस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने चेतावनी दी कि कम फंडिंग से अमेरिका की स्पेस प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब चीन तेजी से अपने चंद्र मिशनों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, “नासा को कम फंड देना समझदारी नहीं है।”
वहीं, रैंकिंग मेंबर जो लोफग्रेन ने कहा कि इस योजना से विज्ञान और तकनीक के कई अहम प्रोग्राम प्रभावित हो सकते हैं, खासकर वे क्षेत्र जो मानव अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े नहीं हैं।
अन्य लॉमेकर्स ने वर्कफोर्स, अर्थ साइंस मिशन और एरोनॉटिक्स रिसर्च पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठाए, साथ ही निजी कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता जताई।
इस पर आइजकमैन ने जवाब दिया कि नासा हमेशा कानून के अनुसार काम करेगा और संसाधनों के इस्तेमाल में पारदर्शिता रखेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि कम संसाधनों में भी बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं, बशर्ते बेकार खर्च को खत्म कर मुख्य लक्ष्यों पर फोकस किया जाए।
1958 में स्थापित नासा लंबे समय से अंतरिक्ष खोज में दुनिया का नेतृत्व करता रहा है, चाहे वह अपोलो कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर लैंडिंग हो या इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का निर्माण। हाल के वर्षों में, खासकर चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण, चंद्रमा मिशनों और पृथ्वी से बाहर मानव मौजूदगी पर फिर से जोर बढ़ा है।
इसी दिशा में आर्टेमिस कार्यक्रम एक अहम पहल है, जिसका उद्देश्य 1972 के बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा पर वापस भेजना है।
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