अंतरराष्ट्रीय समाचार
कोलकाता आरजी कर बलात्कार और हत्या मामला: सुप्रीम कोर्ट 17 मार्च को मामले की सुनवाई करेगा
नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय अगले सप्ताह उस मामले की सुनवाई करेगा, जिसमें उसने कोलकाता के सरकारी आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।
सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर प्रकाशित वाद सूची के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ 17 मार्च को स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई पुनः शुरू करेगी।
पिछली सुनवाई में, सीजेआई खन्ना की अगुवाई वाली पीठ ने देश भर के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया था कि वे उन डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों को दंडित न करें, जिन्होंने जघन्य बलात्कार और हत्या मामले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, लेकिन शीर्ष अदालत की अपील के बाद अपने कर्तव्य पर लौट आए थे।
पिछले वर्ष अगस्त में, ‘आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, कोलकाता में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ कथित बलात्कार एवं हत्या की घटना तथा संबंधित मुद्दे’ शीर्षक से स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शनकारी चिकित्सा बिरादरी से यथाशीघ्र काम पर लौटने का आग्रह किया था तथा उन्हें आश्वासन दिया था कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए उनके विरुद्ध कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस बीच, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा इस महीने कोलकाता की एक विशेष अदालत में अपना पूरक आरोप पत्र दाखिल करने की उम्मीद है, जिसमें साक्ष्यों से छेड़छाड़ के विभिन्न पहलुओं का विवरण दिया जाएगा।
केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी सर्वोच्च न्यायालय में निर्धारित सुनवाई से पहले कोलकाता की विशेष अदालत में पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
अक्टूबर में, सीबीआई ने कथित बलात्कार और हत्या मामले में कोलकाता पुलिस के नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय के खिलाफ अपना पहला आरोप पत्र दायर किया।
आरोप-पत्र में सीबीआई ने इस जघन्य अपराध के पीछे एक बड़ी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया है, जिसके कारण कोलकाता पुलिस द्वारा की गई जांच के प्रारंभिक चरण के दौरान कथित तौर पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ और परिवर्तन की घटनाएं हुईं।
रॉय के अलावा, इस मामले में सीबीआई अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किए गए दो अन्य लोग आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और ताला पुलिस स्टेशन के पूर्व एसएचओ अभिजीत मंडल हैं।
आरजी कर ताला पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है।
घोष और मंडल के खिलाफ मुख्य आरोप जांच को गुमराह करने का है, जब कोलकाता पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी, उसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इसे सीबीआई को सौंप दिया था।
दोनों पर मामले में सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया है।
सजा सुनाते हुए विशेष अदालत के न्यायाधीश अनिर्बान दास ने कहा कि सीबीआई का यह तर्क कि मामले में रॉय का अपराध “दुर्लभतम एवं दुर्लभतम अपराध” है, स्वीकार्य नहीं है।
इसलिए, न्यायाधीश ने कहा कि कोलकाता पुलिस से जुड़े पूर्व नागरिक स्वयंसेवक रॉय को “मृत्युदंड” के बजाय “आजीवन कारावास” की सजा दी जानी चाहिए।
इसके अलावा रॉय पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
विशेष अदालत ने साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार को मृतक पीड़िता के परिवार को 17 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने कहा कि चूंकि पीड़िता के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या उसके कार्यस्थल पर की गई, जो कि राज्य सरकार का निकाय है, इसलिए पश्चिम बंगाल सरकार कानूनी रूप से पीड़िता के परिवार को मुआवजा देने के लिए बाध्य है।
आरोप तय करने की प्रक्रिया 4 नवंबर, 2024 को पूरी हुई, जो पिछले साल 9 अगस्त की सुबह अस्पताल परिसर के भीतर एक सेमिनार हॉल में महिला जूनियर डॉक्टर का शव मिलने के ठीक 87 दिन बाद की बात है।
अपराध का स्वतः संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस घटना को “भयावह” करार दिया था, जो “देश भर में डॉक्टरों की सुरक्षा का प्रणालीगत मुद्दा” उठाता है।
इसमें कहा गया था, “हम इस तथ्य से बहुत चिंतित हैं कि देश भर में, विशेषकर सार्वजनिक अस्पतालों में, युवा डॉक्टरों के लिए काम करने की सुरक्षित परिस्थितियों का अभाव है।”
सर्वोच्च न्यायालय ने देश भर में चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा के लिए उपाय सुझाने हेतु एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया था, तथा कहा था कि डॉक्टरों की सुरक्षा “सर्वोच्च राष्ट्रीय चिंता” है।
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बांग्लादेश चुनावों में ज्यादातर हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुट जिम्मेदार: मानवाधिकार संगठन

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा नियंत्रण एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इसकी वजह कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनावों के दौरान या फिर बाद में हुई हिंसक गतिविधियां हैं। स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि चुनावी हिंसा में सबसे ज्यादा सक्रिय वो गुट रहे हैं जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जुड़े रहे।
ढाका के ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘ओधिकार’ ने अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में बताया कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले 52 फीसदी, पोलिंग के दिन 53 फीसदी और चुनाव के बाद 75 फीसदी हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले दर्ज 15 फीसदी, चुनाव के दिन 13 फीसदी और चुनाव के बाद 9 फीसदी गतिविधियों में शामिल थे।
ये नतीजे सोमवार को ढाका में सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (सीआईआरडीएपी) में हुई चर्चा के दौरान पेश किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय तौर पर हिंसक और डराने-धमकाने की घटनाएं जारी रहीं।
बांग्लादेश के सभी जिलों में से चटगांव, कॉक्स बाजार, भोला, मैमनसिंह और ढाका मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे। यहां मुख्य तौर पर लोगों को डराया-धमकाया गया था। वहीं पोस्ट-इलेक्शन मारपीट, संपत्ति को नुकसान और हत्या जैसी वारदातें ज्यादा दर्ज की गईं। चुनाव से पहले 62 घटनाएं दर्ज की गईं।
चटगांव में सबसे ज्यादा 11 घटनाएं दर्ज की गईं, उसके बाद कॉक्स बाजार में आठ घटनाएं हुईं। ढाका और मैमनसिंह में पांच-पांच घटनाएं जबकि सिराजगंज में चार घटनाएं दर्ज की गईं। चुनाव से पहले हुई 34 घटनाओं में अधिकारियों ने किसी न किसी तरह की कार्रवाई की, जबकि 28 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओधिकार ने वोटिंग के दिन 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएं रिकॉर्ड की, जिसमें मैमनसिंह में सात और भोला में छह वारदातें अंजाम दी गईं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में चार जबकि कॉक्स बाजार और फेनी में तीन-तीन मामले संज्ञान में आए।
32 घटनाओं में से 17 में बीएनपी और उसके सहयोगी शामिल थे, जबकि चार में जमात और उसके सहयोगी। दो में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 11 मामलों में कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सात मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह पता नहीं चल सका।
पिछले महीने, ओधिकार ने बताया कि इस साल अप्रैल और जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोग मारे गए, जबकि पूरे देश में राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान चली गई और 970 घायल हुए।
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यूक्रेन पर रूसी मिसाइल हमलों में 6 लोगों की मौत, जेलेंस्की ने की कड़े प्रतिबंधों की मांग

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी हमलों की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि रूस जानबूझकर नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की अधिकतम कोशिश कर रहा है। सोमवार रात रूस के मिसाइल हमलों में छह लोगों की मौत हो गई और 19 लोग घायल हुए हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”जापोरिज्जिया में रूसी हमले के बाद से रात भर राहत और बचाव कार्य जारी हैं। शहर पर उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों, ‘जिरकॉन’ मिसाइलों और ग्लाइड बमों से हमला किया गया। यह एक बेहद गंभीर हमला था, जिसे नागरिक ढांचे को अधिकतम नुकसान पहुंचाने के इरादे से अंजाम दिया गया।”
जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में शहर में छह लोगों की मौत हुई है और 19 लोग घायल हुए हैं। मैं पीड़ित परिवारों और उनके करीबियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। बचावकर्मी अभीी हमले वाली एक जगह पर लगी आग बुझाने में जुटे हुए हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि कीव में मिसाइल हमले से एक संक्रामक रोग अस्पताल की इमारत और एक औद्योगिक इकाई को नुकसान पहुंचा है। वहीं, अग्रिम मोर्चे के करीब रहने वाले समुदायों पर ड्रोन हमलों का सिलसिला रोज जारी है।
उन्होंने बताया कि खेरसोन और खार्किव में रात के दौरान बिजली सब-स्टेशनों पर हमले हुए, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। सभी संबंधित सेवाएं परिवारों तक दोबारा बिजली पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं।
इसके अलावा डोनेट्स्क, द्नीप्रोपेत्रोव्स्क और मिकोलाइव क्षेत्रों पर भी हमले किए गए। मिसाइलों के साथ-साथ पूरे यूक्रेन में 120 से ज्यादा ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिनमें अधिकांश जेट इंजन वाले ‘शाहेद’ ड्रोन थे।
जेलेंस्की ने कहा कि रूस के हर कदम, चाहे वह बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाना हो, उत्तर कोरियाई हथियारों का इस्तेमाल करना हो या नई सैन्य लामबंदी की तैयारी करना हो, यह साफ दिखाता है कि मॉस्को शांति की दिशा में नहीं बल्कि संघर्ष को और बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया को इसका जवाब अभी देना होगा, इंतजार नहीं करना चाहिए। रूस के युद्ध प्रयासों को समर्थन देने वाले उद्योगों और संस्थानों पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। साथ ही यूक्रेन को वायु रक्षा (एयर डिफेंस) के क्षेत्र में और मदद की जरूरत है। शांति के लिए अवसर बनाने के लिए ये सभी कदम जरूरी हैं। मदद करने वाले सभी देशों और लोगों का धन्यवाद।
यूक्रेन की फर्स्ट लेडी ओलेना जेलेंस्का ने रूसी हमलों की निंदा करते हुए जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
ओलेना जेलेंस्का ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, ”रूस लगातार यूक्रेनियों की जान ले रहा है। बीती रात दुश्मन ने कीव, कीव क्षेत्र, जापोरिज्जिया क्षेत्र, निप्रॉपेट्रोव्स्क क्षेत्र, खार्किव क्षेत्र और कई अन्य इलाकों पर गोलाबारी की। मैं सभी पीड़ितों और जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।”
उन्होंने कहा कि हम दुनिया को इस स्थिति का आदी नहीं होने दे सकते। यूक्रेनियों की मौतों, तबाह हुए घरों और हर नए हमले की खबर को सामान्य बात नहीं माना जाना चाहिए। ये वो लोग हैं, जिनसे रूस हर दिन उनके घर, उनके अपनों और उनकी जिंदगी छीन रहा है।
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ईरान को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति रजा आरिफ

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि हमारे दुश्मन साजिशें रचेंगे और देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशते रहेंगे। इसलिए देश की साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विरोधियों की साजिशों से निपटने के लिए ईरान को पूरी तरह तैयार रहना होगा।
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास मुख्यालय की बैठक में आरिफ ने दुश्मनों की साजिशों को नाकाम करने के लिए देश को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करनी होगी।
उन्होंने कहा कि शहीद इस्लामी क्रांति के नेता की ओर से तय किए गए विकास दृष्टि कार्यक्रम के तहत ईरान को उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में क्षेत्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल करना चाहिए और वैश्विक स्तर पर भी एक प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए।
आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करना एक जरूरी रणनीति है, क्योंकि दुश्मन ईरानी जनता के सामने हाल की अपनी हार के बावजूद साजिशें रचना बंद नहीं करेगा और हमारे देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशता रहेगा। हमें पूरी तरह तैयार रहते हुए विरोधियों की साजिशों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और निष्क्रिय रक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने जून 2025 में ईरान के खिलाफ अपना पहला युद्ध शुरू किया था, जो 12 दिन तक चला। इसके बाद उनका दूसरा सैन्य हमला इस वर्ष 2026 में 28 फरवरी को शुरू हुआ और 40 दिन के बाद अप्रैल की शुरुआत में रुक गया।
मोहम्मद रजा आरिफ ने दावा किया कि दोनों युद्धों में ईरान के मजबूत प्रतिरोध और जवाबी सैन्य अभियानों ने विरोधियों को युद्धविराम स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।
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