अपराध
खालिस्तान पाक का पोजेक्ट है, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा : कनाडाई रिपोर्ट
एक आंख खोलने वाली रिपोर्ट में, कनाडा के दिग्गज पत्रकारों में से एक टेरी मिलेवस्की ने चेतावनी दी है कि खालिस्तान प्रोजेक्ट पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित है और यह न केवल भारत बल्कि कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है। कनाडा के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सीबीसी टीवी न्यूज के संवाददाता के रूप में चार दशकों के दौरान पुरस्कार विजेता मिलेवस्की 52 देशों से रिपोर्टिग कर चुके हैं।
1985 में, उन्होंने एयर इंडिया पर बमबारी को कवर किया, जिसमें मॉन्ट्रियल से हीथ्रो जा रहे विमान में सवार 329 लोग मारे गए थे। उन्होंने पिछले 35 वर्षो से उस कहानी का पीछा किया, मामले की पूरी जांच को कवर किया।
मिलेवस्की 2016 में सीबीसी के वरिष्ठ संवाददाता के रूप में सेवानिवृत्त हुए, जो कभी-कभी नेटवर्क के गेस्ट होस्ट के रूप में लौटते हैं।
ओटावा स्थित एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक मैकडोनाल्ड लॉयर इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित मिलेवस्की की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि कैसे पाकिस्तान ने भारत-पाक 1971 के युद्ध में अपनी हार का बदला लेने के लिए भारत के पंजाब में भारतीय सिखों का इस्तेमाल करते हुए खालिस्तान विद्रोह की शुरुआत की।
पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए नरसंहार को रोकने के लिए भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में हस्तक्षेप किया था और इसके परिणामस्वरूप उसे पश्चिम पाकिस्तान से मुक्त करने में मदद की थी।
दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान ने खालिस्तान परियोजना को एक रणनीतिक बफर के रूप में देखा और कैसे एक स्वतंत्र खालिस्तान भारत की कश्मीर तक उत्तर में पहुंच को समाप्त कर देगा, जो कि 1947 के बाद से पाकिस्तान सेना का एक और महत्वपूर्ण इंट्रेस्ट है।
खालिस्तान परियोजना पर प्रकाश डालते हुए, मिलेवस्की ने बताया कि अलगाववादी सिखों ने 1984 में हिंदुओं द्वारा कई हजार सिखों के नरसंहार के बारे में जोर से और ठीक से शिकायत की, लेकिन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान इस्लाम के नाम पर लाखों सिखों के मुसलमानों द्वारा नरसंहार करने के लिए न्याय मांगने के लिए रैलियों का आयोजन नहीं किया।
मिलेवस्की की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे बड़े देश जहां बड़े पैमाने पर सिख समुदाय हैं, वे इस बात से वाकिफ हैं और इसलिए, खालिस्तान जनमत संग्रह पर संदेह जताया।
कनाडा की सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह इसे मान्यता नहीं देगी।
खालिस्तान जनमत संग्रह पर सवाल उठाते हुए, अनुभवी पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में पूछा है कि अलगाववादी सिख भारतीय पंजाब पर ‘कब्जे’ की जुगत में क्यों हैं, लेकिन कभी भी पाकिस्तान से पाकिस्तानी पंजाब पर अपना कब्जा खत्म करने के लिए नहीं कहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश सिख, भारत से खुश हैं और जो लोग भारतीय पंजाब में रहते हैं, वे यहां तक कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली अपनी क्षेत्रीय सरकार के लिए भी खुश हैं।
अपराध
पंजाब: सीबीआई कोर्ट ने 7.8 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड केस में सात आरोपियों को तीन साल की सजा सुनाई

चंडीगढ़, 29 नवंबर: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कोर्ट ने पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर में 7.8 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।
मामले के मुख्य आरोपियों मनीष जैन और रमेश कुमार जैन को तीन साल की कठोर कारावास (आरआई) और प्रत्येक पर 35,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया, जबकि अन्य आरोपियों रचना जैन, भूपिंदर सिंह, प्रतीपाल सिंह, संजीव कुमार जैन और अनीता जैन को तीन साल की जेल की सजा और प्रत्येक पर 15,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
यह मामला 4 नवंबर 2016 को बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मनीष ट्रेडर्स के पार्टनर मनीष जैन, रमेश कुमार जैन और कांता जैन ने बैंक के कुछ अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर 7.83 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया। सीबीआई की जांच में सामने आया कि इस साजिश के तहत बैंक को गलत तरीके से बड़ी राशि का नुकसान पहुंचाया गया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 28 जून 2017 को इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने सभी सबूतों और गवाहों की सुनवाई के बाद दोषियों को सजा सुनाई।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में साजिश के तहत बैंक को हानि पहुंचाना और फर्जीवाड़ा करना आरोपियों का मुख्य उद्देश्य था। अदालत ने मामले की पूरी जांच और चार्जशीट के आधार पर फैसला सुनाया और सभी दोषियों को सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया।
इस मामले में दोषियों को दी गई सजा तीन साल की है, लेकिन जुर्माना और कड़ी निगरानी के कारण आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है। सीबीआई ने कहा है कि वे भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त और निष्पक्ष जांच जारी रखेंगे।
अपराध
फिल्म निर्देशक कवल शर्मा पर धोखाधड़ी का केस दर्ज, निवेश के बहाने एक्ट्रेस से ठगी का आरोप

मुंबई, 29 नवंबर: भारतीय फिल्म निर्देशक और निर्माता कवल शर्मा पर फिल्मों और वेब सीरीज बनाने के बहाने पैसों की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। मुंबई की खार पुलिस ने अभिनेत्री किरण आहूजा से 71.50 लाख रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में कवल शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
किरण आहूजा और कवल शर्मा ने एक फिल्म और कई विज्ञापनों में काम किया है। शिकायत में बताया गया कि साल 2016 में किरण आहूजा और निर्माता कवल शर्मा की पहली बार एक दोस्त के जरिए मुलाकात हुई थी। मुलाकात के समय कवल शर्मा ने उन्हें बताया कि वह अंधेरी स्थित फिल्म फार्मिंग एंटरटेनमेंट नेटवर्क इंडिया नामक एक कंपनी चलाते हैं और उन्हें सीरियल में कास्ट करना चाहते हैं। उस वक्त एक्ट्रेस ने मना कर दिया था, लेकिन 7 साल बाद 2023 में दोनों की फिर से एक कार्यक्रम में मुलाकात हुई।
किरण आहूजा ने शिकायत में बताया कि कवल ने एक्ट्रेस को 3 लाख रुपए के निवेश पर अच्छा रिटर्न देने की बात कही। हालांकि उन्होंने मना कर दिया, लेकिन 2024 में कथित तौर पर दोबारा संपर्क में आने के बाद एक्ट्रेस ने कवल के प्रोडक्शन हाउस में बनने वाली वेब सीरीज “लक बाय एक्सचेंज” में 60-70 लाख रुपए निवेश किए, क्योंकि उन्हें पैसा किस्तों में लौटाने का वादा किया गया था। संतोषजनक जानकारी न मिलने के बाद एक्ट्रेस ने पैसे वापस करने की मांग की, लेकिन जो चेक निर्माता की तरफ से दिए गए, वे बाउंस हो गए।
ऐसे में एक्ट्रेस ने परेशान होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
इससे पहले इसी साल जुलाई में भी हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने चेक बाउंस के मामले में कवल शर्मा को गिरफ्तार किया था। साल 2022 में पैसों की धोखाधड़ी को लेकर हल्द्वानी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 1 साल की सजा और 51.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था, लेकिन जमानत मिलने के बाद फरार हो गया था। कवल शर्मा ने कई हिंदी फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया है। उन्होंने ‘हीरालाल पन्नालाल,’ ‘गुनाहों का देवता,’ ‘जीते है शान से’ और ‘मर मिटेंगे’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।
अपराध
गुजरात : जेल में कैद नारायण साईं पर एक और मामला दर्ज, सेल से मोबाइल फोन बरामद

सूरत, 29 नवंबर: आसाराम के बेटे नारायण साईं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे नारायण साईं के खिलाफ सूरत की लाजपोर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन रखने और उसका इस्तेमाल करने का नया मामला दर्ज किया गया है। यह मामला सचिन पुलिस थाने में दर्ज हुआ है।
जेल प्रशासन को गुरुवार को गुप्त सूचना मिली थी कि हाई-सिक्योरिटी बैरक नंबर-1 में बंद नारायण साईं के पास मोबाइल फोन है। सूचना मिलते ही जेल स्क्वॉड ने तुरंत कार्रवाई की और नारायण साईं के अलग सेल (सेल नंबर-1) की गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान लोहे के मुख्य दरवाजे के पीछे एक स्मार्टफोन चुंबक की मदद से चिपकाया हुआ मिला। फोन के अलावा उसके पास जियो कंपनी का एक सिम कार्ड भी बरामद हुआ।
जांच में पता चला कि नारायण साईं बेहद शातिराना तरीके से फोन का इस्तेमाल करता था। वह बातचीत पूरी होने के बाद तुरंत फोन से बैटरी और सिम कार्ड निकाल लेता था। सिम कार्ड को वह अपने पास रखता था, जबकि बैटरी को सुरक्षा के लिए सेंट्री रूम में छिपा देता था। जेल स्टाफ की सतर्कता से सेंट्री रूम के दरवाजे में लगे नाकूचे (की-होल) के अंदर छिपाई गई बैटरी भी बरामद कर ली गई।
जेल प्रशासन की शिकायत पर सचिन पुलिस ने नारायण साईं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं तथा गुजरात जेल मैनुअल के नियमों के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आगे की जांच कर रही है कि नारायण साईं यह मोबाइल फोन कहां से और कैसे लाया तथा इसका इस्तेमाल किन-किन लोगों से संपर्क करने के लिए कर रहा था।
एसीपी नीरव गोहिल ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “नारायण साईं जहांगीरपुरा पुलिस स्टेशन रेप केस में दोषी कैदी है। गुरुवार को लाजपोर सेंट्रल जेल के स्टाफ को जानकारी मिली कि नारायण साईं ने अपनी बैरक के अंदर एक मोबाइल फोन छिपा रखा है। इस इनपुट पर कार्रवाई करते हुए, जेल सिक्योरिटी स्क्वॉड ने बैरक नंबर 1 में तलाशी ली, जहां उसे एक अलग सेल में रखा गया था। तलाशी के दौरान, सेल के गेट के पीछे एक मोबाइल फोन मिला, जिसे मैग्नेट से लोहे के दरवाजे से चिपकाया गया था, और उसे तुरंत बरामद कर लिया गया।”
उन्होंने बताया कि जेल में मोबाइल फोन रखना गंभीर अपराध है। नारायण साईं के सेल से फोन, सिम और बैटरी बरामद हुई है। हमने जेल प्रशासन की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की गहन जांच की जा रही है।
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