राजनीति
कारसेवक से बीजेपी नेता बने प्रकाश बोले- मस्जिद गिराए जाने से ‘गुलामी की निशानी’ मिट गई
बेंगलुरू, 5 दिसम्बर : अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हिस्सा लेने वाले कर्नाटक भाजपा के संयुक्त प्रवक्ता प्रकाश राघावाचार्य ने कहा है कि 30 साल बाद हम बहुत संतुष्ट महसूस कर रहे हैं। क्योंकि गुलामी का प्रतीक मिटा दिया गया है और वहां एक भव्य मंदिर बन रहा है।
उन्होंने कहा कि हम मंदिर के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रकाश राम मंदिर बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा शुरू किए गए आंदोलन का हिस्सा थे। राज्य में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश ने कहा कि अयोध्या में गिराया गया ढांचा बाबरी मस्जिद नहीं थी यह एक विवादित ढांचा था। अब विवाद खत्म हो गया है। प्रकाश ने कहा कि आज पूरी तरह से संतुष्टि की भावना है। अगर इस मुद्दे को नहीं उठाया जाता तो अदालत संपत्ति को मूल मालिकों को सौंपने का फैसला नहीं लेती। हमारी कोशिशों के परिणाम हमें मिले हैं।
प्रकाश ने सांप्रदायिक आधार पर देश का विभाजन हुआ जैसे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि लोगों ने केंद्र और कई राज्यों में भाजपा को बार-बार चुनकर उन आरोपों का जवाब दिया है। उनका कहना है कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की यादें आज भी सदाबहार और रोमांचक हैं। कर्नाटक में राम मंदिर आंदोलन का प्रभाव बहुत ज्यादा था। यहां से अयोध्या पहुंचने के लिए राम भक्त बड़े समूहों में कर्नाटक एक्सप्रेस ट्रेनों में सवार होते थे।
हम उन्हें विदा करने के लिए रेलवे स्टेशन जाते थे। जिसने मुझे भी कारसेवक के रूप में अयोध्या जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि मैं इलाहाबाद पहुंचा और वहां से हमें 2 दिसंबर 1992 को अयोध्या ले जाने के लिए एक बस की व्यवस्था की गई थी। मैं रात के करीब 1.30 बजे अयोध्या पहुंचा था। स्वयंसेवकों के रहने और खाने के लिए उचित व्यवस्था की गई थी। 3 दिसंबर को सभी ने श्री राम जन्मभूमि पर जाकर राम लला का आशीर्वाद लिया। 1990 के बाद विवादित ढांचे के चारों ओर लोहे की बाड़ लगाई गई थी।
दिसंबर होने के बावजूद ठंड ज्यादा नहीं थी। हमें बताया गया था कि हमारी भूमिका और जिम्मेदारियां हमें 4 दिसंबर तक बता दी जाएंगी। अगले दिन हमें राज्यवार जाकर सरयू नदी से लाई गई मिट्टी को निर्धारित स्थान पर डालने के लिए कहा गया था। हम योजनाओं के परिवर्तन पर भौचक थे क्योंकि सभी ने सोचा था कि विवादित ढांचे को गिराने की योजना थी। सैकड़ों कारसेवकों ने निर्णय पर अपना गुस्सा व्यक्त किया। अगले दिन, हमें निर्धारित स्थान पर सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई थी।
6 दिसंबर 1992 को लोग मधुमक्खियों की तरह झुंड में आ गए थे। यहां तक कि साइन बोर्ड भी लगा दिए गए कि अयोध्या में कोई जगह नहीं बची है। लोग विवादित ढांचे के आसपास की सभी इमारतों पर खड़े थे। राम भक्तों ने अयोध्या शहर पर अधिकार कर लिया था। हमारे मुखिया वी. मंजूनाथ के आदेशनुसार हम सुबह 8 बजे विवादित मस्जिद के सामने उस स्थान पर पहुंचे जहां कारसेवक थे।
इस जगह से थोड़ी दूर नेताओं के भाषण देने के लिए एक मंच बनाया गया था। माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा था। हमने देखा कि एक व्यक्ति हनुमान के रूप में कपड़े पहने बैरिकेड के अंदर घुस गया। कई लोग उसके पीछे हो लिए और जय श्री राम के नारे लगाते हुए बाबरी मस्जिद के सामने बैठ गए। जब अधिकारियों ने उन्हें खदेड़ने का प्रयास किया तो हजारों कारसेवक उनके समर्थन में खड़े हो गए।
नया मोड़ तब आया जब करीब 50 युवाओं का एक समूह बैरिकेड के अंदर आया और कारसेवकों को बाहर निकालने की कोशिश की। इससे कारसेवकों को और गुस्सा आया। फिर हजारों कारसेवकों ने बेरिकेड्स को तोड़ते हुए आगे मार्च किया। अधिकारियों ने स्थिति पर नियंत्रण खो दिया। दूसरी ओर मंच से दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा कारसेवकों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे थे।
लेकिन अपील को किसी ने नहीं सुना। जैसे ही हम खड़े हुए तो देखा महिला कारसेवकों का एक समूह बाबरी मस्जिद पर दिखाई दिया। जिन्होंने विवादित ढांचे को तोड़ने की पहल की थी, यह वास्तव में जीवन भर की याद बनी हुई है। कारसेवक महिलाओं के साथ इतनी ताकत से शामिल होने के लिए दौड़े कि पुलिसकर्मी उन्हें रोकने की कोई कोशिश किए बिना केवल मूक दर्शक बने रहे।
लोगों ने मीडियाकर्मियों और फोटोग्राफरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। एक के बाद एक टावर नष्ट किए गए और उस दिन शाम 6 बजे तक सभी टावरों को ध्वस्त कर दिया गया था। उस रात एक मार्ग दर्शक मंडली की बैठक हुई थी जिसमें भगवान राम की मूर्ति को उसके मूल स्थान पर स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। अगले दिन हजारों राम भक्तों ने कुछ घंटों में अपने हाथों से मलबा हटा दिया था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर ने स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात की, भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को और मजबूत करने पर जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साह की प्रशंसा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात से संबंधित जरूरी जानकारी साझा की। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन के बीच बैठक से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ेगा।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत की राजकीय यात्रा पर आए स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत-ईएफटीए टीईपीए के वादे को आगे बढ़ाते हुए हमारी साझेदारी को गहरा करने के राष्ट्रपति परमेलिन के विचारों की गहराई से सराहना करता हूं।”
उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि राष्ट्रपति परमेलिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक से दोनों देशों के बीच व्यापक क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा।
राष्ट्रपति परमेलिन सोमवार को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी भारत की पहली राजकीय यात्रा है। इस साल फरवरी में वह नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे।
भारत पहुंचने पर परमेलिन का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस यात्रा का मुख्य जोर दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों की आवाजाही समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर है। स्विस राष्ट्रपति के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारी नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।
राष्ट्रपति मूर्मू ने राष्ट्रपति परमेलिन के सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी।
विदेश मंत्रालय ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती देगी। मंत्रालय के अनुसार, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है।
भारत और ईएफटीए के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। जयशंकर ने भी अपनी मुलाकात के दौरान इस समझौते से पैदा हुए अवसरों का उल्लेख किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क ने इस साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति परमेलिन की मौजूदा यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे तथा साझा हित वाले नए क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
राष्ट्रीय समाचार
बंगाल के कुर्सियोंग में कार के 200 फीट गहरी खाई में गिरने से एक व्यक्ति की मौत

उत्तरी बंगाल के कुर्सियोंग की पहाड़ियों में एक कार के लगभग 200 फीट नीचे खाई में गिरने से कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। यह जानकारी सोमवार को पुलिस ने दी।
पुलिस ने बताया कि यह दुर्घटना रविवार रात को कुर्सियोंग में कारगिल धारा रोड पर हुई। रविवार को छह दोस्त कुर्सियोंग से सिलीगुड़ी जा रहे थे। रविवार रात 9 बजे से 9:30 बजे के बीच कुर्सियोंग के रोहिणी से 10 किलोमीटर ऊपर स्थित कारगिल धारा इलाके में भारी बारिश के कारण गाड़ी अनियंत्रित हो गई और करीब 200 फीट गहरी खाई में गिर गई।
दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही राज्य की आपदा प्रबंधन टीम और पुलिस दल मौके पर पहुंचे। उन्हें बचाकर अस्पताल ले जाया गया। छह दोस्तों में से एक को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। बाकी सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पुलिस के अनुसार, सभी छह लोग सिलीगुड़ी के निवासी हैं। दार्जिलिंग जिला पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “रविवार रात कारगिलदारा में कार अनियंत्रित होकर लगभग दो सौ फीट गहरी खाई में गिर गई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह दो लोगों को बचा लिया। हालांकि, एक तरफ बारिश और दूसरी तरफ अंधेरे ने बचाव कार्य में बाधा डाली। तीन लोग अभी भी कार में फंसे हुए थे।”
बाद में, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल ने कार में फंसे बाकी तीन लोगों को बचा लिया। पांच घायलों में से दो का इलाज कुर्सियोंग के प्राथमिक अस्पताल में चल रहा है। बाकी तीन को सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
बता दें कि उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों में मानसून की वापसी के कारण पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते चालकों को पहाड़ियों पर चढ़ते-उतरते समय, विशेषकर बरसात के मौसम में और रात के समय, सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में गतिरोध, व्यापार संतुलन फिलहाल भारत के पक्ष में: वित्त मंत्री सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी है, लेकिन बातचीत एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई है, जहां आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है।
राष्ट्रीय राजधानी में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है।
उन्होंने कहा, “बातचीत अभी भी जारी है, हालांकि हम यह मानना चाहेंगे कि दोनों पक्ष एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गए हैं, जिसके आगे कुछ देना या लेना दोनों के लिए बहुत-बहुत मुश्किल हो सकता है।”
वित्त मंत्री ने कहा कि दोनों देश अब भी यह तलाश कर सकते हैं कि क्या आगे बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि फिलहाल व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है और अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की चिंता की वजह वर्षों से भारत के साथ होने वाले व्यापार में नुकसान होना है।
यह बातचीत फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत हो रही है।
भारत और अमेरिका ने कहा था कि दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखते हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे।
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते को व्यापार समझौतों पर भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में पेश किया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा।
वित्त मंत्री सीतारमण ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा इस्तेमाल किए गए वाक्यांश का जिक्र करते हुए कहा कि इसे “सभी समझौतों की जननी” कहना उचित होगा।
उन्होंने कहा कि समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोल दिया है, जबकि यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का चयन दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता के आधार पर किया गया कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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