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Thursday,15-October-2026
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मध्य प्रदेश में कमल नाथ एक पद पर रहेंगे

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Kamal-Nath

मध्य प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस में एक बार फिर बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। संभावना इस बात की बनने लगी है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष में से कोई एक पद छोड़ सकते हैं।

राज्य में विधानसभा के 28 क्षेत्रों में उपचुनाव हुए थे और कांग्रेस लगातार यही दावा कर रही थी कि उसकी इस उपचुनाव के जरिए सत्ता में वापसी तय है। इतना ही नहीं, पार्टी हाईकमान को भी यह भरोसा दिलाया गया था कि उपचुनाव राज्य की सियासत में बड़ा फेरबदल करेंगे।

कांग्रेस की ओर से जो दावे किए जा रहे थे उसके ठीक उलट विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आए हैं और इन नतीजों ने प्रदेश संगठन से लेकर पार्टी हाईकमान तक को असहज कर दिया है। पार्टी हाईकमान प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ से रिपोर्ट ले चुका है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन क्षेत्रों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है, उन जिलों के अध्यक्षों के साथ विधानसभा के चुनाव प्रभारियों पर भी गाज गिर सकती है। इतना ही नहीं संगठन के बड़े नेताओं की छुटटी भी हो सकती है। राज्य में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने की बात कही थी, मगर पार्टी हाईकमान ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनसे ऐसा ना करने को कहा था। पहले पार्टी सत्ता से बाहर हुई और विधानसभा के उप-चुनाव में हार मिली तेा बदलाव की चचार्ओं ने जोर पकड़ लिया है। पार्टी हाईकमान भी कमल नाथ की सहमति से प्रदेशाध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष में बदलाव करने का मन बना चुकी है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों में बड़े दावेदारों में गिनती पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री उमंग सिंगार, कमलेश्वर पटेल, अजय सिंह, जीतू पटवारी, मीनाक्षी नटराजन की हो रही है। वहीं पार्टी ऐसे व्यक्ति को प्रदेश की कमान सौंपना चाहती है जो हाईकमान का विश्वासपात्र तो हो ही साथ में कमल नाथ से भी उसका सामंजस्य बेहतर रहे। वहीं अगर कमल नाथ नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ते हैं तो इस पद की जिम्मेदारी अनुसूचित जनजाति के विधायक को सौंपी जा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में कांग्रेस को मजबूती से खड़ा करना कमल नाथ के लिए आसान काम नहीं है, इस बात को वे भी खुद जानते हैं, यही कारण है कि वे दो पदों में से एक पद छोड़ सकते हैं। अध्यक्ष रहते वे संगठन को मजबूत बनाए रख सकते हैं, नेता प्रतिपक्ष रहने पर संगठन पर पकड़ कमजोर हो जाएगी। इसलिए संभावना इस बात की है कि कमल नाथ नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़कर खुद को प्रदेशाध्यक्ष बनाए रखें और पार्टी के संगठन को नई मजबूती दें ताकि पंचायत और नगरीय निकाय के चुनाव पूरी ताकत से लड़ा जा सके।

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राष्ट्रीय समाचार

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, गुरुवार को सुनवाई की उम्मीद

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दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकील लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए शहर से दूर स्थित वैकल्पिक जगहों पर भेजा जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाना और विरोध दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है। इससे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाने का खतरा है।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों की पहचान भी की है।

न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा था कि वैकल्पिक स्थलों की पहचान सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह के आदेश के अनुरूप की गई है। उन्होंने दलील दी कि शीर्ष अदालत ने उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उन्हें निर्धारित करने को कहा था और अधिकारियों ने उसी के अनुसार कार्रवाई की है।

दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में पेश किया है।

यह मामला भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने दलील दी कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए जाने के बाद उदय भानु चिब की याचिका निष्फल हो गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका में उठाई गई अन्य मांगें अब भी विचारणीय हैं। उन्होंने इन मांगों पर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।

दिल्ली पुलिस के वकील ने नोटिस जारी करने की मांग का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले सक्षम अधिकारियों से राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने और उन्हें निर्धारित करने पर विचार करने को कहा था। शीर्ष अदालत ने इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया था।

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राजनीति

सुप्रिया सुले ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, केंद्र से रिहाई की मांग

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।

सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर चिंताजनक है। मैं गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप करने और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं।”

उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। असहमति लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर भारतीय को बिना भय के अपनी आवाज उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर अतिक्रमण के मामले में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जानकारी के अनुसार, सौरव दास को तिहाड़ जेल नंबर-2 और आशुतोष रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है। वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

सीजेपी नेताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने बताया कि अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। उन्होंने दावा किया कि यह आदेश पर्याप्त न्यायिक विचार किए बिना पारित किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मान लिया कि आरोपी कुछ कर सकते हैं और इसी आधार पर उन्हें पांच दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने और तिरंगा लहराने के लिए जेल भेजा जाना चिंताजनक है।

पुलिस के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीनों नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए गए हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

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भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।

बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना ​​है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”

प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”

हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”

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