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Tuesday,31-March-2026
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आईएसएल-7 : मुम्बई और एटीके मोहन बागान में खिताबी जंग आज

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Krishna

 हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के सातवें सीजन का फाइनल मैच आज फातोर्दा के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मुम्बई सिटी एफसी और मौजूदा चैम्पियन एटीके मोहन बागान के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें इस सीजन में अधिकतर समय तक टॉप स्थानों पर ही रही है। दोनों टीमों ने लीग चरण में 12 मैच जीते हैं जबकि केवल चार ही हारे हैं। एक रोमांचक सेमीफाइनल में एफसी गोवा को पेनाल्टी शूटआउट में हराकर फाइनल में पहुंची मुम्बई सिटी एफसी पूरे आत्मविश्वास के साथ फाइनल में पहुंची है। मुम्बई ने लीग चरण में एटीके मोहन बागान को दो बार हराया है और मुम्बई लीग विनर्स शील्ड विजेता रही है।

मुम्बई सिटी एफसी पहली बार फाइनल में पहुंची है। कोच सर्जियो लोबेरा के मार्गदर्शन में टीम पूरे आत्मविश्वास से लबरेज नजर आ रही है लेकिन लोबेरा को फाइनल में मंदर राव देसाई का विकल्प तलाशना होगा। देसाई निलंबन के कारण इस मैच में नहीं खेल पाएंगे।

दूसरी तरफ, एंटोनियो हबास के मार्गदर्शन में एटीके मोहन बागान का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। एटीके मोहन बागान दो बार पहले ही खिताब जीत चुकी है और अब टीम के पास लगातार दूसरी बार तथा कुल तीसरी बार खिताब जीतने का मौका है।

हबास ने इस बात को खारिज कर दिया कि बीते मैचों के प्रदर्शन का प्रभाव इस मैच पर पड़ेगा। लेकिन उनका मानना है कि उन्हें एक मुश्किल चुनौती का सामना करना है।

इस मैच से गोल्डन बूट और गोल्डन ग्लव्स के विजेता का भी फैसला होगा। एटीके मोहन बागान के रॉय कृष्णा और एफसी गोवा के इगोर एंगुलो 14-14 गोलों के साथ टॉप स्कोररों की लिस्ट में संयुक्त रूप से टॉप पर हैं और गोल्डन बूट के दावेदार हैं। शनिवार को एक और गोल कृष्णा को गोल्डन बूट का विजेता बना देगा, जिन्होंने एंगुलो से ज्यादा मिनट खेले हैं।

गोल्डन ग्लव्स की रेस में मुम्बई के गोलकीपर अमरिंदर सिंह और एटीकेएमबी के अरिंदम भट्टाचार्य हैं। दोनों गोलकीपरों के नाम अब तक 10 क्लीन शीट है। इस समय अरिंदम टॉप पर है क्योंकि उन्होंने सबसे कम गोल खाएं हैं।

राजनीति

केरल में राहुल गांधी का सीएम विजयन पर हमला, वामपंथी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गए

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कन्नूर, 31 मार्च : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केरल में सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लेफ्ट और भारतीय जनता पार्टी के बीच अभूतपूर्व साझेदारी बन गई है और इस बार के विधानसभा चुनाव को विचारधाराओं की लड़ाई के रूप में देखा जाना चाहिए।

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के स्टार प्रचारक के तौर पर कन्नूर पहुंचे गांधी ने पहले स्थानीय नेताओं के साथ नाश्ते पर बैठक की। इसके बाद उन्होंने जिले भर से आए उम्मीदवारों और जनता को संबोधित किया।

रैली में सीपीआई (एम) के दो वरिष्ठ पूर्व नेता, टी.के. गोविंदन और वी. कुंजिकृष्णन भी मौजूद थे। ये दोनों अब यूडीएफ समर्थित उम्मीदवार हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह लेफ्ट में आए बदलाव का सबूत है।

राहुल गांधी ने कहा, यह चुनाव दो विचारधाराओं—लेफ्ट और यूडीएफ के बीच है, लेकिन पहली बार हम लेफ्ट और भाजपा के बीच साझेदारी देख रहे हैं।”

उन्होंने इसे एक पहेली बताया, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इन दोनों की विचारधाराएं पूरी तरह अलग रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का लेफ्ट अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया है और अब उसके मन में कॉरपोरेट्स के प्रति नरमी है। उनका तर्क था कि यह अब लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश में धार्मिक मुद्दे उठाते हैं, लेकिन केरल में खासकर सबरीमाला के मामले पर ऐसा नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ कई कानूनी चुनौतियां होने के बावजूद—जिनमें कई मामले, लोकसभा सदस्यता रद्द होना और लंबी पूछताछ शामिल हैं, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन या उनके परिवार के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा चाहती है कि सीपीआई (एम) सत्ता में बनी रहे, क्योंकि वे उन्हें आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार को बीजेपी नियंत्रित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असरदार विरोध करने की क्षमता रखती है।

राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए गांधी ने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के पक्ष में हाल में लिए गए व्यापारिक फैसलों से भारतीय किसानों को नुकसान होगा, विशेषकर उन किसानों को जो रबर, मक्का, सोया और फलों की खेती करते हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और छोटे व्यवसायों के लिए संभावित खतरों की चेतावनी भी दी।

चुनाव को मूल्यों की लड़ाई बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि केरल ऐतिहासिक रूप से एकता, अहिंसा और सभी को साथ लेकर चलने के पक्ष में रहा है। उन्होंने कहा कि यूडीएफ लोगों को प्यार और भाईचारे के जरिए जोड़ती है, जबकि लेफ्ट और बीजेपी का गठबंधन समाज में फूट और विभाजन को बढ़ावा देता है।

कन्नूर से गांधी को कोझिकोड जिले के नाडापुरम जाना है, जहां वह दो और चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। उनके इस दौरे का मकसद लोगों के बीच यूडीएफ के चुनावी संदेश को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जनसमर्थन जुटाना है।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान के लोग हवाई हमलों और जरूरी अपडेट को ट्रैक करने के लिए इस ऐप का कर रहे इस्तेमाल

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तेहरान, 31 मार्च : ईरान में 30 दिनों से ज्यादा समय तक इंटरनेट बंद है। ईरानी लोग हवाई हमलों और जरूरी अपडेट को ट्रैक करने के लिए अलग मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने बताया कि ईरान के लोग टेलीग्राम के जरिए एक-दूसरे के साथ मैसेजिंग या जानकारी साझा कर रहे हैं। इसके अलावा इंडोनेशियाई मीडिया आउटलेट ने बताया है कि ईरान के लोग एयरस्ट्राइक और अन्य जरूरी जानकारी के लिए माहसा अलर्ट ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सीएनए ने कहा बताया कि ईरान में हजारों लोग जरूरी जानकारी शेयर करने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर लोग जानकारी साझा कर रहे हैं कि एयरस्ट्राइक कहां हुए, किन इलाकों में बिजली चली गई और कितना नुकसान हुआ।

ईरान में होने वाले एयरस्ट्राइक के लिए कोई ऑफिशियल चेतावनी सिस्टम न होने के कारण, इसके नागरिक खुद ही समस्या का समाधान कर रहे हैं। ईरानी नागरिक अपना खुद का क्राउडसोर्स्ड एयर अटैक वॉर्निंग सिस्टम बनाते हैं।

इंडोनेशया के डिजिटल मीडिया पोर्टल वीओआई के अनुसार, ईरान में जब मिलिट्री हमलों या मूवमेंट से जुड़ी पब्लिक वॉर्निंग देने के लिए कोई आधिकारिक सरकारी सिस्टम नहीं था, तब महसा अलर्ट नाम का प्लेटफॉर्म एक इमरजेंसी सॉल्यूशन के तौर पर सामने आया है।

ईरान के डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने इस ऐप को तैयार किया है। यह ऐप हमलों और सैन्य गतिविधियों के स्थानों को मैप करने के लिए जनता, सोशल मीडिया और मैनुअल सत्यापन से प्राप्त डेटा पर आधारित है।

ऑफिशियल मिलिट्री वॉर्निंग सिस्टम के उलट, महसा अलर्ट पूरी तरह से रियल-टाइम नहीं है। हालांकि, यह एप्लिकेशन हमलों या खतरों से जुड़ी वेरिफाइड जानकारी होने पर भी नोटिफिकेशन भेजता है।

हर डेटा अपडेट बहुत छोटा रखा जाता है, एवरेज सिर्फ 100केबी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कनेक्शन अनस्टेबल या लिमिटेड होने पर भी यूजर्स जानकारी हासिल कर सकें।

इंडोनेशियाई न्यूज पोर्टल ने बताया कि सही जानकारी बनाए रखने के लिए, महसा अलर्ट के पीछे की टीम डेटा दिखाने से पहले अच्छी तरह वेरिफिकेशन करती है। पुष्टि के तौर पर मार्क की गई अटैक लोकेशन को सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो या इमेज-बेस्ड जांच से गुजरना होगा।

इसके अलावा, इस एप्लिकेशन में मेडिकल सुविधा पॉइंट, सीसीटीवी कैमरे और सरकार से जुड़े होने का शक वाले चेकपॉइंट जैसी अतिरिक्त जानकारी भी होती है। अब तक, डेवलपमेंट टीम को 3,000 से ज्यादा आने वाली रिपोर्ट को वेरिफाई करना बाकी है।

इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट एक्सेस सामान्य स्तर के सिर्फ करीब 1 प्रतिशत तक रह गया है। इसका मतलब है कि अधिकांश लोग इंटरनेट का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और देश डिजिटल रूप से दुनिया से लगभग कट चुका है।

28 फरवरी, 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों की एक शृंखला के बाद से ही इंटरनेट ब्लैकआउट जैसी स्थिति है। मौजूदा हालात के कारण देश के इतिहास में सबसे लंबे डिजिटल शटडाउन हुआ है, इससे लगभग 9 करोड़ नागरिक एक गंभीर राष्ट्रीय संकट के दौरान वैश्विक समुदाय से लगभग पूरी तरह कट गए हैं।

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राजनीति

राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, बोले-केयरगिविंग सिर्फ मां की नहीं, पिता की भी जिम्मेदारी

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नई दिल्ली, 31 मार्च : देश में पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) को कानूनी अधिकार बनाने की मांग तेज होती जा रही है। आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत में केयरगिविंग की जिम्मेदारी सिर्फ मां पर डालना एक बड़ी सामाजिक और कानूनी कमी है।

राघव चड्ढा ने कहा कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो बधाई माता-पिता दोनों को मिलती है, लेकिन उसकी देखभाल की जिम्मेदारी पूरी तरह से मां पर डाल दी जाती है। उन्होंने इसे ‘समाज की विफलता’ बताया। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम सिर्फ मातृत्व अवकाश (मेटरनिटी लीव) को मान्यता देता है, जबकि पिता की भूमिका को नजरअंदाज किया जाता है।

उन्होंने संसद में मांग करते हुए कहा कि पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए, ताकि पिता को अपने नवजात बच्चे और पत्नी की देखभाल के लिए नौकरी और परिवार के बीच चुनाव न करना पड़े। राघव चड्ढा ने कहा, “एक मां को गर्भावस्था के नौ महीनों के बाद, सामान्य या सिजेरियन डिलीवरी जैसी कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे समय में उसे दवाइयों के साथ-साथ अपने पति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहयोग की बेहद जरूरत होती है।”

राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि पति की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चे तक सीमित नहीं होती, बल्कि पत्नी की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। इस समय पति की मौजूदगी कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है।

उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि फिलहाल केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है, जबकि निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के पास यह अधिकार नहीं है। भारत की करीब 90 प्रतिशत कार्यबल प्राइवेट सेक्टर में काम करती है, यानी अधिकांश पिता इस सुविधा से वंचित हैं।

राघव चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा कि स्वीडन, आइसलैंड और जापान जैसे देशों में पितृत्व अवकाश 90 दिनों से लेकर 52 हफ्तों तक कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि कानून को समाज का आईना होना चाहिए और इसमें यह स्पष्ट दिखना चाहिए कि बच्चे की देखभाल सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता और पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

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