अपराध
लश्कर-ए-तैयबा के 26/11 के मुंबई हमले के पीछे आईएसआई का ‘एस’
कुछ विश्लेषकों ने आईएसआई के एक विशिष्ट, औपचारिक रूप से संगठित विंग के अस्तित्व की ओर इशारा किया है, जिसका नाम ‘एस’ या सुरक्षा विंग है। इस विंग के लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के साथ सीधे तौर पर संबंध बताए जा रहे हैं।
यरुशलम पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएसआई के सेवारत अधिकारियों द्वारा लश्कर-ए-तैयबा को दिए गए समर्थन और निर्देश की पुष्टि 26/11 के मुंबई हमलों में हुई है, मगर बहस इस बात पर बनी हुई है कि यह समर्थन आखिर किस हद तक दिया गया था। क्या आईएसआई के स्तर पर ही सारा समर्थन था, या फिर इसमें समस्त पाकिस्तान राष्ट्र की कोई बड़ी भूमिका थी? यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या जॉर्ज हेडली और जबीउद्दीन अंसारी द्वारा दर्शाई गई स्थिति आईएसआई के भीतर आतंकवादी समूह के समर्थक तत्व के अस्तित्व को दर्शाती है। जरूरी नहीं कि इस संबंध में एक साधारण विभाजन रेखा हो।
इसमें कहा गया है कि जब इस मुद्दे की जांच के लिए अमेरिका द्वारा दबाव डाला गया और आईएसआई गुर्गों की संलिप्तता के स्पष्ट सबूत पेश किए गए तो पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह रुख अपनाया कि आईएसआई के भीतर के ‘दुष्ट गुर्गे’ जिम्मेदार थे।
अंतत:, यह मुद्दा कि क्या आईएसआई के भीतर के तत्वों या आईएसआई ने ही मुंबई हमलों की योजना बनाई या फिर सहायता की और निर्देशित किया, एक अनसुलझा मुद्दा बना हुआ है, जिसमें बहस के दोनों पक्षों ने सुसंगत बिंदु या प्वाइंट्स बनाए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी संदेह में नहीं है, क्योंकि इस बात के पुख्ता सबूत सामने आए हैं कि इस संगठन ने अकेले कार्रवाई नहीं की थी। आतंकी समूह और पाकिस्तानी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस या उस संगठन के तत्वों के बीच घनिष्ठ संबंध हमलों के पहले, उसी दौरान या फिर बाद में बनाए रखे गए थे। आईएसआई पाकिस्तान की प्रमुख खुफिया एजेंसी है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “आतंकवादी समूहों के साथ पाकिस्तान के संबंधों में विशेषज्ञता रखने वाले एक अमेरिकी पत्रकार स्टीव कोल के अनुसार, डिजिटल ट्रेल ने सुझाव दिया कि मुंबई से हमलों को निर्देशित करने वाले व्यक्ति आईएसआई के गुर्गों की सेवा कर रहे थे। कोल ने अपनी पुस्तक डायरेक्टरेट एस में कहा है कि पश्चिमी अधिकारियों ने प्रासंगिक अवरोधों के साथ पाकिस्तान का सामना किया। इस संबंध में कोई व्यवस्थित जांच नहीं हुई।”
मुंबई हत्याओं के लिए सुन्नी इस्लामवादी लश्कर-ए-तैयबा समूह की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी संदेह में नहीं है। पकड़े गए बंदूकधारी, अजमल कसाब ने इस संगठन की अपनी सदस्यता स्वीकार की थी और उस प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन भी किया था, जिसमें उसने और उसके सहयोगियों ने पाकिस्तान में प्रशिक्षण लिया था और उन्होंने भारत के लिए निकलने से पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची से हमलों की सारी योजना तैयार की थी।
एक भारतीय जांच ने हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा की जिम्मेदारी की पुष्टि की। बाद में पाकिस्तान पर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के दबाव के कारण पाकिस्तानी सरजमीं पर लश्कर-ए-तैयबा के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2009 में, पाकिस्तान ने अपनी जांच के नतीजे जारी किए, साथ ही हमलों के लिए संगठन की जिम्मेदारी की पुष्टि की।
कसाब ने भारतीय अधिकारियों और एफबीआई अधिकारियों से पूछताछ में पुष्टि की थी कि मुंबई ऑपरेशन कराची से टेलीफोन और इंटरनेट संचार का उपयोग करके निर्देशित किया गया था।
डेविड कोलमैन हेडली (जन्म से दाउद गिलानी), एक पाकिस्तानी और अमेरिकी नागरिक, जिसे 2009 में अमेरिकी अदालत में हमलों से पहले लश्कर-ए-तैयबा की निगरानी करने का आरोप लगाया गया था और दोषी ठहराया गया था, उसने आईएसआई के साथ समूह के संबंधों के अतिरिक्त व्यापक विवरण की पेशकश की।
हेडली की गवाही के अनुसार, सेवारत आईएसआई अधिकारियों ने हमलों के लिए फंडिंग और योजना बनाने में सहायता की थी। हेडली द्वारा नामित अधिकारियों में से एक, जिसे उसके द्वारा ‘मेजर इकबाल’ के रूप में संदर्भित किया गया था, ने हमलों का निर्देशन और वित्त पोषण किया और व्यक्तिगत रूप से लक्ष्यों का चयन किया। हेडली को, उसकी अपनी गवाही के अनुसार, इकबाल द्वारा मुंबई में पांच टोही मिशनों पर भेजा गया था, ताकि बाद में नवंबर, 2008 में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा हमला किए गए लक्ष्यों का चयन किया जा सके।
हेडली के अनुसार, संयोग से इकबाल ने विशेष रूप से नरीमन चबाड हाउस को एक लक्ष्य के रूप में चुना, क्योंकि उसने दावा किया कि यह मोसाद के लिए एक मोर्चा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि हेडली ने आगे खुलासा किया कि हमलों के बाद, इकबाल ने जाइलैंड्स-पोस्टेन अखबार के कार्यालयों पर लश्कर-ए-तैयबा के हमले को गति देने की कोशिश की, जिसने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद की तस्वीरें प्रकाशित की थीं।
मेजर इकबाल के बारे में विवरण के अलावा, डेविड हेडली ने लश्कर-ए-तैयबा को सहायता की पेशकश में लगे आईएसआई अधिकारियों के कई नाम दिए। इन नामों में मेजर समीर अली और साजिद मीर शामिल थे।
हमलों में आईएसआई की भूमिका के बारे में हेडली के दावों की बाद में लश्कर-ए-तैयबा के एक अतिरिक्त सदस्य जबीउद्दीन अंसारी ने स्वतंत्र रूप से पुष्टि की थी। यह व्यक्ति एक भारतीय नागरिक था। वह 2006 में पाकिस्तान भाग गया था और 2012 में सऊदी अरब से भारत प्रत्यर्पित किया गया था।
अंसारी ने गवाही दी कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार और गोला-बारूद आईएसआई द्वारा उपलब्ध कराए गए थे। अंसारी ने आगे पुष्टि की कि हमले के तीन दिनों के दौरान आईएसआई के अधिकारी लश्कर के कराची नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि अंसारी ने दावा किया कि अली ने उन्हें हमलों में पाकिस्तानी प्रतिभागियों को कई सरल हिंदी वाक्यांश सिखाने का काम सौंपा था, ताकि वे हमलों के दौरान और बाद में घेराबंदी के दौरान भारतीय मीडिया को बयान दे सकें।
2008 के बाद से इजरायल और भारत के बीच रणनीतिक संबंध और साझेदारी तेजी से बढ़ी है। मुंबई हमले फिर भी एक निश्चित समानता का प्रतीक हैं जो संबंधों के मूल में बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत और इजराइल दोनों गैर-मुस्लिम देश हैं, जो क्रमश: इस्लामी दुनिया के गढ़ की पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर स्थित हैं। इसलिए दोनों को आधुनिकता के साथ अक्सर विनाशकारी मुठभेड़ और इसके परिणामस्वरूप चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता है।”
नई दिल्ली और यरुशलम के बीच बढ़ता सहयोग और एकजुटता न केवल साझा त्रासदी का कार्य है। मुंबई हमलों की स्मृति, फिर भी, और जिन परिस्थितियों ने उन्हें जन्म दिया, वे इजरायल और भारत के बीच संबंधों की व्यापक संरचना में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नई दिल्ली और यरुशलम के बीच बढ़ता सहयोग और एकजुटता न केवल साझा त्रासदी का कार्य है, बल्कि मुंबई हमलों की यादें और जिन परिस्थितियों ने उन्हें जन्म दिया, वे इजरायल और भारत के बीच संबंधों की व्यापक संरचना में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने रहने की संभावना भी पैदा करती हैं।
अपराध
पंजाब में 47 किलो हेरोइन और अवैध हथियारों के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार, सीमा पार से जुड़े तार

पंजाब पुलिस ने एक बार फिर ड्रग और हथियार तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने बड़ी मात्रा में हेरोइन और हथियार के साथ 4 तस्करों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कनेक्शन सीमा पार से जुड़े हैं।
पंजाब डीजीपी की ओर से एक्स पोस्ट में कहा गया, “एक बड़ी कामयाबी में फरीदकोट पुलिस ने सीमा पार हेरोइन तस्करी के एक नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 4 लोगों को पकड़ा है। इनके कब्जे से 47.3 किलो हेरोइन, 3 पिस्तौल, 3 मैगजीन, 15 कारतूस और 2 गाड़ियां बरामद की हैं।”
डीजीपी ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि पकड़े गए आरोपी पंजाब में हेरोइन और अवैध हथियारों की सीमा पार तस्करी में शामिल एक नेटवर्क से जुड़े हैं। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पुलिस स्टेशन सादिक और फरीदकोट में एफआईआर दर्ज की गई है। इस बड़े नेटवर्क का पता लगाने और इसके आगे-पीछे के कनेक्शन का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।
इसके पहले काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर ने सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 3 मुख्य आरोपियों को पकड़ा था और 17 किलो हेरोइन बरामद की थी। शुरुआती जांच से पता चला है कि ये आरोपी सीमा पार के तस्करों के साथ मिलकर काम कर रहे थे और आगे सप्लाई के लिए हेरोइन की खेप ले रहे थे।
पुलिस स्टेशन स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल अमृतसर में पकड़े गए तस्करों के खिलाफ एअफआईआर दर्ज की गई है। आगे की जांच जारी है ताकि तस्करी के पूरे नेटवर्क (आगे और पीछे के कनेक्शन) का पता लगाया जा सके, इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके और सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क को खत्म किया जा सके। डीजीपी ने दोहराया कि पंजाब पुलिस सीमा पार तस्करी पर कड़ी नजर रख रही है और ड्रग तस्करी व संगठित आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठा रही है।
अपराध
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में खाली घर से मिला नाबालिग लड़की का शव, परिवार ने जताया हत्या का शक

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में शनिवार सुबह एक खाली घर से 16 साल की लड़की का शव मिला है। परिवार का आरोप है कि उसकी हत्या एक नाबालिग लड़के और उसके परिवार वालों ने की है। बताया जा रहा है कि लड़की उस लड़के के साथ रिलेशनशिप में थी। लड़की के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
लड़की का शव पुरुलिया मुफस्सिल पुलिस स्टेशन इलाके में एक खाली घर से मिला। लड़की के जीजा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि वह शुक्रवार रात से लापता थी। हमने पूरी रात उसे ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली। आज सुबह वह मृत पाई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि हमें पता चला कि लड़की का एक स्थानीय लड़के के साथ संबंध था। वह ट्यूशन के लिए उनके घर जाती थी लेकिन बाद में उसने वहां ट्यूशन जाने से मना कर दिया। हमें शक है कि लड़की की हत्या की गई है। हमने सरकार से अपील की है कि उसे उचित न्याय मिले।
शनिवार सुबह लड़की का शव परिवार के ही एक खाली घर के अंदर मिला। उसके गले पर उसका स्कार्फ बंधा हुआ था।पुरुलिया मुफस्सिल पुलिस स्टेशन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को पुरुलिया मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया।
पुलिस ने कहा कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता चलेगा। अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया गया है। पुरुलिया जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शव बरामद कर लिया गया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। लड़की के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अपराध
मोबाइल लूट गैंग का खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार; 24 मोबाइल और लैपटॉप बरामद

नोएडा के सेक्टर-63 थाने की पुलिस ने राह चलते लोगों से मोबाइल फोन और अन्य सामान लूटने व स्नैचिंग करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूट और स्नैचिंग के 24 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, आठ हजार रुपए नकद, एक अवैध चाकू, एक खिलौना पिस्टल और वारदात में इस्तेमाल की गई दो हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी नोएडा और आसपास के इलाकों में राह चलते लोगों को निशाना बनाकर मोबाइल और अन्य सामान छीनते थे। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 17 सितंबर को लोकल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। सेक्टर-63 थाने की पुलिस टीम ने चारों आरोपियों को एफएनजी गोल चक्कर से बहलोलपुर अंडरपास की तरफ जाने वाली सर्विस रोड से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गर्वित गोयल (20), अमन (21), रोहित कुमार (24) और हर्ष कुमार (22) के रूप में हुई है।
इस पूरे गैंग का खुलासा तब हुआ जब पुलिस के मुताबिक एक व्यक्ति ने थाना सेक्टर-63 में शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात आरोपियों ने उसका बैग छीन लिया। बैग में लैपटॉप, चार्जर, मोबाइल फोन और पर्स रखा था। पर्स में पैन कार्ड और आधार कार्ड भी थे। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि उसके खाते से 11,600 रुपये निकाल लिए गए। शिकायत के आधार पर थाना सेक्टर-63 में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। घटना के शीघ्र खुलासे के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया। इसके बाद स्थानीय सूचना और खुफिया तंत्र की मदद से संदिग्धों की तलाश की गई। पुलिस ने अगले ही दिन चार आरोपियों को पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में राह चलते लोगों से मोबाइल फोन और अन्य सामान की लूट व स्नैचिंग करते थे। आरोपियों के अनुसार, वारदात के बाद छीने गए सामान को राह चलते लोगों को अपनी मजबूरी बताकर बेच दिया जाता था। पुलिस अब बरामद किए गए 23 अन्य मोबाइल फोन के संबंध में भी जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये मोबाइल किन-किन घटनाओं से संबंधित हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में गर्वित गोयल मूल रूप से बुलंदशहर के दौलतपुर गांव का निवासी है और वर्तमान में दिल्ली के न्यू कोंडली, मयूर विहार फेज-3 में रहता है। उसकी उम्र 20 वर्ष और शिक्षा कक्षा 9 तक है। अमन की उम्र 21 वर्ष है और वह नेहरू एन्क्लेव, पांडव नगर, दिल्ली का निवासी है। उसने भी कक्षा 9 तक पढ़ाई की है। वहीं, 24 वर्षीय रोहित कुमार गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी स्थित धर्म विहार का निवासी है और कक्षा 8 तक पढ़ा है। चौथा आरोपी हर्ष कुमार 22 वर्ष का है और खोड़ा कॉलोनी के इंदिरा विहार का रहने वाला है। उसकी शिक्षा कक्षा 10 तक बताई गई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से शिकायत से संबंधित एक मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और आठ हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा, अमन के कब्जे से एक अवैध चाकू मिला है। पुलिस ने एक खिलौना पिस्टल भी बरामद की है। वारदात में इस्तेमाल की गई दो हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिलें भी पुलिस के हाथ लगी हैं। इसके अतिरिक्त, स्नैचिंग के 23 अन्य मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
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