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Tuesday,31-March-2026
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आयरलैंड ने की अमेरिका और वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम की घोषणा

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आयरलैंड ने गुरुवार को अमेरिका के साथ होने वाले तीन वनडे मैचों की सीरीज को लेकर अपने 15 सदस्यों के नामों की घोषणा की। यह सीरीज दिसंबर में खेली जाएगी। इसके साथ ही, वर्ल्ड कप के सुपर लीग के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ भी यही टीम जनवरी में खेलती नजर आएगी। लेग स्पिनर बेन व्हाइट, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में टी20 मैचों में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डेब्यू किया था, उनको यूएस और वेस्टइंडीज वनडे सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया है।

राष्ट्रीय चयनकर्ता अध्यक्ष एंड्रयू व्हाइट ने कहा, “वनडे टीम के लिए युवा लेग स्पिनर बेन व्हाइट का चयन किया गया है।”

चयनकर्ताओं ने अमेरिका और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए 15 सदस्यों के नामों की भी घोषणा की। इसमें जोश लिटिल को शामिल नहीं किया गया, जो लंका प्रीमियर लीग में भाग लेने के लिए अमेरिकी दौरे से रह गए थे। हालांकि, लिटिल संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज से पहले टीम में शामिल होंगे और वेस्टइंडीज दौरे के अंत तक बने रहेंगे।

व्हाइट ने कहा, “टीम को आगे बढ़ाने के लिए चयनकर्ताओं को कुछ कठिन निर्णय लेने पड़े हैं। विशेष रूप से टी20 सीरीज के लिए, क्योंकि 2022 की शुरुआत में टी20 विश्व कप क्वालीफायर के मैचों के दौरान यह अहम होगा।”

अंतरराष्ट्रीय

इजरायल ने घातक हमलों के दोषी फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा का कानून किया पारित

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तेल अवीव : इजरायल की संसद ने एक विवादास्पद कानून पारित किया है। जिसके तहत सैन्य अदालतों द्वारा घातक हमलों के दोषी पाए गए फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा अनिवार्य कर दी गई है। यह कानून प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों की एक प्रमुख मांग में शामिल था।

इस कानून की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हुई है। विरोधियों ने इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया है। आलोचकों का तर्क है कि यह कानून पहचान के आधार पर एक अलग कानूनी ढांचा तैयार करता है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

नए कानून के तहत, हत्या के दोषी पाए गए इजरायलियों को मृत्युदंड तभी दिया जाएगा, जब यह कृत्य “इजरायल के अस्तित्व को समाप्त करने” के इरादे से किया गया हो।

आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान प्रभावी रूप से यह सुनिश्चित करता है कि यह सजा असमान रूप से फिलिस्तीनियों को निशाना बनाएगी जबकि इसी तरह के अपराधों के आरोपी यहूदी इजरायलियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

कानून में यह भी अनिवार्य है कि फांसी की सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के भीतर ही दी जाए, जिसमें देरी के लिए केवल सीमित आधार दिए गए हैं और क्षमादान का कोई प्रावधान नहीं है।

अदालतों के पास आजीवन कारावास की सजा देने का विकल्प बरकरार है लेकिन केवल विशेष परिस्थितियों में ही मान्य होगा।

गौरतलब है कि इजरायल ने 1954 में हत्या के लिए मृत्युदंड समाप्त कर दिया था। नागरिक मुकदमे के बाद दी गई एकमात्र फांसी 1962 में एडॉल्फ आइचमैन की थी, जो होलोकॉस्ट में शामिल एक प्रमुख व्यक्ति था।

हालांकि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में सैन्य अदालतों के पास पहले से ही फिलिस्तीनी दोषियों को मृत्युदंड देने का अधिकार था लेकिन ऐसी सजा कभी लागू नहीं की गई थी।

इस विधेयक को धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर का जोरदार समर्थन प्राप्त था, जिन्होंने मतदान से पहले फांसी के फंदे के आकार के लैपल पिन पहनकर ध्यान आकर्षित किया।

विधेयक के पारित होने के बाद यायर लैपिड की येस एटिड, अरब-बहुसंख्यक हदाश-ताअल और वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी जैसी विभिन्न विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ कई मानवाधिकार संगठनों ने उच्च न्यायालय में इस कानून को चुनौती देने का मन बनाया है।

टाइम्स ऑफ इजरायल द्वारा नेसेट की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य और इस कानून के सबसे कड़े आलोचकों में से एक डेमोक्रेट सांसद गिलाद कारिव के हवाले से कहा गया है, “यह एक अनैतिक कानून है जो एक यहूदी और लोकतांत्रिक राज्य के रूप में इजरायल के मूलभूत मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून के उन प्रावधानों के विपरीत है, जिनका पालन करने का इजरायल ने वादा किया है।”

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अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका कुछ हफ्तों में ईरान ऑपरेशन कर देगा खत्म: मार्को रुबियो

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वाशिंगटन : अमेरिकी सरकार की तरह से बार-बार इस बात को दोहराया जा रहा है। कि वह लक्ष्य पूरा करने में तय समय से आगे चल रहे हैं और जल्द ही खत्म कर देंगे। अब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य महीनों में नहीं, बल्कि हफ्तों में पूरा कर लेगा।

इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव ने लड़ाई खत्म करने के लिए वाशिंगटन की शर्तें बताईं और तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी।

स्थानीय समयानुसार, सोमवार को अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन जारी रहने के बावजूद, “ईरान और अमेरिका के अंदर कुछ लोगों के बीच खासकर बिचौलियों के जरिए मैसेज और कुछ सीधी बातचीत चल रही थी।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की मुख्य मांगें वैसी ही हैं, “ईरानी सरकार के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते और उन्हें आतंकवाद को स्पॉन्सर करना बंद करना होगा और उन्हें ऐसे हथियार बनाना बंद करना होगा जो उनके पड़ोसियों के लिए खतरा बन सकते हैं।”

रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने बताए गए मकसद को पाने में बहुत आगे या तय समय से आगे है, जिसमें ईरान की एयर फोर्स और नेवी को खत्म करना और “उनके पास मौजूद मिसाइल लॉन्चर की संख्या में काफी कमी शामिल है।

उन्होंने कहा, “हम ये मकसद, हफ्तों में हासिल कर लेंगे, महीनों में नहीं।” उन्होंने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोई भी कोशिश मंजूर नहीं होगी। दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता है।

रुबियो ने चेतावनी दी कि ऐसा कदम दूसरे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर दावा करने का एक उदाहरण बनेगा। रुबियो ने आगे कहा, “अमेरिका यह शर्त नहीं मानेगा। वे जो मांग रहे हैं, वह एक गैर-कानूनी शर्त है। ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है।”

उन्होंने कहा कि स्ट्रेट किसी न किसी तरह से खुला रहेगा, या तो ईरान के अंतरराष्ट्रीय कानून मानने से या देशों के एक साथ आकर कार्रवाई करने से।

रुबियो ने ईरान पर पूरे इलाके में आवासीय और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “उन्होंने दूतावास, डिप्लोमैटिक फैसिलिटी, एयरपोर्ट, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया है।”

ईरान को 10 सालों में सबसे कमजोर बताते हुए, उन्होंने कहा कि भविष्य में बड़े खतरों को रोकने के लिए अभी उसकी सैन्य क्षमताओं को कम करना जरूरी है।

डिप्लोमेसी को लेकर रुबियो ने कहा कि तेहरान को न्यूक्लियर हथियार रखने की किसी भी इच्छा को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाने और मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम छोड़ने की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है, तो देश का भविष्य अच्छा हो सकता है। दशकों से उस देश की सरकार ने इस रास्ते को नहीं अपनाया है।”

इस दौरान रुबियो ने ऑपरेशन के दौरान एयरस्पेस और बेस एक्सेस न देने का जिक्र करते हुए कुछ नाटो सहयोगियों से भी निराशा जताई और कहा, “अगर नाटो का मकसद सिर्फ यूरोप की रक्षा करना है, लेकिन फिर जब हमें जरूरत हो तो हमें बुनियादी अधिकार देने से मना करना, तो यह बहुत अच्छा इंतजाम नहीं है। इन संबंधों को फिर से देखना होगा।”

रुबियो ने कहा कि अमेरिका के मकसद में ईरान में शासन बदलना शामिल नहीं था। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को माना कि अगर ईरान के नेतृत्व में बदलाव होता है तो वाशिंगटन इसका विरोध नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन का मकसद यह नहीं था।

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अंतरराष्ट्रीय

ट्रंप का दावा: जल्द पता चल जाएगा कि ईरान के संसद अध्यक्ष अमेरिका के साथ काम करना चाहते हैं या नहीं

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TRUMP

वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा है कि करीब एक हफ्ते में यह साफ हो जाएगा कि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं या नहीं।

सिन्हुआ एजेंसी ने न्यूयॉर्क पोस्ट के साक्षात्कार का हवाला देते हुए बताया कि ट्रंप ने ईरान के भीतर एक नाटकीय फेरबदल का वर्णन किया है और दावा किया है कि ईरान के पुराने नेतृत्व को प्रभावी रूप से खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह एक नए समूह ने ले ली है, जिसके साथ काम करना अब तक आसान रहा है।

ट्रंप ने दावा किया, “पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन हो चुका है, क्योंकि पिछली सरकारें खत्म हो गई हैं और हम बिल्कुल नए लोगों के समूह से निपट रहे हैं। अब तक, वे कहीं अधिक समझदार साबित हुए हैं।”

इस बीच, ट्रंप ने बार-बार ईरान से “बहुत देर होने से पहले” समझौता करने का आग्रह किया।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ट्रंप को उम्मीद है कि वे 6 अप्रैल तक ईरान के साथ समझौता कर लेंगे। यह नई समय सीमा ट्रंप ने पिछले सप्ताह ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हवाई हमलों को स्थगित करने के बाद तय की थी।

लीविट ने यह भी कहा कि वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहे ईरानी अधिकारी अधिक समझदार प्रतीत होते हैं, लेकिन उन्होंने उनके नाम बताने से इनकार कर दिया।

लीविट ने कहा, “ये लोग पर्दे के पीछे, निजी तौर पर इन बातचीत में, शायद उन पूर्व नेताओं की तुलना में अधिक समझदार प्रतीत होते हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।”

इससे पहले सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अल जजीरा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि वाशिंगटन द्वारा ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करने के प्रयासों के बीच “ईरान के भीतर निर्णय कैसे लिए जा रहे हैं, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।”

हालांकि ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। स्थानीय विश्लेषकों का कहना है कि कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उनका यह भी कहना है कि मध्य पूर्व में लगातार हो रहे हमलों और सैन्य तैनाती से शीघ्र शांति की उम्मीदें और भी धूमिल हो रही हैं।

रविवार को अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को चल रहे युद्ध को एक महीना पूरा हो गया। ट्रंप ने सोमवार सुबह धमकी दी कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ तो वह ईरान के सभी बिजली संयंत्रों, तेल कुओं और खारग द्वीप को पूरी तरह से नष्ट कर देंगे।

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