अंतरराष्ट्रीय
आईपीएल 2021 : दिल्ली ने राजस्थान को 33 रनों से हराया
गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर दिल्ली कैपिटल्स ने यहां शेख जायेद स्टेडियम में खेले गए आईपीएल 2021 के 36वें मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स को 33 रनों से हराया।
दिल्ली ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में छह विकेट पर 154 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान की टीम कप्तान संजू सैमसन के 53 गेंदों पर आठ चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद 70 रन की पारी के बावजूद 20 ओवर में छह विकेट पर 121 रन ही बना सकी।
दिल्ली की ओर से एनरिच नॉत्र्जे ने दो विकेट लिए जबकि आवेश खान, रविचंद्रन अश्विन, कैगिसो रबादा और अक्षर पटेल को एक-एक विकेट मिला।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान की शुरूआत बेहद खराब रही और उसने लियाम लिविंगस्टोन (1), यशस्वी जायसवाल (5) और डेविड मिलर (7) के विकेट महज 17 रन के स्कोर पर गंवाए। इसके बाद महिपाल लोमरोर चौथे बल्लेबाज के रूप में पवेलियन लौटे। लोमरोर ने 24 गेंदों पर एक छक्के की मदद से 19 रन बनाए।
राजस्थान की टीम जब तक इन झटकों से उबर पाती तब तक अक्षर ने रियान पराग (2) को बोल्ड कर राजस्थान को पांचवां झटका दिया। फिर राहुल तेवतिया (9) भी आउट होकर छठे बल्लेबाज के रूप में पवेलियन लौटे। तबरेज शम्सी दो रन बनाकर नाबाद रहे।
इससे पहले, बल्लेबाजी करने उतरी दिल्ली की शुरूआत अच्छी नहीं रही और उसने कुल 21 के योग पर शिखर धवन (8) और पृथ्वी शॉ (10) के विकेट गंवाए। इसके बाद श्रेयस अय्यर ने कप्तान ऋषभ पंत के साथ मिलकर पारी को संभाला और दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 62 रनों की साझेदारी हुई।
इस साझेदारी को हालांकि, मुस्ताफिजुर रहमान ने पंत को आउट कर तोड़ा जिन्होंने 24 गेंदों पर दो चौकों की मदद से 24 रन बनाए। इसके तुरंत बाद अय्यर भी आउट हो गए और 32 गेंदों पर एक चौके और दो छक्कों के सहारे 43 रन बनाकर पवेलियन लौटे। फिर शिमरॉन हेत्मायेर ने कुछ शॉट खेल दिल्ली को बड़े स्कोर तक ले जाने की कोशिश की लेकिन वह 16 गेंदों पर पांच चौकों की मदद से 28 रन बनाकर आउट हो गए।
इसके बाद अक्षर को चेतन सकारिया ने आउट कर दिल्ली को छठा झटका दिया। अक्षर ने सात गेंदों पर एक छक्के की मदद से 12 रन बनाए। दिल्ली की पारी में ललित यादव 15 गेंदों पर एक चौके की मदद से 14 और अश्विन छह रन बनाकर नाबाद रहे।
राजस्थान की तरफ से सकारिया और मुस्ताफिजुर ने दो-दो विकेट जबकि कार्तिक त्यागी और तेवतिया को एक-एक विकेट मिला।
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान: इमरान खान की बहन अलीमा बोलीं, ‘ईद में भाई को सरकार नहीं करेगी रिहा, तारीख याद रखेगी’

इस्लामाबाद, 11 मार्च : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनें अडियाला जेल के बाहर फिर से धरने पर बैठ गई हैं। तीनों को चेक पोस्ट पर रोका गया जिसके विरोध में उन्होंने धरना दिया। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं को भी पीछे धकेल दिया, जो जेल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।
मंगलवार को जेल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, इमरान खान की अलीमा खान ने इसे बेहद निराशाजनक रवैया करार दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद परिवार के लोगों को पीटीआई संस्थापक से मिलने नहीं दिया गया।
पीटीआई के आधिकारिक एक्स हैंडल पर अलीमा खान की एक वीडियो क्लिप अपलोड की गई है, जिसमें वह गुस्से और हताशा में कह रही हैं कि उन्हें यकीन है कि भाई को ईद में भी रिहा नहीं किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में, अलीमा खान ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनके भाई को ईद से पहले रिहा कर दिया जाएगा।
पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक डॉन के अनुसार, अलीमा ने उन खबरों को लेकर पूछे गए सवाल पर जवाब दिया जिसमें इमरान खान को ईद में रिहा किए जाने का दावा किया गया था।
उन्होंने कहा, “वे उसे रिहा नहीं करना चाहते। आजकल जो दुनिया में हो रहा है उस पर ध्यान देंगे तो, और आपको पता चल जाएगा कि इमरान खान जेल में क्यों हैं? उनके साथ जो हो रहा है उसे तारीख (इतिहास) याद रखेगी।”
इससे पहले फरवरी में, जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जिसमें इमरान खान को कानूनी और मेडिकल मदद देने में कथित रुकावटों पर गंभीर चिंता जताई गई थी।
नेताओं ने चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी को लिखे अपने खत में उनसे इस मामले में दखल देने की अपील की ताकि इस मामले में इंसाफ हो सके। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अफरीदी से यह भी अनुरोध किया कि वे इस मामले पर ध्यान दें और यह पक्का करें कि इमरान खान को कानून के मुताबिक निजी चिकित्सक, कानूनी सलाहकार और परिवार के लोगों से मिलने की इजाजत मिले।
पत्र में, पीटीआई नेताओं ने इमरान खान के इलाज की तुलना पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 2019 में हुए मेडिकल ट्रीटमेंट से की। उन्होंने कहा कि तब की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि नवाज शरीफ को लाहौर के सर्विसेज हॉस्पिटल ले जाया जाए और जब उनका प्लेटलेट काउंट कम था तो उन्हें सही मेडिकल केयर दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि नवाज शरीफ के पर्सनल डॉक्टर मेडिकल बोर्ड की सभी मीटिंग में शामिल होते थे, उनका परिवार और वकील भी उनसे नियमित तौर पर मिलते थे।
अंतरराष्ट्रीय
हम खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों से सहमत नहीं: चीन

बीजिंग, 11 मार्च : चीन ने खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों को गलत बताया है। कहा है कि इसकी चपेट में आम लोग और गैर-सैन्य स्थल आ रहे हैं जो ठीक नहीं है इसलिए हम इससे असहमत हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।
प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि नागरिकों और जरूरी इमारतों को निशाना बनाना गलत है और इससे इलाके में तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि चीन ने अपने बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया।
तेहरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से ईरान अपने पड़ोसियों और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बना रहा है। इस हमले में कई गैर-सैन्य स्थलों पर भी ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिनकी जद में आने से कई लोग घायल हुए हैं या उनकी जान जा रही है।
इस बीच, ईरान ने कहा है कि वह देश में मौजूद अमेरिका और इजरायल से जुड़े बैंकों और आर्थिक ठिकानों पर हमला कर सकता है। उसके मुताबिक ये उसके एक बैंक पर हुए हमले का जवाब होगा।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े खातम अल-अनबिया मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि दुश्मनों के हमले के बाद अब ईरान के पास जवाब देने का पूरा अधिकार है। उनका यह बयान स्टेट मीडिया ने प्रसारित किया।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और इजरायल से जुड़े बैंक और आर्थिक सेंटर्स ईरान के निशाने पर आ सकते हैं। आईआरजीसी ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि बैंकों के आसपास न जाएं और उनसे कम से कम 1 किलोमीटर की दूरी बनाकर रखें।
अमेरिका-इजरायल और ईरान सैन्य संघर्ष के 12वें दिन ईरान ने दावा किया है कि उसने इजरायल के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हमला शुरू कर दिया है।
ईरानी मीडिया के अनुसार ईरान अमेरिकी टेक कंपनियों के दफ्तरों और डेटा सेंटर्स पर भी हमला कर सकता है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बुधवार को एक प्रस्ताव पर वोटिंग करने वाली है। इसमें ईरान से अपील की गई है कि वो बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन पर हमले बंद करे।
अंतरराष्ट्रीय
भारत दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका का बहुत बड़ा साथी: राजदूत सर्जियो गोर

नई दिल्ली, 11 मार्च : अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने तेल की कीमतों को स्थिर रखने में भारत की भूमिका को अहम बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने भारत की रूस से तेल खरीद को ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए जरूरी बताया।
गोर ने लिखा कि भारत दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में बहुत बड़ा साथी रहा है। अमेरिका मानता है कि रूस से भारत की लगातार तेल खरीद भी इसी कोशिश का हिस्सा है।
उन्होंने आगे लिखा, “भारत तेल के सबसे बड़े कंज्यूमर और रिफाइनर में से एक है और अमेरिकियों और भारतीयों के लिए मार्केट में स्थिरता लाने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स और भारत का मिलकर काम करना जरूरी है।”
ये बयान ऐसे समय आया है जब ग्लोबल ऑयल मार्केट में ईरान संकट से बड़ी उठा पटक मची हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा है और आशंका है कि कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर और रिफाइनर है, इसलिए यहां की नीति वैश्विक बाजार पर असर डालती है।
इससे पहले व्हाइट हाउस ने प्रेस से कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे यूएस मिलिट्री कैंपेन से पैदा हुई दिक्कतों के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की एक बड़ी कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट को मंजूरी दी है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और नेशनल सिक्योरिटी टीम के सदस्यों के बीच बातचीत के बाद लिया गया।
लेविट ने एक सवाल के जवाब में कहा, “राष्ट्रपति और ट्रेजरी सेक्रेटरी और पूरी नेशनल सिक्योरिटी टीम इस फैसले पर इसलिए पहुंची क्योंकि भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि यह तत्कालीन उपाय ईरान के संकट से पैदा हुई ग्लोबल तेल सप्लाई में रुकावटों को दूर करने के लिए किया गया है। लेविट ने आगे कहा, “जब हम ईरानियों की वजह से दुनिया भर में तेल सप्लाई के इस ‘टेम्पररी गैप’ (अस्थायी अंतर) को कम करने के लिए काम कर रहे हैं, तो हमने उन्हें तत्कालीन तौर पर रूसी तेल लेने की इजाजत दे दी है।”
लेविट ने बताया कि छूट मिलने से पहले ही शिपमेंट भेज दिए गए थे। व्हाइट हाउस के मुताबिक, प्रशासन को उम्मीद नहीं है कि इस व्यवस्था से मास्को को आर्थिक रूप से कोई खास फायदा होगा।
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