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Tuesday,13-October-2026
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दूरसंचार उत्पादों के लिए पीएलआई में 4,081 करोड़ रुपये का निवेश, 78,672 करोड़ रुपये की बिक्री हुई

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नई दिल्ली, 22 मार्च। ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देते हुए, दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना में 4,081 करोड़ रुपये का निवेश (31 जनवरी तक) हुआ है, जिससे कुल 78,672 करोड़ रुपये की बिक्री हुई है।

इसमें 14,963 करोड़ रुपये की निर्यात बिक्री शामिल है। इसके अतिरिक्त, इसने 26,351 लोगों के लिए रोजगार पैदा किया है, यह जानकारी संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासनी चंद्रशेखर ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने 12,195 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ भारत में दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 24 फरवरी, 2021 को पीएलआई योजना को अधिसूचित किया।

डिजाइन आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित उत्पादों के लिए अतिरिक्त 1 प्रतिशत प्रोत्साहन शुरू करने और उद्योग की आवश्यकताओं के आधार पर अनुमोदित सूची में 11 अतिरिक्त उत्पादों को शामिल करने के लिए योजना दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया।

इसने कंपनियों को योजना अवधि के दौरान किसी भी समय अनुमोदित सूची से एक या अधिक उत्पादों को जोड़ने की सुविधा भी प्रदान की और कंपनियों को तिमाही आधार पर प्रोत्साहन दावों के लिए आवेदन करने का विकल्प दिया।

पीएलआई योजना में 33 दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पाद शामिल हैं, जिनके खिलाफ कंपनियां प्रोत्साहन का दावा कर सकती हैं।

14 प्रमुख क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजनाएं (1.97 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय) विनिर्माण विकास को बढ़ावा दे रही हैं, क्योंकि नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएलआई योजना के तहत दूरसंचार उपकरण विनिर्माण ने बिक्री में 50,000 करोड़ रुपये को पार कर लिया है।

पीएलआई योजना के तहत भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र फल-फूल रहा है, जो मोबाइल फोन के शुद्ध आयातक से शुद्ध निर्यातक में बदल गया है।

घरेलू उत्पादन 2014-15 में 5.8 करोड़ यूनिट से बढ़कर 2023-24 में 33 करोड़ यूनिट हो गया, जबकि आयात में उल्लेखनीय कमी आई। निर्यात 5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गया और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 254 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देने में योजना की भूमिका को दर्शाता है।

व्यापार

एलटीसीजी पर चर्चाओं से भारतीय शेयर बाजार में तूफानी तेजी; सेंसेक्स 1,109 अंक चढ़ा

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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तूफानी तेजी देखने को मिली। इस दौरान सेंसेक्स 1,109.10 अंक या 1.54 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,033.78 और निफ्टी 358.60 अंक या 1.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,721.95 पर था।

बाजार में तेजी का नेतृत्व आईटी शेयरों ने किया। सूचकांकों में निफ्टी आईटी 5.22 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल के साथ करीब सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। केवल निफ्टी फार्मा ही सपाट बंद हुआ।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में मजबूत खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 624.65 अंक या 1.06 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,459.20 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 21.60 अंक या 0.11 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,447.40 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचयूएल, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, टाइटन, बीईएल, एमएंडएम,भारती एयरटेल, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। केवल कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी और इटरनल लूजर्स थे।

जानकारों ने कहा कि बाजार में तेजी की वजह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा, “सरकार बजट से जुड़ी बातचीत के दौरान लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स को हटाने पर लोगों की राय जानना चाहती है।” इसकी वजह भारत में निवेशकों की ओर से इक्विटी पर लगने वाले टैक्स को लेकर लगातार सवाल उठाना है।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी कंपनियों की उम्मीद से बेहतर कमाई ने कॉर्पोरेट मुनाफे में बढ़ोतरी को लेकर भरोसा बढ़ाया, जिससे लार्ज-कैप शेयरों में तेजी आई। रुपए में स्थिरता और बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी बाजार के मूड को बेहतर बनाया, जिससे फाइनेंशियल शेयरों पर फोकस बढ़ा।

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राष्ट्रीय समाचार

आज तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ही शक्ति के नए स्रोत, ‘पावर टू एम्पावर’ ही नए युग की सबसे बड़ी ताकत: पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘पावर टू एम्पावर’ (सशक्तिकरण की शक्ति) की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज के दौर में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ही असली शक्ति हैं, लेकिन इनकी वास्तविक कीमत इस बात में है कि उनका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है।

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के फोरम का विषय उभरती शक्तियों पर आधारित है और 21वीं सदी के तीसरे दशक में दुनिया बड़े बदलावों से गुजर रही है। आज तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ही शक्ति के नए स्रोत बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है। क्या तकनीक केवल कुछ लोगों को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होगी या फिर करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यहीं से ‘पावर टू एम्पावर’ का विचार जन्म लेता है। उन्होंने कहा, “नियंत्रण की शक्ति से आगे बढ़कर सशक्त बनाने की शक्ति है, प्रतिस्पर्धा की शक्ति से आगे सहयोग की शक्ति है और केवल स्वयं सफल होने से आगे दूसरों को सफल बनाने की शक्ति है।”

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शक्ति के वास्तविक मूल्य को समझना बेहद जरूरी है।

पीएम मोदी ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताते हुए कहा कि देश में 100 से अधिक भाषाएं हैं, करीब 80,000 पंजीकृत समाचार पत्र और प्रकाशन, 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल, 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब उपयोगकर्ता और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता हैं।

उन्होंने कहा, “भारत में विभिन्न मुद्दों पर खुली बहस होती है, लोग अलग-अलग विचारों पर चर्चा करते हैं और इस प्रक्रिया में डिजिटल शक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि 12-13 वर्ष पहले मोबाइल इंटरनेट तक पहुंच भी अपने आप में एक शक्ति थी, क्योंकि जिसके पास इंटरनेट था, उसके पास जानकारी, ज्ञान और अवसर भी थे।

उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार बनने के बाद भारत ने मोबाइल डेटा को सस्ता और सुलभ बनाने पर विशेष ध्यान दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि आज गांव का एक छोटा दुकानदार भी डिजिटल माध्यम से अपने ग्राहकों तक पहुंच सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में कनेक्टिविटी ने सिर्फ लोगों को आपस में नहीं जोड़ा, बल्कि उन्हें अवसरों से भी जोड़ा है। यही ‘पावर टू एम्पावर’ का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां तकनीक का उपयोग लोगों को सशक्त बनाने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विभिन्न क्षेत्रों में हमारे काम करने के तरीके को बदल रही है। बढ़ती उम्र से संबंधित चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। विश्वास दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।”

मोदी ने आगे कहा कि विश्वभर में कई अंतरराष्ट्रीय समूह हैं, लेकिन भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, बिग कैट अलायंस, बायोफ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ, आईएमईसी जैसे समूह बनाए हैं, जो सभी के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “एक सूर्य, एक दुनिया और एक नेटवर्क; एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य। हम दुनिया को जोड़ने और दूसरों को सशक्त बनाने के लिए शक्ति का उपयोग करने को प्राथमिकता देते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने जीएसटी, दिवालियापन जैसे कई कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। हमारी सुधार की रफ्तार तेज है। हमारे लिए सुधार कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक दृढ़ विश्वास है।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

होर्मुज समझौता बंद होने से 2026 में खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट की आशंका, क्रूड ऑयल की कीमत 95.74 डॉलर रहने का अनुमान: आईएमएफ

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को कहा कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने के कारण 2026 में मध्य पूर्व और मध्य एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सिकुड़ सकती है। आईएमएफ की अक्टूबर 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 3.7 प्रतिशत से घटकर 2026 में -0.3 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि 2027 में इसके दोबारा 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

आईएमएफ ने कहा कि अप्रैल 2026 के अनुमान की तुलना में 2026 के लिए वृद्धि दर में 2.2 प्रतिशत अंक की कटौती की गई है, जिसकी प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने की आशंका है, जबकि उसके दोबारा खुलने के बाद 2027 में अपेक्षाकृत मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक असर छोटे खाड़ी तेल उत्पादक देशों पर पड़ेगा। कुवैत की अर्थव्यवस्था 2026 में 16.7 प्रतिशत, इराक की 16 प्रतिशत, कतर की 15.6 प्रतिशत और बहरीन की 11.3 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है। आईएमएफ का मानना है कि ऊर्जा उत्पादन और परिवहन में बाधाओं का इन देशों पर सबसे ज्यादा प्रभाव होगा।

हालांकि 2027 में इन देशों में तेज वापसी की संभावना जताई गई है। आईएमएफ के अनुसार, 2027 में इराक 19 प्रतिशत, कतर 18.8 प्रतिशत, कुवैत 17.1 प्रतिशत और बहरीन 13.9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज कर सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब पर प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा क्योंकि उसके पास निर्यात के अधिक विविध मार्ग उपलब्ध हैं। सऊदी अर्थव्यवस्था के 2026 में 3.3 प्रतिशत सिकुड़ने और 2027 में 7.9 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अर्थव्यवस्था 2026 में 3.9 प्रतिशत घट सकती है और 2027 में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। ओमान इस रुझान से अलग रहेगा और उसके 2026 में 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

आईएमएफ ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 2026 में 7.6 प्रतिशत सिकुड़ने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य तनाव बढ़ने, नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू होने और कड़े प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था दबाव में रहेगी। देश में मुद्रास्फीति 78.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

आईएमएफ के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध शुरू होने से पहले प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल, जो दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई है, इसी मार्ग से गुजरता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाड़ी देशों ने कुछ निर्यात अन्य बंदरगाहों के जरिए मोड़ा है, जबकि खाड़ी क्षेत्र के बाहर तेल उत्पादन में भी प्रतिदिन लगभग 20 लाख बैरल की वृद्धि हुई है।

वहीं इसके साथ ही, आईएमएफ ने कहा है कि 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95.74 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जो 2025 के 67.74 डॉलर प्रति बैरल से काफी अधिक है। 2027 में यह कीमत घटकर 87.39 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में कच्चे तेल की कीमतों में 41 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 48 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इसके प्रभाव से उर्वरक कीमतें 10 प्रतिशत और खाद्य कीमतें 5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।

आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर देश सबसे ज्यादा दबाव में रहेंगे। उन्हें ऊंचे आयात बिल, मुद्रा विनिमय दर पर दबाव, कम वास्तविक आय और सीमित राजकोषीय क्षमता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि आईएमएफ ने कहा कि ऊंची तेल कीमतों के बावजूद भारत मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के समर्थन से अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है और उसे ऊर्जा आयातक उभरती अर्थव्यवस्थाओं की उन श्रेणियों से अलग रखा गया है, जिनके विकास अनुमान में कटौती की गई है।

आईएमएफ ने आगाह किया है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है या लंबे समय तक बना रहता है, तो ऊर्जा और खाद्य कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वित्तीय संतुलन पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।

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