व्यापार
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में इनफ्लो नवंबर में 21 प्रतिशत बढ़कर 29,911 करोड़ रुपए रहा
SHARE MARKET
नई दिल्ली, 11 दिसंबर: इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में इनफ्लो नवंबर में मजबूत रहा है और मासिक आधार पर यह 21 प्रतिशत बढ़कर 29,911 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि अक्टूबर में 24,690 करोड़ रुपए पर था। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से गुरुवार को जारी किए गए डेटा में दी गई।
हालांकि, बीते महीने सालाना आधार पर इनफ्लो में 17 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। नवंबर में यह 35,943 करोड़ रुपए पर था।
फ्लेक्सी कैप फंड्स ने नवंबर में सबसे अधिक इनफ्लो आकर्षित किया है और यह 8,135 करोड़ रुपए रहा है। हालांकि, अक्टूबर में यह 8,928 करोड़ रुपए पर था।
इनफ्लो आकर्षित करने के मामले में लार्ज एंड मिडकैप फंड्स कैटेगरी दूसरे नंबर पर रही है और इसने नवंबर में 4,503 करोड़ रुपए का फंड आकर्षित किया, जो कि पिछले महीने के मुकाबले 42 प्रतिशत अधिक है।
नवंबर में मिड-कैप फंडों को 4,486 करोड़ रुपए और स्मॉल-कैप फंडों को 4,406 करोड़ रुपए का इनफ्लो प्राप्त हुआ।
वैल्यू और कॉन्ट्रा फंडों में मासिक आधार पर सबसे अधिक निवेश वृद्धि देखी गई, जो अक्टूबर के 368 करोड़ रुपए की तुलना में 231 प्रतिशत बढ़कर 1,219 करोड़ रुपए हो गया।
वहीं, मल्टीकैप फंडों में इनफ्लो में मामूली 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
मनी मार्केट फंड में 11,104 करोड़ रुपए का इनफ्लो आया। इसके बाद अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स का स्थान रहा, जिसमें इनफ्लो 8,360 करोड़ रुपए रहा।
इस हफ्ते की शुरुआत में आए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के डेटा के मुताबिक, पिछले महीने म्यूचुअल फंड्स ने इक्विटी बाजार में 43,465 करोड़ रुपए निवेश किए हैं, जो कि अक्टूबर में दर्ज किए गए 20,718 करोड़ रुपए के निवेश से करीब दोगुना है।
बाजार नियामक के डेटा के मुताबिक, म्यूचुअल फंड्स ने पूरे महीने लगातार शेयर बाजार में इक्विटी में निवेश किया है। केवल दो दिन ही निकासी की है, जिसमें 2,473 करोड़ रुपए की बिक्री की गई थी।
म्यूचुअल फंड्स की ओर से मजबूत और स्थिर खरीदारी ने पूरे बाजार के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की और बेंचमार्क सूचकांकों में तेजी लाने में योगदान दिया।
व्यापार
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता के चलते इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में दर्ज की गई उल्लेखनीय बढ़त

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरों से बाजार की धारणा मजबूत हुई, जिसके चलते इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
निफ्टी में सप्ताह के दौरान 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और आखिरी कारोबारी दिन यह 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 231 अंक या 0.31 प्रतिशत बढ़कर 75,415 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.24 प्रतिशत की तेजी रही।
एक विश्लेषक ने कहा, “बाजार में सुधार के बावजूद निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। ऊंचे स्तरों पर मजबूत खरीदारी नहीं दिखने से बाजार की तेजी सीमित रही।”
आईटी सेक्टर इस सप्ताह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन के कारण इसमें निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
रियल्टी, सीमेंट और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूती बनी रही, जबकि एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर कमजोर रहे। थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के असर से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की चिंता बनी रही।
मिडकैप इंडेक्स ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप100 में 1.36 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने की लगातार कोशिशों से रुपए को भी समर्थन मिला।
हालांकि, बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं के कारण घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड इस सप्ताह 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इससे लगातार बनी महंगाई, ऊंची ऊर्जा कीमतों और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनी रह सकती हैं, जिसका असर वैश्विक लिक्विडिटी और जोखिम वाले निवेशों पर पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया रहेगा।
वहीं, बैंक निफ्टी में 54,200 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस देखा जा रहा है, जबकि 53,600 से 53,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है।
एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस सप्ताह भी बड़े पैमाने पर बिकवाली करते रहे और कुल निकासी लगभग 7,570 करोड़ रुपए रही।
निवेशकों की नजर अब भारत के अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों पर है, जिससे यह संकेत मिल सकता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालिया कमजोरी अस्थायी है या लंबे समय तक रहने वाली है।
इसके अलावा, आरबीआई की जून मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर पीसीई आंकड़े भी बाजार के लिए अहम संकेतक रहेंगे। यदि पीसीई आंकड़े ज्यादा आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों में एफआईआई निवेश सीमित रह सकता है।
व्यापार
मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला शेयर बाजार, ऑटो स्टॉक्स में खरीदारी

मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को तेजी के साथ खुला। सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 161 अंक या 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,344 और निफ्टी 40 अंक या 0.17 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,697 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी को ऑटो सेक्टर लीड कर रहा था। सूचकांकों में निफ्टी ऑटो टॉप गेनर था। निफ्टी प्राइवेट बैंक,निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मेटल और निफ्टी इंडिया डिफेंस भी हरे निशान में थे। निफ्टी मीडिया, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी आईटी और निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 68 अंक या 0.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,369 पर था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक या 0.04 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,976 पर था।
सेंसेक्स पैक में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, एनटीपीसी, टाटा स्टील, इटरनल, भारती एयरटेल, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, एलएंडटी और सन फार्मा गेनर्स थे। पावर ग्रिड, आईटीसी, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, बीईएल और एचसीएल टेक लूजर्स थे।
वैश्विक बाजारों में तेजी देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, सोल, जकार्ता और बैंकॉक हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को हरे निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ हरे निशान में और टेक्नोलॉजी सूचकांक नैस्डैक 0.09 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ था।
वैश्विक बाजारों में तेजी वजह ईरान की ओर से तनाव कम होने के संकेत मिलना है।
ईरान की समाचार एजेंसी आईएसएनए का कहना है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ के माध्यम से बातचीत जारी है, जिसमें दोनों पक्ष संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते का औपचारिक ढांचा स्थापित करने के प्रयास में संदेशों और ड्राफ्ट का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) गुरुवार के सत्र में भी शुद्ध विक्रेता रहे और इक्विटी मार्केट में 1,891.21 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,492.42 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
व्यापार
वैश्विक अस्थिरता के चलते भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में आई मामूली गिरावट : पीएमआई डेटा

वैश्विक अस्थिरता से भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में मई में मामूली गिरावट देखी गई है और इससे एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स 58.1 हो गया है, जो कि अप्रैल में 58.2 पर था। यह जानकारी गुरुवार को जारी निजी सर्वेक्षण में दी गई।
एचएसबीसी की ओर से जारी कम्पोजिट पीएमआई डेटा में बताया गया कि सर्विस अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार ने फैक्ट्री में कमजोर उत्पादन की भरपाई की है।
आंकड़ों में बताया गया कि अप्रैल में गिरावट के बाद, इनपुट कीमतों में महंगाई थोड़ी बढ़ी, लेकिन कंपनियों ने उत्पादन शुल्क में कम वृद्धि करके ग्राहकों पर अतिरिक्त लागत का बोझ सीमित कर दिया। इस दौरान सर्विसेज सेक्टर ने मैन्युफैक्चरिंग से बेहतर प्रदर्शन किया और उन पर महंगाई का दबाव कम रहा।
एचएसबीसी के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि दर में नरमी आने से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में मामूली गिरावट आई है, जबकि नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में तेज कमी आई है। फिर भी, निरंतर इन्वेंट्री के कारण मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मोटे तौर पर अपने दीर्घकालिक औसत के अनुरूप बना रहा।”
उन्होंने आगे कहा, “मई में तैयार माल के भंडार में लगातार दूसरे महीने वृद्धि हुई और खरीद भंडार में पिछले तीन महीनों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। लागत का दबाव बढ़ गया, और इनपुट कीमतों में जुलाई 2022 के बाद से सबसे तेज वृद्धि हुई।”
पीएमआई आंकड़ों के अनुसार, मई में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और सर्विस कंपनियों के साथ नए कारोबार में वृद्धि की दर धीमी रही, जिसके परिणामस्वरूप समग्र स्तर पर वृद्धि दर में गिरावट आई।
भारत के निजी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में मई में नए निर्यात ऑर्डर में धीमी वृद्धि देखी गई, जो पिछले 19 महीनों में सबसे कम है। पीएमआई आंकड़ों के अनुसार, वस्तु उत्पादकों ने सितंबर 2024 (फरवरी 2026 से पहले) के बाद से अंतरराष्ट्रीय बिक्री में दूसरी सबसे धीमी वृद्धि दर्ज की।
मई में कारोबारी विश्वास काफी सकारात्मक बना रहा, हालांकि सकारात्मक भावना का समग्र स्तर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, फिर भी यह अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर रहा।
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
दुर्घटना9 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र11 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
