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Friday,25-September-2026
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भारतीयता का मतलब समावेशिता है: शबाना आजमी

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Shabana-Azmi

दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी ने कट्टरवाद पर हमला बोलते हुए कहा है कि इस्लाम में संगीत और कला प्रतिबंधित कतई नहीं है। शहनाई के दिग्गज रहे उस्ताद स्वर्गीय बिस्मिल्लाह खान और दिवंगत सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान जैसे महान लोगों के उदाहरण का हवाला देते हुए शबाना कहती हैं कि धार्मिक चरमपंथ से दूर रहने पर ही सच्ची कला का निर्माण होता है। वह कहती हैं कि भारतीयता का मतलब ही समावेशिता है।

शबाना ने कहा, “हमें ऐसे निर्थक सवालों को उठने से रोकना होगा जो कला के अभ्यास को रोकते हैं और कला के बीच में धार्मिक चरमपंथ लाते हैं। ऐसा कहने वाले कई लोग हैं कि इस्लाम में संगीत और कला प्रतिबंधित है। लेकिन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, उस्ताद अली अकबर खान जैसे कई और प्रतिष्ठित कलाकार यदि इन सवालों की निर्थक न बनाते तो वे कैसे अपनी कला के लिए इतना सम्मान और सफलता हासिल कर पाते? यदि हम एक प्रगतिशील समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें ऐसे सवालों से छुटकारा पाना होगा।”

शबाना आजमी के ऐसे ही विचारों पर आधारित है उनकी फिल्म ‘मी रक्सम’, जो कि इसी सप्ताह के अंत तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है। अभिनेत्री द्वारा पेश की गई इस फिल्म से उनके भाई और अनुभवी छायाकार बाबा आजमी ने निर्देशन में कदम रखा है। यह फिल्म एक ऐसी मुस्लिम लड़की के बारे में है, जो एक भरतनाट्यम नर्तकी बनने की इच्छा रखती है, लेकिन उसके समुदाय के कट्टरपंथी लोग उसके सपने के बीच इसलिए आ जाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि नृत्य की इस विद्या का संबंध हिन्दू माइथोलॉजी से है।

इसे लेकर फिल्म में केन्द्रीय भूमिका निभा रहे अभिनेता दानिश हुसैन ने कहा, “अगर भरतनाट्यम की उत्पत्ति हिंदू पौराणिक कथाओं में निहित है, तो जाहिर है कि इस नृत्य पर हिंदू देवी-देवताओं का प्रभाव होगा। उदाहरण के लिए कव्वाली संगीत का ऐसा रूप है जो सूफी परंपरा और अमीर खुसरो से निकलकर आई है, इसलिए इसमें इस्लामिक प्रभाव रहेगा। अब देखिए कि ध्रुव सांगरी कितने प्रतिभाशालीकव्वाली गायक हैं, लेकिन कव्वाली हिंदू पौराणिक कथाओं से नहीं आई है तो क्या इसका मतलब यह है कि ध्रुव कव्वाली नहीं गा सकते हैं। हमें ये बाधाएं तोड़नी होगी। कोई भी व्यक्ति कला के जिस रूप में रुचि रखता है, वह इसे सीख सकता है और इसका अभ्यास कर सकता है, भले ही उस कला की उत्पत्ति कहीं से भी हुई हो।”

बता दें कि ज़ी5 पर रिलीज हुई इस फिल्म में दानिश हुसैन के साथ अदिति सूबेदी, सुदीप्ता सिंह, राकेश चतुवेर्दी ओम, कौस्तुभ शुक्ला, जुहिना अहसन और शिवांगी गौतम हैं। वहीं नसीरुद्दीन शाह एक विशेष भूमिका में हैं।

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मनोरंजन

बिग बॉस 20 में छलका मैरी कॉम का दर्द, बोलीं- बच्चों के लिए जी रही हूं

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वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर मैरी कॉम इन दिनों ‘बिग बॉस-20’ में नजर आ रही हैं। शो को दौरान मैरी कॉम ने बताया कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा समय भी था, जब उन्होंने सब कुछ खत्म करने के बारे में सोचा था, लेकिन अपने छोटे बच्चों की वजह से उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

मैरी कॉम साथी कंटेस्टेंट ईशा रिखी, रीति तिवारी और कनिका मान के साथ अपने स्ट्रगल के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि भले ही दुनिया उन्हें बॉक्सिंग रिंग के अंदर अपनी ताकत के लिए जानती है, लेकिन उनके जीवन में ऐसे पल भी आए हैं, जह वह पूरी तरह से टूट गई थीं।

मैरी ने कहा, “मैंने बचपन से ही बहुत कुछ झेला है। मैंने अपने परिवार, राज्य और देश के लिए बहुत कुर्बानियां दी है। मेरी तरह कौन लड़ सकता है? ये एक बड़ी चुनौती है। मैं एक एथलीट हूं, जो मेडल जीतना चाहती है, मेरे लिए एक-दो मेडल काफी नहीं है। मेरे अंदर अभी भी जीतने की भूख है लेकिन उम्र ज्यादा होने की वजह से अब हिस्सा नहीं ले सकती।”

बातचीत के दौरान मैरी कॉम ने बताया कि अब उनके लिए अपनी भावनाओं को जाहिर करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि वह पहले बहुत रोया करती थीं और अब उन्हें अपने आंसू रोकने की जरूरत महसूस होती है। उन्होंने कहा, “मैं बहुत रोई हूं। अब धीरे-धीरे मुझे आंसू अंदर खींचने होंगे।”

मैरी कॉम की बात करें तो, वह भारत की सबसे कामयाब बॉक्सर्स में से एक हैं, जिन्होंने अपने शानदार करियर और संघर्षों से पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने 6 बार (2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018) महिला विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीता है। वह विश्व चैंपियनशिप में 8 पदक जीतने वाली एकमात्र मुक्केबाज हैं। साथ ही, वह पांच बार एशियाई मुक्केबाजी चैंपियन भी रह चुकी हैं

मणिपुर के बॉक्सर डिंग्को सिंह से प्रेरित होकर उन्होंने बॉक्सिंग चुनी लेकिन शुरुआती दिनों में उनके पिता इसके खिलाफ थे। उन्होंने छुप-छुपकर प्रशिक्षण लिया और कई आर्थिक तंगियों का सामना किया।

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मनोरंजन

‘हम 24 में 36 घंटे काम करते थे’, रवीना-करिश्मा ने याद किया 90 के दशक का दौर

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सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ के सेट पर एक्ट्रेस रवीना टंडन ने 90 के दशक के बॉलीवुड दौर को याद किया। वह शो के सेमी-फिनाले एपिसोड में स्पेशल गेस्ट बनकर पहुंचीं थी।

इस दौरान उन्होंने शो की जज और साथी एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के साथ पुराने दौर की कई यादें साझा कीं। रवीना ने बताया कि उस समय वह और करिश्मा एक दिन में कई फिल्मों की शूटिंग करती थीं और कई बार उन्हें खुद भी याद नहीं रहता था कि वह किस फिल्म के किस किरदार में हैं।

रवीना ने मजाकिया अंदाज में कहा, ”मुझे लगता है कि 90 के दशक में शायद दो ही हीरोइनें थीं, जो 24 घंटे में 36 घंटे काम करती थीं। इनमें एक करिश्मा कपूर थी और दूसरी मैं खुद थी। एक ही दिन में करीब छह अलग-अलग प्रोडक्शन के सेट पर शूटिंग करनी पड़ती थी। कहीं दो घंटे शूटिंग, फिर दूसरे सेट पर डेढ़ घंटे, उसके बाद किसी और जगह तीन घंटे और फिर दूसरे सेट पर चार घंटे। इस तरह पूरा दिन अलग-अलग लोकेशन और किरदारों के बीच निकल जाता था।”

रवीना ने कहा, ”लगातार इतने प्रोजेक्ट्स पर काम करने की वजह से एक वक्त के बाद हमें यह तक याद नहीं रहता था कि हम किस किरदार में हैं। एक ही तरह का किरदार कई अलग-अलग फिल्मों में निभाते हुए कई बार बस यही करना होता था कि जो बताया गया है, उसे कर दो। अगर किसी फिल्म में मेरा किरदार अमीर और बिगड़ी हुई लड़की का था, तो वही किरदार छह अलग-अलग सेट पर भी चल रहा होता था।”

रवीना की इस बात पर करिश्मा कपूर भी अपनी एक याद साझा करती हैं। वह बताती हैं, ”उस समय ज्यादातर शूटिंग फिल्म सिटी में होती थी। हम दोनों सुबह सात बजे से काम शुरू कर देती थीं। कभी-कभी तो हम दोनों एक-दूसरे को अलग-अलग सेट पर जाते हुए देखती थीं। एक सेट से निकलकर दूसरे सेट पर पहुंचना, रास्ते में कपड़े बदलना और फिर तुरंत अगले सेट पर शूटिंग के लिए तैयार होना हमारी दिनचर्या का हिस्सा था।”

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‘जनादेश नहीं मिल रहा तो लोकतंत्र का अपमान करने का अधिकार नहीं’, अखिलेश के बयान पर भाजपा का पलटवार

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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के 2027 के चुनाव को लेकर दिए बयान और सरकार व संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बाद भाजपा नेताओं ने सपा पर निशाना साधा। कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव के 2027 के चुनाव को आखिरी चुनाव बताए जाने पर कहा कि लोकतंत्र में कोई आखिरी या नया चुनाव नहीं होता।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना चाहिए और जो लोग जनादेश हासिल नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें जनादेश का अपमान करने का अधिकार नहीं है। मनोज पांडेय ने सपा शासनकाल के दौरान नौकरियों, छात्रों पर कार्रवाई, दंगों और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब देख चुकी है।

उन्होंने कहा कि आज किसान, गरीब, नौजवान, पिछड़ा और अगड़ा वर्ग ऐसा प्रदेश चाहता है, जहां शांति और सुरक्षा के साथ खेती, कारोबार और जीवनयापन किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बदले की राजनीति का कोई स्थान नहीं है।

योगी सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अखिलेश के चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर कहा कि सपा का संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव दर चुनाव हार के बाद सपा निर्वाचन आयोग, पुलिस व्यवस्था और संविधान पर सवाल उठाती है। पीडीए के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अधिकारियों का चयन जाति के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और क्षमता के आधार पर होता है।

उन्होंने राम मंदिर और कारसेवकों का जिक्र करते हुए सपा पर निशाना साधा। मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा नेताओं को एसी में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, भ्रम फैलाने और गलत आंकड़े जनता के सामने रखने की आदत हो गई है। यही उनका एजेंडा बन गया है। उन्होंने सपा से 2012 से 2017 तक के दंगों, अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराध और सरकारी नौकरियों से जुड़े आंकड़े जारी करने को कहा।

पीडीए के आरोपों पर दानिश ने कहा कि सपा नेता एसी कमरों से बाहर निकलेंगे तो उन्हें धरातल की हकीकत पता चलेगी। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कॉलरशिप का जिक्र करते हुए कहा कि पिछड़े, दलित और पसमांदा समाज को इनका लाभ मिल रहा है। एसआईआर पर सपा के सवालों को लेकर दानिश ने कहा कि सिर्फ सवाल खड़े करना और भ्रम फैलाना सपा का ‘मूल कैरेक्टर’ बन गया है।

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