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Monday,13-April-2026
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सिंगापुर में भारतीय कर्मचारी की समुद्र में गिरने से मौत

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Singapore

सिंगापुर में जुरोंग द्वीप के समुद्र में गिरने से 41 वर्षीय एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। इसी के साथ इस साल कार्यस्थल पर होने वाली मौतों की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की गई है। चैनल न्यूज एशिया ने बताया कि यह जानलेवा हादसा 25 नवंबर की सुबह करीब 11 बजे उस समय हुआ जब वह मर्लीमाऊ रोड स्थित सिंगापुर रिफाइनिंग कंपनी में काम कर रहा था।

वह समुद्र में गिर गया और उसी दिन उसका शरीर निकाल लिया गया। कर्मचारी सिंगापुर रिफाइनिंग कंपनी के प्लांट जनरल सर्विसेज के लिए काम करता था।

चैनल न्यूज एशिया ने मंगलवार को मंत्रालय के एक बयान के हवाले से बताया, “एमओएम (मिनिस्ट्री ऑफ मैनपॉवर) दुर्घटना की जांच कर रहा है और उसने नियोक्ता को घाटों पर संचालन बंद करने का आदेश जारी किया है।”

बयान में कहा गया, “एक सामान्य सुरक्षा उपाय के रूप में, समुद्र या बड़े जल निकायों के पास काम करने वालों को गिरने से बचने के लिए एक प्रतिक्रिया योजना होनी चाहिए।”

इस साल जून में, एक निर्माण स्थल पर मोबाइल क्रेन के कुछ हिस्सों के बीच कुचल जाने के बाद एक 32 वर्षीय भारतीय श्रमिक की मौत हो गई थी।

चैनल न्यूज एशिया ने बताया कि 2022 की पहली छमाही में, स्लिप, ट्रिप और गिरना सिंगापुर में कार्यस्थल की चोटों का प्रमुख कारण पाया गया, 2022 में आज तक कार्यस्थल पर 42 मौतें दर्ज की गईं जो पिछले चार वर्षो में दर्ज की गई सबसे अधिक हैं। अकेले अप्रैल माह में ही 10 मौतें हुई थीं।

2021 में कार्यस्थल पर 37 मौतें दर्ज की गई थीं इसके बाद 2020 में 30 और 2019 में 39 मौतें दर्ज की गईं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान का विश्वास हासिल करना ही अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति से निकलने का रास्ता: बाकेर कालिबाफ

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ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका यह है कि वह अपना निर्णय ले और ईरानी राष्ट्र का विश्वास हासिल करे।

उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तान की अपनी यात्रा से ईरान लौटते समय पत्रकारों को संबोधित करते हुए की, जहां उन्होंने अपने साथ आए प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ शांति वार्ता में भाग लिया था।

क़ालिबाफ ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ईरानी जनता का ऋणी है और उसे इसकी भरपाई के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।”

उन्होंने कहा, “अगर वे लड़ेंगे, तो हम भी लड़ेंगे और अगर वे तर्क के साथ आगे आते हैं, तो हम तर्क से जवाब देंगे। हम किसी भी धमकी के सामने झुकेंगे नहीं। वे हमारी इच्छाशक्ति को एक बार फिर परख सकते हैं और हम उन्हें और बड़ा सबक सिखाएंगे।”

क़ालिबाफ ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता को “बहुत गहन, गंभीर और चुनौतीपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि सक्षम विशेषज्ञों के सहयोग और व्यापक व विविध दृष्टिकोण के साथ, ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने देश की सद्भावना दिखाने के लिए “बेहतरीन पहल” तैयार कीं, “जिससे बातचीत में प्रगति हुई।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “हमने शुरू से ही घोषणा की थी कि हमें अमेरिकियों पर भरोसा नहीं है। हमारे अविश्वास की दीवार 77 साल पुरानी है। यह ऐसे समय में है जब 12 महीनों से भी कम समय में उन्होंने बातचीत के दौरान दो बार हम पर हमला किया। इसलिए, उन्हें ही हमारा विश्वास जीतना होगा।”

क़ालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ता।

ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों ने शनिवार और रविवार तड़के इस्लामाबाद में लंबी बातचीत की। ये वार्ताएं किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकीं। यह बातचीत 40 दिनों की लड़ाई के बाद बुधवार को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद हुई थी।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान ने बातचीत विफल होने के लिए यूएस को ठहराया दोषी, अमेरिका पर शर्तों को बदलने का लगाया आरोप

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ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने एक संभावित समझौते को अंतिम चरण में आकर पटरी से उतार दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने, बार-बार शर्तें बदलने (गोलपोस्ट शिफ्ट करने) और नाकाबंदी जैसी रणनीतियों का सहारा लिया, जिससे सहमति बनने की प्रक्रिया बाधित हो गई।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का दावा है कि प्रस्तावित “इस्लामाबाद समझौता” (एमओयू) लगभग तैयार था और दोनों पक्ष अंतिम सहमति के बेहद करीब थे।

उनका कहा है कि इन परिस्थितियों के चलते 21 घंटे तक चली गहन और मुश्किल बातचीत आखिरकार बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। तेहरान ने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत के दौरान शर्तों में लगातार बदलाव न किए जाते, तो यह डील संभव हो सकती थी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने 47 सालों में वॉशिंगटन के साथ अपनी सबसे ऊंचे स्तर की सीधी बातचीत ईमानदारी और चल रहे झगड़े को खत्म करने में मदद करने के इरादे से की है। अराघची ने दुख जताया कि “कोई सबक नहीं मिला”।

अराघची ने एक्स पर लिखा, “47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गहरी बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छी नीयत से बातचीत की। लेकिन जब ‘इस्लामाबाद एमओयू’ से बस कुछ इंच दूर थे, तो हमें गोलपोस्ट बदलने और ब्लॉकेड का सामना करना पड़ा। कोई सबक नहीं मिला। अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है। दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है।”

ईरानी विदेश मंत्री का यह कहना कि दोनों पक्ष एक समझौते को फाइनल करने से कुछ ही दूर थे, यह दिखाता है कि आखिरी स्टेज पर तनाव तेजी से बढ़ने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत सफलता के कितने करीब आ गई थी।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के साथ डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू की संभावना अभी भी है, बशर्ते वॉशिंगटन अपना नजरिया बदले। उन्होंने अमेरिका से “सर्वाधिकारवाद” को छोड़ने और ईरान के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की। ऐसा बदलाव एक समझौते का रास्ता बना सकता है। बता दें, सर्वाधिकारवाद एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली है, जिसमें राज्य सार्वजनिक और निजी जीवन के हर पहलू पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर एक पोस्ट में बातचीत करने वाले डेलिगेशन के सदस्यों की सराहना करते हुए कहा, “अगर अमेरिकी सरकार अपना सर्वाधिकारवाद छोड़ दे और ईरानी देश के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे।”

इस बीच, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू कर देगा।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ब्रिटेन अगले हफ्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत करेगा : रिपोर्ट

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ब्रिटेन अगले सप्ताह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी टोल के दोबारा जहाजों के लिए खोलने के मुद्दे पर अपने सहयोगी देशों के साथ अहम बातचीत करने जा रहा है। इस अहम समुद्री मार्ग को लेकर बढ़ते तनाव के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की मेजबानी में 2 अप्रैल को हुई वर्चुअल बैठक में शामिल देशों के प्रतिनिधियों के साथ यह अगली चर्चा होगी। इस बैठक में 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, साथ ही यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए समन्वित आर्थिक और राजनीतिक कदम उठाने पर विचार किया जाएगा। इसमें संभावित प्रतिबंध लगाने जैसे विकल्प भी शामिल हैं। साथ ही, स्ट्रेट में फंसे हजारों जहाजों और नाविकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के उपायों पर भी चर्चा होगी।

एक अधिकारी के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य मौजूदा तनाव को खत्म करने का स्थायी रास्ता तलाशना है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति भी बनाई जाएगी, ताकि वह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोल सके।

गौरतलब है कि इस मुद्दे पर ब्रिटेन द्वारा इस महीने आयोजित की जा रही यह तीसरी बैठक होगी। हालांकि, अगले सप्ताह होने वाली इस बैठक की सटीक तारीख अभी तय नहीं की गई है।

इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है। अब दोनों देश पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अहम बातचीत करने जा रहे हैं। लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास, अलग-अलग मांगें और दबाव के कारण बातचीत काफी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

द वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, दोनों देशों में सिर्फ एक ही बात समान है कि युद्ध से बाहर निकलने की जरूरत। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्तावों को ‘धोखा’ करार दिया है और आरोप लगाया है कि ईरान टैंकरों की आवाजाही में बाधा डाल रहा है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी शर्तें साफ कर दी हैं। मोहम्मद बाक़िर गालिबफ ने कहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले ‘ब्लॉक किए गए संपत्तियों’ की रिहाई जैसे मुद्दों का समाधान जरूरी है।

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