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Thursday,24-September-2026
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ऑफ फील्ड विवादों के बीच दक्षिण अफ्रीका दौरा कोच द्रविड़ के लिए चुनौतीपूर्ण

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भारतीय क्रिकेट ने पिछले कुछ महीनों में अहंकार, महत्वाकांक्षाएं, सत्ता संघर्ष और चौंकाने वाले खुलासे, यह सब देखा है। इस संकट की स्थिति में भारत के नए कोच ‘क्राइसिस मैन’ राहुल द्रविड़ के लिए दक्षिण अफ्रीका दौरा और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

दक्षिण अफ्रीका के दौरे से पहले अपने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोहली ने बुधवार को कहा था कि जब उन्होंने बोर्ड को टी20 कप्तान के रूप में पद छोड़ने के अपने फैसले के बारे में सूचित किया था, तब उन्हें पद पर बने रहने के लिए नहीं कहा गया था। उन्होंने गांगुली के उस बयान का भी खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि स्टार बल्लेबाज को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

गांगुली ने कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोहली से बात की थी जब वह टी20 कप्तान के रूप में पद छोड़ने का फैसला कर रहे थे और उनसे काम जारी रखने का आग्रह किया, लेकिन स्टार बल्लेबाज ने पद छोड़ने का फैसला किया।

टी20 कप्तानी पर भारत के टेस्ट कप्तान विराट कोहली के चौंकाने वाले खुलासे के एक दिन बाद, बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने गुरुवार को कहा कि वह इस मामले में कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को बोर्ड द्वारा निपटा जाएगा।

गांगुली ने कोलकाता में मीडियाकर्मियों से कहा था, “मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। हम इससे उचित तरीके से निपटेंगे, इसे बीसीसीआई पर छोड़ दें।”

कप्तानी के मुद्दे ने बीसीसीआई अध्यक्ष और भारत के टेस्ट कप्तान के बीच विवाद उत्पन्न कर दिया और इसके शुरू होते ही सोशल मीडिया पर पिछले दो दिनों से हैशटैग विराट बनाम बीसीसीआई ट्रेंड कर रहा है।

उस प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले विराट और रोहित शर्मा के रिश्तों को लेकर विवाद होने की संभावना जताई जा रही थी और अब यह विवाद कोहली बनाम गांगुली हो गया है और इसके बीच भारतीय टीम भले ही सीरीज के लिए दक्षिण अफ्रीका पहुंच गई हो, लेकिन विवादों ने अभी पीछा नहीं छोड़ा है।

पिछले एक हफ्ते में सामने आए सभी ड्रामे के बाद, भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने राहुल द्रविड़ के लिए खेद महसूस किया है। लेकिन, भारतीय क्रिकेट की राजनीति उनके लिए नई नहीं है। वास्तव में, गांगुली-ग्रेग चैपल के विवाद के दौरान द्रविड़ क्राइसिस मैन में से एक थे।

और अब नए कोच के कंधों पर टीम इंडिया को सभी ऑफ-फील्ड विवादों से उबारने और खिलाड़ियों को प्रोटियाज के खिलाफ मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

विराट कोहली के नेतृत्व वाले भारत का 2021 टी20 विश्व कप के पहले दो मैचों में खराब प्रदर्शन रहा था और वे मेगा-इवेंट के अगले दौर से ही बाहर हो गए थे। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि एक असुरक्षित ड्रेसिंग रूम का माहौल उस टूर्नामेंट में भारत की हार के प्रमुख कारकों में से एक था।

उनके अनुसार, एक बार जब कोहली ने आयोजन शुरू होने से पहले अपनी टी20 कप्तानी छोड़ने का फैसला किया, तो खिलाड़ी किसी तरह अपने काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे थे।

द्रविड़, जो हमेशा काम की नैतिकता में विश्वास करते हैं और अपने खेल के दिनों में एक टीम मैन थे। वह चाहते हैं कि उनके खिलाड़ी अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय काम पर फोकस करें।

हालांकि, चोटों, चयन मुद्दों और नाजुक बल्लेबाजी क्रम, कठिन खेल परिस्थितियों और दक्षिण अफ्रीका में कोविड-19 के डर के कारण प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपलब्धता को देखते हुए ‘मिस्टर डिपेंडेबल’ के लिए यह एक आसान काम नहीं होगा।

भारत के गौरवशाली क्रिकेट इतिहास में दक्षिण अफ्रीका एकमात्र देश बना हुआ है जहां ‘मेन इन ब्लू’ ने अभी तक एक भी टेस्ट सीरीज नहीं जीती है। हां, मौजूदा प्रोटियाज क्रिकेट टीम कुछ अनुभवहीन है, लेकिन वे अपने घरेलू मैदान पर मजबूती से मुकाबला करेंगे।

विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे टेस्ट क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजी के स्तंभ हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। वहीं, कगिसो रबाडा और एनरिक नॉर्टजे इन अनुभवी पेशेवरों खिलाड़ियों को चुनौती देते नजर आएंगे।

यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या कोहली और द्रविड़ की जोड़ी में संघर्ष कर रहे रहाणे और पुजारा को प्लेइंग इलेवन में शामिल करते हैं या नहीं, खासकर तब जब श्रेयस अय्यर और हनुमा विहारी ने मौका मिलने पर अच्छा प्रदर्शन किया हो।

भारत को रोहित शर्मा, शुभमन गिल और रवींद्र जडेजा की भी कमी खलेगी, जो चोटों के कारण टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं और उनकी अनुपस्थिति में नए खिलाड़ियों को उनकी जगह भर पाना आसान नहीं होगा।

लेकिन, 48 वर्षीय कोच की सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक संघर्षों को सुलझाना होगा। उनके के लिए रेनबो नेशन में जीतने के लिए एक खुश कप्तान और टीम में सकारात्मक माहौल को बनाना जरूरी होगा।

द्रविड़ ‘द वॉल ऑफ इंडियन टीम’ को सभी अनिश्चितताओं और विवादों के बीच दक्षिण अफ्रीका में अपने खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

अंतरराष्ट्रीय

कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

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कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।

कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।

इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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