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लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 577 अंक टूटा
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मुंबई, 9 दिसंबर: भारतीय बेंचमार्क सूचकांक मंगलवार को लाल निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विस, फार्मा, एफएमसीजी और मेटल सभी सेक्टर में बिकवाली देखी जा रही थी।
सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर सेंसेक्स 577.81 अंक या 0.68 प्रतिशत की गिरावट के बाद 84,524.88 स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 191.15 अंक या 0.74 प्रतिशत की गिरावट के बाद 25,769 स्तर पर बना हुआ था।
निफ्टी बैंक 225.30 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,013.25 स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 495.55 अंक या 0.83 प्रतिशत की गिरावट के बाद 58,992.55 स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 149.30 अंक या 0.88 प्रतिशत के नुकसान के साथ 16,902.35 स्तर पर था।
बाजार के जानकारों ने कहा, “हम जो देख पा रहे हैं वह यह है कि फंडामेंटल्स बाजार पर असर डाल रहे हैं। मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट में ओवरवैल्यूड स्टॉक बेचे जा रहे हैं, जिससे उनकी शेयर कीमतों पर असर पड़ रहा है। इस ट्रेंड को पूरा होने में अभी थोड़ा और समय लगेगा। मिडकैप में और करेक्शन से लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए इस सेगमेंट में धीरे-धीरे हाई क्वालिटी ग्रोथ स्टॉक जमा करने के अवसर पेश होंगे। डिफेंस स्टॉक अब वैल्यू दे रहे हैं।”
इस बीच सेंसेक्स पैक में एशियन पेंट्स, इटरनल, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बीईएल, टाटा स्टील, टीसीएस, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, टीएमपीवी, बजाज फिनसर्व और इंफोसिस टॉप लूजर्स थे। वहीं, भारती एयरटेल, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टाइटन टॉप गेनर्स थे।
एशियाई बाजारों में बैंकॉक और जापान हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं, जकार्ता, सोल, चीन और हांग कांग लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजार आखिरी कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुए। डाउ जोंस 0.45 प्रतिशत या 215.67 अंक की गिरावट के बाद 47,739.32 पर बंद हुआ। वहीं, एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.35 प्रतिशत या 23.89 अंक के नुकसान के बाद 6,846.51स्तर और नैस्डेक 0.14 प्रतिशत या 32.22 अंक के नुकसान के बाद 23,545.90 पर बंद हुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 8 दिसंबर को शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने 655.59 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) इस कारोबारी दिन शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 2,542.49 करोड़ रुपए के शेयरों की खरीदारी की।
व्यापार
सेंसेक्स करीब 1,800 अंक फिसला, इन कारणों के चलते धड़ाम हुआ शेयर बाजार

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मुंबई, 23 मार्च : भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। दोपहर 12:37 पर सेंसेक्स 1,772 अंक या 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,803 और निफ्टी 565 अंक या 2.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,549 पर था।
बाजार में चौतरफा गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2,074 अंक या 3.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 52,789 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 648.70 अंक या 4.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,070 पर था।
इसके साथ करीब सभी सूचकांक लाल निशान में बने हुए हैं, जिसमें कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल टॉप लूजर्स थे।
बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव का बढ़ना है। सप्ताहांत में तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए 48 घंटे की समय सीमा दी और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर गंभीर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। वहीं, तेहरान ने प्रमुख क्षेत्रीय संपत्तियों पर हमला करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद करने की धमकी देकर जवाब दिया।
अब यह संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। वहीं, इसके अंत के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिससे बाजार को लेकर निवेशक सतर्क हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से खराब संकेतों ने भी भारतीय बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ने का काम किया है। टोक्यो, सोल, हांगकांग, शंघाई और बैंकॉक के बाजारों में 2 प्रतिशत से लेकर 6.5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी बाजार का मूड बिगाड़ने का काम किया है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर ब्रेंट क्रूड 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 113 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.15 प्रतिशत की तेजी के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल पर था।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाने का दाम किया है। आखिरी कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने 5,518.39 करोड़ रुपए की इक्विटी में निकासी की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) ने 5,706.23 करोड़ रुपए का निवेश किया था।
व्यापार
आईईए प्रमुख ने पश्चिम एशिया में तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बताया खतरा, बोले- ‘कोई भी देश संकट से नहीं बचेगा’

नई दिल्ली, 23 मार्च : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी हमलों का असर अब दुनिया के अन्य देशों पर तेजी से देखने को मिल रहा है। दुनिया के तमाम देश ईरान से तुरंत हमले रोकने और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खोलने की अपील कर रहे हैं। ताजा हालातों के बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के चीफ फतिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा संसाधनों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा है।
आईईए चीफ ने कहा कि पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात से दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को गंभीर खतरा है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यक्रम के दौरान आईईए चीफ बिरोल ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था आज एक बहुत बड़े खतरे का सामना कर रही है और मुझे पूरी उम्मीद है कि यह मामला जल्द से जल्द हल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसका असर कुछ देशों की अर्थव्यवस्था तक ही सीमित नहीं रहेगा। कोई भी देश इस संकट के असर से बचा नहीं रहेगा। बता दें, अमेरिका-इजरायल और ईरान की इस लड़ाई ने ग्लोबल तेल मार्केट के इतिहास में सबसे बड़ी सप्लाई में रुकावट पैदा कर दी है। ईरान की तरफ से जारी कार्रवाई की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग बहुत कम हो गई है।
बता दें, होर्मुज स्ट्रेट विश्व व्यापार के लिए एक अहम रास्ता है। आम तौर पर दुनिया भर में तेल की खपत का लगभग 20 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से ही जा रहा है। हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और तेल प्रोडक्ट स्ट्रेट से गुजरते हैं।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक नहीं है और पानी के रास्ते में नेविगेशन जारी है। युद्ध के हालात की वजह से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने हमेशा नेविगेशन की आजादी और समुद्री सुरक्षा का सम्मान किया है और सालों से इन उसूलों को बनाए रखने के लिए काम किया है।
पिछले हफ्ते, आईईए ने सरकारों, बिजनेस और घरों के लिए डिमांड-साइड एक्शन की एक रेंज तय की। इसके अनुसार घर से काम करना और हवाई यात्रा से बचना शामिल है, ताकि कंज्यूमर्स पर पड़ने वाले आर्थिक असर को कम किया जा सके।
डिमांड कम करने के लिए तुरंत किए जाने वाले एक्शन में, जहां तक हो सके घर से काम करना शामिल है। इसके अलावा आने-जाने के लिए तेल के इस्तेमाल को कम करना, खासकर जहां नौकरियां रिमोट वर्क के लिए सही हों। जहां तक हो सके, खाना पकाने के दूसरे मॉडर्न तरीकों पर स्विच करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक कुकिंग और दूसरे मॉडर्न ऑप्शन को बढ़ावा देने से एलपीजी पर निर्भरता कम हो सकती है।
बिरोल ने कहा, “मिडिल ईस्ट में युद्ध एक बड़ा एनर्जी संकट पैदा कर रहा है, जिसमें ग्लोबल ऑयल मार्केट के इतिहास में सबसे बड़ी सप्लाई में रुकावट शामिल है। जल्दी समाधान न होने पर, एनर्जी मार्केट और अर्थव्यवस्था पर असर और भी गंभीर होते जाएंगे।”
राष्ट्रीय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक पेश करेंगी

नई दिल्ली, 23 मार्च : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश करेंगी।
वित्त विधेयक का उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए केंद्र सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को लागू करना है। वित्त मंत्री विधेयक 2026-27 पर विचार-विमर्श के लिए प्रस्ताव रखेंगे और इसे पारित कराने का प्रयास करेंगे।
यह आगामी वर्ष के लिए सरकार की बजटीय योजनाओं और आर्थिक नीतियों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
संसद के एजेंडा के अनुसार, वित्त मंत्री लोकसभा में प्रमुख कॉर्पोरेट कानूनों में संशोधन के लिए एक बिल भी पेश करेंगे।
प्रस्तावित कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 में सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन का प्रावधान है।
कंपनी अधिनियम निगमन, कॉर्पोरेट प्रशासन, प्रकटीकरण और विघटन को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम साझेदारों के लिए सीमित देयता के साथ अधिक लचीला ढांचा प्रदान करता है।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दे दी, जिससे चालू संसदीय सत्र में आईबीसी संशोधन विधेयक पेश करने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
प्रस्तावित विधायी संशोधन भारतीय जनता पार्टी के सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली एक विशेष संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति को मौजूदा दिवालियापन ढांचे की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था। समीक्षा पूरी होने पर, समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया को गति देने पर विशेष जोर दिया गया था।
वर्तमान व्यवस्था में व्याप्त विलंबों से निपटने के लिए संसदीय समिति ने दिवालियापन मामलों के निपटारे हेतु सख्त समयसीमा लागू करने की सिफारिश की है। सख्त समयसीमा के साथ-साथ समिति ने लेनदारों की समिति (सीओसी) को अधिक शक्तियां प्रदान करने का भी सुझाव दिया है, जिससे ऋणदाताओं को मामलों का त्वरित और निर्णायक समाधान करने में सहायता मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित संशोधन दो प्रमुख संरचनात्मक ढांचे पेश करके मौजूदा संहिता में मौजूद कमियों को भी दूर करते हैं। सबसे पहले, चयन समिति ने अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों और विदेशी लेनदारों वाली संकटग्रस्त कंपनियों के बेहतर प्रबंधन के लिए सीमा पार दिवालियापन के लिए एक समर्पित तंत्र का प्रस्ताव दिया है।
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