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Monday,16-March-2026
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भारतीय परिवार बन रहे निवेशक, बैंकों में जमा राशि में भारी बढ़ोतरी : एसबीआई रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 12 जनवरी: वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के बीच भारतीय बैंकों में जमा राशि और कर्ज की रकम लगभग तीन गुना हो गई है। इससे यह साफ होता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत हुआ है और कर्ज देने की प्रक्रिया फिर से तेज हुई है। सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से 2025 के दौरान बैंकों में जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। वहीं, बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 77 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत ही नहीं कर रहे, बल्कि निवेश की ओर भी रुख करने लगे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है।

लंबे समय की बात करें तो वित्त वर्ष 2005 से 2025 के बीच बैंकों में जमा राशि 18.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। इसी तरह बैंकों का कर्ज 11.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गया। इससे साफ है कि बैंकिंग प्रणाली का आकार काफी बढ़ गया है।

हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्ज देने की रफ्तार जमा की तुलना में तेज रही है, जिससे कर्ज और जमा का अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 69 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 79 प्रतिशत हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से ज्यादा कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा कम हो गया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे ज्यादा कर्ज देने को तैयार हैं।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपए से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपए हो गया।

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंकों का मुनाफा और बेहतर होगा। त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कर्ज में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) आवश्यकता से मिलने वाले फायदे और असुरक्षित व एमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट के मामलों के धीरे-धीरे सामान्य होने से बैंकों को फायदा मिलेगा।

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सोने की चमक फीकी, चांदी का दाम 3 हजार रुपए से अधिक गिरा

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मुंबई, 16 मार्च : सोने और चांदी की कीमत में सोमवार को कमजोरी देखी जा रही है, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 3,500 रुपए तक कम हो गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएस) पर 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोना 1,192 रुपए या 0.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,57,274 रुपए पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,57,347 का उच्चतम स्तर और 1,56,665 रुपए का न्यूनतम स्तर बनाया है।

5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी का दाम 3,435 रुपए या 1.19 प्रतिशत कम होकर 2,56,340 रुपए था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,54,367 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,56,444 रुपए का उच्चतम स्तर छूआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में गिरावट देखी जा रही है। सोना 0.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 5,028 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80.70 डॉलर प्रति औंस पर थी।

जानकारों के मुताबिक, सोने की कीमत में गिरावट की वजह 17 मार्च से शुरू होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक है, जिसका परिणाम 18 मार्च को आएगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए अमेरिकी फेड ब्याज दरों को यथावत रख सकता है, जिसके चलते इस बैठक से पहले निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

इस बैठक के निर्णय सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

इसके अलावा, कच्चे तेल के लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण डॉलर की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।

वहीं, ईरान संघर्ष में कम होने के कोई संकेत नहीं दिखे, क्योंकि सप्ताहांत में अमेरिका और इजरायल ने एक प्रमुख निर्यात टर्मिनल पर हमला किया, जिसके बाद तेहरान की ओर से कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इससे सोने और चांदी की कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।

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मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती के चलते इस हफ्ते सोने-चांदी की कीमतों आई गिरावट, गोल्ड 0.73 प्रतिशत फिसला

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नई दिल्ली, 14 मार्च: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों के चलते वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच इस सप्ताह सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

पूरे सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि मल्टी-वीक हाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।

शुक्रवार को एमसीएक्स पर गोल्ड फरवरी फ्यूचर्स 0.04 प्रतिशत गिर गया, जबकि एमसीएक्स सिल्वर मार्च फ्यूचर्स में 3.24 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। फिलहाल सोने का फ्यूचर भाव लगभग 1,58,400 रुपए और चांदी का फ्यूचर भाव 2,59,279 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,58,399 रुपए प्रति 10 ग्राम रही, जो सोमवार को 1,59,568 रुपए थी। वहीं चांदी की कीमत शुक्रवार को 2,60,488 रुपए प्रति किलोग्राम रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के कारण कीमती धातुओं की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिक नहीं पाईं। हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश की मांग अभी भी सोने को समर्थन दे रही है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में सोना महंगाई से बचाव के एक सुरक्षित निवेश के रूप में निवेशकों को आकर्षित करता है।

उन्होंने बताया कि कई कमोडिटी में बीच-बीच में मुनाफावसूली और इंट्राडे उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के आसपास बाजार में सक्रियता बनी रही।

इसी बीच अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से ईरान के करीब 90 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है। इस घटना से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कारण पिछले सप्ताह सोना और चांदी की कीमतों में तेजी सीमित रही, जबकि आमतौर पर युद्ध जैसी स्थितियों में इनकी कीमतें बढ़ती हैं।

तकनीकी स्तर की बात करें तो एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1,63,000 से 1,63,200 रुपए का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 1,58,000 से 1,57,500 रुपए का स्तर मजबूत डिमांड जोन बना हुआ है।

वहीं एमसीएक्स सिल्वर इस सप्ताह 2,80,000 से 2,92,000 रुपए के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिक नहीं पाया और उसमें गिरावट जारी रही। विश्लेषकों के अनुसार 2,58,000 से 2,54,000 रुपए का स्तर चांदी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध की खबरों, अमेरिकी डॉलर की दर और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से माहौल अस्थिर बना हुआ है, जिसका असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला।

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मध्य पूर्व तनाव का असर: इस हफ्ते करीब 6 प्रतिशत गिरा भारतीय शेयर बाजार, एक ही दिन में निवेशकों के डूबे करीब 10 लाख करोड़ रुपए

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मुंबई, 14 मार्च : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। इस सप्ताह प्रमुख घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 6 प्रतिशत तक गिर गए, जिससे बाजार में लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा।

सप्ताह के दौरान निफ्टी में 5.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और आखिरी कारोबारी दिन यह 2.06 प्रतिशत टूटकर 23,151 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,564 पर बंद हुआ।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए बढ़ती आर्थिक चिंताओं के कारण बाजार में यह बड़ी गिरावट देखने को मिली।

इस दौरान निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 10 से 11 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। इस इंडेक्स के लगभग सभी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

इस तेज गिरावट के कारण एक ही कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपए डूब गए।

वहीं व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 4.59 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.66 प्रतिशत गिर गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट स्तर 23,000 के आसपास है, जबकि 23,300 और 23,500 के स्तर पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 53,500 पहला सपोर्ट स्तर माना जा रहा है, इसके बाद 53,000 का स्तर महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर 54,000 और 54,300 के स्तर को रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

विश्लेषकों ने यह भी बताया कि इंडिया वीआईएक्स 22 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है, जो बाजार में बढ़ते डर और आने वाले समय में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देता है।

विश्लेषकों का कहना है कि एलएनजी और एलपीजी की संभावित कमी से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है, जबकि सीएनजी की उपलब्धता पर दबाव पड़ने से उपभोक्ताओं की मांग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, खासकर उन शहरी इलाकों में जहां सीएनजी वाहन ज्यादा इस्तेमाल होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को बढ़ाती हैं और इससे रुपए पर भी दबाव पड़ता है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर होती है।

इसी बीच भारतीय रुपया लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर रहा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

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