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Wednesday,13-May-2026
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महत्वपूर्ण फोनवार्ता बाद भारत, चीन मतभेद को विवाद न बनाने पर सहमत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सप्ताहांत में हुए लद्दाख के अग्रिम इलाकों के दौरे और लगातार बनाए जा रहे कूटनीतिक दबाव के चलते लगता है कि भारत-चीन सीमा गतिरोध का कोई समाधान निकल आया है। यह बात ऐसे समय में सामने आई है, जब एक दिन पहले लद्दाख में एलएसी पर चार टकराव बिंदुओं में से तीन पर सेनाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत और चीन में सीमा पर जारी तनाव के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।

भारत और चीन के बीच लंबे वक्त से सीमा विवाद चल रहा है। इसे सुलझाने के लिए दोनों देशों की ओर से प्रतिनिधि तय किए गए हैं, भारत की ओर से अजीत डोभाल स्थायी प्रतिनिधि हैं।

सीमा पर चल रहे गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने रविवार को भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों पर विचारों का स्पष्टता एवं गहनता के साथ आदान-प्रदान किया।

हालांकि सोमवार को हुई वार्ता पर चीन की ओर से जो बयान आया है, उसमें वह अपनी पहले बताई गई स्थिति से हटता नजर नहीं आ रहा है, मगर साथ ही उसने दोनों पक्षों से रणनीतिक निर्णयों का पालन करने और महत्वपूर्ण रूप से मतभेदों को विवाद नहीं बनाने पर जोर दिया है।

वांग ने कहा, कुछ दिनों पहले चीन और भारत के बीच गलवान घाटी में सीमा के पश्चिमी हिस्से में जो कुछ हुआ, वह बहुत स्पष्ट है। चीन अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और सीमा क्षेत्र का शांति के साथ प्रभावी ढंग से बचाव करता रहेगा।

चीनी मंत्री ने जोर देकर कहा कि विकास और सशक्तिकरण चीन और भारत की पहली प्राथमिकता है और चीन और भारत इस सामान्य दिशा में दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को साझा करते हैं। दोनों पक्षों को हमेशा रणनीतिक निर्णयों का पालन करना चाहिए, जो एक-दूसरे के लिए खतरा पैदा न करते हुए विकास के अवसर प्रदान करे।

चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में वर्तमान की जटिल स्थिति को सही करने के लिए दोनों देशों को मिलकर प्रयास करने चाहिए और जितनी जल्दी हो सके, उन्हें दूर करना चाहिए। आशा है कि भारत और चीन एक ही दिशा में आगे बढ़ेंगे और साथ ही सही ढंग से जनता का मार्गदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच मौजूदा सीमा की स्थिति के बारे में खुलकर और गहराई से विचारों का आदान-प्रदान किया और सकारात्मक सहमति तक पहुंचे हैं।

दोनों पक्ष दोनों देशों के नेताओं द्वारा महत्वपूर्ण सहमति का पालन करने के लिए सहमत हैं और मानते हैं कि सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इस बात पर जोर दिया गया कि मतभेद बढ़ने से बचने के लिए सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों में एक उपयुक्त स्थिति में रखा जाना चाहिए।

इसके साथ ही दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दे पर दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित समझौतों के पालन की पुष्टि की है और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति को आसान बनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।

दोनों पक्ष विशेष प्रतिनिधि बैठक तंत्र के माध्यम से संचार को मजबूत करने के लिए सहमत हुए हैं। दोनों पक्षों के बीच गतिरोध को कम करने के लिए कई बैठकें हुई हैं।

दोनों पक्ष दोनों देशों के बीच हाल ही में हुई सैन्य और राजनयिक बैठक में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं और बातचीत और परामर्श आगे भी जारी रखने के लिए सहमत हैं। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया है कि सैन्य स्तर पर दोनों सीमा रक्षा बलों के स्तर पर सहमति बनी रहनी चाहिए।

इसके अलावा दोनों पक्षों ने जितनी जल्दी हो सके अग्रिम स्थानों पर तैनात सैनिकों को हटाने पर भी सहमति जताई है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

‘ट्रंप का पूरा कार्यकाल थेरेपी सेशन है’, ईरान के नए प्रस्ताव को खारिज करने पर ईरानी दूतावास ने कसा तंज

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ईरान ने अमेरिका के 14 पाइंट वाले प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया और एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव वाशिंगटन को भेजा। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए ड्राफ्ट को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं भारत में ईरान के दूतावास ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अमेरिका के प्लान पर ईरान के जवाब की डिटेल्स, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘मंजूर नहीं’ कहा। अमेरिका के प्लान के जवाब में पेश किया गया ईरान का प्रस्ताव, ईरानी देश के मूल अधिकारों पर जोर देता है। ईरान ने अमेरिका के प्लान को रिजेक्ट कर दिया है। अगर ईरान प्रस्ताव स्वीकार कर लेता, तो इसका मतलब होता कि तेहरान ट्रंप की बहुत ज्यादा मांगों के आगे झुक जाता है।”

ईरानी दूतावास ने आगे कहा, “ईरान का प्लान इस बात पर जोर देता है कि अमेरिका को युद्ध का हर्जाना देना जरूरी है और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को सुनिश्चित करता है। ईरान ने बैन खत्म करने और देश के जब्त किए गए एसेट्स और संपत्तियों को रिलीज करने की जरूरत पर जोर दिया है।”

वहीं घाना में ईरानी दूतावास ने ट्रंप के एक बयान पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उन्होंने कुछ ‘पढ़ा’ है, जबकि वास्तविकता यह है कि उस सामग्री का मूल सार उनके लिए अब भी एक रहस्य बना हुआ है। इसके बावजूद वे इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि उन्हें वह पसंद नहीं आया। कहा जा रहा है कि ट्रंप केवल वैश्विक ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। व्हाइट हाउस के आंतरिक सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है कि उनका पूरा कार्यकाल दरअसल एक ‘मल्टी-बिलियन डॉलर थेरेपी सेशन’ के अतिरिक्त और कुछ नहीं है, एक ऐसा उपचार, जो उन्हें उनके बचपन के दिनों में कभी प्राप्त नहीं हो सका।

दरअसल, ईरान की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया था कि मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ का जवाब पढ़ा है। मुझे यह पसंद नहीं आया, बिल्कुल मंजूर नहीं!

ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अमेरिका के प्लान का मतलब है ईरान का ट्रंप के लालच के आगे सरेंडर करना और तेहरान का जवाब ईरान के बुनियादी अधिकारों पर जोर देता है।

इसके साथ ही ईरान के नए प्रस्ताव में अमेरिका द्वारा युद्ध के मुआवजे की जरूरत और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता पर भी जोर दिया गया है। वहीं प्रतिबंधों को खत्म करने और देश के जब्त किए गए पैसे और संपत्ति को वापस करने की जरूरत पर भी जोर देता है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

यूएन प्रमुख ने यूक्रेन व रूस के बीच युद्धविराम और कैदियों के आदान-प्रदान का किया स्वागत

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता ने कहा कि यूक्रेन व रूस के बीच तीन दिवसीय युद्धविराम और कैदियों के आदान-प्रदान का स्वागत किया है।

गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने बयान में कहा, “महासचिव ने यूएन चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित यूएन प्रस्तावों के अनुरूप, न्यायपूर्ण, स्थायी और व्यापक शांति की दिशा में तत्काल, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम की अपील को दोहराया।”

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, रूस और यूक्रेन 9 मई से 11 मई तक युद्धविराम और “हजार के बदले हजार” कैदियों के आदान-प्रदान पर सहमत हुए।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिवसीय युद्धविराम पर सहमति हो गई है, जिसे उन्होंने इस युद्ध को समाप्त करने की दिशा में संभावित कदम बताया।

ट्रम्प ने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिवसीय युद्धविराम (9, 10 व 11 मई) होगा।”

उन्होंने कहा कि युद्धविराम रूस के विजय दिवस समारोह के साथ होगा और द्वितीय विश्व युद्ध में यूक्रेन की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “रूस में विजय दिवस का जश्न मनाया जा रहा है लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध में यूक्रेन की भी बड़ी भूमिका थी।”

ट्रम्प के अनुसार, समझौते में सक्रिय युद्ध अभियानों को रोकना शामिल है। इस युद्धविराम में सभी प्रकार की सैन्य गतिविधियों को फिलहाल निलंबित करना शामिल होगा।

ट्रम्प ने कहा कि दोनों पक्ष बड़ी संख्या में कैदियों की अदला-बदली पर भी सहमत हुए हैं। साथ ही, दोनों देशों से 1,000 कैदियों की अदला-बदली भी होगी।

उन्होंने कहा कि यह पहल सीधे उनकी ओर से की गई थी। ट्रम्प ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की दोनों को शर्तों पर सहमत होने के लिए आभार व्यक्त किया।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

तुर्किए के यूएन दूत ने फिलिस्तीन में इजरायल के ‘औपनिवेशीकरण उपायों’ की आलोचना की

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संयुक्त राष्ट्र में तुर्किए के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत अहमत यिल्डिज ने वेस्ट बैंक समेत फिलिस्तीनी इलाकों में इजरायल के ‘औपनिवेशीकरण’ के तरीकों की बुराई की और कहा कि उसके गैर-कानूनी कामों को रोका जाना चाहिए।

यिल्डिज ने वेस्ट बैंक और ईस्ट येरुशलम पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अरिया-फॉर्मूला मीटिंग के दौरान ओआईसी ग्रुप के चेयरमैन के तौर पर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन ग्रुप का बयान दिया।

यह मीटिंग डेनमार्क, फ्रांस, ग्रीस, लातविया और ब्रिटेन के स्थायी मिशन के प्रस्ताव पर हुई थी। यिल्डिज ने फिलिस्तीनी इलाकों में इजरायल की गैर-कानूनी कार्रवाइयों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि इजरायल के ‘फिलिस्तीन के लोगों, अधिकारों, जमीन, सुरक्षा और सम्मान पर लगातार हमलों’ की वजह से इस मुद्दे की असली वजहों को सुलझाना बहुत जरूरी हो गया है।

यिल्डिज ने यूएनएससी के प्रस्ताव 2803 और 2334 के साथ-साथ कई दूसरे जरूरी यूएन प्रस्तावों को याद करते हुए कहा कि वे उन बुनियादी मुद्दों को सुलझाते हैं जिन्हें उन्होंने लंबे समय से चल रहे अन्याय के तौर पर बताया।

यिल्डिज ने कहा, “हम सभी औपनिवेशीकरण के तरीकों की निंदा करते हैं, जिसमें फिलिस्तीनी घरों पर कब्जा करना और उन्हें गिराना और फिलिस्तीनी परिवारों को निकालना शामिल है। ऐसे गैर-कानूनी कामों को रोकना होगा।”

ओआईसी की तरफ से बोलते हुए यिल्डिज ने गाजा सीजफायर का पालन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इजरायल हर दिन सीजफायर का उल्लंघन करता है। उन्होंने गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए व्यापक प्लान को ध्यान से लागू करने की भी मांग की।

यिल्डिज ने जोर देकर कहा कि फिलिस्तीनी मुद्दा एक अकेला और ऐसा मामला है जिसे बांटा नहीं जा सकता। उन्होंने ईस्ट यरुशलम समेत वेस्ट बैंक में इजरायल के गैरकानूनी कामों की कड़ी निंदा की। बस्तियों के विस्तार, कब्जे की योजनाओं, सेटलर टेररिज्म और इस्लाम और ईसाई धर्म की पवित्र जगहों, खासकर अल-अक्सा मस्जिद के खिलाफ उल्लंघन का जिक्र किया।

यिल्डिज ने कहा, “हम ईस्ट यरुशलम समेत वेस्ट बैंक में इजरायल के गैर-कानूनी कामों, बस्तियों के विस्तार, कब्जे की योजनाओं, सेटलर टेररिज्म और इस्लाम और ईसाई धर्म की पवित्र जगहों, खासकर अल-अक्सा मस्जिद के खिलाफ उल्लंघन की कड़ी निंदा करते हैं।”

बता दें कि सेटलर टेररिज्म का मतलब वेस्ट बैंक में रह रहे इजरायली निवासियों (सेटलर) द्वारा फिलिस्तीनी नागरिकों, उनकी संपत्तियों और फसलों पर की जाने वाली हिंसा है।

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