अंतरराष्ट्रीय
भारत ने पहले टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज को 6 विकेट से हराया, सीरीज में 1-0 से बनाई बढ़त
कप्तान रोहित (40) और सूर्यकुमार यादव (नाबाद 34) की शानदार पारी की वजह से यहां कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर बुधवार को खेले गए पहले टी20 मैच में भारत ने वेस्टइंडीज को छह विकेट से हरा दिया। इसी के साथ तीन टी20 मैचों की सीरीज में भारत ने 1-0 से बढ़त बना ली। वेस्टइंडीज के 157 रनों के जवाब में भारत ने चार विकेट खोकर 162 रन बनाकर लक्ष्य को हासिल कर लिया। वेस्टइंडीज की ओर से रोस्टन चेस ने दो विकेट लिया। वहीं, फैबियन एलेन और शेलडन कॉटरेल ने एक-एक विकेट अपने नाम किया।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत शानदार रही, क्योंकि पावरप्ले में सलामी बल्लेबाज कप्तान रोहित शर्मा और ईशान किशन ने बिना कोई विकेट गंवाए 58 रन बना लिए। भारतीय टीम को जीतने के लिए अभी भी 100 रनों की जरूरत थी, कप्तान रोहित विरोधी टीम के गेंदबाजों की बुरी तरह पिटाई कर रहे थे। वहीं ईशान को रन बनाने में संघर्ष करना पड़ रहा था।
लेकिन तेज गति से रन बनाने के चक्कर में कप्तान रोहित चार चौके और तीन छक्के की मदद से 19 गेंदों में 40 रन बनाकर रोस्टन चेस की गेंद पर आउट हो गए। इसके साथ उनकी और किशन के बीच 45 गेंदों में 65 रनों की साझेदारी का भी अंत हो गया। 7.3 ओवरों के बाद भारत का स्कोर एक विकेट के नुकसान पर 64 रन पहुंच चुका था।
तीसरे नंबर पर आए विराट कोहली ने किशन के साथ मिलकर लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया। 10 ओवरों के बार भारतीय टीम का स्कोर एक विकेट के नुकसान पर 80 रन पहुंच गया था, जीतने के लिए 78 रनों अभी भी आवश्यकता थी। इस दौरान किशन चार चौके की मदद से 42 गेंदों में 35 रन बनाकर चेस की गेंद पर फैबियन एलेन को कैच थमा बैठे। इसके बाद कोहली (17) भी बिना कोई कमाल दिखाए पवेलियन लौट गए। जिससे 12.3 ओवरों में भारत का स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर 95 रन पर पहुंच गया।
चौथे और पांचवें नंबर पर आए ऋषभ पंत और सुर्यकुमार यादव ने लड़खड़ाती पारी को संभालने का काम किया। लेकिन पंत भी 8 रन बनाकर कॉटरेल की गेंद पर आउट होकर लौट गए। इसके बाद आए वेंकटेश अय्यर ने सूर्यकुमार के साथ मिलकर भारत को आखिर में जीत दिलाई। सूर्यकुमार (34) और अय्यर (24) नाबाद रनों की वजह से भारत ने 18.5 ओवरों में चार विकेट खोकर 162 रन बनाकर लक्ष्य पूरा कर लिया।
इससे पहले, टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम की शुरुआत अच्छी रही, क्योंकि उन्होंने पावरप्ले में एक विकेट खोकर 50 के करीब रन जोड़े। इस दौरान, सलामी बल्लेबाज ब्रैंडन किंग (4) भुवनेश्वर के पहले ही ओवर में आउट होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद काइल मेयर्स ने ताबड़तोड़ 7 चौकों की मदद से 31 रन बनाकर चहल की गेंद पर एलबीडब्ल्यू हो गए और इसी के साथ 36 गेंदों में 47 रनों की साझेदारी का अंत हो गया। इस समय तक वेस्टइंडीज सात ओवरों के बाद दो विकेट के नुकसान पर 51 रन बना लिए थे।
इस बीच, मैदान पर निकोलस पूरन और रोस्टन चेस ने पारी को आगे बढ़ाया और टीम के लिए कुछ बड़े शॉट खेले, जिससे स्कोर बोर्ड पर 10 ओवरों के बाद दो विकेट के नुकसान पर 71 रन हो चुके थे। लेकिन डेब्यू कर रहे रवि बिश्नोई ने अपना पहला विकेट चेस (4) को आउट करके प्राप्त किया। उसी ओवर में रोवमैन पॉवेल (2) को बिश्नोई ने वेंकटेश अय्यर के हाथों कैच आउट कराया, जिससे एक ही ओवर में उन्हें दो सफलताएं मिलीं। 11 ओवरों के बाद चार विकेट गंवाकर टीम ने 74 रन बना लिए थे।
छठे स्थान पर अकील हुसैन पूरन का साथ देने के लिए मैदान पर आए। वहीं, भारतीय गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में वेस्टइंडीज पर दबाव बनाया, जिससे उनकी रन की गति धीमी हो गई। इस बीच, हुसैन (10) को चाहर ने पवेलियन भेज दिया। 15 ओवरों के बाद टीम ने पांच विकेट के नुकसान पर 95 रन जोड़े। मैदान पर पूरन ने शानदार बल्लेबाजी की और 38 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।
लेकिन 18 ओवरों में पटेल की गेंद पर पूरन चार चौके और पांच छक्के की मदद से 43 गेंदों में 61 रन बनाकर आउट हो गए, जिससे टीम का स्कोर छह विकेट के नुकसान पर 135 रन पहुंच गया।
आखिरी के दो ओवरों में कप्तान पोलार्ड ने कुछ अच्छे शॉट खेले, जिससे टीम का स्कोर 20 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 157 रन बनाए, कप्तान पोलार्ड दो चौके और एक छक्के की मदद से 19 गेंदों में 24 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की ओर से रवि बिश्नोई और हर्षल पटेल ने दो-दो सफलताएं अपने नाम कीं। वहीं दीपक चाहर, भुवनेश्वर कुमार और युजवेंद्र चहल ने एक-एक विकेट लिया।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से तोड़ा नाता, कोविड विफलताओं का लगाया आरोप

वाशिंगटन, 23 जनवरी: अमेरिका ने औपचारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अपनी सदस्यता खत्म कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले दिन किए गए वादे को पूरा करने के तहत लिया गया है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर ने एक संयुक्त बयान में बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश के जरिए यह वापसी लागू की गई। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिका को डब्ल्यूएचओ की ‘पाबंदियों’ से मुक्त करना और कोविड-19 महामारी के दौरान हुई विफलताओं से हुए नुकसान की भरपाई करना है।
बयान में कहा गया, “आज अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से खुद को अलग कर लिया है, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले दिन वादा किया था। यह कदम कोविड-19 के दौरान डब्ल्यूएचओ की नाकामियों के जवाब में उठाया गया है, जिनका खामियाजा अमेरिकी जनता को भुगतना पड़ा।”
प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ पर अपने मूल उद्देश्य से भटकने और अमेरिकी हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ का संस्थापक सदस्य और सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता रहा है, इसके बावजूद संगठन ने अमेरिका के हितों की अनदेखी की।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि डब्ल्यूएचओ ने राजनीतिक और नौकरशाही एजेंडे को अपनाया, जो उन देशों से प्रभावित था जो अमेरिका के विरोधी हैं। साथ ही, महामारी के दौरान समय पर और सटीक जानकारी साझा करने में संगठन असफल रहा।
बयान में यह भी कहा गया कि इन विफलताओं की वजह से अमेरिकी लोगों की जान जा सकती थी और बाद में इन गलतियों को ‘जन स्वास्थ्य के हित’ के नाम पर छिपाया गया।
प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के बाहर निकलने के फैसले के बाद डब्ल्यूएचओ का व्यवहार अपमानजनक रहा। कहा गया कि संगठन ने अपने मुख्यालय में लगा अमेरिकी झंडा सौंपने से इनकार कर दिया और यह दावा किया कि उसने अमेरिका की वापसी को मंजूरी नहीं दी है।
संयुक्त बयान में कहा गया, “हमारे संस्थापक सदस्य और सबसे बड़े समर्थक होने के बावजूद, अंतिम दिन तक अमेरिका का अपमान जारी रहा।”
अमेरिकी सरकार ने साफ किया कि अब डब्ल्यूएचओ के साथ उसका संपर्क केवल वापसी की प्रक्रिया पूरी करने और अमेरिकी नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा तक सीमित रहेगा। डब्ल्यूएचओ से जुड़ी सभी अमेरिकी फंडिंग और स्टाफिंग तुरंत समाप्त कर दी गई है।
प्रशासन ने कहा कि अमेरिका अब वैश्विक स्वास्थ्य प्रयासों का नेतृत्व सीधे देशों के साथ द्विपक्षीय साझेदारी और भरोसेमंद स्वास्थ्य संस्थानों के जरिए करेगा। बयान में डब्ल्यूएचओ को भारी-भरकम और अक्षम नौकरशाही बताया गया।
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह फैसला उन अमेरिकियों को सम्मान देने के लिए लिया गया है जिन्होंने महामारी में अपनों को खोया, खासकर नर्सिंग होम में मरे बुजुर्गों और उन कारोबारियों को, जिन्हें कोविड प्रतिबंधों से भारी नुकसान हुआ।
बता दें कि अमेरिका 1948 में डब्ल्यूएचओ का संस्थापक सदस्य बना था और लंबे समय तक इसका सबसे बड़ा डोनर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी एजेंसी ने भारत-सिंगापुर सबमरीन केबल लिंक प्रोजेक्ट का किया समर्थन

वॉशिंगटन, 21 जनवरी : अमेरिकी ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी ने मंगलवार को भारत को सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशियाई डेटा हब से जोड़ने वाले एक प्रस्तावित सबमरीन केबल सिस्टम के लिए सपोर्ट की घोषणा की।
यूएसटीडीए ने कहा कि उसने एससीएनएक्स3 सबमरीन केबल सिस्टम के लिए एक फीजिबिलिटी स्टडी को फंड करने के लिए सबकनेक्स मलेशिया एसडीएन.बीएचडी. के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया है। यह प्रोजेक्ट भारत को सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे हिस्सों से जोड़ेगा और इससे लगभग 1.85 बिलियन लोगों को सर्विस मिलने की उम्मीद है।
यूएसटीडीए ने कहा कि यह स्टडी केबल सिस्टम के लिए निवेश लाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड-बेस्ड सर्विसेज के लिए जरूरी क्षमता बढ़ाने में मदद करने के लिए डिजाइन की गई है।
एजेंसी ने कहा कि इस कोशिश के जरिए यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी कि इंटरनेशनल नेटवर्क भरोसेमंद और सुरक्षित रहें। इसके साथ ही साइबर खतरों और विदेशी दखलंदाजी के खतरे को कम किया जा सके। यह एग्रीमेंट हवाई के होनोलूलू में पैसिफिक टेलीकम्युनिकेशंस काउंसिल 26 कॉन्फ्रेंस में साइन किया गया था।
यूएसटीडीए के डिप्टी डायरेक्टर थॉमस आर हार्डी ने कहा, “सेंसिटिव डेटा और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर हमलों और विदेशी जासूसी से बचाने के लिए सुरक्षित, अमेरिका में बनी सबसी केबल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना जरूरी है। यह प्रोजेक्ट दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में हमारे साझेदारों की रणनीतिक प्राथमिकता को आगे बढ़ाता है और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अमेरिका के नेतृत्व को मजबूत करता है।”
सबकनेक्स ने फिजिबिलिटी स्टडी करने के लिए फ्लोरिडा की एपीटेलीकॉम एलएलसी को चुना है। स्टडी रूट डिजाइन, इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल मॉडलिंग, कमर्शियलाइजेशन प्लानिंग और रेगुलेटरी एनालिसिस पर फोकस करेगी।
यूएसटीडीए के मुताबिक, इस काम का मकसद एससीएनएक्स3 केबल प्रोजेक्ट के लिए निजी निवेश को बढ़ाना और शुरुआती स्टेज के रिस्क को कम करना है। अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि सिस्टम के टेक्निकल और कमर्शियल फ्रेमवर्क को बनाने में अमेरिकी विशेषज्ञ अहम भूमिका निभाएंगे।
प्लान किया गया केबल रूट दक्षिण भारत में चेन्नई को सिंगापुर से जोड़ेगा। एजेंसी ने कहा कि भारत, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया में और लैंडिंग पॉइंट पर विचार किया जा रहा है। यूएसटीडीए ने कहा कि केबल के बनने से अमेरिकी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए पूरे इलाके में भरोसेमंद सॉल्यूशन सप्लाई करने के नए मौके बन सकते हैं।
एससीएनएक्स3 सबमरीन केबल का मकसद भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती कनेक्टिविटी चुनौतियों का सामना करना है। यूएसटीडीए ने कहा कि बढ़ती डिजिटल डिमांड और सीमित रूट डायवर्सिटी ने मौजूदा नेटवर्क को आउटेज और सिक्योरिटी रिस्क के प्रति कमजोर बना दिया है।
इस प्रोजेक्ट के जरिए नए और मजबूत डेटा पाथवे जोड़कर डिजिटल एक्सेस में सुधार लाया जा सकता है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड सर्विसेज की ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि यह केबल दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया में सरकारों, बिजनेस और नागरिकों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर देगा।
सबकॉनेक्स के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर साइमन जेटल ने कहा कि यह प्रोजेक्ट इस इलाके के डिजिटल बैकबोन को मजबूत करने के लिए एक जरूरी कदम है।
उन्होंने कहा, “भारत, सिंगापुर और खास क्षेत्रीय हब के बीच एक नया, मजबूत और भरोसेमंद रूट बनाकर, यह सिस्टम सीधे तौर पर इकोनॉमिक ग्रोथ, डिजिटल इन्क्लूजन और दुनिया के सबसे डायनामिक मार्केट में से एक में क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं के तेजी से विस्तार में मदद करेगा।”
जेटल ने कहा कि यूएसटीडीए का समर्थन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। प्रोजेक्ट यह सुनिश्चित करेगा कि केबल भरोसेमंद तकनीक और दुनिया की सबसे अच्छी विशेषज्ञता पर बनी हो।
यूएसटीडीए ने कहा कि फिजिबिलिटी स्टडी से सुरक्षित केबल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और डेटा फ्लो को गलत विदेशी असर से बचाने में मदद मिलेगी। ऐसी चिंताएं इसलिए बढ़ी हैं क्योंकि समुद्र के नीचे के केबल दुनिया भर के ज्यादातर इंटरनेट और डेटा ट्रैफिक को ले जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
फुटबॉल वर्ल्ड कप में आने वाले दर्शकों की आसानी के लिए यूएस ने की ‘फीफा पास’ की घोषणा

वाशिंगटन, 21 जनवरी : संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया भर से आने वाले फुटबॉल प्रशंसकों का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि यह फीफा विश्व कप अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भव्य आयोजन होगा। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने विदेशी प्रशंसकों के लिए एक नई फास्ट-ट्रैक वीजा पहल की घोषणा की है, ताकि लाखों दर्शक आसानी से अमेरिका आ सकें।
20 जनवरी से अमेरिका का विदेश विभाग एक नई व्यवस्था शुरू कर रहा है, जिसे फीफा प्रायोरिटी अपॉइंटमेंट शेड्यूल सिस्टम कहा गया है। इसे फीफा पास नाम दिया गया है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए है, जिनके पास विश्व कप के मैचों के टिकट हैं और जिन्हें अमेरिका आने के लिए वीज़ा की ज़रूरत होती है।
विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि असली और सही प्रशंसकों को समय पर वीज़ा अपॉइंटमेंट मिल जाए, ताकि वे टूर्नामेंट से पहले अमेरिका पहुंच सकें।”
फीफा पास के तहत जिन लोगों के पास कंफर्म टिकट होगा, उन्हें वीजा साक्षात्कार के लिए प्राथमिकता दी जाएगी और उनका वीजा काम तेजी से पूरा किया जाएगा।
हालांकि, अधिकारी ने साफ किया कि इस नई सुविधा से अमेरिका के आव्रजन नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। वीजा साक्षात्कार के दौरान आवेदक को यह साबित करना होगा कि वह वीज़ा के सभी नियमों को पूरा करता है, अमेरिका के कानूनों का पालन करेगा और टूर्नामेंट के बाद वापस लौट जाएगा। अमेरिका की सुरक्षा और सीमा की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।
विश्व कप को सुचारू रूप से कराने के लिए विदेश विभाग 500 से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भी तैनात कर रहा है, ताकि वीज़ा आवेदन समय पर निपटाए जा सकें। इसके साथ ही सुरक्षा जांच के वही सख्त मानक लागू रहेंगे, जो सामान्य वीज़ा प्रक्रिया में होते हैं।
इसके अलावा, दुनिया के ज्यादातर देशों में वीज़ा अपॉइंटमेंट का इंतज़ार भी कम किया गया है। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दुनिया भर के 80 प्रतिशत से ज्यादा देशों में, आवेदक अब 60 दिनों से भी कम समय में यूएस विज़िटर वीज़ा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट शेड्यूल कर सकते हैं, जो पहले के बैकलॉग की तुलना में एक महत्वपूर्ण कमी है।
फीफा विश्व कप 11 जून से शुरू होगा। यह टूर्नामेंट अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको मिलकर आयोजित कर रहे हैं। पहली बार इसमें 48 टीमें भाग लेंगी और अमेरिका के 11 शहरों में कुल 78 मैच खेले जाएंगे, जिनमें फाइनल मैच न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में होगा।
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