राजनीति
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में विश्व ने भारतीय सेना का पराक्रम देखा, मिशन सुदर्शन चक्र पर हो रहा है काम : राष्ट्रपति
नई दिल्ली, 28 जनवरी : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद में अपने अभिभाषण के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब देश से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। देश ने अपने संसाधनों के दम पर आतंकियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में विश्व ने भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा है। वर्ष 2025 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन डेढ़ लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। इसके साथ ही डिफेंस एक्सपोर्ट भी 23,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ‘मेड इन इंडिया’ डिफेंस प्लेटफॉर्म्स पर दुनिया का भरोसा मजबूत हुआ है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में अपना अभिभाषण दे रही थीं। यहां उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमको सिखाया है कि हम न किसी को डराएं न ही किसी से डर कर जिएं। इसी निडर मन से हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। हमारे देश ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकवादियों के अड्डों को ध्वस्त किया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ”मेरी सरकार ने कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा। सिंधु जल समझौते को स्थगित किया जाना भी आतंकवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई का हिस्सा है। देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम हो रहा है। मेरी सरकार की नीतियों के अनुरूप सुरक्षाबलों ने माओवादी आतंकियों पर भी निर्णायक कार्रवाई की है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्षों तक देश के 126 जिलों में असुरक्षा, भय और अविश्वास का वातावरण था। माओवादी विचारधारा ने कई पीढ़ियों का भविष्य अंधकार में डाल दिया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान हमारे युवाओं, गरीब व आदिवासी भाई-बहनों को हुआ। आज माओवादी की चुनौती 126 जिलों से घटकर आठ जिलों तक सीमित रह गई है। इनमें से भी केवल तीन जिले ऐसे हैं जो माओवाद से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
उन्होंने बताया कि बीते एक साल में लगभग दो हजार माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इससे लाखों लोगों के जीवन में शांति लौटी है। माओवाद से प्रभावित रहे इलाकों में आए परिवर्तन को आज सारा देश देख रहा है। बीजापुर के एक गांव में 26 साल बाद बस आई तो लोगों ने किसी उत्सव की तरह खुशियां मनाई। बस्तर के युवा ओलंपिक में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। हथियार छोड़ चुके व्यक्ति अब लोगों की सेवा कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि मेरी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जो लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में जुड़े हैं उनका जीवन पटरी पर लौटे। वह दिन अब दूर नहीं जब देश से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का जिक्र करते हुए कहा कि गुरुदेव देव ने कहा था कि आजादी तब तक अधूरी है जब तक कि आत्मनिर्भरता का जीवन न जीया जाए। मेरी सरकार भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास कर रही है। आज मेक इन इंडिया के विजन के साथ बने उत्पाद दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंच रहे हैं। स्वदेशी को लेकर देशवासियों में भी बहुत उत्साह है।
उन्होंने बताया कि कुछ ही महीने पहले राष्ट्रीय डिफेंस अकादमी यानी एनडीए में महिला कैडेट्स का पहला बैच पास आउट हुआ है। राष्ट्रपति ने इसे एक बड़ा मील का पत्थर बताते हुए कहा कि देश के विकास और सशक्तिकरण में नारी शक्ति सबसे आगे खड़ी है।
राष्ट्रीय समाचार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को तीन और एफआईआर में दी अंतरिम राहत, गिरफ्तारी पर रोक

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन और एफआईआर में गिरफ्तारी सहित सख्त पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दी है।
अभिषेक बनर्जी को अब राज्य के अलग-अलग थानों में दर्ज कुल 16 एफआईआर में से 11 मामलों में अंतरिम सुरक्षा मिल गई है।
जिन तीन एफआईआर में हाईकोर्ट के सिंगल जज बेंच जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी है, उनमें से एक दक्षिण कोलकाता में कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र वाले भवानीपुर थाने में दर्ज है। वहीं, दो अन्य एफआईआर दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अंतर्गत आने वाले कालीतला और विष्णुपुर थानों में दर्ज हैं। यह अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक लागू रहेगी।
अंतरिम सुरक्षा देते हुए जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच ने यह भी कहा कि डायमंड हार्बर सांसद को इन तीन एफआईआर में जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करना होगा। जस्टिस भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि इन तीन एफआईआर के संबंध में हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है।
फैसले के मुताबिक, अगर जांच एजेंसी समन भेजती है तो अभिषेक बनर्जी को पेश होना होगा। ऐसे में सिंगल बेंच ने कहा कि डायमंड हार्बर सांसद को पेशी से 48 घंटे पहले सूचित करना होगा। अगर वह जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो राज्य सरकार इस बारे में अदालत का ध्यान आकर्षित कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को तय की गई है।
जस्टिस भट्टाचार्य ने आदेश में यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अब तक दर्ज सभी एफआईआर की कॉपी उनके वकील को दी जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि अभिषेक बनर्जी कोर्ट की इजाजत के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। हालांकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने जोड़ा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दे रखी है, इसलिए यह आदेश उस विदेश यात्रा में बाधा नहीं बनेगा।
राजनीति
चाय की कीमत बढ़कर 15 रुपए हो गई, 50 पैसे में चाय पीकर हमारी जिंदगी शुरू हुई है: संजय राउत

चाय की कीमतों में बढ़ोतरी, कंगना रनौत के बयान और मराठी भाषा विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया सामने आई है।
नेता संजय राउत ने चाय की बढ़ती कीमतों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “चाय की कीमत 15 रुपये हो गई है, जबकि बड़े होटलों में यही चाय 200-300 रुपये में मिलती है। हमारी जिंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई है।” राउत ने तंज कसते हुए कहा, “अब भाजपा वाले कहेंगे कि चाय मत पियो। चाय पीना अपराध है, देशद्रोह है। राष्ट्रभक्ति के नाम पर कोई आदेश जारी कर देंगे। खुद इथेनॉल पिएंगे। गरीब आदमी को मेहनत करके एक कप चाय नसीब होती है और ये लोग सरकारी चाय पीते हैं।”
कंगना रनौत की ओर से कृति सेनन और तापसी पन्नू पर कटाक्ष करने को लेकर संजय राउत ने कहा, “आप लोग कंगना रनौत को इतनी गंभीरता से क्यों लेते हैं? उनको इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। ये अंधभक्त लोग हैं। उनसे पूछना चाहिए कि चाय क्यों महंगी हो गई है। चीनी बनाने वाला गन्ना इथेनॉल बनाने में चला गया।
महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोलने को लेकर संजय राउत ने कहा, “संविधान में जो अधिकार दिया गया है, उसका इस्तेमाल होना चाहिए। चाहे महाराष्ट्र हो या बंगाल, कॉर्पोरेट में स्थानीय भाषा होनी चाहिए। देश की भाषा एक होनी चाहिए, हिंदी। अगर अंग्रेजी गुलामी का लक्षण है तो हिंदी में बात होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और ब्यूरोक्रेट्स को हिंदी में लिखना और बोलना चाहिए। उनको हिंदी में जवाब देने से किसने रोका है?
बीते दिन भी संजय राउत ने अखिलेश यादव के बयान पर कहा था, “अखिलेश यादव ने ऐसा कुछ नहीं कहा। यहां और हर राज्य में एक कानून है कि स्थानीय भाषा बोली जानी चाहिए। अखिलेश ने यही कहा, लेकिन यह कानून सभी पर लागू होना चाहिए। जो लोग कॉर्पोरेट में, ऊंचे पदों पर या ऑफिस में काम करते हैं, वे मराठी क्यों नहीं बोलते? उन्हें भी मराठी आनी चाहिए और उन पर भी मराठी सख्ती से लागू होनी चाहिए। हर राज्य में लोगों को गर्व और आत्म-सम्मान के साथ स्थानीय भाषा बोलनी चाहिए।”
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र : पालघर के आश्रम स्कूल में 7 साल के बच्चे की मौत, 26 अन्य छात्र अस्पताल में भर्ती

महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक आवासीय स्कूल में 7 साल के छात्र की तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद मौत हो गई है। वहीं 26 अन्य छात्रों को सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
मसवण के आश्रम स्कूल में पढ़ने वाले पहली क्लास के छात्र को 22 अगस्त को तेज बुखार आया था। इसके बाद उसे इलाज के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाया गया था।
सोमवार को जब उसका बुखार वापस आया तो पीएचसी के डॉक्टर ने देखा कि उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है। डॉक्टर ने उसे तुरंत एंबुलेंस से मनोर के ग्रामीण अस्पताल में भेजने की सलाह दी।
अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे का ईसीजी किया और फिर उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारी ने बताया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
घटना के बाद स्वास्थ्य और प्रशासन के बड़े अधिकारी स्कूल पहुंचे। इस स्कूल में कुल 449 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से 395 छात्र हॉस्टल में रहते हैं। मेडिकल टीम ने स्कूल परिसर में सभी छात्रों की पूरी स्वास्थ्य जांच भी की।
एहतियात के तौर पर सर्दी, खांसी या बुखार के हल्के लक्षण वाले 26 छात्रों को मसवण पीएचसी में निगरानी में रखा गया है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अधिकारी विशाल खत्री ने स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया और अस्पताल में भर्ती छात्रों और उनके माता-पिता से मुलाकात की।
यह घटना कुछ हफ्ते पहले गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल हॉस्टल में हुई घटना के बाद हुई है, जहां तीन आदिवासी लड़कियों की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। बताया गया था कि वे जमीन पर सो रही थीं।
इन मौतों ने महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी महीने की शुरुआत में अधिकारियों ने बताया था कि पिछले दो सालों में राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त आवासीय स्कूलों में 584 छात्रों की मौत हुई है। इन मौतों के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल रोग, गंभीर बीमारियां, हादसे और आत्महत्या शामिल हैं।
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