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एचपी ने 4जी एलटीई के साथ 44999 रुपये में ‘ऑलवेज कनेक्टेड’ पीसी लॉन्च किए

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हमेशा की तरह कनेक्टेड पीसी मार्केट को एक नए स्तर पर ले जाते हुए एचपी इंक ने मंगलवार को 4जी एलटीई कनेक्टिविटी से लैस लेटेस्ट इंटेल 10वीं जनरेशन चिपसेट और शक्तिशाली इंटर्नल के साथ एचपी 14एस नोटबुक पेश किया। इसके आई3 प्रोसेसर और चार जीबी रैम वाले वैरिएंट की कीमत 44,999 रुपये रखी गई है, जबकि आई5 प्रोसेसर और आठ जीबी रैम वाले वैरिएंट की कीमत 64,999 रुपये है। इसके साथ ही कंपनी ने एचपी पवेलियन एक्स360 14 आई5 पीसी भी लॉन्च किया है, जो एचपी वल्र्ड स्टोर्स और ऑनलाइन स्टोर पर एक जुलाई से 84,999 रुपये में उपलब्ध होगा।

नया नोटबुक पोर्टफोलियो 4जी एलटीई कनेक्टिविटी के साथ आता है, जो पहले एचपी एलीट ड्रैगनफ्लाई और एचपी स्पेक्ट्रम एक्स 360 जैसे एचपी प्रीमियम नोटबुक के साथ उपलब्ध था।

एचपी इंडिया मार्केट के प्रबंध निदेशक विनय अवस्थी ने कहा, मुख्यधारा के डिवाइस में 4जी एलटीई की शुरुआत भारत में कहीं भी और कभी भी काम करने, सीखने और खेलने के लिए लाखों पीसी उपयोगकर्ताओं के अनुभव को बदल देगी।

घर वाई-फाई के लिए कम फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड पैठ और उप-इष्टतम सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ, 4 जी एलटीई तेज और सुरक्षित मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सिर्फ 1.53 किलोग्राम वजनी इस नए स्टाइलिश और हल्के एचपी 14एस में नौ घंटे की लंबी बैटरी लाइफ के साथ फास्ट चाजिर्ंग सपोर्ट मिलता है।

इंटेल के 10वीं जनरेशन आई3/आई5 प्रोसेसर द्वारा संचालित एचपी 14एस में 78 प्रतिशत स्क्रीन-टू-बॉडी रेशो में माइक्रो-एज एफएचडी डिस्प्ले मिलता है।

खरीदारों को लॉन्चिंग ऑफर के तहत छह महीने मुफ्त डेटा (1.5 जीबी प्रतिदिन) के साथ एक रिलायंस जियो सिम मुफ्त दिया जा रहा है, जिससे जियो इकोसिस्टम एक्सेस किया जा सकेगा और छह महीने की फ्री डेटा अवधि के बाद सभी जियो डेटा प्लान्स पर 30 प्रतिशत की छूट मिलेगी।

एचपी 14एस में अल्ट्रा-मोबाइल डिजाइन मिलता है और यह इंटेल कोर आई5/आई3 प्रोसेसर के साथ विंडोज 10 ऑपरेटिंग सिस्टम और बिल्ट-इन इंटेल एक्सएमएम 7360 4जी एलटीई6 से लैस है, जो तेज, कनेक्टेड और सुरक्षित समाधान प्रदान करने की क्षमता रखता है।

व्यापार

हफ्ते के पहले दिन सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, बाजार खुलते ही 1,400 रुपए टूटा सोना; चांदी 1,500 रुपए से ज्यादा फिसली

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सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना करीब 1,400 रुपए प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी में भी 1,400 रुपए से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में रुपए की मजबूती का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर दिखाई दिया।

एमसीएक्स पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,51,499 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जो सोमवार को 1,51,596 पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में तेज बिकवाली के चलते करीब 1,50,056 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक फिसल गया, जो 1,443 रुपए यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार में गिरावट का मुख्य कारण रुपए में मजबूती और मुनाफावसूली रहा। तकनीकी रूप से सोने के लिए 1,50,000-1,50,700 रुपए का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।

वहीं, सोमवार को चांदी की कीमतों में भी दबाव देखा गया। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,25,755 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, जो सोमवार को 0.11 प्रतिशत गिरकर 2,25,494 रुपए पर खुली। लेकिन कारोबार के दौरान इसमें और गिरावट दर्ज की गई और एक समय यह 1,552 रुपए यानी 0.68 प्रतिशत फिसलकर 2,24,203 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई।

हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग चांदी को कुछ हद तक समर्थन दे सकती है, लेकिन निकट भविष्य में रुपए की मजबूती कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।

वहीं, वैश्विक बाजारों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड और सिल्वर दोनों में हल्की तेजी देखी गई। सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता नजर आया, तो वहीं चांदी में भी मजबूती देखने को मिली और यह 61.1 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती हुई नजर आई।

इसके बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें नीचे आई हैं क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया कदमों से रुपया मजबूत हो सकता है। मजबूत रुपए का मतलब है कि आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार की नजर अब अमेरिका के मुद्रास्फीति (सीपीआई) आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति पर है। वहीं, दिसंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद पहले से बाजार में शामिल है।

उच्च ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम करती हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुख आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर बदल सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी ने हाल ही में अनुमान जताया है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने हुए हैं।

हालांकि, ऐसे भू-राजनीतिक जोखिम लंबे समय में सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन भी दे सकते हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए तत्काल सपोर्ट 1.50 लाख के आसपास है। यदि यह स्तर टूटता है, तो भाव 1.48 लाख रुपए तक जा सकते हैं। वहीं, ऊपर की ओर 1.52-1.53 लाख रुपए का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

वहीं, चांदी के लिए 2.24 लाख रुपए का स्तर महत्वपूर्ण है, जबकि मजबूती आने पर 2.28 लाख रुपए की ओर बढ़त संभव है।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति का नया केंद्र, एआई और बदलते पूंजी प्रवाह से बढ़ेंगे अवसर: रिपोर्ट

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वैश्विक स्तर पर पूंजी प्रवाह में बदलाव, भू-राजनीतिक आधार पर बंटते व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत विकास की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए बहुध्रुवीय दुनिया में एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। सोमवार को जारी ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पूंजी प्रवाह, व्यापारिक रिश्तों और उद्योगों की संरचना तेजी से बदल रही है। एआई क्रांति शुरू हो चुकी है, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार नए निर्यात अवसर पैदा कर रहा है और शहरीकरण की गति लगातार बढ़ रही है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टॉम ऑर्लिक ने कहा कि इन सभी बदलावों के बीच भारत विकास में मौजूद कई बाधाओं को कम करते हुए वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विस्तार होता मुक्त व्यापार नेटवर्क 2035 तक देश की जीडीपी में 140 अरब डॉलर से 170 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है। विनिर्माण लागत कम करने और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों को अधिक उत्पादक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने जैसे घरेलू सुधार इन लाभों को और बढ़ा सकते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक पूंजी प्रवाह अब पहले की तुलना में अधिक केंद्रित और राजनीतिक होता जा रहा है। प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पूंजी निवेश मित्र देशों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है, जबकि निवेश का बड़ा हिस्सा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।

भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की मजबूत मांग और विभिन्न देशों द्वारा दिए जा रहे निवेश प्रोत्साहनों के बीच वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की अपनी गति बनाए रखे।

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई भारत की आर्थिक वृद्धि दर में हर साल 0.9 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बुनियादी ढांचे की सीमाएं एआई से मिलने वाले लाभ को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं। विशेष रूप से भारत का आईटी सेवा क्षेत्र अवसरों और चुनौतियों दोनों का सामना करेगा। एआई जहां कंपनियों को उच्च मूल्य वाली सेवाओं की ओर ले जा सकता है, वहीं स्वचालन कम लागत वाले श्रम आधारित मॉडल को चुनौती भी दे सकता है।

रिपोर्ट में भारत के शहरीकरण को भी एक बड़ी ताकत बताया गया है। इसके अनुसार, करीब 82 करोड़ भारतीय शहरी वातावरण में रहते हैं। यदि नगर प्रशासन, बुनियादी ढांचे और भूमि उपयोग योजना को और मजबूत किया जाता है, तो यह शहरी आबादी उत्पादकता वृद्धि का एक बड़ा स्रोत बन सकती है।

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व्यापार

सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच हरे निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स में 412 अंकों की बढ़त; निफ्टी में 0.58 प्रतिशत की तेजी

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एशियाई बाजारों में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जैसे सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में खुला, जबकि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ।

सेंसेक्स अपने पिछले बंद 72,472.33 से 298.99 अंक यानी 0.41 प्रतिशत बढ़कर 72,771.32 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,520.45 से 72.75 अंक यानी 0.32 प्रतिशत चढ़कर 22,593.20 पर खुला।

हालांकि दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 411.92 अंकों यानी 0.56 प्रतिशत की तेजी के साथ 72884.25 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 का दिन का उच्चतम स्तर 22,651.10 रहा, जो 130.65 अंकों यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।

व्यापक बाजार ने प्रमुख बेंचमार्कों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।

वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल्स, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी फार्मा इंडेक्स में बढ़त देखी गई, जबकि निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में बिकवाली का दबाव रहा।

इस बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 पैसे मजबूत होकर 95.76 पर खुला, जबकि इससे पहले यह 96.73 पर बंद हुआ था।

वैश्विक स्तर पर, एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जहां दक्षिण कोरिया के कोस्पी और कोस्डैक में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजार पिछले सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुआ, शुक्रवार को तीनों प्रमुख अमेरिकी शेयर सूचकांकों में तेजी आई और इस तरह साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, ब्रेंट तेल की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घरेलू सकारात्मक कारकों की तुलना में वैश्विक चुनौतियां अधिक प्रभाव डाल रही हैं। उनके अनुसार, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) निकट अवधि में बिकवाली जारी रख सकते हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) उनकी बिकवाली को काफी हद तक संतुलित करते रहेंगे।

हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2027 में 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि अनुमान और कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार जैसे मजबूत बुनियादी कारक बाजार को समर्थन दे रहे हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे माहौल में निवेशक बाजार की अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करते हुए उचित मूल्यांकन वाले ग्रोथ शेयरों में निवेश जारी रख सकते हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा बाजार अच्छे खरीदारी अवसर प्रदान कर रहा है।

उनका यह भी मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में सकारात्मक घटनाक्रम के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो मौजूदा स्तरों से बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, शुक्रवार की रिकवरी और चार्ट पर बने पैटर्न से 22,800 से 23,200 के दायरे तक तेजी की संभावना बनी हुई है। हालांकि यदि निफ्टी 22,575 के ऊपर बंद होने में विफल रहता है, तो बाजार पर मंदड़ियों की पकड़ बनी रह सकती है। दिन के लिए 22,295 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।

इस बीच, एशियाई बाजारों में भी निवेशक सतर्क बने हुए हैं क्योंकि अब उनकी नजर कॉर्पोरेट नतीजों के सीजन पर है। विश्लेषकों का कहना है कि यह सीजन तकनीकी कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन की परीक्षा ले सकता है।

वहीं कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। रूस और अन्य पक्षों के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने संबंधी समझौते के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बना है।

कुल मिलाकर, बाजार की दिशा आगे भी वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर काफी हद तक निर्भर रहने की संभावना है।

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