अंतरराष्ट्रीय
एचपी इडिया के एमडी आईसीईए पैनल का करेंगे नेतृत्व, आईटी मैनुफैक्च रिंग को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने आईटी हार्डवेयर मैनुफैक्च रिंग को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक एसोसिएशन ( आईसीईए) ने बुधवार को एक उच्चस्तरीय कमिटी बनाने की घोषणा की है। यह कमिटी भारत में आईटी हार्डवेयर के एक्यपोर्ट को बढ़ावा देने का काम करगी। इस कमिटी का नेतृत्व एचपी इंडिया के एमडी केतन पटेल कर रहे हैं। एचपी इंडिया के प्रबंध निदेशक केतन पटेल की अध्यक्षता में पैनल, 2026 तक भारत में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी आईटी हार्डवेयर घटक, भागों और डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण निवेश सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप तैयार करेगा।
पटेल के अनुसार, पीसी और टैबलेट का बाजार वैश्विक स्तर पर लगभग 230 बिलियन डॉलर का है। भारत में एक स्थायी विनिर्माण के लिए सस्टेनेबल मैन्युफैक्चिरिंग का आधार बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, मैं रोजगार, जीडीपी में योगदान और संभावित वैल्यू एडिशन के संबंध में डिजायर्ड परिणामों के साथ अगले पांच वर्षों के लिए एक ठोस आईटी विनिर्माण रोडमैप तैयार करना चाहता हूं।
उन्होंने कहा कि सरकार के साथ उनकी बातचीत इस दिशा में अत्यधिक उत्साहजनक रही है।
इस महीने की शुरूआत में, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने देश में आईटी हार्डवेयर निर्माण के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 14 आवेदकों का चयन किया। प्रोत्साहन योजना के तहत चुने गए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी डेल, विस्ट्रॉन, राइजिंग स्टार्स हाई-टेक (फॉक्सकॉन) और फ्लेक्सट्रॉनिक्स हैं।
इस योजना के तहत चुनी गई घरेलू कंपनियों में लावा इंटरनेशनल लिमिटेड, डिक्सन टेक्नोलॉजीज (इंडिया) लिमिटेड, इंफोपावर टेक्नोलॉजीज (सहस्रा और एमआईटीएसी का संयुक्त उद्यम), भगवती (माइक्रोमैक्स) नियोलिन्क, ऑप्टिमस, नेटवेब, स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स, वीवीडीएन और पनाचे डिजिलाइफ शामिल हैं।
आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि डेल, ऐप्पल, विस्ट्रॉन, फॉक्स, फॉक्सकॉन और उनकी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्च रिंग सर्विसेज (ईएमएस) कंपनियों जैसे वैश्विक ब्रांडों के साथ अपनी पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए आईटी मैन्युफैक्च रिंग विजन को फिर से तैयार करने के तरीके खोजने के लिए गहन विचार-विमर्श कर रहा है।
आईसीईए अध्यक्ष पंकज ने कहा, दुनिया की शीर्ष ईएमएस कंपनियां पहले से ही भारत में हैं। और भारतीय कंपनियां भी प्रमुख वैश्विक ओईएम के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाना सीख रही हैं। आईसीईए में, हम सरकार के साथ साझेदारी में भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए अगला वैश्विक केंद्र बनाने के लिए ²ढ़ हैं।
आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना, जिसे 3 मार्च को अधिसूचित किया गया था। भारत में निर्मित लक्ष्य खंडों के तहत माल की इंक्रीमेंटल बिक्री (वित्त वर्ष 2020 के आधार वर्ष से अधिक) पर 4 प्रतिशत से 2 प्रतिशत / 1 प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि का विस्तार किया गया है, जो भारत में एलिजिबल कंपनियों के लिए चार साल की अवधि के लिए निर्मित होते हैं।
आईसीईए द्वारा आईटी हार्डवेयर समिति में एचपी, डेल, लावा, फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन और फ्लेक्स जैसी शक्तिशाली ब्रांड और ईएमएस कंपनियां शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका का मानना, समुद्री नाकेबंदी से ईरान को हुआ 456 अरब रुपए का नुकसान: रिपोर्ट

अमेरिकी की समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर (456 अरब रुपए ) का नुकसान हुआ है। एक्सियोस के मुताबिक यह आकलन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) का है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नाकेबंदी के दौरान दो टैंकर जब्त किए गए। इसके अलावा, अधिकारियों ने दावा किया कि लगभग 53 मिलियन बैरल तेल ले जा रहे 31 टैंकर इस समय “खाड़ी में फंसे हुए हैं,” जिससे ईरान के तेल निर्यात में आई भारी गिरावट का अंदाजा लगाया जा सकता है। कथित तौर पर इसी वजह से उसे 4.8 अरब डॉलर (करीब 45,600 करोड़ रुपए) का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ईरान के समुद्र में अमेरिकी नाकाबंदी पूरी ताकत से लागू है, जिससे ईरान की फंडिंग क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
इन्हीं अधिकारियों के अनुसार, कुछ जहाज अब “अमेरिकी नाकेबंदी के डर से चीन को तेल पहुंचाने के लिए एक महंगा और लंबा रास्ता चुन रहे हैं,” जिससे पता चलता है कि अमेरिकी सेना की सख्त कार्रवाई के डर से जहाजों के आने-जाने के तरीकों में बदलाव आया है।
यह नाकेबंदी अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर एक अस्थायी संघर्षविराम के दौरान लगाई थी। इसका मकसद ईरान पर दबाव डालना था ताकि वह पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए उस युद्धविराम को मान ले, जिससे इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
ईरान ने पिछले महीने कहा था कि इजरायल और लेबनान में सशस्त्र समूह हिज्बुल्लाह के बीच 10 दिन के संघर्ष विराम की घोषणा के बाद होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से फिर से खोल दिया है।
हालांकि, बाद में इस जलमार्ग पर फिर से पाबंदी लगा दी गई, जब अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी हटाने से इनकार कर दिया। अमेरिका का कहना था कि जब तक ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए कोई पक्का समझौता नहीं हो जाता, तब तक ये पाबंदियां जारी रहेंगी।
अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी से ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर यानी लगभग 456 अरब रुपये (करीब 45,600 करोड़ रुपये) के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक यह आकलन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) का है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका: रिटायरमेंट सेविंग्स को विस्तार, ट्रंप ने जारी किया नया कार्यकारी आदेश

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लाखों अमेरिकियों, खासकर कम आय वाले और नियोक्ता-प्रायोजित योजनाओं से वंचित कामगारों के लिए रिटायरमेंट सेविंग्स खातों तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
इसे “ऐतिहासिक कार्यकारी आदेश” बताते हुए ट्रंप ने कहा कि यह पहल आम नागरिकों को संघीय कर्मचारियों जैसी उच्च गुणवत्ता वाली रिटायरमेंट सेविंग्स योजनाओं का लाभ देगी।
उन्होंने कहा, “आज दोपहर मैं लाखों अमेरिकियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रिटायरमेंट सेविंग्स खातों तक पहुंच बढ़ाने वाले एक ऐतिहासिक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए बेहद उत्साहित हूं।”
ट्रंप के अनुसार, कम आय वाले अमेरिकियों को उनके खातों में सरकार की ओर से “प्रति वर्ष 1,000 डॉलर तक का मैचिंग फंड” मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पारंपरिक रोजगार संरचनाओं से बाहर काम करने वाले लोगों के लिए बेहद अहम साबित होगा। उन्होंने कहा, “जिन लाखों अमेरिकियों के पास नियोक्ता-प्रायोजित योजनाएं नहीं हैं, उनके लिए यह क्रांतिकारी होगा क्योंकि अब वे भी इसके दायरे में होंगे।”
ट्रंप ने इसके दीर्घकालिक लाभ का उदाहरण देते हुए कहा, “अगर 25 साल का कोई व्यक्ति हर महीने सिर्फ 165 डॉलर निवेश करता है, तो 65 साल की उम्र तक उसके खाते में अनुमानित 4,65,000 डॉलर हो सकते हैं… दूसरे शब्दों में, वह समृद्ध हो सकता है।”
राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने कहा कि यह नीति रिटायरमेंट सेविंग्स तक पहुंच में मौजूद संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए तैयार की गई है। उन्होंने कहा, “आपने कम आय वाले, 35,000 डॉलर से कम आय वाले लोगों को यह मैचिंग सुविधा दी है।”
हैसेट ने बताया कि प्रशासन इस योजना के विस्तार पर भी काम कर रहा है। “हम कांग्रेस के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को काफी विस्तार देने की दिशा में काम कर रहे हैं,” उन्होंने कहा, साथ ही यह भी जोड़ा कि इसे मध्यम आय वर्ग तक बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
ट्रंप ने माना कि योजना को और आगे बढ़ाने के लिए विधायी मंजूरी जरूरी होगी। उन्होंने कहा, “अगले स्तर तक ले जाने के लिए हमें कांग्रेस की मंजूरी चाहिए… यह द्विदलीय समर्थन से होना चाहिए।”
इस कार्यक्रम के तहत चैरिटेबल संगठनों को भी इंडिविजुअल रिटायरमेंट अकाउंट यानी व्यक्तिगत रिटायरमेंट खातों (आईआरए) में योगदान देने की अनुमति होगी, जिससे भागीदारी का दायरा और बढ़ेगा। हैसेट ने कहा, “ट्रंपआईआरए के तहत चैरिटी भी दूसरों के खातों में योगदान कर सकती हैं।”
ट्रंप ने इस पहल को व्यापक आर्थिक प्रदर्शन से भी जोड़ा और रोजगार व निवेश में वृद्धि का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “इस समय हमारे देश के इतिहास में सबसे ज्यादा लोग काम कर रहे हैं।”
अमेरिका की रिटायरमेंट प्रणाली लंबे समय से नियोक्ता-आधारित योजनाओं पर निर्भर रही है, जिससे गिग वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग इससे बाहर रह जाता है। हाल के वर्षों में इस खाई को पाटने के प्रयासों को दोनों दलों का समर्थन मिलता रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
एयर इंडिया ने ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल लागू करने के फैसले का किया स्वागत, कहा- इससे भारत के एविएशन सेक्टर में आएगा बड़ा बदलाव

एयर इंडिया ने बुधवार को सरकार के ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल को अपनाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश के एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने सरकार की इस पहल को एविएशन सेक्टर के लिए एक ‘परिवर्तनकारी कदम’ बताया और कहा कि इससे कनेक्टिविटी मजबूत होगी और देश भर में एयरपोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम उपयोग संभव होगा।
इस दौरान एयर इंडिया ने ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के अंतर्गत वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लॉन्च किया।
विल्सन ने आगे कहा,“यह भारतीय एविएशन के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने और पूरे एविएशन इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी प्रयासों के लिए हम उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं।”
साथ ही, उन्होंने एक बड़े एविएशन इकोसिस्टम के विकास और वैश्विक हवाई यात्रा में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि की सराहना की।
इस मॉडल के अनुरूप अपनी विस्तार रणनीति के तहत, एयर इंडिया वाराणसी से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी क्षेत्रों के यात्रियों के लिए सुगम्य यात्रा सुनिश्चित करना है।
एयर इंडिया के गवर्नेंस, रिस्क, कंप्लायंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स के ग्रुप हेड पी. बालाजी ने कहा कि इस कदम से भारत के ग्लोबल एविएशन को महानगरों से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और टियर 2 और टियर 3 शहरों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सुलभ हो जाएगी।
इसी महीने की शुरुआत में, नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने हब-एंड-स्पोक संचालन को लागू करने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए प्रमुख हितधारकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
मंत्री ने कहा कि यह मॉडल उड़ान योजना के तहत विकसित टियर-II और टियर-III हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी को सक्षम करेगा।
उन्होंने बताया कि भारत से लगभग 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री वर्तमान में दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हब के माध्यम से पारगमन करते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हमारा लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय केंद्रों का विकास करके इस ट्रेंड को पलटना है।”
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