राष्ट्रीय
शेयर बाजार में कैसे करें इन्वेस्टमेंट, जानिए दो बड़े एक्सपर्ट विवेक बजाज और रचना रानाडे से कुछ खास टिप्स
Written by – Alisha chandrakar
शेयर बाजार में पैसा लगाकर लाखों कमाया जा सकता है…और लोग कमा भी रहे हैं…पर ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है..क्योकि लोग शेयर बाजार के बारे में ज्यादा जानते नहीं हैं…ऐसे में कुछ शेयर बाजार के एक्सपर्ट से जानकारी लेकर आप कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.. तो चलिए आज हम आपको ऐसे ही दो बड़े शेयर एक्सपर्ट से आपको मिलवाते हैं..जो आपको शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट करने का आसान तरीका बताएंगे.. इस लेख को अंत तक पढिये और सिखिए की कैसे शेयर बाजार में निवेश करते हैं . आज हम जानेंगे फाइनेंस की दुनिया के सबसे फेमस विवेक बजाज और रचना रानाडे के बारे में…जो आपको इन्वेस्ट का सबसे आसान रास्ता बताएंगे..

विवेक बजाज एक ऐसी शख्सियत है. जिनके वजह से आज शेयर मार्किट के बारे में सीखने का पुराना नजरिया ही बदल चुका है..विवेक बजाज इंडिया के सबसे बड़े स्टॉक मार्किट सॉफ्टवेयर ई-लर्न मार्केट्स के फाउंडर है और स्टॉक-एज के को-फाउंडर भी हैं.. विवेक बजाज ने जीरो से शुरूवात की थी लेकिन आज वो करोड़ो के मालिक हैं.. उनकी कंपनी में कोटक महिंद्रा ने भी इन्वेस्ट किया हुआ है.. विवेक बजाज अपने सॉफ्टवेयर और अपने यूट्यूब की मदद से आज लाखो लोगों को स्टॉक मार्किट के बारे में सीखा रहे है….

वही दसूरी तरफ सीए रचना रानाडे एक बहुत ही शानदार एंट्रेप्रेनॉर, सीए, और एक अमेजिंग यूट्यूबर हैं…रचना रानाडे के कंटेंट आज हर कोई देखना पसंद करता है क्योंकि वो बहुत ही आसानी से आम भाषा में सिखाती है.. रचना रानाडे आज एक सक्सेसफुल एंट्रेप्रेनॉर हैं…
स्टॉक सेवा और मीडिया टर्मिनल को दिए एक इंटरव्यू के दौरान विवेक बजाज और रचना रानाडे ने कुछ टिप्स शेयर की जिनसे आप भी बन सकते है..इन्ही की तरह करोड़पति..तो आइए जानते हैं, इन खास टिप्स को….
1) कहते हैं जितनी चादर उतना ही पैर फैलाये…विवेक बजाज ने बताया कि आपके पास जितनी क्षमता है उतना ही पैसा स्टॉक मार्किट में इन्वेस्ट करें..जैसे कई लोग लोन लेकर पैसा स्टॉक में डालते है..यदि उन्हे उतना मुनाफा नहीं मिलता..तो नुकसान हो जाता है…इसलिए लोन लेने से बचे…
2) वहीं रचना रानाडे का मानना है कि एक्सपर्ट ओपिनियन के भरोसे ज्यादा न रहे.. मसलन कई लोगो की आदत होती है कि वो बार बार एक्सपर्ट ओपिनियन लेते हैं और वो एक्सपर्ट उनका कोई दोस्त या पडोसी ही होता है…रानाडे का कहना है कि जितना हो सके खुद ही समझ कर इन्वेस्ट करें या रियल एक्सपर्ट से ही एडवाइस ले..यानि कि सुनिए सब की लेकिन करिये सिर्फ अपने मन की…
3) विवेक बजाज का मानना है कि अपना पोर्टफोलियो रोज ना चेक करें.. जब मार्किट रेड में हो. क्योंकि उससे गलत फैसला ले सकते हैंं.. लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के बारे में सोचिये और इसीलिए रोज़ पोर्टफोलियो चेक ना करें..
4) रचना रानाडे ने इंटरव्यू में बताया कि कैसे आप गलत कंपनी में इन्वेस्ट करने से बच सकते हो.. इन्वेस्ट करने से पहले उस कंपनी के बारे में ये 3 जवाब जान लो पहला कि क्या कंपनी का फ्यूचर ब्राइट है ? दूसरा क्या मुझे लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट करना है या शार्ट टर्म ? और तीसरा क्या यह कंपनी पहले भी डाउन हिल सर्वाइव कर चुकी है ? इन सब का जवाब मिलने पर ही उस कंपनी में निवेश करें…
5) बाई हाई ,सेल लो ( buy high sell low ) की साईकल में न फंसे.. विवेक बजाज ने बताया कि सेल लो बाई हाई की साइकिल में ना फंसे, इन्वेस्टर्स ये गलती करते हैं कि जब प्राइस स्टॉक नीचे गिरता है तो वह शेयर्स बेच देते हैं..बहुत ही सस्ते में और सोचते है कि जब और गिरेगा नीचे तब खरीदेंगे लेकिन उल्टा हो जाता है, प्राइस फिर बढ़ जाते हैं और फिर से वो महंगे में उससे ख़रीद लेते हैं और नुकसान हो जाता है इसलिए इससे बचे…
तो ये थी कुछ खास टिप्स विवेक बजाज और रचना रानाडे के तरफ से. उम्मीद है आपके काम जरूर आएगी…
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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