राष्ट्रीय समाचार
पुंछ से जम्मू के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शुरू, स्थानीय लोगों ने जताई खुशी
पुंछ, 21 दिसंबर। जम्मू-कश्मीर के पुंछ से जम्मू के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शनिवार से शुरू हो गई। पुंछ के विधायक एजाज अहमद जान और उनके परिवार ने हेलीकॉप्टर में सवार होकर पुंछ से जम्मू के लिए उड़ान भरी।
दरअसल, पुंछ और जम्मू के बीच शुरू हुई हेलीकॉप्टर सेवा का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई सेवा से जोड़ना है। इसी के मद्देनजर भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित पुंछ जिला मुख्यालय से जम्मू के बीच हेलीकॉप्टर को शुरू किया गया है।
पुंछ हवेली विधानसभा क्षेत्र से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक एजाज अहमद जान ने आईएएनएस से बातचीत की। उन्होंने कहा, “हेलीकॉप्टर सेवा को लेकर लोगों की तरफ से जो भी मांग की जाएगी, उसके मद्देनजर हेलीकॉप्टर के फेरे में इजाफा किया जाएगा। अगर एक दिन में लोग ज्यादा सफर करेंगे तो उनकी सुविधा का भी ख्याल रखा जाएगा।”
उन्होंने कहा, “शादी या किसी अन्य काम के लिए भी हेलीकॉप्टर सेवा को बुक किया जा सकता है, इसका किराया भी कम है। लोगों की परेशानियों को देखते हुए हेलीकॉप्टर सेवा को फिर से शुरू किया गया है। हमारी तरफ से प्रयास किया जा रहा है कि इसके किराए को और भी कम किया जाए। मैं सीएम उमर अब्दुल्ला और गवर्नर साहब का शुक्रिया अदा करता हूं, जिनकी वजह से ये सर्विस शुरू हो पाई है।”
एजाज अहमद जान ने बताया, “पुंछ के अलावा मेंढर में भी हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई है। सरकार का प्रयास है कि लोगों की मुश्किलों को कम किया जाए। जो सर्विस दिल्ली में मिलती है, उसको पुंछ की जनता के लिए भी मुहैया कराया जाए।”
पुंछ के लोगों ने हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने पर खुशी जाहिर की। स्थानीय निवासी ओंकार सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “बहुत लंबे समय के बाद एक बार फिर से पुंछ में हेलीकॉप्टर सेवा को शुरू किया गया है। हम सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। विधायक के प्रयास की वजह से आज ये सर्विस शुरू हुई है।”
उन्होंने कहा, “हेलीकॉप्टर सेवा नहीं होने के कारण यहां के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा छात्र अपनी परीक्षा देने के लिए दूसरी जगह भी नहीं जा पाते थे और मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ती थी। हेलीकॉप्टर सेवा फिर शुरू होने के बाद काफी लाभ मिल पाएगा।”
राष्ट्रीय समाचार
टीएमसी दफ्तर से मिले 1.02 करोड़ रुपये पुलिस ने रखवाए : अभिषेक बनर्जी

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ने सरिशा स्थित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक पार्टी कार्यालय से 1 करोड़ 2 लाख 79 हजार रुपए बरामद किए। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस पार्टी (ममता गुट) के महासचिव महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि यह रकम वास्तव में पुलिस ने वहां रखी थी।
डायमंड हार्बर पुलिस ने दावा किया है कि अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान सरिशा पार्टी कार्यालय में भारी मात्रा में कैश होने की जानकारी मिली। सुमित रॉय अभी पुलिस हिरासत में हैं। कालीतला-अशुती पुलिस स्टेशन में मिट्टी चोरी के एक करोड़ों रुपए के मामले में केस दर्ज है।
हालांकि पुलिस के इन दावों को खारिज करते हुए बनर्जी ने बुधवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि उक्त पार्टी कार्यालय में जानबूझकर नगदी रखी गई थी। छह महीने पहले भारतीय जनता पार्टी समर्थित गुंडों ने इस कार्यालय में तोड़फोड़ की थी।
डायमंड हार्बर के सांसद ने एक्स पर लिखा, “छह महीने पहले भाजपा के गुंडों द्वारा तोड़ी गई जगह (पुलिस जांच के तहत अपराध स्थल) पर जानबूझकर फर्जी और मनगढ़ंत सबूत रखना, न्याय को बाधित करने, जांच में हेरफेर करने और कानूनी तंत्र का दुरुपयोग करने की एक बेशर्म कोशिश है।”
अभिषेक बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चेतावनी दी कि जिन्होंने उस जगह पर नगदी रखवाई है। अंततः जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस खतरनाक साजिश को रचने वालों और उनके इशारे पर काम करने वालों के लिए यह एक साफ चेतावनी है। आप हर तरह की जालसाजी, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।”
उन्होंने पुलिस प्रशासन को भी चेतावनी दी कि वे राजनीतिक संरक्षण और अपने आधिकारिक पद या पुलिस शक्तियों के दुरुपयोग को कानूनी कार्रवाई से बचने का जरिया न समझें।
बनर्जी ने कहा, “कानून इसमें शामिल हर व्यक्ति तक पहुंचेगा, चाहे उसका ओहदा, पद या राजनीतिक जुड़ाव कुछ भी हो। कानून की पूरी सख्ती का सामना करने के लिए तैयार रहें। इसमें कोई समझौता नहीं होगा, कोई पीछे हटने की गुंजाइश नहीं होगी और कानूनी जवाबदेही से कोई बच नहीं पाएगा।”
सोमवार को डायमंड हार्बर पुलिस जिले ने पुष्टि की कि जिस पार्टी कार्यालय से नदी बरामद हुई, वह तृणमूल कांग्रेस का है, हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस कार्यालय को चलाने के लिए असल में कौन जिम्मेदार था।
अभी यह साफ नहीं है कि इतनी बड़ी रकम तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय में क्यों रखी गई थी और यह कहां से आई। पुलिस इस पैसे के स्रोत के बारे में और जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है। हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि इसका संबंध कालीतला-अशुती पुलिस स्टेशन में दर्ज मिट्टी चोरी के मामले से है।
राजनीति
सरकार का लक्ष्य महाराष्ट्र को भविष्य की गतिशीलता का वैश्विक केंद्र बनाना है: सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य राज्य को सिर्फ एक राष्ट्रीय ऑटोमोटिव केंद्र से बदलकर भविष्य की गतिशीलता का वैश्विक केंद्र बनाना है।
‘मेक इन महाराष्ट्र’ से ‘इनोवेट इन महाराष्ट्र’ की ओर बढ़ते हुए राज्य सरकार विनिर्माण के साथ-साथ अनुसंधान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी विकास और नवाचारों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री चाकन में मर्सिडीज-बेंज के अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक जीएलसी वाहन के लॉन्च के अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ क्षेत्रों में एक विशाल ऑटोमोटिव उद्योग क्लस्टर विकसित हुआ है, जिसमें महाराष्ट्र भारत के कुल मोटर वाहन उत्पादन में 20 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य की महत्वाकांक्षा केवल वाहन असेंबली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), बैटरी प्रौद्योगिकी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल सॉफ्टवेयर, डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने तक फैली हुई है।
मुख्यमंत्री ने मर्सिडीज-बेंज से आग्रह किया कि वह भारतीय घरेलू बाजार के साथ-साथ एशियाई और वैश्विक बाजारों के लिए भी चाकन से उत्पादन करे, और भविष्य की बैटरी प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और गतिशीलता अनुसंधान के लिए महाराष्ट्र को प्राथमिकता दे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत, 2030 तक नए वाहन पंजीकरण में 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि राजमार्गों पर फास्ट-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और समृद्धि महामार्ग के साथ सतत गतिशीलता कॉरिडोर और बैटरी रीसाइक्लिंग पहलों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य के वाहन केवल चार पहिया वाहन नहीं होंगे, बल्कि कंप्यूटर, ऊर्जा प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से युक्त एक एकीकृत गतिशीलता मंच होंगे।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, प्रस्तावित पुणे-पुरंदर हवाई अड्डे और वधावन बंदरगाह के माध्यम से वैश्विक बाजारों से कनेक्टिविटी को और बढ़ाया जाएगा।
विशाल बाजार, सशक्त विनिर्माण प्रणाली, कुशल इंजीनियरों और उन्नत प्रौद्योगिकी के बल पर महाराष्ट्र एक प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में उभरा है।
उन्होंने कहा कि मात्र 36 घंटों के भीतर लगभग 650 ग्राहकों ने इलेक्ट्रिक जीएलसी वाहन में रुचि दिखाई।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि महाराष्ट्र से वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार को सक्रिय रूप से विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 3,200 करोड़ रुपए के निवेश से निर्मित मर्सिडीज-बेंज के चाकन संयंत्र ने लगभग 1,200 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान किया है, जबकि आपूर्तिकर्ता नेटवर्क और सेवा क्षेत्रों के माध्यम से लगभग 18,000 व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए हैं। इस संयंत्र के विस्तार के दस वर्षों के भीतर अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक जीएलसी का उत्पादन राज्य की औद्योगिक और तकनीकी प्रगति का प्रमाण है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि मर्सिडीज-बेंज ने पिछले तीन दशकों में महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
राजनीति
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक लड़ाई में ‘बेबी-ममता’ की नजदीकियों से वामपंथियों के बीच बेचैनी बढ़ी

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ पूरे देश में एक गठबंधन बनाने के लिए विपक्ष के बीच दिख रही एकजुटता शायद अभी तक शीर्ष नेतृत्व से नीचे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक नहीं पहुंची है। हाल ही में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी सीपीआईएम के महासचिव एमए बेबी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के बीच दिखी नजदीकी ने खबरों के अनुसार वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) के कुछ हिस्सों में एक असहज बहस छेड़ दी है।
ऐसा लगता है कि नई दिल्ली में रविवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक की रैली की एक तस्वीर सामने आने के बाद यह विवाद और भड़क गया है। इस तस्वीर में ‘बेबी’ (एमए बेबी) ममता बनर्जी के कान में कुछ फुसफुसाते हुए दिख रहे हैं, और ममता मुस्कुराते हुए उनकी बात ध्यान से सुन रही हैं।
कुछ समय पहले तक ऐसी तस्वीर की कल्पना करना भी मुश्किल था, और लोग इसे नापसंद भी करते। ऐसा इसलिए है क्योंकि ममता का एकमात्र राजनीतिक लक्ष्य पश्चिम बंगाल में वामपंथियों (लेफ्ट) के गढ़ को तोड़ना था। उन्होंने 2011 में यह हासिल भी कर लिया—कांग्रेस पार्टी छोड़ने के लगभग 13 साल बाद जब उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक इरादों पर सवाल उठाए थे।
इस विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि क्या वामपंथी दल, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कड़ा राजनीतिक संघर्ष जारी रखते हुए भाजपा से भी प्रभावी ढंग से लड़ सकते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल में?
कम्युनिस्टों के बीच एक विचारधारा यह है कि भाजपा से लड़ने के लिए वामपंथी दलों को अपने ‘दुश्मन के दुश्मन’ के साथ हाथ मिला लेना चाहिए, भले ही वे क्षेत्रीय स्तर पर उनके विरोधी ही क्यों न हों।
इस विचार का समर्थन करने वाले लोग बताते हैं कि वामपंथियों का एकजुट होना तभी संभव हो पाया, जब सीपीआईएम की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ने ‘सांप्रदायिक ताकतों’ के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
वे यह भी मानते हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) से समर्थन वापस लेने के बाद ही वामपंथियों के जनाधार में गिरावट शुरू हुई। हालांकि, इस विचार का कड़ा विरोध भी हो रहा है। विरोध करने वालों का तर्क है कि पश्चिम बंगाल में जब ममता बनर्जी अपने चरम पर थीं, तब कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बावजूद वे उन्हें चुनौती देने में विफल रहे थे।
एक और पहलू यह है कि केरल में वामपंथी गठबंधन का सीधा मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन से है। जमीनी स्तर पर हो रही चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी का एक धड़ा इस नई राजनीतिक दिशा को वरिष्ठ मार्क्सवादी नेता और पूर्व महासचिव प्रकाश करात की रणनीतिक सोच से दूर जाने के रूप में देख रहा है।
सालों तक, बंगाल के वामपंथी नेताओं का यही मानना रहा है कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वामपंथी नेताओं का तर्क था कि ममता बनर्जी के साथ किसी भी तरह का राजनीतिक समझौता करने से उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान कमजोर होगी और उनके कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा होगा, खासकर ऐसे राज्य में, जहां पार्टी का आरोप रहा है कि ममता के शासन में उनके समर्थकों पर अत्याचार किए गए हैं। पर्यवेक्षकों का मानना है कि सीपीआईएम प्रमुख बनने के बाद से, बेबी ने ‘भाजपा-विरोधी एकता’ को मजबूत करने पर काफी जोर दिया है। इस दौरान, ‘इंडिया’ ब्लॉक के दायरे में ममता बनर्जी के साथ उनकी बातचीत काफी ‘सौहार्दपूर्ण’ रही है।
भारतीय राजनीति में भाजपा एक प्रमुख ताकत बनी हुई है, लेकिन संसद में सीपीआईएम की मौजूदगी अब पहले की तुलना में बहुत कम रह गई है। ऐसे हालात में पार्टी के भीतर कई लोगों का मानना है कि विपक्ष की एकता अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत बन गई है, लेकिन पार्टी के कट्टर समर्थकों को डर है कि इन तस्वीरों और संदेशों से यह संकेत जा सकता है कि सीपीआईएम तृणमूल के प्रति अपना विरोध नरम कर रही है।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
बॉलीवुड1 month agoटीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में 10 साल बाद कोर्ट ने बॉयफ्रेंड पर सुनाया फैसला
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति2 years agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल2 years agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
