राजनीति
दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था लाचार : मनोज तिवारी
दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा राज्य सरकार के अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली के लोगों का ईलाज कराने के फैसले का भाजपा ने कड़ा विरोध किया है। दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस फैसले पर व्यंग्य करते हुए कहा कि दिल्ली में लोग इलाज के लिये क्यों आयेंगे, जब दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था ही लाचार है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो भी लोग रह रहे हैं, उनके इलाज से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भाग नहीं सकते, राजधानी के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में लोगों को इलाज कराने से रोक नही सकते हैं, ये शर्मनाक है।
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने रविवार को साफ कर दिया है कि बाहरी मरीजों का इलाज अब राज्य सरकार के अस्पतालों में नहीं होगा। मुख्यमंत्री केजरीवाल के मुताबिक दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में अब सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही इलाज होगा। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र वाले अस्पतालों जैसे एम्स समेत अन्य में कोई भी मरीज इलाज करा सकता है।
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली कैबिनेट ने फैसला लिया है कि राज्य सरकार के अस्पताल अब दिल्ली के लोगों के लिए होंगे। केंद्र सरकार के अस्पताल में कोई भी इलाज करा सकता है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों के अस्पतालों में 10,000- 10,000 बेड हैं।
अपराध
युवक की पीटकर हत्या करने के मामले में दो वांछित बदमाश मुठभेड़ में गिरफ्तार

CRIME
ग्रेटर नोएडा, 6 जनवरी: गौतमबुद्धनगर जिले के दादरी थाना क्षेत्र में पुलिस और बदमाशों के बीच सोमवार देर रात मुठभेड़ हो गई। इस दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश गोली लगने से घायल हो गए। दोनों आरोपी हाल ही में दर्ज हत्या के मामले में वांछित थे। पुलिस ने मौके से अवैध हथियार और कारतूस बरामद कर लिए हैं तथा घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 5 जनवरी 2026 की रात थाना दादरी पुलिस जारचा अंडरपास के पास संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सामने से दो संदिग्ध व्यक्ति आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन वे नहीं रुके और भागने का प्रयास करने लगे। शक होने पर पुलिस टीम ने उनका पीछा किया।
खुद को घिरता देख बदमाशों ने पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें दोनों बदमाश घायल हो गए। बाद में उनकी पहचान प्रशांत उर्फ सिट्टू पुत्र बिजेंद्र, निवासी कैमराला, थाना दादरी, गौतमबुद्धनगर और प्रशांत पुत्र गजब सिंह, निवासी निजामपुर, थाना सिकंदराबाद, जनपद बुलंदशहर के रूप में हुई।
पुलिस ने उनके कब्जे से दो अवैध तमंचे .315 बोर, दो जिंदा कारतूस और दो खोखा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, ये दोनों आरोपी 5 जनवरी 2026 को दादरी क्षेत्र में हुई एक गंभीर आपराधिक घटना में शामिल थे। आरोप है कि अभियुक्तों ने पीड़ित के चचेरे भाई मोहित पुत्र धर्मवीर और गांव के हरकेश पुत्र जतन सिंह के साथ जान से मारने की नीयत से लाठी-डंडों से बेरहमी से मारपीट की थी।
इस दौरान जान से मारने की धमकी दी गई और वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। घटना में गंभीर रूप से घायल हरकेश की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद मुकदमे में हत्या से संबंधित धाराएं बढ़ा दी गईं। पुलिस तभी से आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। देर रात हुई मुठभेड़ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घायलों का इलाज चल रहा है और उनके खिलाफ अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सतर्क है और आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
राजनीति
ममता बनर्जी के रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान कैटरिंग आरक्षण की होगी जांच, एनएचआरसी ने रेलवे बोर्ड को भेजा नोटिस

नई दिल्ली, 6 जनवरी: वर्ष 2010 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान लागू की गई रेलवे कैटरिंग नीति एक बार फिर विवादों में आ गई है। आरोप है कि उस समय रेलवे के खान-पान स्टॉल और कैंटीन के संचालन की ठेकेदारी से जुड़ी आईआरसीटीसी की टेंडर प्रक्रिया में नीति स्तर पर बदलाव कर अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों, को 9.5 प्रतिशत तक आरक्षण दिया गया था।
इस मुद्दे को लेकर लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी नामक एक कार्यकर्ता ग्रुप ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि यह आरक्षण तुष्टिकरण की नीति के तहत किया गया प्रतीत होता है और यह संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि इस फैसले के कारण एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के अधिकारों में कटौती हुई, जो उनके संवैधानिक अधिकारों पर अतिक्रमण जैसा है।
इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। आयोग ने रेलवे बोर्ड से इस पूरे मामले की जांच करने और विधिसम्मत उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, वर्ष 2009-10 के रेल बजट भाषण के दौरान तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बेहतर गुणवत्ता का भोजन, साफ पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय और सफाई सुनिश्चित करने की घोषणा की थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि जन आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय व्यंजनों को रेलवे कैटरिंग में शामिल किया जाएगा।
इसी घोषणा के आधार पर रेलवे बोर्ड द्वारा 21 जुलाई 2010 को नई कैटरिंग नीति तैयार कर लागू की गई। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (टूरिज्म एंड कैटरिंग) मणि आनंद द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि यह नीति वित्त और विधि निदेशालय की सहमति से बनाई गई है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। इस संबंध में सभी भारतीय रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को निर्देश भेजे गए थे और आईआरसीटीसी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया गया था।
अब, एक दशक से अधिक समय बाद, इस नीति में कथित आरक्षण प्रावधान को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
पर्यावरण
मुंबई मौसम अपडेट (6 जनवरी, 2026): शहर घने धुंध की चपेट में, वायु गुणवत्ता की गंभीर स्थिति; समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 319

WETHER
मुंबई: मंगलवार को मुंबईवासियों का स्वागत एक खूबसूरत, निर्मल सर्दियों की सुबह से हुआ, जिसमें साफ नीला आसमान, हल्की हवाएं और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। सुबह के शुरुआती घंटों में राहत और ताजगी का एहसास हुआ, जिससे आने वाला दिन सुखद और आरामदायक रहने की उम्मीद जगी। हालांकि, यह शांति ज्यादा देर तक नहीं टिकी, क्योंकि जल्द ही शहर पर धुंध की एक मोटी परत छा गई, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई और मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण का संकट एक बार फिर सामने आ गया।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा मौसम के आशावादी पूर्वानुमानों के बावजूद, वायु गुणवत्ता जल्द ही शहर की सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई। आईएमडी ने धूप और सुहावने मौसम का पूर्वानुमान लगाया था, जिसमें तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद थी।
वायु गुणवत्ता निगरानी प्लेटफॉर्म AQI.in के आंकड़ों से पता चला है कि मुंबई का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सुबह के समय 319 तक पहुंच गया, जिससे यह ‘गंभीर’ श्रेणी में आ गया। बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों सहित संवेदनशील वर्गों को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
शहर में चल रहे व्यापक निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल और महीन कण लगातार प्रदूषण का मुख्य कारण बने हुए हैं। मुंबई भर में मेट्रो रेल लाइनें, फ्लाईओवर, तटीय सड़क विस्तार और सड़क चौड़ीकरण जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं चल रही हैं। इनके साथ-साथ, तेजी से हो रहे निजी रियल एस्टेट विकास ने भी प्रदूषण को और बढ़ा दिया है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, विशेष रूप से व्यस्त यातायात के समय, समस्या को और भी गंभीर बना देता है, जिससे वायु गुणवत्ता प्रबंधन लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
मुंबई के कई इलाके प्रदूषण के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे। चेंबूर में AQI खतरनाक रूप से 398 दर्ज किया गया, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है और यह स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। बांद्रा में AQI 368 रहा, जबकि वडाला ट्रक टर्मिनल में यह 358 था। जोगेश्वरी पश्चिम और सांताक्रूज़ दोनों में AQI का स्तर 346 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
हालांकि उपनगरीय क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम था, फिर भी वे सुरक्षित नहीं थे। बोरीवली पूर्व और कांदिवली पूर्व में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्रमशः 227 और 230 दर्ज किया गया, जो ‘अस्वास्थ्यकर’ श्रेणी में आता है। बोरीवली पश्चिम, गोवंडी और गोरेगांव पूर्व में भी खराब वायु गुणवत्ता पाई गई, जो मुंबई में प्रदूषण की समस्या की व्यापकता को उजागर करती है।
मानक वायु गुणवत्ता वर्गीकरण के अनुसार, 0 से 50 के बीच के AQI स्तर को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘मध्यम’, 101 से 200 को ‘खराब’, 201 से 300 को ‘अस्वास्थ्यकर’ माना जाता है, और 300 से ऊपर के स्तर ‘गंभीर’ या ‘खतरनाक’ श्रेणी में आते हैं।
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