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बायर्न म्यूनिख के साथ बने रहेंगे हैरी केन, 2029 तक के लिए बढ़ाया कॉन्ट्रैक्ट
हाल ही में बैलन डी’ओर अवॉर्ड जीतने वाले हैरी केन ने बायर्न म्यूनिख के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। क्लब ने गुरुवार को घोषणा की कि इस नए करार के तहत केन 2029 तक इस जर्मन दिग्गज क्लब के साथ बने रहेंगे।
यह करार लैमिन यमल और किलियन एम्बाप्पे को पीछे छोड़कर बैलन डी’ओर जीतने के 10 दिन बाद हुआ है। जर्मन क्लब द्वारा जारी एक बयान में केन ने कहा, “मैं एफसी बायर्न में बिल्कुल अपने घर जैसा महसूस करता हूं। मुझे यह क्लब, यहां के प्रशंसक और म्यूनिख शहर बहुत पसंद हैं। हमारे पास एक शानदार टीम है और विंसेंट कॉम्पनी के रूप में एक बेहतरीन मैनेजर हैं। इस क्लब का हिस्सा होने पर मुझे बहुत गर्व है। मेरा पूरा परिवार यहां बहुत खुश है। मैं यहीं रुकना चाहता था। अब मैं भविष्य की ओर देख रहा हूं और इस महान क्लब के साथ और भी कई खिताब जीतना चाहता हूं।”
2023 में टोटेनहम हॉटस्पर छोड़ने के बाद से केन ने इस क्लब के लिए 161 मैचों में 156 गोल किए हैं। इंग्लैंड के कप्तान ने पिछले सीजन में 51 मैचों में 61 गोल किए थे। उन्होंने क्लब को बुंडेसलिगा खिताब और डीएफबी-पोकल जिताने में अहम भूमिका निभाई, जिससे क्लब ने लीग और कप दोनों जीते।
क्लब के साथ अपने समय के दौरान केन ने दो बुंडेसलिगा खिताब, एक डीएफबी कप और दो फ्रांज बेकेनबाउर सुपरकप जीते हैं। कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने पर बात करते हुए बायर्न के अध्यक्ष हर्बर्ट हेनर ने इसे एक खास दिन बताया। उन्होंने कहा, “जो एक बड़े ट्रांसफर के रूप में शुरू हुआ था, वह समय के साथ एफसी बायर्न के इतिहास का एक खास अध्याय बन गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “हैरी केन फुटबॉल की हर उम्मीद पर खरे उतरे हैं। उन्होंने हमारे समय के खेल के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक के रूप में प्रशंसकों के दिलों में अपनी जगह बना ली है। मैं जान-क्रिश्चियन ड्रीसेन और हमारी स्पोर्टिंग मैनेजमेंट टीम को बधाई देता हूं। आज एफसी बायर्न के लिए यह एक खास पल है।”
हाल ही में केन ने उन चर्चाओं को खारिज कर दिया था कि वह प्रीमियर लीग में वापस जा सकते हैं। प्रीमियर लीग में वह दूसरे सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं और एलन शियरर के ऑल-टाइम रिकॉर्ड से केवल 47 गोल पीछे हैं।
हैरी केन ने कहा था, “फिलहाल तो नहीं, अभी तो बिल्कुल नहीं। मुझे बायर्न म्यूनिख में अपनी जिंदगी बहुत पसंद आ रही है। बायर्न एक बेहतरीन क्लब है। हमारे पास एक शानदार टीम है और एक बेहतरीन कोच (विन्सेंट कॉम्पनी) हैं। तो हां, अभी मेरा पूरा ध्यान यहीं है और मैं बहुत खुश हूं। इस तरह के अवॉर्ड जीतना यह साबित करता है कि मैंने यहां आने का फैसला क्यों लिया था।”
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वेलिंग्टन में कैसा है टीम इंडिया का वनडे रिकॉर्ड? 2019 में मिली थी आखिरी जीत

भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की सीरीज का दूसरा वनडे मुकाबला वेलिंग्टन के स्काई स्टेडियम में शनिवार को खेला जाना है। पहले वनडे में भारतीय टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 5 विकेट से हराया था। आइए आपको बताते हैं कि वेलिंग्टन में कैसा रहा है टीम इंडिया का वनडे रिकॉर्ड।
भारतीय टीम ने वेलिंग्टन के स्काई स्टेडियम में अब तक कुल 4 वनडे मुकाबले खेले हैं। इसमें से भारतीय टीम को 2 में जीत मिली है। वहीं, एक मुकाबले में टीम को हार का सामना करना पड़ा है, जबकि एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। भारत ने इस ग्राउंड पर अपना आखिरी मैच साल 2019 में खेला था, जहां टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 35 रनों से हराया था।
बारिश से प्रभावित पहले वनडे मुकाबले में टीम इंडिया का प्रदर्शन दमदार रहा था। अर्शदीप सिंह की अगुवाई में भारतीय गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की पूरी टीम को 185 रनों पर समेट दिया था। अर्शदीप ने 4 विकेट अपने नाम किए थे, जबकि गुरनूर बरार 3 विकेट चटकाने में सफल रहे थे। वहीं, अंशुल कंबोज ने महज 22 रन देकर 2 विकेट चटकाए थे। अंशुल को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया था। न्यूजीलैंड के छह बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा तक नहीं छू सके थे। टीम की ओर से सर्वाधिक 38 रन टिम सीफर्ट ने बनाए थे।
बल्लेबाजी में भारत की ओर से विराट कोहली ने बेहतरीन लय में दिखाई दिए थे और उन्होंने सिर्फ 51 गेंदों का सामना करते हुए 74 रनों की आतिशी पारी खेली। वहीं, शुभमन गिल ने 37 रनों का योगदान दिया था। हालांकि, रोहित शर्मा बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके थे और वह बिना खाता खोले पवेलियन लौटे थे। श्रेयस अय्यर भी 15 रन ही बना सके थे, जबकि अक्षर पटेल भी जीरो पर आउट हुए थे। इससे पहले, टीम इंडिया ने पांच मैचों की टी20 सीरीज को 3-2 से अपने नाम किया था।
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क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने इंटरनेशनल फुटबॉल से किया संन्यास का ऐलान, पुर्तगाल के लिए दागे सर्वाधिक गोल

पुर्तगाल के स्टार फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का ऐलान कर दिया है। रोनाल्डो ने अपने संन्यास की जानकारी सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो शेयर करते हुए दी।
रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू साल 2003 में किया था। इसके बाद से उन्होंने टीम की ओर से खेलते हुए कई बड़े रिकॉर्ड्स कायम किए। खिलाड़ी के साथ-साथ रोनाल्डो ने पुर्तगाल टीम की कप्तानी भी की और उनकी अगुवाई में टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। रोनाल्डो ने अपने 232 मैचों के करियर में कुल 146 गोल किए। पुर्तगाल की ओर से सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड भी रोनाल्डो के ही नाम है।
रोनाल्डो की अगुवाई में पुर्तगाल ने साल 2016 में यूरो कप का खिताब अपने नाम किया था। रोनाल्डो ने संन्यास लेने के अपने इस फैसले को खुद के लिए बेहद कठिन निर्णय बताया। उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर के दौरान उनका समर्थन करने वाले लोगों का भी धन्यवाद किया।
रोनाल्डो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किए गए वीडियो में कहा, “पुर्तगाल के लोगों, अब समय आ गया है कि नेशनल टीम की नंबर 7 जर्सी आप सभी को वापस सौंप दी जाए। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि यह सिर्फ मेरी है, लेकिन 23 वर्षों तक मुझे इसे पहनने, इसका मान रखने और दुनिया भर के स्टेडियमों में इसे अपने साथ ले जाने का सौभाग्य और जिम्मेदारी मिली। आज इसे भविष्य को सौंपने का समय आ गया है।”
अपने सफर को याद करते हुए रोनाल्डो ने माना कि उनके करियर में कई यादगार जीतें रहीं, तो कुछ मुश्किल पल भी आए। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि नेशनल टीम के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “कुछ बेहतरीन दिन और रातें थीं, ऐसी जीतें थीं, जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकता, और कुछ ऐसी हार भी थीं, जिन्हें याद करना आज भी मुश्किल लगता है। मुझसे गलतियां भी हुईं, मुझे तकलीफें भी झेलनी पड़ीं और कई बार ऐसा भी हुआ, जब मैं पुर्तगाल के लोगों को वह नहीं दे पाया, जिसकी उन्हें बहुत उम्मीद थी। मगर मैंने कभी हार नहीं मानी। सबसे बड़ी बात, पुर्तगाल का प्रतिनिधित्व करने पर मुझे हमेशा गर्व महसूस होता रहा।”
उन्होंने अपने इंटरनेशनल सफर के दौरान साथ देने के लिए अपने साथियों, कोचों, सपोर्ट स्टाफ और परिवार का भी धन्यवाद किया। रोनाल्डो ने कहा, “उन सभी कोचों, डॉक्टरों, फिजियोथेरेपिस्ट, ड्रेसर्स, कर्मचारियों और उन तमाम लोगों का शुक्रिया, जिन्होंने इतने वर्षों तक मेरे साथ काम किया है। आपमें से कई लोग कभी तस्वीरों में नहीं दिखे, लेकिन आपके बिना इनमें से कोई भी तस्वीर मुमकिन नहीं होती। मेरे परिवार को भी धन्यवाद, जिन्होंने मेरे साथ इस सपने को साझा किया।”
रोनाल्डो ने आगे कहा, “मेरी गैर-मौजूदगी को समझने, बलिदान देने और उन पलों को स्वीकार करने के लिए धन्यवाद, जब राष्ट्रीय टीम को उस जगह की जरूरत पड़ी, जो असल में आपकी थी। अगर मैं यहां तक पहुंच पाया, तो इसलिए क्योंकि आप हमेशा मेरे साथ खड़े रहे।”
रोनाल्डो के संन्यास से पुर्तगाल के लिए एक युग का अंत हो गया है और अब राष्ट्रीय टीम की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के कंधों पर आ गई है।
हालांकि, रोनाल्डो ने यह साफ कर दिया कि इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद भी देश के साथ उनका जुड़ाव वैसा ही बना रहेगा। उन्होंने कहा, “आज मैं राष्ट्रीय टीम के साथ मैदान पर अपना सफर खत्म कर रहा हूं, मैं अपना सिर ऊंचा करके जा रहा हूं, अपने तय किए गए रास्ते पर गर्व महसूस करते हुए और इस संतुष्टि के साथ कि मैंने पुर्तगाल के लिए अपना सब कुछ दे दिया। मगर मैं हमेशा आपमें से ही एक बना रहूंगा।”
उन्होंने आगे कहा, “आज मुझे एहसास हो रहा है कि मेरी सबसे बड़ी जीत यह थी कि मुझे दुनिया के सबसे बेहतरीन देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इन 23 वर्षों के लिए धन्यवाद। मुझ पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद।”
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‘मैं अब युवा नहीं रही, बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल से लिया ब्रेक’: पीवी सिंधु

ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है। सिंधु इस टूर्नामेंट के लिए ही ब्रेक लिया था।
जापान ओपन सुपर 750 और जर्मनी में हाइलो ओपन में जीत हासिल करने के बाद पीवी सिंधु का आत्मविश्वास बढ़ा है। 2022 के बाद यह पहला सीजन है जिसमें सिंधु ने कई बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर टाइटल जीते हैं। पूर्व वर्ल्ड चैंपियन ने सारब्रुकेन में टूर्नामेंट से पहले फ्रेंच ओपन का फाइनल भी खेला था, लेकिन वह दुनिया की नंबर 1 और पेरिस 2024 चैंपियन कोरिया की एन से-यंग से हार गई थीं।
हाइलो ओपन जीतने के कुछ दिनों बाद, सिंधु ने कोरिया ओपन और जापान मास्टर्स छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि उनका शुरुआती प्लान सभी टूर्नामेंट खेलने का था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने शरीर की सुनने और दिसंबर में होने वाले बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल के लिए आराम करने और फिट होने का फैसला किया।
बैडमिंटन फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित मीडिया बातचीत के दौरान आईएएनएस के एक सवाल पर सिंधु ने कहा, “लंबा टूर खेलने के बाद, मैंने सोचा था कि मैं कोरिया ओपन और उसके बाद के टूर्नामेंट नहीं खेल पाऊंगी, लेकिन मेरे लिए वापस आकर आराम करना भी जरूरी था। मेरे लिए अपने शरीर का ध्यान रखना और अगले टूर्नामेंट के लिए फिट होना जरूरी था। यही प्लान था। मुझे लगता है कि मेरे लिए यह फैसला लेना जरूरी था कि मैं नहीं खेलूंगी। मुझे अपने शरीर का ध्यान रखना है और कोर्ट पर फिर से मजबूती से वापस आना है।”
सिंधु ने कहा, “मैं अब जवान नहीं रही, लेकिन मैंने यह भी कहा कि 31 अब नया 21 है, इसलिए मुझे अपने शरीर का ध्यान रखना है।”
नया 3×15 स्कोरिंग सिस्टम 4 जनवरी, 2027 से लागू होगा। सिंधु ने यह भी बताया कि क्या यह गेम को बदल देगा और क्या उनका गेम नए पॉइंट सिस्टम के हिसाब से सही होगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को शुरू से ही चौकन्ना रहने और आसान पॉइंट न गंवाने के लिए अलर्ट रहने की जरूरत है।
सिंधु ने कहा, “15 पॉइंट्स ऐसी चीज है जिस पर हर किसी को जरूर काम करना चाहिए, और हम इतने सालों से 21 पॉइंट्स पर खेल रहे हैं। इसलिए, हमने यह पक्का किया कि हम उस स्कोरिंग के लिए भी ट्रेनिंग और अभ्यास करें। हर किसी के लिए यह अलग होगा, इसलिए शुरू से ही अलर्ट रहना भी जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह जरूरी है कि आप शुरू से ही अलर्ट रहें। यह भी जरूरी है कि जब तक आपको पता चले कि आधा गेम खत्म हो गया है, तब तक आप कोई और आसान पॉइंट न दे सकें। इसलिए आपको हर बार चौकन्ना रहना होगा।”
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