राजनीति
गुजरात चुनाव ने भाजपा को नदी जोड़ने की परियोजना रोकने पर किया मजबूर : जयराम रमेश
पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सरकार ने आदिवासी आबादी और आगामी राज्य चुनावों के विरोध के कारण गुजरात में नदी जोड़ने की परियोजना को रोक दिया है। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार को आगामी गुजरात चुनावों के कारण पर-तापी-नर्मदा नदी-जोड़ने की परियोजना को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि जमीनी स्तर पर आंदोलन ने हजारों आदिवासियों के संभावित विस्थापन का विरोध किया था। लेकिन मध्य प्रदेश में विनाशकारी केन-बेतवा लिंक परियोजना जारी है।”
सूत्रों ने बताया कि आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद भाजपा सांसदों ने परियोजना को रोकने के लिए गृह मंत्री से मुलाकात की और बाद में यह फैसला लिया गया।
आदिवासी इस परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका दावा है कि इससे वलसाड, डांग और नवसारी जिलों में उनकी आजीविका नष्ट हो जाएगी।
यह परियोजना पर नदी को जोड़ेगी, जिसकी उत्पत्ति नासिक में है और गुजरात में वलसाड से होकर बहती है। सापुतारा से तापी नदी सूरत से होकर बहती है और नर्मदा नदी मध्य प्रदेश से निकलती है। इस परियोजना का उद्देश्य सरदार सरोवर परियोजना का इस्तेमाल करके पश्चिमी घाट से अतिरिक्त पानी को सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्रों में स्थानांतरित करना है।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को भेजा नोटिस, 12वीं बोर्ड में कैलकुलेटर इस्तेमाल की मांग वाली याचिका पर मांगा जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में 12वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। सीबीएसई के 12वीं कक्षा के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं में साधारण, गैर-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीएसई सहित केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और परख (प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा एवं समग्र विकास के लिए ज्ञान का विश्लेषण) को भी नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले से संबंधित अगली सुनवाई 2 जनवरी 2027 को होगी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि दिसंबर 2024 में हुई गवर्निंग बॉडी की बैठक में सीबीएसई ने कक्षा बारहवीं की एकाउंटेंसी की परीक्षाओं में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने को मंजूरी दी थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पाठ्यक्रम समिति ने दिसंबर 2024 में इस एजेंडे को मंजूरी दे दी थी, लेकिन उसके बाद से इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी को लेकर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई, केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और परख को नोटिस भेजकर 12वीं बोर्ड की एकाउंटेंसी की परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा है।
इसके अतिरिक्त, सीबीएसई की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए एक और अहम खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इन दोनों कक्षाओं के छात्रों को पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान दर्ज की गई जानकारियों को अच्छे से चेक करने का निर्देश और उनमें सुधार करने का मौका अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके दिया है।
सीबीएसई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (एलओसी) जारी कर दी है, जिसमें स्टूडेंट्स अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल चेक कर सकते हैं। अगर छात्रों को अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल में कोई संशोधन करना है, तो वे स्कूल से संपर्क करके उसमें 7 नवंबर तक सुधार करवा सकते हैं।
स्टूडेंट्स ध्यान दें कि केवल वही छात्र कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, जिनके नाम सीबीएसई की ओर से जारी एलओसी में होंगे।
राजनीति
‘मस्जिद से एलर्जी है’, कदीमी मस्जिद मामले को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना

एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नई दिल्ली में कृषि भवन कंपाउंड में मौजूद सौ साल पुरानी कदीमी मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसे मस्जिद से एलर्जी है।
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) के रीडेवलपमेंट के लिए नई दिल्ली में कृषि भवन कंपाउंड में मौजूद 100 वर्ष पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना होगा। सरकार का तर्क है कि मस्जिद ‘नाजायज है और सरकारी प्रॉपर्टी के सेक्युलर नेचर के साथ मेल नहीं खाती’। मोदी सरकार ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का उद्घाटन भूमि पूजा के साथ किया। साफ है, सेक्युलरिज्म को किसी पब्लिक प्रोजेक्ट के लिए एक धर्म के रीति-रिवाजों के इस्तेमाल से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उसे एक ऐसी मस्जिद से एलर्जी है जो 1912 से भी पहले से, कृषि भवन के बनने से बहुत पहले से वहां मौजूद है।”
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। अपने हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि कृषि भवन में मौजूद मस्जिद सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के खिलाफ है और इसे हटाया जाना चाहिए। बीते दिन केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को हटाने की जरूरत है, ताकि सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट मास्टर प्लान के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास हो सके। सरकार का कहना है कि यह निर्माण राष्ट्रीय महत्व की सर्वोपरि जन परियोजना है और प्रोजेक्ट साइट पर फिलहाल मस्जिद मौजूद होने से इसके कार्यान्वयन में बाधा आ रही है।
हलफनामे में केंद्र सरकार ने स्पष्ट तर्क दिया है कि किसी भी केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर की सीमा के भीतर स्थायी धार्मिक ढांचा स्थापित करना, बनाए रखना या दावा करना अस्वीकार्य है और यह सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विपरीत है। सरकार ने कहा कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव एरिया में स्थित सार्वजनिक भूमि पर कोई स्थायी धार्मिक निर्माण नहीं हो सकता।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं, जो विशेष रूप से सरकारी, प्रशासनिक और जनसेवा कार्यों के लिए समर्पित हैं। ऐसे में परिसर के भीतर धार्मिक ढांचे को बनाए रखना उचित नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि सीसीएस बिल्डिंग 4 और 5 का निर्माण सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान का अहम हिस्सा है। इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट साइट पर मौजूद मस्जिद को हटाना जरूरी है।
केंद्र ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि कृषि भवन के आसपास दो किलोमीटर के दायरे में शाही मस्जिद जाब्तागंज स्थित है, जो आसपास के किसी भी व्यक्ति को नमाज की पूरी सुविधा प्रदान करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। ऐसे में कृषि भवन परिसर के भीतर अलग से मस्जिद की आवश्यकता नहीं है।
महाराष्ट्र
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर शिवसेना-यूबीटी का केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला, मांगा केंद्रीय गृह मंत्री का इस्तीफा

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। लॉरेन्स बिश्नोई गैंग के नाम से व्यापारियों, बिल्डर्स, सिने अभिनेताओं और निर्माताओं को धमकियां मिल रही हैं। ऐसे महानायक को बुलेटप्रूफ पिंजरे में घूमना पड़ रहा है। बच्चन और उनके परिजनों को सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है। यह मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय गृहमंत्री शाह की असफलता है।
अभिनेता अमिताभ बच्चन के ‘बुलेटप्रूफ ग्लास’ के अंदर से अपने प्रशंसकों का अभिवादन करने की एक तस्वीर के साथ शिवसेना-यूबीटी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में ‘पिंजरे में बच्चन!’ शीर्षक के साथ एक लेख लिखा है। शिवसेना-यूबीटी ने कहा कि यह मौजूदा प्रशासन के तहत कानून-व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने का सबूत है।
मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में ठाकरे गुट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा। संपादकीय में कहा गया है कि देश में सार्वजनिक सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक स्तर तक गिर गई है।
शिवसेना-यूबीटी ने कहा, “शाह ने मानो अपने स्वार्थ के लिए एक अदृश्य शक्ति का निर्माण किया है और उस अदृश्य शक्ति के जरिए देश में किसी को भी धमकियां दिलाई जाती हैं, किसी से भी वसूली की जाती है या गोलीबारी करके लाशें गिराई जाती हैं। इसी के लिए अमिताभ बच्चन (आयु ८४ वर्ष) जैसे महानायक को बुलेटप्रूफ कांच का पिंजरा लेकर घूमना पड़ रहा है।”
अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी के पास हुई गोलीबारी की हालिया घटनाओं और नागपुर में सर्राफा व्यापारियों से रंगदारी मांगने के मामलों का जिक्र करते हुए शिवसेना-यूबीटी ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों हाई-प्रोफाइल फिल्मी हस्तियां, बड़े कारोबारी और आम नागरिक लगातार डर के साये में जी रहे हैं?
उद्धव ठाकरे गुट ने सवाल किया कि अपराधी गिरोह, खासकर लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क, बिना किसी डर के कैसे काम कर रहे हैं? आरोप लगाया गया है कि गृह मंत्रालय के एक आदेश ने राज्य पुलिस को गुजरात की साबरमती जेल से बिश्नोई को हिरासत में लेने से रोक दिया है, जिससे जेल में बंद इस गैंगस्टर को एक तरह का ‘अदृश्य सुरक्षा कवच’ मिल गया है।
संपादकीय में पूछा गया, “एक तरफ सत्ताधारी नेता भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बड़ी-बड़ी रैलियां कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक, बिल्डर और फिल्मी हस्तियां लगातार खौफ में जी रही हैं। आखिर सरकार कितने नागरिकों को इस तरह के विशेष सुरक्षा कवच मुहैया करा सकती है?”
संपादकीय में कहा गया है कि जो प्रशासन अपने प्रमुख नागरिकों की रक्षा नहीं कर सकता और बुनियादी अपराधी नेटवर्क को खत्म नहीं कर सकता, उसने अपना नैतिक अधिकार खो दिया है। साथ ही, उद्धव गुट ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।
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