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पाक के नापाक इरादों को जर्मन खुफिया एजेंसी ने उजागर किया
जर्मन राज्य सारलैंड की एक घरेलू खुफिया एजेंसी ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान अपने ‘कट्टर दुश्मन’ भारत के खिलाफ एक गंभीर निवारक क्षमता बनाए रखने के लिए व्यापक जनसंहार के हथियार (डब्ल्यूएमडी) के लिए तकनीक की तलाश में था।
इजरायल के दयेरुशलम पोस्ट ने खुलासा किया है। पश्चिम जर्मन राज्य सारलैंड द्वारा जारी एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान, पाकिस्तान और कुछ हद तक सीरिया ने माल की खरीद के साथ व्यापक जनसंहार के हथियार और उनकी वितरण प्रणाली को जानने के प्रयास किए हैं और वह हथियारों के आगे के विकास के लिए भी प्रयासरत रहे हैं।
पिछले सप्ताह जारी ‘ओवरव्यू ऑफ द सिचुएशन’ शीर्षक वाली खुफिया रिपोर्ट में जर्मनी और अन्य जगहों पर पाकिस्तान की स्पष्ट रूप से अवैध परमाणु हथियारों की गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
अखबार ने 112 पन्नों की रिपोर्ट के हवाले से बताया, “पाकिस्तान एक व्यापक परमाणु और वाहक प्रौद्योगिकी कार्यक्रम संचालित कर रहा है और ‘कट्टर दुश्मन’ भारत के खिलाफ एक गंभीर निवारक क्षमता को बनाए रखने के लिए विस्तार और आधुनिकीकरण का प्रयास जारी रखे हुए है। हालांकि पाकिस्तान बड़े पैमाने पर तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर है, लेकिन इसके लिए कुछ प्रमुख घटकों की जरूरत है। (नियंत्रण प्रौद्योगिकी सहित) जो विदेशों से खरीदे जाते हैं।”
आतंकवाद निरोधक विशेषज्ञों ने लंबे समय से पाकिस्तान पर तालिबान जैसे आतंकवादी आंदोलनों को प्रायोजित करने और उन्हें संरक्षित करने का आरोप लगाया है।
जर्मन खुफिया ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में पाकिस्तान, ईरान और सीरिया की संचालन रणनीति को बताया है।
इसके अलावा बाडेन-वुर्टेमबर्ग राज्य की खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में भी पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठाए गए हैं। परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियारों के प्रसार पर जारी इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि कैसे पाकिस्तान जैसे देश जर्मनी में अवैध हथियारों की खरीद, तैनाती और प्रभाव पर अपना काम जारी रखे हुए हैं। अग्रणी औद्योगिक देशों में से एक और कई उच्च-तकनीकी कंपनियों के होने के कारण, जर्मनी ऐसे देशों के संचालन का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
बाडेन-वुर्टेमबर्ग की 181 पन्नों की रिपोर्ट में पाकिस्तान के व्यापक सैन्य परमाणु कार्यक्रम का भी खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे देश इसी तकनीक को अनुकूलित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। पाकिस्तान कई वर्षों से असैन्य परमाणु हथियारों के अलावा एक व्यापक सैन्य परमाणु हथियार और वितरण कार्यक्रम चला रहा है। यह मुख्य रूप से ‘कट्टर-दुश्मन’ भारत के खिलाफ है, जिसके पास परमाणु हथियार भी हैं। रखरखाव और विकास के लिए, पाकिस्तान अन्य चीजों के अलावा पश्चिमी प्रौद्योगिकी पर निर्भर करता है।”
हिंदुस्तान टाइम्स ने कुछ दिनों पहले बताया था कि पाकिस्तान ने जर्मनी से अपनी पनडुब्बियों को और ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन (एआईपी) सिस्टम देने का अनुरोध किया था, लेकिन जर्मनी ने मना कर दिया। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की अध्यक्षता वाले सिक्योरिटी पैनल ने ये फैसला लिया। पाकिस्तान ने जर्मनी से एयर एआईपी की मांग इसलिए की थी, ताकि वह अपनी पनडुब्बियों को रिचार्ज कर सके और लंबे वक्त तक पानी के अंदर रह सके।
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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।
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मुंबई : मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ का वीडियो वायरल होने के बाद 3 हॉकरों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज

मुंबई : रेलवे पुलिस ने बताया कि मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ पढ़ते हुए तीन फेरीवालों का एक वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के बाद उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों हॉकरों की पहचान मुश्ताक बाबू लोन, सोहेब सदाकत साहा और बिस्मिल्लाह दीन अंसारी के रूप में हुई है। आरपीएफ ने अनाधिकार प्रवेश के लिए रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत मामला दर्ज किया, जबकि जीआरपी ने स्टेशन मास्टर की शिकायत के बाद बीएनएस की धारा 168 के तहत एक और मामला दर्ज किया। वीडियो वायरल होने के बाद, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि इस घटना के संबंध में एफ आई आर दर्ज की जाएगी। समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई के मलाड रेलवे स्टेशन पर, स्टेशन के प्लेटफॉर्म के ऊपर, खुलेआम एक छोटे मंडप जैसी संरचना बना दी गई है, और वहाँ नमाज़ पढ़ी जाने लगी है… इस पूरे मामले को लेकर एक एफ आई आर दर्ज की जाएगी।”
वायरल वीडियो में कुछ लोग मलाड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के ठीक बगल में बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज़ पढ़ते हुए दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, मलाड वेस्ट रेलवे स्टेशन पर विस्तार का काम चल रहा है और रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास एक बड़ी खुली जगह बनाई है। इस बीच, पिछले ही हफ़्ते बॉम्बे हाई कोर्ट ने टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को रमज़ान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के भीतर एक अस्थायी शेड में नमाज़ अदा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है।
अदालत ने कहा कि रमज़ान मुस्लिम धर्म का एक अहम हिस्सा है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि लोग किसी भी जगह पर नमाज़ पढ़ने के धार्मिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते, खासकर हवाई अड्डे के आस-पास, जहाँ सुरक्षा को लेकर काफ़ी चिंताएँ होती हैं। अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-ऊबर मेंस यूनियन की तरफ़ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि जिस अस्थायी शेड में वे नमाज़ पढ़ते थे, उसे पिछले साल गिरा दिया गया था। याचिका में अदालत से यह गुज़ारिश की गई थी कि वह अधिकारियों को निर्देश दे कि वे उन्हें उसी इलाके में नमाज़ पढ़ने के लिए कोई जगह आवंटित करें।
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असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, विवादित वीडियो को लेकर दी शिकायत

हैदराबाद, 9 फरवरी : एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट किए जा चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है।
पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देते रहे हैं, जिनमें से कई अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
पुलिस कमिश्नर के नाम पत्र में ओवैसी ने कहा, “मैं आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूं कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई सालों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। ऐसे कई भाषण अभी भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। हाल के महीनों में मुख्यमंत्री ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज कर दिया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा देना है, यह जानते हुए भी कि ऐसे आरोप राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक हैं और सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने वाले हैं।”
ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए और कोई भी निष्क्रियता या हिचकिचाहट कर्तव्य की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
उन्होंने कहा, “मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया एक हालिया वीडियो, जिसे एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें हिमंत बिस्वा सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ और ‘कोई दया नहीं’ जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया गया था और पूरे भारत में उपलब्ध था, जिसमें इस पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र भी शामिल है। मैंने इसे इस पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में देखा है। उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप कानून के अनुसार श्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ तत्काल और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें।
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