राजनीति
न्यूयॉर्क राज्य में गांधी की प्रतिमा स्थापित कर दी श्रद्धांजलि
अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य के एक शहर ने अहिंसा और शांति को बढ़ावा देने में महात्मा गांधी की वैश्विक भूमिका के लिए उनकी प्रतिमा स्थापित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
हालांकि, महात्मा गांधी की कुछ मूर्तियां अमेरिका में कट्टरपंथी समूहों द्वारा कुछ स्थानों पर हमले की भेंट चढ़ गए हैं।
एमहस्र्ट में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सामुदायिक पहल के माध्यम से प्रतिमा स्थापित की गई।
न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत रणधीर जायसवाल, स्टेट असेंबली की सदस्य कैरन मिकमॉहन, काउंटी प्रमुख मार्क पोलोनार्ज और ब्रायन कलपा, जो शहर के मेयर के समकक्ष हैं, ने संयुक्त रूप से प्रतिमा का अनावरण किया।
काउंसिल ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट्स ऑफ इंडिया (सीएचएआई) ने राम सुतर द्वारा गढ़ी गई मूर्ति को स्थापित कराने के लिए पहल की जो जानेमाने मूर्तिकार हैं।
संगठन ने मूर्ति के लिए 40,000 डॉलर जुटाए, कुछ धन संग्रह डिजिटल फंडरेजर साइट ‘गोफंडमी’ से हुआ।
सीएचएआई के कार्यकारी निदेशक सिबू नायर ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने प्रतिमा को एमहस्र्ट में लाने का फैसला किया क्योंकि गांधी की एक विचारधारा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अमेरिका और दुनिया को नफरत और हिंसा से विभाजित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “मैंने गांधी स्मारक बनाकर अपने शहर में एक छोटा कदम उठाने के बारे में सोचा क्योंकि गांधी सिर्फ एक व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा या जीवन जीने का तरीका है, जो कभी नहीं मरता। वर्तमान दुनिया में उनका संदेश बहुत महत्वपूर्ण है। दुनिया नफरत और हिंसा से भरी पड़ी है।”
जून में कुछ व्यक्तिगत घृणा संदेशों के साथ गांधी की मूर्तियों को वाशिंगटन में नुकसान पहुंचाया गया था।
कैलिफोर्निया के डेवीस में गांधी की एक और मूर्ति को तोड़ दिया गया था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रवक्ता केलीग मैकनानी ने गांधी और अमेरिकी नेता जॉर्ज वाशिंगटन की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने की निंदा की थी।
राष्ट्रीय समाचार
केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति का बड़ा फैसला, विवेक चतुर्वेदी बने नए सीबीआईसी चेयरमैन

नई दिल्ली, 29 नवंबर: केंद्र सरकार ने 1990 बैच के आईआरएस (सीएंडआईटी) अधिकारी विवेक चतुर्वेदी को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने यह फैसला जारी आधिकारिक आदेश के माध्यम से लिया।
जारी आदेश के अनुसार, वर्तमान में सीबीआईसी सदस्य के रूप में कार्यरत विवेक चतुर्वेदी अब बोर्ड के सर्वोच्च पद (चेयरमैन) की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह नियुक्ति राजस्व प्रशासन, सीमा शुल्क व्यवस्था और अप्रत्यक्ष कर प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
यह आदेश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा जारी किया गया। आदेश पर उप सचिव सुबीर कुमार के हस्ताक्षर हैं।
जारी पत्र की प्रतियां सरकार के प्रमुख कार्यालयों को भेजी गई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और गार्ड फाइल शामिल हैं।
साथ ही यह आदेश वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग को भी भेजा गया है, जहां सचिव अरविंद श्रीवास्तव को इसकी सूचना दी गई है। नियुक्ति से संबंधित आधिकारिक संवाद में संपर्क नंबर 2401 0487 का भी जिक्र है।
सीबीआईसी देश के अप्रत्यक्ष कर ढांचे (जैसे जीएसटी, कस्टम्स और सेंट्रल एक्साइज) के संचालन और निगरानी का शीर्ष संस्थान है। ऐसे में इस पद पर नियुक्ति न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि कर सुधारों और नीति क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विवेक चतुर्वेदी के पास कर प्रणाली, कस्टम्स, डिजिटल कर प्रशासन और नीतिगत मामलों में लंबा अनुभव है। एक वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी होने के नाते उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे बोर्ड के कामकाज में और अधिक पारदर्शिता, दक्षता और तकनीकी सुधारों को बढ़ावा देंगे।
केंद्र सरकार हाल के वर्षों में आईआरएस और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े शीर्ष पदों पर तेजी से बदलाव कर रही है ताकि नीतियों के क्रियान्वयन और निगरानी में अधिक प्रभावशीलता लाई जा सके।
राजनीति
नेशनल हेराल्ड केस: राऊज एवेन्यू कोर्ट में ईडी की चार्जशीट पर फैसला टला, अब 16 दिसंबर को सुनाया जाएगा आदेश

नई दिल्ली, 29 नवंबर: राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने का फैसला टाल दिया। अब अदालत 16 दिसंबर को अपना आदेश सुनाएगी, हालांकि ईडी की जांच पर कांग्रेस की दलील थी कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।
इस मामले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस ओवरसीज प्रमुख सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया गया है।
ईडी का आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों पर गलत तरीके से कब्जा किया। एजेंसी का दावा है कि यह पूरी योजना महज 50 लाख रुपए में यंग इंडियन नाम की कंपनी के माध्यम से की गई। इस कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की अधिकांश हिस्सेदारी है।
अदालत ने 7 नवंबर को आदेश सुरक्षित रखते हुए ईडी से कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे थे। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने कहा था कि कुछ दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की जानकारी को और गहराई से देखना जरूरी है। अदालत ने केस रिकॉर्ड की जांच के बाद बताया कि लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, कथित किराए की रसीदें और फंड फ्लो का पूरा पैटर्न विस्तार से देखने के बाद ही फैसला लिया जा सकता है।
अदालत ने कहा था, “अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने केस फाइलों की जांच के मद्देनजर जरूरी स्पष्टीकरण दे दिए हैं। आदेश अब 16 दिसंबर को सुनाया जाएगा।”
ईडी का कहना है कि इसमें फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग के स्पष्ट सबूत मिले हैं और यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है। वहीं कांग्रेस का दावा है कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। उनका कहना है कि यंग इंडियन का गठन कानूनी नियमों के तहत हुआ और इसमें किसी भी तरह का निजी लाभ शामिल नहीं है।
ईडी ने आरोप लगाया है कि कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के निर्देश पर कुछ लोगों ने वर्षों तक फर्जी अग्रिम किराया भुगतान दिखाया और नकली किराया रसीदें जारी कीं। एजेंसी के अनुसार, यह सब एजेएल की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने की योजना का हिस्सा था।
इस विवाद की शुरुआत 2012 में हुई, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेएल के अधिग्रहण की प्रक्रिया में कांग्रेस नेताओं ने धोखाधड़ी और भरोसे का उल्लंघन किया।
इस केस की अगली सुनवाई अब 16 दिसंबर को होगी, जब अदालत तय करेगी कि क्या ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाएगा या नहीं।
अपराध
गुजरात : जेल में कैद नारायण साईं पर एक और मामला दर्ज, सेल से मोबाइल फोन बरामद

सूरत, 29 नवंबर: आसाराम के बेटे नारायण साईं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे नारायण साईं के खिलाफ सूरत की लाजपोर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन रखने और उसका इस्तेमाल करने का नया मामला दर्ज किया गया है। यह मामला सचिन पुलिस थाने में दर्ज हुआ है।
जेल प्रशासन को गुरुवार को गुप्त सूचना मिली थी कि हाई-सिक्योरिटी बैरक नंबर-1 में बंद नारायण साईं के पास मोबाइल फोन है। सूचना मिलते ही जेल स्क्वॉड ने तुरंत कार्रवाई की और नारायण साईं के अलग सेल (सेल नंबर-1) की गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान लोहे के मुख्य दरवाजे के पीछे एक स्मार्टफोन चुंबक की मदद से चिपकाया हुआ मिला। फोन के अलावा उसके पास जियो कंपनी का एक सिम कार्ड भी बरामद हुआ।
जांच में पता चला कि नारायण साईं बेहद शातिराना तरीके से फोन का इस्तेमाल करता था। वह बातचीत पूरी होने के बाद तुरंत फोन से बैटरी और सिम कार्ड निकाल लेता था। सिम कार्ड को वह अपने पास रखता था, जबकि बैटरी को सुरक्षा के लिए सेंट्री रूम में छिपा देता था। जेल स्टाफ की सतर्कता से सेंट्री रूम के दरवाजे में लगे नाकूचे (की-होल) के अंदर छिपाई गई बैटरी भी बरामद कर ली गई।
जेल प्रशासन की शिकायत पर सचिन पुलिस ने नारायण साईं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं तथा गुजरात जेल मैनुअल के नियमों के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आगे की जांच कर रही है कि नारायण साईं यह मोबाइल फोन कहां से और कैसे लाया तथा इसका इस्तेमाल किन-किन लोगों से संपर्क करने के लिए कर रहा था।
एसीपी नीरव गोहिल ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “नारायण साईं जहांगीरपुरा पुलिस स्टेशन रेप केस में दोषी कैदी है। गुरुवार को लाजपोर सेंट्रल जेल के स्टाफ को जानकारी मिली कि नारायण साईं ने अपनी बैरक के अंदर एक मोबाइल फोन छिपा रखा है। इस इनपुट पर कार्रवाई करते हुए, जेल सिक्योरिटी स्क्वॉड ने बैरक नंबर 1 में तलाशी ली, जहां उसे एक अलग सेल में रखा गया था। तलाशी के दौरान, सेल के गेट के पीछे एक मोबाइल फोन मिला, जिसे मैग्नेट से लोहे के दरवाजे से चिपकाया गया था, और उसे तुरंत बरामद कर लिया गया।”
उन्होंने बताया कि जेल में मोबाइल फोन रखना गंभीर अपराध है। नारायण साईं के सेल से फोन, सिम और बैटरी बरामद हुई है। हमने जेल प्रशासन की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की गहन जांच की जा रही है।
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