राजनीति
‘गांधी का भारत’ अब ‘गोडसे का भारत’ बनता दिख रहा : महबूबा मुफ्ती
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा, ‘गांधी का भारत’ अब ‘गोडसे के भारत’ बनता दिख रहा है।
महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को संवाददाताओं से बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान हुए क्रिकेट मैच को भी याद किया। इसके बाद उन्होंने इसी साल वल्र्ड कप में पाकिस्तान के हाथों टीम इंडिया को मिली शिकस्त पर भारत के कई इलाकों में जश्न के मुद्दे को भी उठाया।
महबूबा मुफ्ती ने कहा, मुझे एक क्रिकेट मैच याद है। भारत-पाकिस्तान के बीच एक क्रिकेट मैच खेला गया था। तब केंद्र में वाजपेयी जी की सरकार थी। उस वक्त पाकिस्तान के नागरिकों ने भारतीय खिलाड़ियों को चीयर किया था। वहीं, भारतीय नागरिक पाकिस्तान की टीम को भी प्रोत्साहित कर रहे थे।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती मंगलवार को पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के उस बयान को भी याद किया, जिसमें उन्होंने झारखंड की राजधानी रांची के क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की तारीफ की थी। टीम इंडिया के लिए पाकिस्तान में धोनी ने शानदार पारी खेली थी। मैच देखने के लिए स्टेडियम में आये परवेज मुशर्रफ ने उनकी जमकर तारीफ की थी।
उन्होंने कहा कि परवेज मुशर्रफ ने महेंद्र सिंह धोनी के हेयर स्टाईल की भी तारीफ की थी। साथ ही एमएस धोनी को सलाह दी थी कि धोनी अपना हेयर स्टाईल कभी न बदलें। महबूबा ने कहा है कि लेकिन कुछ दिनों पहले आगरा में कुछ युवाओं ने पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाया था। पड़ोसी देश की टीम का समर्थन किया, तो उनके खिलाफ यहां मुकदमा दर्ज कर दिया गया। ये गलत रवैया है।
महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जिस तरह से पाकिस्तान के खेल की तारीफ करने वालों लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करा दिया गया और आज की तारीख में इन युवाओं का मुकदमा लड़ने के लिए कोई वकील तैयार नहीं है। इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि गांधी का भारत अब गोडसे के भारत में तब्दील होने लगा है।
इससे पहले पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया था और मांग की थी कि जम्मू-कश्मीर में लोगों को कथित रूप से दबाना और बेगुनाह नागरिकों की हत्या फौरन बंद की जाए।
राजनीति
भाजपा सांसदों का विपक्ष पर हमला, लोकसभा में हंगामा और मर्यादा भंग करने का आरोप

नई दिल्ली, 16 मार्च : भाजपा के सांसदों ने हाल ही में लोकसभा में विपक्ष के व्यवहार और संसद की मर्यादा को लेकर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उनका व्यवहार रहता है, वह देश के लिए सही नहीं है। उन्हें व्यवहार में सुधार लाना चाहिए और सदन की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सभी सांसदों को पत्र भेजना लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों ने बिना किसी विषय के सदन में हंगामा किया। यह अविश्वास प्रस्ताव राहुल गांधी की जिद के कारण आया और उन्होंने उम्मीद जताई कि अब वे ऐसे धरने बंद करेंगे।
भाजपा सांसद कमलजीत सेहरावत ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता की सराहना करते हुए बताया कि ओम बिरला जब भी सदन के किसी भी सदस्य से बात करते हैं, चाहे वो पक्ष से हो या विपक्ष से हो, उसमें भेद-भाव नहीं होता है। लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार नेता प्रतिपक्ष को भी कहा कि वे अपनी बात रखें, लेकिन बार-बार वे उसे नजरअंदाज करते हैं और बाद में आरोप लगाते हैं कि उन्हें बात नहीं रखने दी जाती है, लेकिन उनका नजरअंदाज करना और बाद में आरोप लगाना चिंता का विषय है।
भाजपा सांसद नरेश बंसल ने लोकसभा अध्यक्ष के लिए प्रधानमंत्री के पत्र पर कहा, “निश्चित रूप से संसद के अंदर विपक्ष का जिस प्रकार का व्यवहार है, मुझे लगता है कि उनके दिमाग में उनके खुद के अलावा कोई और सम्मानित है ही नहीं। वे न तो न्यायालय का सम्मान करते हैं, न संसद का, न राष्ट्रपति का, न उपराष्ट्रपति का और न ही स्पीकर का। मुझे लगता है कि उनके कोई सुधरने की गुंजाइश नहीं है।”
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष ने गैर जिम्मेदाराना तरीके अपनाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से लोकसभा अध्यक्ष को निशाना बनाया गया और अब चुनाव आयोग पर हमला किया जा रहा है। भाजपा सांसद ने इसे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का राजनीतिक स्टंट करार दिया।
भाजपा सांसदों ने एक स्वर में कहा कि लोकसभा का उद्देश्य विवाद नहीं, बल्कि देश के चुने हुए 140 करोड़ लोगों के लिए काम करना है। उन्होंने विपक्ष पर हंगामा करने और सदन की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों हो सकती हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
राजनीति
जब देश में संकट होता है तो ऐसे समय में भी कांग्रेस राजनीति करती हैः जेपी नड्डा

नई दिल्ली, 16 मार्च : केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि जब देश में संकट होता है ऐसे समय में कांग्रेस राजनीति करती है। इसके साथ ही उन्होंने एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर कहा कि कांग्रेस के एक नेता एलपीजी गैस सिलेंडरों की जमाखोरी करते हुए पाए गए हैं।
जेपी नड्डा ने सोमवार को यह जानकारी राज्य सभा में रखी। साथ ही, उन्होंने सदन को यह भी बताया कि एलपीजी की यह मौजूदा स्थिति भारत के कारण उपजी नहीं है न ही भारत का इस स्थिति में कोई योगदान है। नड्डा सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए वक्तव्य का जवाब दे रहे थे।
दरअसल इससे पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में एलपीजी की कमी का विषय उठाया था। इसके जवाब में राज्यसभा में नेता जेपी नड्डा ने कहा, “मुझे दुख है कि हमारे यहां विपक्ष, विशेषकर इंडियन नेशनल कांग्रेस, विपत्ति के समय में भी देश में राजनीति करने से पीछे नहीं हटती।”
जेपी नड्डा ने सदन को बताया कि देश में एलपीजी गैस का यह संकट भारत के कारण नहीं आया है और इसमें भारत का कोई योगदान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण उत्पन्न हुआ है। हम सब जानते हैं कि इन्हीं अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते यह संकट पैदा हुआ है।
नड्डा ने कहा कि इस संकट के बारे में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही विस्तार से सदन में जानकारी दे चुके हैं। लेकिन जब वे बोल रहे थे, तब ये लोग सुनने के लिए तैयार नहीं थे। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि इसके अलावा, कांग्रेस का एक नेता एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी करते हुए पकड़ा गया है। उन्होंने सिलेंडरों की होर्डिंग करके जनता को उकसाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ये लोग देश के शांतिप्रिय लोगों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
जेपी नड्डा ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में भी राजनीति करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। संकट के समय देश के साथ खड़े होने के बजाय इस मुद्दे को उठाकर देश में खलबली मचाने और अराजकता पैदा करने की कोशिश करना अत्यंत निंदनीय है। गौरतलब है कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस विषय पर सदन में शून्यकाल के दौरान विस्तृत वक्तव्य दिया।
इस पर जेपी नड्डा ने सभापति से कहा कि यह शून्यकाल है और माननीय सदस्य, जो कि विपक्ष के नेता भी हैं, उन्हें यह पता होना चाहिए कि उन्हें अपनी बात तीन मिनट के भीतर ही रखनी होती है। लेकिन उन्होंने छह मिनट से अधिक समय तक बात की है। इसलिए मुझे लगता है कि इस पर आपका हस्तक्षेप आवश्यक है।
राजनीति
बिहार राज्यसभा चुनाव: शाहनवाज हुसैन का दावा, एनडीए जीतेगी पांचों सीटें

पटना, 16 मार्च : राज्यसभा की 37 सीटों के लिए बिहार सहित 10 राज्यों में आज चुनाव हो रहे हैं। नेता अपने पसंदीदा प्रतिनिधि के लिए मतदान करने पहुंच रहे हैं। बिहार में 5 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान जारी है। इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने दावा किया कि एनडीए सभी पांचों की पांच सीटें जीतने वाली है और राजद के प्रत्याशी हारने वाले हैं। राजद और उसके सहयोगियों को अपने गठबंधन पर विश्वास नहीं है। हमारे विधायक एकजुट हैं और हमें बहुत बड़ी संख्या में वोट मिलने वाले हैं।”
शाहनवाज हुसैन ने कहा, “पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी कमल खिलाएगी और ममता बनर्जी की विदाई की तारीख तय हो चुकी है।”
वहीं, भाजपा विधायक विजय खेमका ने मीडिया से बातचीत में कहा, “बहुत अच्छा होगा और बिहार में हमेशा सब कुछ अच्छा ही होता है। देश में भी, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सब कुछ अच्छा चल रहा है। आज जो चुनाव है उसमें मैं भी मतदान करने जा रहा हूं। एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है।”
मतदान करने के बाद मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा, “हमारी पार्टी के सभी विधायकों ने अपना वोट डाल दिया है और हमारी जीत शत प्रतिशत निश्चित है। हम सभी पांच सीटों पर जीत हासिल कर रहे हैं। हमारे पास संख्या बल पर्याप्त है। जो लोग राज्य की तरक्की चाहते हैं, वे हमारे पक्ष में मतदान करेंगे।”
जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने कहा, “पहली बार मतदान करने का उत्साह है। मुझे इस बात की और भी ज़्यादा खुशी है कि आज हम सभी पांचों की पांचों सीटें जीत रहे हैं।”
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा, “हमारी एनडीए की जीत 100 फीसदी सुनिश्चित है, अब बस औपचारिक घोषणा बाकी हैं।”
आज महाराष्ट्र से सात, तमिलनाडु से छह, बिहार और पश्चिम बंगाल से पांच-पांच, ओडिशा से चार, असम से तीन, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से दो-दो और हिमाचल प्रदेश से एक सीट के लिए चुनाव हो रहा है।
लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और कार्यकाल पूरा होने के बाद भंग हो जाता है, जबकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और बिना किसी रुकावट के निरंतर कार्य करती रहती है। उच्च सदन के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है, जिसमें एक तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं। इन खाली पदों को भरने के लिए चुनाव आयोजित किए जाते हैं, जिससे सदन में निरंतरता और अनुभव सुनिश्चित होता है।
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