राजनीति
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव पुण्यतिथि पर याद किए गए
साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव को यहां उनकी पुण्यतिथि पर बुधवार को श्रद्धांजलि दी गई। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेता और राज्य विधान परिषद के सदस्य, के. कविता के साथ नरसिम्हा राव की बेटी श्रीवाणी और बेटे पीवी प्रभाकर राव ने हुसैन सागर झील के किनारे पीवी ज्ञान भवन में दिवंगत नेता को पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर परिषद के अध्यक्ष गुट्टा सुखेंद्र रेड्डी, विधानसभा अध्यक्ष पोचराम श्रीनिवास रेड्डी, टीआरएस के महासचिव और सांसद केशव राव, गृहमंत्री महमूद अली और अन्य उपस्थित थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि नरसिम्हा राव को एक प्रखर सुधारक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बयान में कहा कि देश शिक्षा, अर्थव्यवस्था, भूमि, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में पीवी द्वारा किए गए सुधारों का लाभ उठा रहा है। टीआरएस प्रमुख ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा, बाहरी मामलों और कूटनीति में पीवी के दृढ़ रवैये ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पीवी के सालभर के जन्मशती समारोह का भी आयोजन कर रही है, जिसमें बहुमुखी प्रतिभा के धनी और महान प्रशासक पी.वी. के बारे में बताया जाएगा।
जन्म शताब्दी समारोह 28 जून से शुरू हुआ और राज्य सरकार ने सालभर चलने वाले समारोह को धूमधाम से आयोजित करने का फैसला किया है।
करीमनगर जिले (अब तेलंगाना में) के वंगारा से ताल्लुक रखने वाले नरसिम्हा राव भारत के पहले और एकमात्र तेलुगू प्रधानमंत्री थे। उन्हें नेहरू-गांधी राजवंश के बाहर का पहला प्रधानमंत्री होने का गौरव भी मिला। उन्होंने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।
नरसिम्हा राव, जिन्होंने अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया और एक केंद्रीय मंत्री के रूप में भी सेवा दी, वह एक विद्वान, राजनेता, और एक लेखक के रूप में जाने जाते थे। वेयी पदागलु के लिखे तेलुगू उपन्यास ‘सहस्रफण’ का हिंदी में अनुवाद के लिए नरसिम्हा राव को वर्ष 1989 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह देश के एक मात्र अकादेमी पुरस्कार विजेता प्रधानमंत्री हुए।
वह 1972 में संसद के लिए चुने गए और 1980 से 1984 तक इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सहित कई कैबिनेट पदों पर रहे।
कई लोगों द्वारा ‘राजनीतिक चाणक्य’ के रूप में वर्णित पीवी संसद में बहुमत से कम होने के बावजूद पूर्ण कार्यकाल पूरा करने में कामयाब रहे। हालांकि, उन्हें सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ के आरोपों का सामना करना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मस्कट: भारत भेजे गए एमटी सेट्टेबेलो हमले में मारे गए दो भारतीय नाविकों के पार्थिव शरीर

ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को बताया कि जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर हुए हमले में जान गंवाने वाले दो भारतीय समुद्री कर्मियों के पार्थिव शरीर भारत भेज दिए गए हैं।
दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
दूतावास ने कहा, “ आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया, जिन्होंने एमटी सेट्टेबेलो पर हुए दुखद हमले में अपनी जान गंवाई, उनके पार्थिव शरीर भारत वापस भेज दिए गए हैं। इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं।”
मंगलवार को दूतावास ने यह भी बताया था कि जहाज के सभी 21 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से ओमान से भारत लौट रहे हैं। रवाना होने से पहले भारत के ओमान में राजदूत प्रशांत पीसे ने चालक दल से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, पलाऊ ध्वज वाले जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर 30 समुद्री मील दूर सोहर के पास हमला हुआ था। इस घटना के बाद 21 भारतीयों को बचा लिया गया, जबकि 3 नाविकों की मौत हो गई।
दूतावास ने बताया कि ओमान मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कूटनीतिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात कर इस हमले पर विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कहा था कि नागरिक जहाजों पर इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया था कि उसने उस जहाज को निशाना बनाया था, क्योंकि वह ईरान से तेल ले जाने और अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप था। सेना के अनुसार कार्रवाई के दौरान जहाज को निष्क्रिय किया गया।
भारत ने इस घटना को गंभीर बताते हुए नागरिक समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत ने अफगानिस्तान को भेजी जरूरी दवाओं की बड़ी खेप : विदेश मंत्रालय

भारत सरकार ने एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाते हुए अफगानिस्तान को आवश्यक दवाओं की बड़ी खेप भेजी है। इस सहायता के माध्यम से भारत ने अफगान जनता के स्वास्थ्य, कल्याण और राहत प्रयासों के प्रति अपने निरंतर सहयोग को दोहराया है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है और कठिन परिस्थितियों में भी वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, ” भारत ने 5 टन जरूरी दवाओं की खेप अफगानिस्तान भेजी है। इस तरह हमने अफगान जनता के कल्याण और मानवीय सहायता पहुंचाने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है।”
यह नई खेप अफगानिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने और वहां की तत्काल चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से भेजी गई है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को दवाइयों, खाद्यान्न, टीकों और अन्य मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति करता रहा है।
हाल के वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान को जीवनरक्षक दवाइयां, खाद्य सहायता और आपदा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। नई खेप इसी मानवीय सहयोग की निरंतरता का हिस्सा है।
अप्रैल में भी भारत ने टीबी टीकाकरण कार्यक्रम को बल देने के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी थी।इसकी पुष्टि भी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर की थी।
इसी साल बाढ़ और भूकंप ने अफगानिस्तान में भारी तबाही मचाई थी। जिसके बाद भारत की ओर से 5 अप्रैल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) पहुंचाई गई थी।
वहीं, मार्च में, भारत ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण भेजे थे। यह मदद काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए दी गई थी। पाकिस्तान के एक हमले में काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2,000 बिस्तरों वाले ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
भारत पिछले कई वर्षों से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी के बीच नवंबर 2025 में हुई बैठक में व्यापार, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी।
बैठक के बाद जयशंकर ने कहा था कि भारत अफगान जनता के विकास और कल्याण के लिए अपने समर्थन को जारी रखेगा। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया था।
इससे पहले भारत ने अफगानिस्तान के भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और खाद्य सहायता भी भेजी थी। बाल्ख, समनगन और बगलान प्रांतों में आए विनाशकारी भूकंप (2025) के बाद भारत ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई थी।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली में नीट की तैयारी कर रही छात्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट बरामद

दिल्ली में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा के कथित तौर पर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। मृतक छात्रा की पहचान रेणु के तौर पर हुई है, जो दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी।
शुरुआती जांच में पता चला कि छात्रा ने 3 मई को नीट परीक्षा दी थी और परीक्षा रद्द होने के बाद से कथित तौर पर वह डिप्रेशन से जूझ रही थी। पुलिस ने बताया कि 13 जून को रेणु के पिता अपने ससुर की मौत के बाद ससुराल गए थे। घटना के समय रेणु घर पर अकेली थी। उसने कथित तौर पर 13 जून की शाम को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
मौके से मिले सुसाइड नोट से उसकी मानसिक परेशानी का पता चला। नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी और लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। परिवार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब खासकर नीट परीक्षा से जुड़े विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर चिंता बढ़ रही है।
इस हफ्ते की शुरुआत में, राजस्थान के सीकर जिले में नीट की तैयारी कर रहे 22 साल के एक छात्र ने आत्महत्या की थी। उमेश माली नाम का यह छात्र नीट परीक्षा के अपने तीसरे प्रयास की तैयारी कर रहा था, जो 21 जून को होनी है। सीकर में नीट की तैयारी कर रहे छात्र की आत्महत्या का यह दूसरा मामला था।
पुलिस के मुताबिक, उमेश झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ का रहने वाला था। उसके पिता मुंबई में टाइल कॉन्ट्रैक्टर का काम करते हैं। उमेश परीक्षा की तैयारी के दौरान सीकर के उद्योग नगर पुलिस स्टेशन इलाके में एक फ्लैट में अपनी मां, बड़ी बहन और छोटे भाई के साथ रह रहा था।
मंगलवार को सामने आई एक और ऐसी ही घटना में देहरादून में 23 साल की एक युवती ने नीट परीक्षा पास न कर पाने के कारण कथित तौर पर अपनी जान दे दी। उसने अपने माता-पिता के नाम एक नोट छोड़ा, जिसमें लिखा था, “मम्मी-पापा, मैं आपसे प्यार करती हूं।”
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि वह लंबे समय से नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी और मेडिकल के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती थी।
इसी बीच, एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने मंगलवार को उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया कि दोबारा परीक्षा सुरक्षित और बिना किसी गड़बड़ी के कराई जाएगी। साथ ही, उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को सोशल मीडिया पर चल रहे उन रैकेट से सावधान रहने को कहा जो मोटी रकम लेकर लीक हुए पेपर बेचने का दावा करते हैं।
एक वीडियो संदेश में अभिषेक सिंह ने कहा कि दोबारा परीक्षा के लिए कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने उम्मीदवारों को टेलीग्राम चैनलों के जरिए धोखाधड़ी करने वालों के झांसे में न आने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि 22 जून तक टेलीग्राम ऐप को अस्थायी रूप से बंद करने का मकसद परीक्षा से जुड़ी फर्जी खबरों और गुमराह करने वाले दावों पर रोक लगाना था।
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