अंतरराष्ट्रीय समाचार
दिसंबर में पाक लौट सकते हैं पूर्व पाक पीएम नवाज शरीफ
पीएमएल-एन नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया है कि पार्टी सुप्रीमो नवाज शरीफ दिसंबर में अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए पाकिस्तान लौट आएंगे, लेकिन वह कहते हैं कि लंबे समय से प्रतीक्षित घर वापसी समय से पहले चुनाव के मुद्दे पर सरकार के इरादों को स्वीकार करने का संकेत नहीं देगी, जैसा कि पीटीआई ने मांग की थी। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नवाज शरीफ, अगर सब कुछ ठीक रहा, तो दिसंबर में पार्टी की बागडोर संभालने के लिए लौट आएंगे। लेकिन उनकी वापसी का मतलब यह नहीं है कि पीएमएल-एन किसी भी जल्दी चुनाव के लिए सहमत है।”
उन्होंने कहा, “पार्टी समय से पहले चुनाव की मांग को नहीं मानेगी, चाहे जो हो जाए। पीएमएल-एन भले ही वह अपनी सरकार खो दे, इस मांग से सहमत नहीं होगी, यह फाइनल है।”
इसके बजाय उन्होंने स्पष्ट किया कि नवाज शरीफ की वापसी एक जन संपर्क अभियान की शुरुआत होगी, जिसके बाद कार्यकर्ताओं का सम्मेलन होगा और पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उत्साहित करने के लिए अन्य गतिविधियां होंगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी स्विंग वोटों को वापस लाने के लिए शेष कार्यकाल का पूरा उपयोग करने की कोशिश करेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
तेल रिफाइनरी में लगी आग का ऑस्ट्रेलियाई ईंधन सप्लाई पर बहुत कम असर होगा: पीएम अल्बानीज

ऑस्ट्रेलिया के दो तेल रिफाइनरी में आग लगने की घटना सामने आई। इस मामले में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने शुक्रवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया की दो तेल रिफाइनरियों में से एक में लगी भीषण आग का फ्यूल प्रोडक्शन पर बहुत कम असर पड़ेगा।
पीएम अल्बानीज शुक्रवार को ब्रुनेई और मलेशिया के आधिकारिक दौरे से जल्दी लौट आए। उन्होंने मेलबर्न के दक्षिण-पश्चिम में वीवा एनर्जी की रिफाइनरी में हुए नुकसान का मुआयना किया। बुधवार रात इक्विपमेंट फेल होने से आग लग गई थी, जिसे गुरुवार दोपहर के आसपास बुझा दी गई।
रिफाइनरी में मीडिया से बात करते हुए पीएम अल्बानीज ने कहा कि मिडिल ईस्ट में लड़ाई की वजह से तेल सप्लाई में आए संकट के बीच आग लगने का समय अफसोस की बात थी, लेकिन इसका प्रोडक्शन पर बहुत कम असर पड़ेगा।
फ्यूल सिक्योरिटी पर बातचीत के लिए ब्रुनेई और मलेशिया में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, “आज हमें जो सलाह मिली है, वह यह है कि 80 फीसदी डीजल प्रोडक्शन जारी है, 80 फीसदी एविएशन फ्यूल का प्रोडक्शन जारी है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैसिलिटी में पेट्रोल प्रोडक्शन, जो ऑस्ट्रेलिया की नेशनल फ्यूल सप्लाई का 10 फीसदी देता है, शुक्रवार को 60 फीसदी कैपेसिटी पर था और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह बढ़ सकता है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि सरकार शनिवार को फ्यूल स्टॉकपाइल लेवल पर अपना रेगुलर साप्ताहिक अपडेट देगी।
अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि इक्विपमेंट में खराबी की वजह से एक ऑस्ट्रेलियाई तेल रिफाइनरी में बड़ी आग लग गई, जिससे नेशनल फ्यूल सप्लाई पर असर पड़ने की उम्मीद है।
मेलबर्न से 65 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में जिलॉन्ग शहर में वीवा एनर्जी की रिफाइनरी में बुधवार को लोकल टाइम के हिसाब से रात करीब 11 बजे आग लगी और गुरुवार सुबह भी जलती रही।
यह जगह ऑस्ट्रेलिया की सिर्फ दो चालू रिफाइनरियों में से एक है और देश की फ्यूल सप्लाई का लगभग 10 फीसदी बनाती है। विक्टोरिया राज्य में फायर और रेस्क्यू सर्विस की डिप्टी कमिश्नर मिशेल काउलिंग ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) रेडियो को बताया कि रिफाइनरी में इक्विपमेंट में खराबी की वजह से आग लगी।
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ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकारों पर समझौते से किया इनकार, यूएस पर युद्ध भड़काने का लगाया आरोप

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान अपने न्यूक्लियर संवर्धन अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा। सरकारी मीडिया ने गुरुवार को बताया कि न्यूक्लियर एनर्जी पर उसका अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर आधारित है।
तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बाघेई ने पश्चिमी मीडिया में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर फैल रही अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान के वैध अधिकार पर कोई समझौता नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु संवर्धन का अधिकार किसी बाहरी शक्ति की कृपा या रियायत नहीं है, जिसे दबाव या संघर्ष के समय वापस लिया जा सके। जब तक ईरान एनपीटी का सदस्य है, उसे इस संधि के सभी प्रावधानों का पूरा लाभ मिलना चाहिए।पाकिस्तान में हाल ही में हुई ईरान-अमेरिका वार्ता को लेकर संवर्धन से जुड़ी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए बाघेई ने कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए पहले एक व्यापक ढांचा तय होना जरूरी है। जब तक बुनियादी शर्तें तय नहीं होतीं, तब तक युद्ध और शांति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत बातचीत जल्दबाजी होगी।
लेबनान प्रतिरोध को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा “वैध प्रतिरोध” का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान में युद्ध समाप्त करना भी उस सीजफायर समझौते का हिस्सा था, जिस पर इस्लामाबाद वार्ता में चर्चा हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरा पक्ष (इजरायल) शुरू से ही सीजफायर की शर्तों का पालन नहीं कर रहा है। बाघेई ने यह भी कहा कि किसी समझौते के तहत यदि एक पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है, तो दूसरे पक्ष को भी अपनी जिम्मेदारियों को उसी अनुपात में समायोजित करने का अधिकार होता है।
उन्होंने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया कि ईरान ने लेबनान में प्रतिरोध मोर्चों का समर्थन कम किया है। बाघेई ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर यूरोपीय प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान और उसके क्षेत्रीय साझेदार इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र का संरक्षक रहा है और पिछले 40 दिनों में जो भी व्यवधान हुए हैं, वे अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संघर्ष का परिणाम हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बाहरी हस्तक्षेप से क्षेत्रीय स्थिति और जटिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय देश अमेरिकी और इजरायल की रणनीति के जाल में नहीं फंसे हैं, यह सकारात्मक संकेत है।
अंत में उन्होंने दोहराया कि यदि अमेरिका का हस्तक्षेप समाप्त हो जाए, तो ईरान क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिरता बनाए रख सकता है।
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विदेश मंत्री जयशंकर ने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग से वेस्ट एशिया के हालात पर की चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की अपनी समकक्ष पेनी वोंग से फोन पर बात की और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति काफी तनावपूर्ण है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सकी है।
बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज ऑस्ट्रेलिया की सीनेटर पेनी वोंग के साथ पश्चिम एशिया के हालात पर अच्छी बातचीत हुई, उनके साथ विचारों का आदान-प्रदान सराहनीय रहा।”
आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान में हमले किए थे, जिसमें ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और अमेरिका के सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
पिछले कुछ हफ्तों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर कई देशों के विदेश मंत्रियों से बात कर चुके हैं। भारत लगातार इस क्षेत्र के देशों और अपने अहम साझेदारों के साथ संपर्क में बना हुआ है।
इससे पहले एस. जयशंकर ने इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से भी फोन पर बात की। दोनों के बीच पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज स्ट्रेट पर चर्चा हुई थी।
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि उन्होंने जयशंकर से कहा कि अमेरिका का सख्त रुख बहुत जरूरी है, ताकि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हमेशा की तरह एक अच्छी बातचीत हुई। हमने ईरान, होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान पर चर्चा की।
इजरायल के विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, “मैंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए शर्तों पर अमेरिका का सख्त रुख (ईरान में कोई संवर्धन नहीं, संवर्धित सामग्री को ईरान से हटाना) पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आर्थिक आतंकवाद के जरिए नुकसान पहुंचाना ऐसे कदमों की मांग करता है, जो सभी देशों (जिसमें भारत और हमारे खाड़ी के मित्र भी शामिल हैं) के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें।”
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और इसके जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।
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