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शेयर बाजार में सपाट कारोबार, सेंसेक्स 77,000 के करीब

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मुंबई, 21 जनवरी। भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मंगलवार को सपाट हुई। बाजार के बड़े सूचकांकों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। सुबह 9:33 पर सेंसेक्स 116 अंक या 0.19 प्रतिशत गिरकर 76,957 और निफ्टी 18 अंक अंक या 0.08 प्रतिशथ बढ़कर 23,363 पर था।

बाजार के सपाट होने की वजह अमेरिका नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तत्काल प्रभाव से ट्रेड टैरिफ को न लागू करने को माना जा रहा है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि ट्रेड टैरिफ में देरी करने से डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड दोनों गिरेंगी। यह भारत जैसे बाजारों से लिए अच्छा है।

व्यापक बाजार का रुझान सकारात्मक बना हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 1,694 शेयर हरे निशान में और 599 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 154 अंक या 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 54,952 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक या 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,868 पर बना हुआ है।

सेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा मोटर्स, आईटीसी, सन फार्मा, एलएंडटी, इन्फोसिस, टाटा स्टील, नेस्ले, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस टॉप गेनर्स हैं। जोमैटो, कोटक महिंद्रा, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई, बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल टॉप लूजर्स हैं।

ऑटो, आईटी, फार्मा, एफएमसीजी, मेटल, मीडिया, एनर्जी और इन्फ्रा सबसे ज्यादा बढ़ने वाले इंडेक्स हैं। पीएसयू बैंक, रियल्टी और प्राइवेट बैंक इंडेक्स पर दबाव देखा जा रहा है।

जानकारों के अनुसार, निफ्टी को 23,250 पर और उसके बाद 23,100 और 23,000 पर सपोर्ट मिल सकता है। तेजी की स्थिति में 23,400 एक रुकावट का स्तर हो सकता है। अगर यह टूटता है तो 23,500 और फिर 23,700 रुकावट के स्तर होंगे।

सोमवार को मार्टिन लूथर किंग जूनियर डे के कारण अमेरिकी शेयर बाजार बंद थे। वहीं, एशिया के ज्यादातर बाजारों में हरे निशान में कारोबार हो रहा है।

व्यापार

पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कनाडा के मंत्री मनिंदर सिद्धू से की मुलाकात

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को आगे बढ़ाने के संबंध में एक सार्थक बैठक की।

गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों पक्षों ने अपने नेतृत्व की उस प्रतिबद्धता को दोहराया है जिसके तहत सीईपीए वार्ताओं को तेजी से पूरा कर जल्द से जल्द समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इससे वस्तुओं, सेवाओं और निवेश सहित कई क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत-कनाडा सीईपीए का शीघ्र निष्कर्ष दोनों देशों के साझा लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी को आपसी लाभ के लिए और मजबूत किया जा सकेगा।

इस सप्ताह भारत और कनाडा ने प्रस्तावित सीईपीए के लिए नई दिल्ली में चौथे दौर की वार्ता शुरू की। दोनों देशों का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देना है।

पांच दिनों तक चली इन वार्ताओं में वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं, मूल नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) और तकनीकी व्यापार बाधाएं जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे। इससे पहले तीसरा दौर जुलाई में कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसी वर्ष मार्च में नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान सीईपीए वार्ताओं को वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों नेताओं ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी।

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा, जबकि कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर तक पहुंचा।

कनाडा को भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में दवा उत्पाद, मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरणों के पुर्जे, लोहे और इस्पात से बने उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कार्बनिक रसायन, आभूषण, रत्न एवं कीमती पत्थर, परिधान एवं वस्त्र, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।

वहीं कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का पल्प, रत्न एवं कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के हिस्से तथा लोहा और एल्युमीनियम स्क्रैप शामिल हैं।

सेवा क्षेत्र में भारत का आईटी उद्योग कनाडा को सेवाओं के निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है। सीईपीए के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए पहुंचा

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भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में अब तक (1 अप्रैल से 17 सितंबर तक) सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। यह जानकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से शुक्रवार को दी गई।

सरकारी डेटा के मुताबिक, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 14.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

कॉर्पोरेट कर संग्रह 19.48 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) से होने वाला कर संग्रह 6 प्रतिशत बढ़कर 6.16 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है।। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में, 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 53 प्रतिशत बढ़कर 40,214 करोड़ रुपए हो गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान रिफंड जारी करने में 29 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई और यह 2.2 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया।

17 सितंबर तक एडवांस टैक्स संग्रह 16.18 प्रतिशत बढ़कर 5.22 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसमें एडवांस कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 4.16 लाख करोड़ रुपए और नॉन-कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 9.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.06 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

पिछले महीने के आखिर में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में भारत का राजकोषीय घाटा 4.55 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य का 26.8 प्रतिशत है।

यह पिछले साल इसी अवधि के राजकोषीय घाटा से कम है, जो 4.7 लाख करोड़ रुपए था और पूरे वित्त वर्ष के अनुमान का 29.9 प्रतिशत था।

वित्त वर्ष 2027 के लिए, केंद्र सरकार ने 16.96 लाख करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे का बजट रखा है, जो देश की जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटे लक्ष्य हासिल किया था और राजकोषीय समेकन के तहत मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इसे घटाकर जीडीपी का 4.3 प्रतिशत कर दिया है।

राजकोषीय घाटे में कमी आने से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत होती है और कीमतों में स्थिरता के साथ विकास का रास्ता खुलता है। इससे सरकार की उधारी कम होती है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में कॉर्पोरेट्स और उपभोक्ताओं को कर्ज देने के लिए ज्यादा फंड बचता है, और इससे आर्थिक विकास में तेजी आती है।

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व्यापार

भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

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भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।

जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”

जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।

इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।

राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।

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