अंतरराष्ट्रीय
फिंच ने पुकोवस्की को टेस्ट में जल्द मौका मिलने का समर्थन किया
आस्ट्रेलिया की सीमित ओवरों की टीम के कप्तान एरॉन फिंच ने टेस्ट क्रिकेट में विल पुकोवस्की को जल्द मौका मिलने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देरी से मौका मिलने से टेस्ट क्रिकेटर के विकास में बाधा पहुंच सकती है, जैसा कि उनके साथ हुआ था। फिंच ने 32 सल की उम्र में पहली बार अपना टेस्ट मैच खेला था।
इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर है कि क्या 22 साल के पुकोवस्की को भारत के साथ होने वाले पहले टेस्ट मैच में अंतिम एकादश में मौका मिलेगा या नहीं क्योकि जो बर्न्स पहले से ही वहां मौजूद है, जो हाल के समय में डेविड वार्नर के साथ ओपनिं करते आए हैं।
मार्क टेलर सहित कई पूर्व खिलाड़ियों के भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में युवा विल पुकोवस्की को खेलने की पैरवी करने के बाद भी आस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन सलामी बल्लेबाज के तौर पर जोए बर्न्स के साथ ही जाने के मूड में है।
आस्ट्रेलिया के मुख्य कोच जस्टिन लैंगर ने बुधवार को इस बात के संकेत दिए हैं कि बर्न्स नई गेंद से खेलने के लिए आस्ट्रेलिया की पहली पसंद हैं।
फिंच ने गुरुवार को मीडिया से कहा, ” जब आप युवा खिलाड़ियों की बात करते हैं, खासकर विल पुकोवस्की जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की तो अपने करियर में वे ऊपर नीचे होते रहते हैं।”
उन्होंने कहा कि किसी भी युवा खिलाड़ी को जल्द मौका मिलना मुश्किल होता है, लेकिन इससे उन्हें खुद को सेटल करने, सीखने और मानसिक रूप से खुद को विकास करने में मदद मिलता है।
सीमित ओवरों के कप्तान ने कहा, ” मुझे लगता है कि पहले ही उच्च स्तर से अवगत कराने के बाद अगर चीजें आपके अनुरूप नहीं होती है तो यह मुश्किल लगता है। लेकिन इससे आप सीखते हैं। जिस तरह से आप गेम को अप्रोच करते हैं, वैसे ही मानसिक रूप से भी करें। यह शायद कुछ ऐसा है जो वास्तव में सिखाया नहीं जा सकता है। मुझे लगता है कि आप हर किसी से बात कर सकते हैं कि आप इसके बारे में कैसे करते हैं।”
अंतरराष्ट्रीय
बलूचिस्तान में पाकिस्तान का ड्रोन अटैक, एक की मौत और कई घायल

क्वेटा, 9 अप्रैल : पाकिस्तानी ड्रोन हमले में बलूचिस्तान के एक युवक की मौत हो गई और कई महिलाएं घायल हो गईं। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को इसे रिपोर्ट किया। घटना मस्तंग जिले की बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए, ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने मस्तंग के कुर्दगाप इलाके में एक घर पर ड्रोन हमला किया, जिससे अब्दुल समद नाम का शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया। घर में मौजूद महिलाएं भी घायल हुईं।
अब्दुल की अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई। हमले में घायल महिलाओं को स्थानीय अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद, बेहतर इलाज के लिए क्वेटा भेज दिया गया।
हाल के दिनों में, इस इलाके में बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए हमलों में पाकिस्तानी सेना और स्पेशल सर्विस ग्रुप के कई जवान मारे गए थे, जिसके बाद सेना ने एक बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया, जो अभी भी जारी है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के ड्रोन हमलों से आम नागरिक हताहत हुए हैं; ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं।
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग सहित कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, और साथ ही बलूच राजनीतिक दलों ने इन हमलों में आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। ये संगठन सरकार से बलूचिस्तान में ऐसी और घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की अपील करते रहे हैं।
पिछले हफ्ते ही बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए मोर्टार में एक बलूच परिवार के तीन सदस्य मारे गए थे, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बताया कि यह दुखद घटना 31 मार्च की शाम को अवारान जिले के बुंगुल बाजार इलाके में हुई थी।
संगठन ने बताया कि कथित तौर पर बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा पास के एक सैन्य शिविर पर हमला किए जाने के बाद, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने आम आबादी वाले इलाकों के करीब मोर्टार दागे और कई भारी हथियारों का इस्तेमाल किया।
इस गोलाबारी के दौरान, एक मोर्टार बुंगुल बाजार स्थित रिहायशी इलाके में गिरा, जिससे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई।
60 वर्षीय मोहम्मद उमर, 57 वर्षीय फैजा, और पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी महजैब बलूच इसमें मारे गए।
इस घटना की निंदा करते हुए, ‘बलूच वॉयस फॉर जस्टिस’ (बीवीजे) ने कहा, “यह घटना अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के संभावित उल्लंघन को उजागर करती है, विशेष रूप से ‘भेदभाव’ और ‘अनुपात’ के सिद्धांतों का उल्लंघन; ये सिद्धांत सभी पक्षों को आम नागरिकों और नागरिक संपत्तियों की रक्षा करने के लिए बाध्य करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
भारत और आसियान ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की

मनीला, 9 अप्रैल : भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पेरियासामी कुमारन और फिलीपींस के विदेश विभाग की नीति के अवर सचिव लियो एम हेरेरा-लिम ने मनीला में आसियान और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों की 28वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की।
मीटिंग के दौरान हिस्सा लेने वालों ने अक्टूबर 2025 में हुए आसियान-भारत समिट के फैसलों को लागू करने में हुई प्रक्रिया की समीक्षा की और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “मीटिंग में अक्टूबर 2025 में हुए आसियान-भारत समिट के फैसलों को लागू करने में हुई प्रक्रिया की समीक्षा की गई और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई। हम साल 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के तौर पर मना रहे हैं।”
फिलीपींस में भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया कि बुधवार को पेरियासामी कुमारन ने मनीला में जाने-माने थिंक टैंक, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और कई द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर उपयोगी विचारों का आदान-प्रदान किया।
पेरियासामी कुमारन ने बुधवार को मनीला में फिलीपींस की विदेश मामलों की सचिव मारिया थेरेसा पी. लाजारो के साथ भी मीटिंग की। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और फिलीपींस के बीच रणनीतिक साझेदारी की प्रक्रिया और आसियान के लिए भारत के समर्थन को लेकर चर्चा की।
एक्स पर एक पोस्ट में, लाजारो ने कहा, “फिलीपींस-भारत रणनीतिक साझेदारी की प्रक्रिया के साथ-साथ आसियान के लिए भारत के एक्टिव सपोर्ट पर हमारी छोटी, लेकिन फायदेमंद बातचीत हुई।”
इस बीच, मनीला में हुई आसियान वरिष्ठ अधिकारियों की मीटिंग (एसओएम) में फिलीपींस की चेयरशिप की प्राथमिकताओं और आसियान समुदाय के निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए तय लक्ष्यों और योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इसके साथ ही, आसियान के बाहरी संबंधों को और मजबूत बनाने के तरीकों पर मंथन हुआ और मई 2026 में होने वाले 48वें आसियान शिखर सम्मेलन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
आसियान के बयान के मुताबिक, इस मीटिंग में प्लेनरी और रिट्रीट सत्र शामिल थे। इसमें आसियान के सदस्य देशों के एसओएम नेताओं या उनके प्रतिनिधियों और आसियान राजनीतिक-सुरक्षा समुदाय के लिए आसियान के उप महासचिव शामिल हुए।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, आसियान की स्थापना 1967 में थाईलैंड में हुई थी, जब आसियान के फाउंडिंग फादर्स: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने आसियान डिक्लेरेशन (बैंकॉक डिक्लेरेशन) पर हस्ताक्षर किए थे। ब्रुनेई दारुस्सलाम जनवरी 1984 में आसियान में शामिल हुआ, उसके बाद जुलाई 1995 में वियतनाम, जुलाई 1997 में लाओस और म्यांमार, अप्रैल 1999 में कंबोडिया, और अक्टूबर 2025 में तिमोर-लेस्ते शामिल हुए, जिससे आज आसियान के 11 सदस्य देश बन गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय
मैक्रों ने लेबनान में इजरायल के हमलों की आलोचना की, सभी देशों से शांति बनाए रखने पर दिया जोर

पेरिस, 9 अप्रैल : ईरान और अमेरिका के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक भीषण संघर्ष चलने के बाद दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में सीजफायर हुई। सीजफायर के बाद ही इजरायल ने लेबनान पर हमला कर दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इजरायल के हमले की कड़ी आलोचना की है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से बात की और इन जानलेवा हमलों के सामने फ्रांस की पूरी एकजुटता दिखाई। इजरायल ने कहा कि इन हमलों में ईरान के समर्थन वाले मिलिटेंट समूह हिज्बुल्लाह के 100 से ज्यादा कमांड सेंटर और मिलिट्री साइट्स को टारगेट किया गया।
लेबनानी पीएम और राष्ट्रपति से बातचीत के बाद फ्रांस के प्रेसिडेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “ये हमले अभी हुए सीजफायर के बने रहने के लिए सीधा खतरा हैं। लेबनान को इस सीजफायर के तहत पूरी तरह शामिल किया जाना चाहिए।”
इसके साथ ही फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की। एक्स पर उन्होंने कहा, “मैंने उन दोनों से कहा कि सीजफायर मानने का उनका फैसला सबसे अच्छा था। मैंने उम्मीद जताई कि लेबनान समेत टकराव के सभी इलाकों में, हर लड़ने वाला सीजफायर का पूरी तरह से सम्मान करेगा। सीजफायर के भरोसेमंद और लंबे समय तक चलने के लिए यह एक जरूरी शर्त है।”
उन्होंने आगे कहा कि मिडिल ईस्ट में सभी के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने लायक पूरी बातचीत का रास्ता खोलना होगा। किसी भी समझौते में ईरान के न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम से उठी चिंताओं के साथ-साथ उसकी क्षेत्रीय नीति और होर्मुज स्ट्रेट से नेविगेशन में रुकावट डालने वाले उसके कामों पर भी ध्यान देना होगा।
मैक्रों ने सबके समर्थन और योगदान से मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली शांति बनाए रखने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि फ्रांस मिडिल ईस्ट में अपने साझेदारों के साथ मिलकर अपनी पूरी भूमिका निभाएगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने कतर, संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान और इराक के नेताओं के साथ भी इस मुद्दे पर बातचीत की।
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