अंतरराष्ट्रीय
इंग्लैंड के कप्तान रूट ने कप्तानी से हटाए जाने की अफवाहों को किया खारिज
इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने शुक्रवार को यहां एशेज सीरीज के बाद अपनी कप्तानी गंवाने से जुड़ी अफवाहों को खारिज किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका ध्यान केवल 26 दिसंबर से शुरू हो रहे एमसीजी टेस्ट को जीतने पर है। पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में इंग्लैंड 0-2 से पीछे है और एशेज पाने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं, क्योंकि टीम गाबा में शुरुआती टेस्ट में नौ विकेट और एडिलेड ओवल में दूसरा टेस्ट 275 रनों से हार गई थी।
मीडिया से बातचीत के दौरान रूट ने कहा, “केवल एक चीज जिसे लेकर मैं चिंतित हूं वह है जीत। मेलबर्न में अच्छी शुरुआत और यह सुनिश्चित करना कि हम पहले कुछ घंटों में बेहतर प्रदर्शन करें।”
कप्तान ने एडिलेड हार के बाद अपनी टिप्पणी को भी स्पष्ट किया, जहां उन्होंने तेज गेंदबाजों स्टुअर्ट ब्रॉड, जिमी एंडरसन और बेन स्टोक्स की शॉर्ट-पिच डिलीवरी को टीम के लिए नुकसान बताया था।
सेन रेडियो ने रूट के हवाले से कहा, “मुझे लगता है कि कई मौकों पर हमें वह गेंदें थोड़ी गलत लगी थी।”
उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि तेज गेंदबाज अक्सर गलती करते हैं, क्योंकि वे सभी असाधारण गेंदबाज हैं। यह किसी एक की गलती नहीं थी, बल्कि सामूहिक रूप से सबकी गलती थी।”
कप्तान ने यह भी कहा कि बॉक्सिंग डे टेस्ट के लिए प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव किए जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय
एशिया में कम हो रहा तेल भंडार, जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में अमेरिका और यूरोप को लेकर भी चेतावनी जारी

नई दिल्ली : ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के हमलों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट अभी बंद है। इसकी वजह से मिडिल ईस्ट का तेल बाकी दुनिया में नहीं जा पा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि तमाम देशों को घटते तेल स्टॉक का असर महसूस होने लगा है। प्रमुख अमेरिकी वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन ने पिछले हफ्ते जारी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे यह झटका पश्चिम की ओर बढ़ेगा, एशिया पर इसका असर सबसे पहले पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार अगला नंबर अमेरिका और यूरोप का होगा।
आमतौर पर, फारस की खाड़ी से तेल का शिपमेंट 10 से 20 दिनों में एशिया पहुंचता है। लगभग 20 से 35 दिनों में यूरोप और अफ्रीका और फिर आखिर में लगभग 35 से 45 दिनों के बाद अमेरिका पहुंचते हैं।
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम की ओर बढ़ रही सप्लाई में रुकावट की वजह से एशिया को सबसे पहले दबाव महसूस होगा। आखिरी तेल टैंकर 28 फरवरी को स्ट्रेट से निकला था और युद्ध से पहले ये आखिरी शिपमेंट ज्यादातर खत्म हो चुके हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया पर खास तौर पर बुरा असर पड़ेगा। इस इलाके में तेल एक्सपोर्ट में महीने-दर-महीने 41 फीसदी की गिरावट का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया, “तेल से संबंधित मुख्य चुनौती कीमत से फिजिकल कमी में बदल गई है।”
दक्षिण पूर्व एशिया के बाद स्थिति से अफ्रीका प्रभावित होगा, जिसका असर अप्रैल की शुरुआत तक और बढ़ जाएगा, हालांकि यह लोकल स्टॉक लेवल और देश में आयात किए गए तेल पर कितने आश्रित हैं, इस पर निर्भर करता है। जेपी मॉर्गन ने कहा कि तनाव के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। केन्या में रिटेल लेवल पर फ्यूल की कमी हो रही है, जबकि तंजानिया के पास अभी काफी स्टॉक है।
यूरोप पर इसका असर अप्रैल के बीच तक महसूस होने की संभावना है, हालांकि उसके पास मजबूत इन्वेंट्री बफर और अल्टरनेटिव अटलांटिक बेसिन सप्लाई का फायदा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को सबसे आखिर में झटका लगेगा, क्योंकि उसका घरेलू प्रोडक्शन काफी है। इसलिए शायद उसे शॉर्ट-टर्म फिजिकल शॉर्टेज महसूस नहीं होगी, हालांकि कैलिफोर्निया सप्लाई की चुनौतियों के लिए खास तौर पर कमजोर है और देश को ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के कुवैत स्थित प्लांट पर हमले में भारतीय की मौत, संघर्ष में अब तक 8 भारतीयों की जान गई
कुवैत सिटी, 30 मार्च : कुवैत सरकार ने घोषणा की कि सोमवार तड़के ईरान द्वारा किए गए हमले में कुवैत के एक बिजली और जल विलवणीकरण (डिसेलिनेशन) संयंत्र पर काम कर रहे एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई। इस घटना के साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में मारे गए भारतीय नागरिकों की संख्या बढ़कर कम से कम आठ हो गई है।
कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय ने सोशल साइट एक्स पर पुष्टि की कि ईरान के हमले में संयंत्र की एक सेवा इमारत को भी नुकसान पहुंचा और इसे खाड़ी राष्ट्र के खिलाफ “ईरानी आक्रमण” के रूप में कड़ा निंदा की।
मंत्रालय ने अरबी में कहा- “इस हमले में एक कर्मचारी (भारतीय नागरिक) की मृत्यु हुई और भवन को गंभीर क्षति पहुंची।”
अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन और तकनीकी प्रतिक्रिया टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। साथ ही, नुकसान को कम किया जा सके और संयंत्र के संचालन में बड़े व्यवधान से बचा जा सके।
मंत्रालय ने जोर दिया कि “बिजली और जल अवसंरचना की सुरक्षा और स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता हैं” और तकनीकी टीमें किसी भी आगे के जोखिम की आशंका के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं ताकि आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
यह घटना संयुक्त अरब अमीरात में हाल ही में हुई एक दुखद घटना के कुछ दिन बाद आई है, जिसमें पिछले गुरुवार को अबू धाबी में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जब एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया और मलबे की वजह से वह घायल हो गया था।
तत्कालीन समय में भारतीय दूतावास ने कहा था कि वह “यूएई अधिकारियों के साथ निकटता से काम कर रहा है ताकि प्रभावित लोगों को सभी संभव समर्थन और सहायता प्रदान की जा सके।”
शुक्रवार को हुई एक अंतर-मंत्रालयीय समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने कहा था कि अब तक मध्य पूर्व संघर्ष में सात भारतीय नागरिक मारे गए हैं और एक व्यक्ति लापता है। सोमवार की घटना के बाद मृतकों की संख्या बढ़ गई है।
यह संघर्ष अब अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और यह तब शुरू हुआ जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर समन्वित हमले किए, जिससे क्षेत्र में व्यापक तनाव बढ़ गया।
इसके बाद, ईरानी बलों ने इज़रायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य स्थलों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे क्षेत्र में जनहानि हुई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के तेज पर अमेरिका की नजर, खार्ग द्वीप पर कर सकता है कब्जा, राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए संकेत

TRUMP
वाशिंगटन, 30 मार्च : पिछले एक महीने से जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान का तेल लेना चाहते हैं और देश के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा कर सकते हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “सच कहूं तो मेरी पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना है।” उन्होंने इसकी तुलना वेनेजुएला से की, जहां वाशिंगटन जनवरी में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के बाद कथित तौर पर तेल उद्योग पर लंबे समय तक नियंत्रण रखना चाहता है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का तेल लेने का मतलब होगा खार्ग द्वीप पर कब्जा करना, जिसके जरिए ईरान के 90 प्रतिशत से ज्यादा तेल का निर्यात होता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस तरह के हमले से हताहतों की संख्या बढ़ने और युद्ध लंबा खिंचने का खतरा है।
रिपोर्ट में ट्रंप के हवाले से कहा गया, “हो सकता है हम खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लें, हो सकता है न करें। हमारे पास बहुत सारे विकल्प हैं।” उन्होंने कहा, “इसका यह भी मतलब होगा कि हमें वहां कुछ समय तक रहना पड़ेगा।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा कि उनका मानना है कि द्वीप पर ईरान की सुरक्षा व्यवस्था बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं है। उन्होंने कहा, “हम बहुत आसानी से इस पर कब्जा कर सकते हैं।”
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है और ईरान से लगभग 1,000 पाउंड यूरेनियम निकालने के लिए संभावित सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की सोच से परिचित एक अज्ञात सूत्र का हवाला देते हुए बताया गया है कि उन्होंने अपने सलाहकारों को इस बात के लिए दबाव डालने को भी कहा है कि ईरान युद्ध खत्म करने की शर्त के तौर पर यह सामग्री सौंपने पर राजी हो जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन इस क्षेत्र में 10,000 तक अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को घोषणा की कि 2,500 मरीन सहित 3,500 से ज्यादा सैनिक मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं।
इस खतरे के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के जरिए चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा, “बहुत जल्द कोई समझौता हो सकता है।”
गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिकी की ईरान के साथ लड़ाई को एक महीने से अधिक समय हो गया है। 28 फरवरी को यह जंग शुरू हुई थी। इसके बाद दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। मार्च में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो जून 2022 के बाद से सबसे ज्यादा है।
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