अंतरराष्ट्रीय
2021 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 80 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद
पिछले दो वर्षों में दुनिया भर में अभूतपूर्व उद्योग और सरकार की प्रतिबद्धताओं को देखते हुए 2021 में यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 80 प्रतिशत बढ़कर 56 लाख यूनिट तक पहुंचने की उम्मीद है। ब्लूमबर्ग फिलानथ्रोपिस के साथ साझेदारी में यूके सीओपी26 प्रेसीडेंसी के अनुरोध पर ब्लूमबर्गएनईएफ (बीएनईएफ) द्वारा बुधवार को प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट जीरो-एमिशन व्हीकल्स फैक्टबुक के अनुसार 2021 में यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 80 प्रतिशत बढ़ सकती है।
फैक्टबुक सड़क परिवहन क्षेत्र में वैश्विक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन की दिशा में हुई प्रगति का दस्तावेजीकरण करती है, और दर्शाती है कि शून्य-उत्सर्जन वाहनों के लिए भविष्य पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल है।
2021 की पहली छमाही में, यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों (बैटरी इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड और ईंधन सेल वाहनों सहित) की बिक्री 2019 में इसी अवधि की तुलना में 140 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई है, जो वैश्विक यात्री वाहन बिक्री के सात प्रतिशत तक पहुंच गई है।
यात्री इलेक्ट्रिक और ईंधन सेल वाहनों का कुल वैश्विक बेड़ा अब लगभग 1.3 करोड़ है, जिनमें से 85 लाख शून्य-उत्सर्जन वाहन (जेडईवी) हैं और इसके अलावा इसमें या तो बैटरी इलेक्ट्रिक या ईंधन सेल वाहन शामिल हैं।
इससे पहले आंकड़ा सीओपी25 के समय केवल 46 लाख था। जबकि 2021 की पहली छमाही में शून्य-उत्सर्जन बसों के वैश्विक बेड़े में 2019 के बाद से 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 के अंत में सड़क पर मौजूद सभी नगरपालिका बसों में से 18 प्रतिशत शून्य-उत्सर्जन होने की उम्मीद है।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि उत्सर्जन कम करने की दिशा में भविष्य पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल होगा।
उद्योग के ²ष्टिकोण की समीक्षा से पता चलता है कि शून्य-उत्सर्जन वाहन पूवार्नुमान पूरे मंडल में उठाए गए हैं। 2040 में वैश्विक जेडईवी के बेड़े के लिए बीएनईएफ का अपना पूर्वानुमान 2019 के पूवार्नुमान में 49.5 करोड़ वाहनों से बढ़ाकर 2021 इलेक्ट्रिक वाहन आउटलुक में 67.7 करोड़ वाहन कर दिया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने 2019 के बाद से अपने 2030 बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े के पूवार्नुमान में सात प्रतिशत की वृद्धि की है, जबकि पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपीईसी) ने वैश्विक इलेक्ट्रिक और ईंधन सेल वाहन बेड़े के लिए अपने 2040 के अनुमान को 11 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।
इन मजबूत पूर्वानुमानों में कई कारक शामिल हैं, जिनमें बैटरी प्रौद्योगिकी और लागत में सुधार, चाजिर्ंग बुनियादी ढांचे का तेजी से रोल-आउट, ग्राहकों को पेश किए जाने वाले वाहन मॉडल की एक विस्तृत श्रृंखला और नवीनतम वाहनों पर उपलब्ध लंबी दूरी और तेज चाजिर्ंग गति शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक कारक पर रिपोर्ट में विस्तार से चर्चा की गई है।
रिपोर्ट को सीओपी26 के परिवहन दिवस (ट्रांसपोर्ट डे) के लिए समय पर लॉन्च किया गया है, जहां सरकार और वैश्विक कार उद्योग के नेताओं का एक गठबंधन 2040 तक 100 प्रतिशत शून्य-उत्सर्जन नई कार, वैन और एचजीवी बिक्री की दिशा में काम कर रहा है।
ब्रिटेन के परिवहन सचिव ग्रांट शाप्स ने कहा, “एक हरित भविष्य की दिशा में तेजी लाना यूके की प्रमुख प्राथमिकता है और इस रिपोर्ट में परिलक्षित परिवहन के प्रति हमारे जबरदस्त प्रयासों को देखकर मुझे खुशी हो रही है।”
व्यापार
टाटा मोटर्स ने कमर्शियल वाहनों के दाम 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाए, 1 जुलाई से लागू होंगी नई कीमतें

टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स (टीएमसीवी) ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है और नई कीमतें 1 जुलाई से लागू होंगी। यह जानकारी गुरुवार को कंपनी की ओर से दी गई।
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी होना और लागत का बढ़ना है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल पर विभिन्न होगी और 2.5 प्रतिशत तक सीमित होगी।
इस बढ़ोतरी से टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स भी उन कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने मध्य पूर्व संकट के चलते कच्चे माल और लागत में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में इजाफा किया है।
इससे पहले, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने 12 जून को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।
कंपनी की ओर से जारी की गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इनपुट लागत में बढ़ोतरी होना था।
टीएमपीवी ने कहा कि वह लागत में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है, जबकि हालिया कीमत संशोधन के जरिए बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही है।
कंपनी ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। वहीं, मध्य पूर्व तनाव के चलते मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया जैसी कंपनियां गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में, टीएमसीवी के मुनाफे में सालाना आधार पर 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि आय 22 प्रतिशत बढ़कर 24,452 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान कंपनी का एबिटा मार्जिन 13.90 प्रतिशत रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर 4 रुपए का डिविडेंड भी घोषित किया।
व्यापार
शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों का मार्केटकैप 1.90 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार में बीते हफ्ते शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों का मार्केटकैप 1.90 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। इसकी वजह घरेलू बाजार में मजबूती रैली थी।
इस दौरान सेंसेक्स 1,284.61 अंक या 1.73 प्रतिशत की मजबूती के साथ 75,527.95 और निफ्टी 256.20 अंक या 1.10 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,622.90 पर बंद हुआ।
बाजार में तेजी की वजह अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ना है। इससे वैश्विक स्तर पर अस्थिरता में कमी आई, जिसमें भारत के साथ दुनिया के बाजार में खरीदारी देखने को मिली।
विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्ष एक शांति समझौता करने के अंतिम दौर में है। जल्द ही अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक डील हो सकती है।
समीक्षा अवधि में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एलएंडटी और एचयूएल के मार्केट कैप में बढ़ोतरी हुई है, जबकि टीसीएस और एलआईसी के वैल्यूएशन में कमी देखने को मिली है।
आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप 56,223 करोड़ रुपए बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, एचडीएफसी बैंक का बाजार मूल्यांकन 38,571 करोड़ रुपए बढ़कर 11.89 लाख करोड़ रुपए हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का बाजार मूल्यांकन 36,138 करोड़ रुपए बढ़कर 9.39 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 18,367 करोड़ रुपए बढ़कर 5.72 लाख करोड़ रुपए हो गया है। भारती एयरटेल का मार्केटकैप 14,380 करोड़ रुपए बढ़कर 11.11 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
एलएंडटी का मार्केटकैप 13,241 करोड़ रुपए बढ़कर 5.57 लाख करोड़ रुपए हो गया है। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केटकैप 10,984 करोड़ रुपए बढ़कर 5.09 करोड़ रुपए हो गया है।
दूसरी तरफ, टीसीएस का मार्केटकैप 13,296 करोड़ रुपए घटकर 7.82 लाख करोड़ रुपए हो गया है। एलआईसी का मार्केटकैप 822 करोड़ रुपए कम होकर 5.05 लाख करोड़ रुपए रह गया है।
व्यापार
सोना एक हफ्ते में करीब 6,400 रुपये और चांदी 14,300 रुपये से अधिक सस्ती हुई

सोने और चांदी में इस हफ्ते गिरावट देखने को मिली, जिससे सोना और चांदी क्रमशः 6,400 रुपये और 14,300 हजार रुपये से अधिक सस्ते हो गए हैं।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 6,438 रुपये कम होकर 1,47,800 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,54,238 रुपए पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,35,385 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,41,282 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,10,850 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,15,679 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते सोने में सबसे न्यूनतम दाम 11 जून को सुबह के सत्र में 1,44,782 रुपये प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 9 जून को सुबह के सत्र में 1,52,519 रुपये प्रति 10 ग्राम देखा गया। सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 14,326 रुपये कम होकर 2,42,582 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,56,908 रुपये प्रति किलो था। इस हफ्ते चांदी में सबसे न्यूनतम दाम 11 जून को शाम के सत्र में 2,32,591 रुपये प्रति किलो देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 9 जून को शाम के सत्र में 2,45,938 रुपये प्रति किलो देखा गया।
वैश्विक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम 4,248 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 68 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह महंगाई बढ़ने की आशंका और अमेरिका – ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत उच्च स्तर पर रहना है। इसके साथ ही ब्याज दरों के बढ़ाने की आसान कहां है निवेशकों को सोने और चांदी में मुनाफा वसूली पर मजबूर किया है।
बीते एक वर्ष में सोने और चांदी ने शानदार रिटर्न दिया है। डॉलर में इस दौरान सोने ने 24 प्रतिशत से अधिक और चांदी ने 87 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
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