राष्ट्रीय समाचार
झारखंड सीएम हेमंत सोरेन से खनन घोटाले में ईडी की पूछताछ शुरू
झारखंड के साहिबगंज जिले में अवैध स्टोन माइनिंग के जरिए एक हजार करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले में ईडी ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ शुरू कर दी है। ईडी की ओर से भेजे गए समन पर मुख्यमंत्री रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय में गुरुवार सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर पहुंचे। ईडी के समक्ष पेश होने के पहले सीएम ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि उनपर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्हें इस तरह समन भेजा गया जैसे वे देश छोड़कर भाग रहे हों। इस देश में घोटाला करने वाले व्यापारियों देश छोड़कर भागते रहे हैं, लेकिन किसी राजनेता को लेकर ऐसा कोई उदाहरण नहीं है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार को अस्थिर करने के षड्यंत्र का हिस्सा है। अवैध खनन को लेकर उनपर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईडी का कहना है कि सिर्फ एक जिले में अवैध पत्थर खनन के जरिए एक हजार करोड़ का घोटाला हुआ है, जबकि पूरे राज्य में स्टोन चिप्स से साल भर में एक हजार करोड़ रुपए की आमदनी नहीं होती।
मुख्यमंत्री ने झारखंड राज्यपाल रमेश बैस पर भी बड़ा हमला बोला और कहा कि राज्यपाल का पद राजनीति और पार्टी से ऊपर से होता है, लेकिन इनके कार्यकलापों से ऐसा लगता है कि वे षड्यंत्रकारी राजनीति करने वाले दलों को संरक्षण दे रहे हैं। एक तरफ माइनिंग लीज मामले में चुनाव आयोग के मंतव्य की चिट्ठी का लिफाफा राज्यपाल महीनों बाद भी नहीं खोलते, और दूसरी तरफ बयान देते हैं राज्य में बम-पटाखा फूट सकता है। उनके बयान के तुरंत बाद ईडी का समन आता है और सत्ताधारी दलों के विधायकों के यहां आईटी और केंद्रीय एजेंसियों का छापा पड़ने लगता है। मुझे खबर है कि अभी कई और विधायकों के यहां छापमारी की तैयारी चल रही है। यह सब षड्यंत्र का हिस्सा है।
सीएम हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए ईडी के ज्वायंट डायरेक्टर कपिल राज सहित कई बड़े अफसर पहुंचे हैं। ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय की सुरक्षा कड़ी की गई है। यहां गुरुवार की सुबह से ही जबर्दस्त बैरिकेडिंग की गई है। कार्यालय के बाहर सीआरपीएफ, जैप, आइआरबी, एसआइआरबी के जवानों की तैनाती की गई है। इधर राज्य के विभिन्न इलाकों से आए झामुमो के हजारों कार्यकर्ता रांची में जुटे हैं। वे ईडी की कार्रवाई के खिलाफ मोरहबादी मैदान के पास नारेबाजी कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने ईडी दफ्तर के पास विरोध प्रदर्शन करने वालों को पहुंचने से रोकने के तमाम इंतजाम किया है। हिनू चौक से लेकर एयरपोर्ट के इलाके तक धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
बता दें कि अवैध माइनिंग के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के जिस मामले में ईडी सीएम से पूछताछ कर रहा है, उसमें मुख्यमंत्री के विशेष प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को पहले ही गिरफ्तार किया गया है। पंकज मिश्रा के खिलाफ दायर चार्जशीट में ईडी ने उसे मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण का विस्तार पूर्वक उल्लेख किया है। खनन घोटाले में साहिबगंज में छापेमारी के दौरान ईडी को पंकज मिश्रा के घर से एक लिफाफा मिला था। इसमें मुख्यमंत्री के बैंक खाते से जुड़ा चेकबुक था। इसमें से दो चेक बुक हस्ताक्षरित थे। हालांकि, इसमें राशि का उल्लेख नहीं किया गया था। ईडी की चार्जशीट के मुताबिक मुख्यमंत्री के नाम पर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए अधिकारियों को कार्रवाई करने से रोका जाता था।
पंकज मिश्रा के अलावा पावर ब्रोकर प्रेम प्रकाश और कोलकाता के कारोबारी अमित अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों ने भी पूछताछ में हेमंत सोरेन से अपने संबंधों के बारे में जानकारी दी है। माना जा रहा है कि इन्हीं तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री से पूछताछ की जाएगी।
ईडी ने इसके पहले मनरेगा घोटाले के जरिए मनी लांड्रिंग में झारखंड की सीनियर आईएएस खनन सचिव पूजा सिंघल को भी गिरफ्तार किया था। उनसे जुड़े सीए सुमन कुमार के ठिकाने से 17.49 करोड़ नकद मिले थे। ईडी को जांच के दौरान इस बात की जानकारी मिली थी कि इसमें अवैध खनन से मिली राशि भी शामिल है। पूछताछ के दौरान मुख्यमंत्री से इन सभी मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं।
राष्ट्रीय समाचार
इंडो पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड की बड़ी योजना, ‘सहयोग से मजबूत होगी सप्लाई चेन’

क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया है कि इन देशों का साझा लक्ष्य एक ही है, और वह ऊर्जा की आपूर्ति को सुरक्षित, स्थिर और बिना रुकावट के बनाए रखना है।
मंगलवार को नई दिल्ली में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया। क्वाड देशों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी भी तरह की बाधा का सबसे अधिक प्रभाव इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर पड़ता है, इसलिए इस क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
बयान में कहा गया है कि चारों देश मिलकर एनर्जी मार्केट को स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए काम करेंगे। इसके साथ ही तेल, गैस और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई चेन को मजबूत और विविध बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम हो सके।
समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को भी इस समूह ने महत्वपूर्ण बताया है। इसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि होर्मुज स्ट्रेट समेत दुनिया भर में जहाजों की आवाजाही बेरोक-टोक के जारी रहे जिससे वैश्विक व्यापार सामान्य रूप से चलता रहे। विशेष रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
छोटे द्वीपीय और विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतों को विशेष रूप से ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है। इन देशों का मानना है कि वे ऊर्जा संकट के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। क्वाड देश आपातकालीन परिस्थितियों में एक-दूसरे और क्षेत्रीय साझेदारों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करेंगे।
बयान के अनुसार, क्षेत्रीय स्तर पर चल रही अलग-अलग पहलें ऊर्जा और संसाधनों की सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इनमें जापान की पीओडब्ल्यूआरआर पहल शामिल है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और संसाधन प्रबंधन को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है। इसी तरह भारत दक्षिण एशिया के देशों को ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग दे रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और व्यवस्था मजबूत करने में मदद कर रहा है।
ऑस्ट्रेलिया ने इसके लिए 2 अरब डॉलर की निवेश योजना भी शुरू की है। इसके अलावा आसियान देशों के बिजली नेटवर्क को मजबूत करने पर भी काम चल रहा है। साथ ही प्रशांत द्वीप देशों में विकास परियोजनाओं के लिए निवेश और सहायता भी दी जा रही है, ताकि वहां ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया जा सके।
नई पहल और भविष्य की योजना पर भी जोर दिया गया है। क्वाड देशों ने “क्वाड इनिशिएटिव ऑन इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी” नामक एक नई पहल शुरू करने की बात कही है। जिसके तहत तकनीक, नीति, ऊर्जा प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपात प्रतिक्रिया अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।
इसके साथ ही एक “क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम” भी स्थापित किया जाएगा, जहां ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नियमित चर्चा और समन्वय किया जाएगा।
राष्ट्रीय समाचार
महत्वपूर्ण खनिजों और और दुर्लभ मृदा तत्वों की सप्लाई के लिए भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक समझौता

भारत और अमेरिका ने मंगलवार को एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। ये वही जरूरी पदार्थ हैं जो सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और हाईटेक रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होते हैं।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया में चीन के इन अहम संसाधनों पर दबदबे को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जाता है कि इससे चीन को वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने की ताकत मिल जाती है।
यह समझौता क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुआ, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद थे।
इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “आज हम भारत-अमेरिका के बीच एक ऐसा फ्रेमवर्क साइन कर रहे हैं, जिसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स की सप्लाई को सुरक्षित करना है। हमने इस पर क्वाड बैठक में भी चर्चा की है। चाहे हम इसे दो देशों के बीच करें, क्वाड के जरिए करें या समान सोच वाले देशों के बड़े समूह के तौर पर, समय की जरूरत को देखते हुए यह जरूरी और अहम है।”
उन्होंने बताया कि इस फ्रेमवर्क का मकसद पूरे सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाना है, जिसमें खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और इससे जुड़े निवेश शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह समझौता इसलिए किया गया है, क्योंकि भारत और अमेरिका का साझा रणनीतिक हित है। उनका कहना है कि मजबूत और इनोवेशन पर आधारित अर्थव्यवस्थाएं ऐसी चीजों पर निर्भर नहीं रह सकतीं, जो सिर्फ एक ही देश या एक ही स्रोत से मिलती हों। वरना वह देश इसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कई बार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर बात की है। यह समझौता उसी साझेदारी का एक ठोस उदाहरण है।
रुबियो ने यह भी बताया कि इस समझौते की नींव 4 फरवरी को रखी गई थी, जब भारत ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में हिस्सा लिया था।
उन्होंने भारत द्वारा ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर करने का भी जिक्र किया। यह अमेरिका के नेतृत्व में बना एक समूह है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करना है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-कनाडा व्यापार समझौते में तेजी, साल के अंत तक ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ होने की उम्मीद

भारत और कनाडा ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के संकेत दिए हैं। दोनों देशों के नेताओं ने इस साल के अंत तक लंबे समय से रुकी हुई ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ बातचीत को पूरा करने की उम्मीद जताई है। साथ ही व्यापार, निवेश और बिजनेस सहयोग को तेजी से बढ़ाने की बात कही है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत ‘कनाडाई कामगारों और व्यवसायों के लिए गेम चेंजर’ साबित होगी।
वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम भारत के साथ एक फ्री ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं। यह कनाडा के कामगारों और बिजनेस के लिए गेम चेंजर होगा, जिससे एक बहुत बड़ा नया बाजार खुलेगा।”
कार्नी ने बताया कि दोनों पक्षों ने बातचीत की प्रगति की समीक्षा की और ऊर्जा, एग्री-फूड, टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए मौके तलाशे।
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल कनाडा में अब तक के सबसे बड़े भारतीय बिजनेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कनाडा के प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दीं और कार्नी की हाल की भारत यात्रा को भी याद किया।
गोयल ने कहा कि उनकी हाल की भारत यात्रा ने भारत-कनाडा साझेदारी को नई गति और नया भरोसा दिया है।
उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को और गहरा करने पर ‘आगे की सोच वाली बातचीत’ हुई और जल्द से जल्द भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता पूरा करने की उम्मीद जताई गई।
ओटावा में एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने कहा कि दोनों देश इस समझौते को जल्दी पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हमने कनाडा के लोगों से वादा किया था कि हम तेजी से काम करेंगे।” उन्होंने बताया कि अब तक बातचीत के दो दौर पूरे हो चुके हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कनाडा अपने व्यापारिक साझेदारों को विविध बनाना चाहता है और लगभग 300 अरब डॉलर के अतिरिक्त गैर-अमेरिकी निर्यात के अवसर खोलना चाहता है।
पीयूष गोयल ने इस रिश्ते को ‘बहुत तेजी से रीसेट हो रहा संबंध’ बताया।
उन्होंने कहा, “यह रिश्ते में पूरी तरह बदलाव की दिशा में एक नई शुरुआत है, जिसमें नए लक्ष्य और नई योजनाएं ‘मिशन मोड’ में तय की जा रही हैं।”
मंत्री ने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने वार्ताकारों को निर्देश दिया है कि इस साल के अंत तक या उससे पहले व्यापक दृष्टिकोण के साथ मुक्त व्यापार समझौता पूरा किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को काफी बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं।
गोयल ने कहा, “हम पूरी तरह सक्षम महसूस कर रहे हैं कि हम तेजी से आगे बढ़कर ऐसे नतीजे दे सकें जो सिर्फ बिजनेस ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के लिए भी फायदेमंद हों।”
अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद, कृषि मंत्री हीथ मैकडोनाल्ड और मनिंदर सिद्धू से भी मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, खाद्य सुरक्षा, एग्री-टेक, स्थिरता, तकनीक और निवेश सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
अनीता आनंद ने कहा कि उन्होंने “हमारे व्यापार संबंधों को मजबूत और विस्तार देने” पर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों, कामगारों और निवेशकों के लिए नए अवसर बन सकें।
मनिंदर सिद्धू ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और नई दिल्ली के साथ संबंध मजबूत करना कनाडा के आर्थिक लक्ष्यों के लिए बहुत जरूरी है।
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