अंतरराष्ट्रीय समाचार
डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार ने 2021 में अफगानिस्तान में 2,500 सैनिकों के रहने की पुष्टि की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन ने फिर पुष्टि की है कि अफगानिस्तान में 2021 की शुरूआत में अमेरिकी सैनिकों की संख्या में कमी कर दी जाएगी और घटाकर 2,500 तक कर देंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की खबर के मुताबिक, ओब्रायन की फिर से की गई ये घोषणा उन विवादित संदेशों के बाद स्पष्टीकरण देने के प्रयास में सामने आई है जो अफगानिस्तान से सैनिकों को हटाने को लेकर किए गए ट्रंप के ट्वीट और उसके बाद जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ मार्क माइले की टिप्पणियों से मिले संकेत के कारण पैदा हुए थे।
पिछले हफ्ते रविवार को ओब्रायन ने एनपीआर को दिए गए साक्षात्कार में 2,500 सैनिकों की योजना का खुलासा किया था, जिसे माइले ने खारिज कर दिया।
माइले ने कहा, “मुझे लगता है कि रॉबर्ट ओब्रायन या कोई भी व्यक्ति ऐसी अटकलें लगा सकता है लेकिन मैं अटकलों में नहीं पड़ने वाला हूं। मैं परिस्थितियों और योजनाओं के आधार पर स्थिति का कठोर विश्लेषण कर रहा हूं और यह मेरी और राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत पर आधारित है।”
ओब्रायन ने कहा, “कुछ लोगों ने इसे अटकलें कहा है लेकिन मैं आपको गारंटी दे सकता हूं कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की योजना है। यह उनका आदेश है ना कि अटकलें।”
क्रिसमस पर सैनिकों की घर वापसी को लेकर ट्रंप द्वारा किए गए ट्वीट के बारे में ओब्रायन ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई उनकी इच्छा थी।
2021 की शुरूआत में युद्धग्रस्त देश अफगानिस्तान में 2,500 सैनिक रखने की बुधवार को ओब्रायन की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने ट्वीट किया था कि “हमारे पास क्रिसमस तक अफगानिस्तान में सेवा करने वाले हमारे बहादुर पुरुषों और महिलाओं की बहुत कम संख्या होनी चाहिए।”
बता दें कि अफगानिस्तान के युद्ध में करीब 2,400 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है, जो अमेरिका के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चला है।
ट्रंप ने अफगानिस्तान से सभी सैनिकों को वापस लाने की बात कही है।
यदि तालिबान समझौते की शर्तों को पूरा करता है तो अमेरिका-तालिबान समझौते के तहत भी मई 2021 तक अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैन्य बलों की पूर्ण वापसी की बात कही गई है। वहीं जनरल मैकेंजी ने पिछले महीने कहा था कि तालिबान ने अब तक “यह नहीं कहा है कि वे अल-कायदा के साथ अपने संबंध खत्म करने वाले हैं।”
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यूएनजीए ने महासचिव पद के उम्मीदवार के साथ पांचवीं बैठक की, फर्नांडा एस्पिनोसा ने पेश की दावेदारी

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव पद के उम्मीदवार के साथ अपनी पांचवीं बातचीत की, जिसमें उम्मीदवार के तौर पर फर्नांडा एस्पिनोसा ने अपनी दावेदारी ठोंकी।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, सोमवार को हुए संवाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष और इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, जिन्हें मई में एंटीगुआ और बारबुडा द्वारा नामित किया गया था, ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के नेतृत्व कौशल, अनुभव और क्षमताओं, संयुक्त राष्ट्र सुधार और संयुक्त राष्ट्र के तीन स्तंभों शांति और सुरक्षा, मानवाधिकार और विकास से संबंधित प्रश्नों के जवाब दिए।
एस्पिनोसा ने अपने बयान में कहा कि वह यूएन प्रमुख का पद ऐसे समय में संभालना चाहती हैं, जब दुनिया को बहुपक्षीय आदर्शों को दोहराने की नहीं, बल्कि नतीजों की जरूरत है, एक ऐसा संयुक्त राष्ट्र जो संकट को पहले ही रोक सके, बेहतर ढंग से प्रतिक्रिया दे सके, ज्यादा असरदार तरीके से काम कर सके और सामूहिक कार्रवाई की अहमियत में भरोसा बहाल कर सके।
उन्होंने कहा कि उनका विजन परिवर्तन के पांच परस्पर जुड़े स्तंभों शांति और सुरक्षा, विकास, डिजिटल और ऊर्जा परिवर्तन, वितरण अंतर को कम करना और विश्वसनीयता का पुनर्निर्माण करना के इर्द-गिर्द संगठित है।
एस्पिनोसा ने कहा, “यह कोई विस्तृत और व्यापक कार्य योजना नहीं है, क्योंकि व्यापक राजनीतिक और वित्तीय नेतृत्व सदस्य देशों से आना चाहिए। बल्कि, यह उन क्षेत्रों को उजागर करती है जहां महासचिव अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर सबसे प्रभावी ढंग से कार्य कर सकती हैं और परिणाम देकर संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और विश्वास को बहाल कर सकती हैं।”
अप्रैल के अंत में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अगले संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के लिए चार उम्मीदवारों के साथ दो दिवसीय संवादात्मक बैठक आयोजित की। इसके तहत ब्राजील और मैक्सिको द्वारा नामित चिली की पूर्व राष्ट्रपति और मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र की पूर्व उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट, अर्जेंटीना द्वारा नामित अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के वर्तमान महानिदेशक राफेल ग्रॉसी, बुरूंडी द्वारा नामित सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी साल और कोस्टा रिका द्वारा नामित अर्थशास्त्री और कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रेबेका ग्रिनस्पैन के नाम शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान और नौवें महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल इस वर्ष के अंत में समाप्त हो जाएगा। अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एक जनवरी, 2027 को पदभार ग्रहण करेंगे।
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अमेरिकी एयर फोर्स का बी-52 बॉम्बर टेकऑफ के तुरंत बाद हुआ क्रैश, आठ लोगों की मौत

कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान में एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से उड़ान भरने के तुरंत बाद अमेरिकी एयर फोर्स का बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस क्रैश हो गया। इस भयानक हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई।
बेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि क्रैश सोमवार को स्थानीय समय के हिसाब से सुबह करीब 11:20 बजे हुआ। इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और ऑपरेशन अभी भी जारी हैं।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि एक्स पर एक अलग पोस्ट में, सैन्य बेस ने बताया कि एयरफील्ड बंद कर दिया गया है और आने वाले सभी एयरक्राफ्ट को डायवर्ट किया जा रहा है।
कर्नल जेम्स हेस ने मीडिया को बताया, “आज, एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर एक भयानक हादसा हुआ और हमने आठ महान अमेरिकियों को खो दिया।” उन्होंने मृतको को “मिलिट्री, सरकारी सिविलियन और सरकारी कॉन्ट्रैक्टर का मिला-जुला क्रू” बताया।
बेस ने कहा कि सभी नॉन-कमर्शियल विजिटर पास अगली सूचना तक सस्पेंड कर दिए गए हैं ताकि इंस्टॉलेशन पूरी तरह से इमरजेंसी रिस्पॉन्स ऑपरेशन पर फोकस कर सके।
बेस ने बताया कि बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस में आठ लोग सवार थे और एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गया, जिसमें किसी के बचने की खबर नहीं है।
बेस ने एक्स पर बताया कि एयरक्राफ्ट एक रूटीन टेस्ट मिशन पर था। क्रैश से हवा में काले धुएं का एक बड़ा गुबार उठा जो मीलों दूर से देखा जा सकता था। शुरुआती संकेत हैं कि क्रैश में कोई बच नहीं सकता था।
अधिकारी इसमें शामिल सभी लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। क्रैश के कारण की जांच अभी चल रही है।
बी-52 एक लंबी दूरी का स्ट्रेटेजिक बॉम्बर है जो ईरान पर हाल ही में हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान बमबारी में भी शामिल रहा है। यह विशाल बमवर्षक विमान 50,000 फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है, जबकि वाणिज्यिक यात्री विमान आमतौर पर लगभग 35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। इसकी 70,000 पाउंड की भारी पेलोड क्षमता में सैकड़ों पारंपरिक बमों के साथ-साथ 32 परमाणु क्रूज मिसाइलें भी शामिल हो सकती हैं।
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अमेरिका और ईरान शांति समझौते से कीमती धातुओं में भारी उछाल, सोना और चांदी 3 प्रतिशत तक चढ़े

अमेरिका और ईरान द्वारा शांति समझौते की पुष्टि के बाद, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं में कमी आने से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार के साथ ही कीमती धातुओं में भी भारी उछाल देखने को मिली।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) पर अगस्त वायदा सोना अपने पिछले बंद 1,50,528 रुपए से 3,301 रुपए की भारी उछाल के साथ 1,53,829 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला, जो खबर लिखे जाने तक दिन का उच्चतम स्तर रहा।
वहीं, एमसीएक्स सिल्वर जुलाई वायदा अपने पिछले बंद 2,46,186 रुपए से 5,377 रुपए की जबरदस्त तेजी के साथ 2,51,563 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 2,53,345 रुपए के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, खबर लिखे जाने तक (दोपहर 12.09 बजे के करीब) एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1.48 प्रतिशत यानी 2,222 रुपए की उछाल के साथ 1,52,750 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, तो वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2.20 प्रतिशत यानी 5,414 रुपए की तेजी के साथ 2,51,600 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।
वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के सुबह के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को 999 प्यूरिटी वाला सोना 1,50,169 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जबकि 999 प्यूरिटी वाली चांदी की कीमत 2,51,011 रुपए प्रति किलोग्राम थी।
सोने-चांदी की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पुष्टि की है कि ईरान के साथ शांति समझौता हो गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा, जिससे चार महीने से चल रहे संघर्ष का अंत हो गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग से नाकाबंदी हटा ली है, जो विश्व ऊर्जा व्यापार के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और दोनों देशों के बीच तनाव के कारण काफी हद तक बाधित रहा था।
इस बीच, एक कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि एमसीएक्स गोल्ड फिलहाल 1.54-1.55 लाख रुपए के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन के नीचे ट्रेड कर रहा है। भू-राजनीतिक तनावों में कुछ नरमी आने से सोने में मजबूती देखने को मिल रही है और कीमतों में रिकवरी के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
एक्सपर्ट का मानना है कि यदि सोना 1.55 लाख रुपए के स्तर के ऊपर लगातार बना रहता है, तो इसमें और तेजी आ सकती है तथा भाव 1.58 लाख रुपए से 1.60 लाख रुपए के दायरे तक पहुंच सकते हैं। दूसरी ओर, यदि कीमत 1.53-1.52 लाख रुपए के सपोर्ट जोन के नीचे फिसलती है, तो सोना फिर से 1.50 लाख रुपए के स्तर तक गिर सकता है।
वहीं, एक्सपर्ट ने आगे बताया कि एमसीएक्स सिल्वर ने भी 2.50 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर लिया। इससे बाजार की धारणा में सुधार और कीमतों में धीरे-धीरे रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, यदि चांदी 2.54-2.55 लाख रुपए के रेजिस्टेंस जोन को पार कर लेती है, तो इसमें और तेजी आ सकती है और भाव 2.58-2.60 लाख रुपए तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, यदि कीमत 2.50 लाख के नीचे फिसलती है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और भाव 2.42-2.40 लाख रुपए के सपोर्ट क्षेत्र तक आ सकते हैं।
एक्सपर्ट ने बताया कि निकट अवधि में चांदी का रुझान सकारात्मक बना हुआ है। बाजार की धारणा को और मजबूत करने के लिए कीमतों का मौजूदा रेजिस्टेंस स्तरों के ऊपर टिकना जरूरी होगा। भू-राजनीतिक घटनाक्रम, सुरक्षित निवेश की मांग और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता आगे भी चांदी की चाल को प्रभावित कर सकती है।
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