राजनीति
नेकी कर दरिया में डाल’, यूपी चुनाव से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिया लोगों को जुड़ने का मंत्र
मेरठ, 21 फरवरी : उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मेरठ में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संघ से जुड़े रहने और अन्य लोगों को जोड़ने के लिए पांच मंत्र दिए।
पांचवें मंत्र में संघ प्रमुख ने कहा कि आप कोई ना कोई अच्छा काम करें, प्रमाणिकता के साथ करें, निस्वार्थ करें। उन्होंने कहा कि उसमें टिकट मांगना नहीं, ना कोई सीट मांगना। नेकी करो कुएं में डालो। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से आप काम करते हुए देश के लिए उत्कृष्ट करो, एक्सीलेंस करो। यह जो आप कर रहे हो, आपको संघ का नाम भी नहीं पता तब भी हम आपको संघ का सदस्य बनाएंगे।
इससे पहले 18 फरवरी बुधवार को लखनऊ में आरएसएस प्रमुख ने सामाजिक समरसता, जाति उन्मूलन और सांस्कृतिक एकता को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार बताते हुए कहा था कि हम सब भारत माता के पुत्र हैं, सहोदर हैं, और हम हिंदू हैं। यही भाव अस्पृश्यता और जातीय विभाजन को समाप्त करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि आधुनिकता का विरोध नहीं, बल्कि अंधानुकरण का विरोध है। समाज यदि जागृत और समरस रहेगा तो राजनीतिक विकृतियां स्वतः समाप्त होंगी।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि जाति कोई शाश्वत व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्तमान समय में अव्यवस्था का रूप ले चुकी है। पहले यह कार्य-आधारित थी, अब हर व्यक्ति हर कार्य कर सकता है। जाति की दीवारें मिट रही हैं, तरुण वर्ग का व्यवहार बदल रहा है। हमें समाज को समरस बनाए रखने की बड़ी लकीर खींचनी है- हम सब हिंदू हैं।
यूजीसी रेगुलेशन को लेकर लखनऊ में उन्होंने कहा था कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए पूर्वानुमान आधारित प्रतिक्रिया उचित नहीं। समाज में विभाजन न हो, यह ध्यान रखना आवश्यक है। भागवत ने कहा कि आधुनिकीकरण एक सतत प्रक्रिया है, उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए, परंतु पश्चिमीकरण के अंधानुकरण से बचना जरूरी है। जो नया है, उसे परख कर स्वीकार करें। शाश्वत मूल्यों के अनुरूप परिवर्तन ही उचित है।
बता दें कि आरएसएस प्रमुख 22 और 23 फरवरी को दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर रहेंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे शताब्दी वर्ष के तहत उत्तराखंड में व्यापक स्तर पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। संघ ने प्रदेशभर में 1,000 हिंदू सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका के साथ शांति समझौता ‘सम्मान और ताकत’ के साथ आगे बढ़ा : ईरानी राष्ट्रपति

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा बताए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ हालिया शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) ‘सम्मान’ और ‘ताकत’ के साथ किया है।
मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी की मौजूदगी में हुई एक बैठक में ये बातें कहीं। उनके कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, इस बैठक में राष्ट्रपति ने उस एमओयू का बचाव किया, जिस पर ईरान और अमेरिका ने 18 जून को क्षेत्र में युद्ध खत्म करने के लिए हस्ताक्षर किए थे।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा, “हमने हालिया समझौते को मजबूती से आगे बढ़ाया और अपने दुश्मनों के सामने घुटने नहीं टेके। यह एमओयू विशेषज्ञों के साथ सोच-समझकर और विस्तार से चर्चा करने के बाद तैयार किया गया था।”
आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, शनिवार को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने शांति एमओयू को “ईरान की शान और जीत” का सबूत बताया और कहा कि यह कूटनीति के क्षेत्र में देश की जीत को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
एमओयू के तहत, ईरान और अमेरिका को सोमवार को खत्म होने वाली 60 दिनों की अवधि में बातचीत करके किसी अंतिम समझौते पर पहुंचना था। हालांकि, हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद बातचीत का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
इस बीच, रविवार को अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर रूबेन गैलेगो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बिना किसी स्पष्ट योजना, बाहर निकलने की रणनीति या तय मिशन के ईरान युद्ध में शामिल हुआ, जिसका खामियाजा अमेरिकी सैनिकों को भुगतना पड़ा।
इराक युद्ध के अनुभवी और मरीन कॉर्प्स में सेवा दे चुके गैलेगो ने रविवार को कहा कि इस संघर्ष ने पेंटागन की योजना और नेतृत्व में गंभीर कमियों को उजागर किया है।
सीनेटर ने एबीसी न्यूज से कहा, “इस प्रशासन ने इस युद्ध के लिए कोई योजना नहीं बनाई थी। उन्होंने यह योजना नहीं बनाई कि इस युद्ध से कैसे बाहर निकला जाए और न ही वे वास्तव में यह समझ पाए कि यह युद्ध कैसे बढ़ेगा।”
एरिजोना के सीनेटर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर थकान, गिरते मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन का 24वां दिन : चार मंत्रियों का समूह करेगा रिफॉर्म मंच से बातचीत

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार को एक बार फिर वार्ता होगी। आंदोलन के 24वें दिन दोपहर दो बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार के चार मंत्रियों का समूह जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करेगा।
छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ वार्ता में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। आंदोलनकारी छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की सीबीआई जांच की दो प्रमुख मांगों पर कायम हैं। सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक दोनों प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आज की वार्ता को आंदोलन के मौजूदा गतिरोध को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से छात्रों को बातचीत का यह प्रस्ताव रविवार को दिया गया। अनुमंडल पदाधिकारी और एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर ने आंदोलनकारियों को वार्ता की जानकारी दी। सरकार ने छात्रों के विधिक सलाहकारों को भी बातचीत में शामिल होने की अनुमति देने की बात कही है। वार्ता से एक दिन पहले रविवार शाम आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में विरोध मार्च निकाला। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला मार्च अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा। यहां छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंके।
छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच का कहना है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुंचेंगे। छात्र आंदोलन की दो प्रमुख मांगों को लेकर सरकार का अब तक का रुख अलग है। वर्ष 2024 में हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं।
सरकार का तर्क है कि इस चरण पर परीक्षा रद्द करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। सरकार यह भी कहती रही है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच पहले हुई है और मामला न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजर चुका है। फिलहाल मामले से जुड़ी जांच राज्य की सीआईडी कर रही है। छात्र सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में अब तक हुई जांच से उनका विश्वास बहाल नहीं हुआ है। वे पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से सीबीआई जांच के विकल्प के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव सामने आ चुका है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। इस बीच, सरकार और छात्रों के बीच पूर्व की वार्ताओं में परीक्षा सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति बनी है। सरकार 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा भी कर चुकी है। आंदोलनकारी छात्रों ने पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
हालांकि, सरकार के साथ आज होने वाली बातचीत में मुख्य फोकस भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों और छात्रों की प्रमुख मांगों पर रहने की संभावना है। अब सबकी निगाहें दोपहर दो बजे होने वाली इस वार्ता पर टिकी हैं। यदि सरकार और छात्रों के बीच किसी साझा समाधान पर सहमति बनती है तो करीब साढ़े तीन सप्ताह से चल रहे आंदोलन को विराम देने की राह खुल सकती है। वहीं, बातचीत विफल रहने की स्थिति में 20 अगस्त के प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर आंदोलन और तेज होने की संभावना है।
राजनीति
मुख्यमंत्री विजय ने तमिलनाडु सरकार के 100 दिन पूरे होने पर कल्याणकारी योजनाओं की सूची जारी की

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को तमिलनाडु में टीवीके सरकार के 100 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में सत्ता संभालने के बाद से शुरू की गई कई कल्याणकारी, निवेश और प्रशासनिक पहलों की सूची जारी की है।
सीएम विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी सरकार को “नए युग के लिए जनता की अंतरात्मा” के रूप में वर्णित किया और कहा कि इसके पहले 100 दिन पारदर्शी शासन, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित रहे हैं।
उन्होंने प्रमुख उपलब्धियों में तमिलनाडु निवेशक शिखर सम्मेलन 2026 का जिक्र किया गया, जिसने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं हासिल कीं।
उन्होने लिखा कि सरकार ने शराब की खपत को कम करने की अपनी चरणबद्ध नीति के तहत 717 सरकारी शराब की दुकानों को भी बंद कर दिया।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिलनाडु-वेत्री ग्रामीण पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत स्वच्छता, पेयजल सुविधाओं और सड़कों में सुधार के लिए प्रतिवर्ष 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान को तेज करने के लिए 65 विशेष कार्य बलों का भी गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि विजय कौशल विकास कार्यक्रम के तहत 12 लाख छात्रों और एक लाख युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने “विजयम 150” कार्यक्रम की भी घोषणा की है, जिसके तहत 150 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। विजय ने बताया कि स्वर्ण सहायता योजना के लिए 560 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि एक अन्य विवाह सहायता पहल के तहत पात्र लाभार्थियों को तीन ग्राम का सोने का सिक्का और रेशमी साड़ी प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम के लिए 812 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
किसानों के लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की, जिसके तहत गन्ने पर 4,000 रुपये प्रति टन और धान पर 2,750 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान सुनिश्चित किया गया। इसके अलावा, सरकार ने लगभग 6,000 करोड़ रुपये के फसल ऋण माफ किए और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए वेट्री महिला बकरी पालन योजना शुरू की।
सरकार ने वेट्री आवास योजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये आवंटित किए और 200 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की। इसके अलावा, पेरुंथलाइवर कामराज नाश्ता योजना के विस्तार के लिए 710 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए।
वेट्री लैपटॉप योजना को 2,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 11 के छात्रों को हेलमेट और पानी की बोतलों से सुसज्जित आधुनिक ब्रांडेड साइकिलें प्रदान की जाएंगी।
मुख्यमंत्री विजय ने प्रशासनिक सुधारों के भी बारे में भी जानकारी दी, जिनमें चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण स्तर पर बहुमंजिला इमारतों के लिए योजना अनुमति और संपत्ति दस्तावेजों का सीधा, संपर्क रहित पंजीकरण शामिल है। उन्होंने दोहराया कि पारदर्शिता और ईमानदारी टीवीके सरकार के मूल सिद्धांत बने रहेंगे।
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