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डीजल की महंगाई 3 सप्ताह से जारी, 20 बार बढ़ा पेट्रोल का दाम
पेट्रोल और डीजल की महंगाई तीन सप्ताह से जारी है। तेल विपणन कंपनियों ने शनिवार को लगातार 21वें दिन डीजल के दाम में वृद्धि की जबकि एक दिन छोड़ बाकी 20 दिन पेट्रोल के दाम इजाफ किया गया। पेट्रोल का भाव शनिवार को दिल्ली में 25 पैसे, कोलकाता और मुंबई में 23 पैसे जबकि चेन्नई में 22 पैसे प्रति लीटर बढ़ गया। वहीं, डीजल की कीमत दिल्ली में 21 पैसे, कोलकाता में 18 पैसे, मुंबई में 20 पैसे और चेन्नई में 17 पैसे प्रति लीटर हो गई है।
इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल का भाव बढ़कर क्रमश: 80.38 रुपये, 82.05 रुपये, 87.14 रुपये और 83.59 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
डीजल का दाम भी चारों महानगरों में बढ़कर क्रमश: 80.40 रुपये, 75.52 रुपये, 78.71 रुपये और 77.61 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
इस महीने के सात जून से पेट्रोल और डीजल के दाम में रोजाना बदलाव हो रहे हैं। इन 21 दिनों में दिल्ली में डीजल 11.01 रुपये लीटर महंगा हो गया है जबकि तीन सप्ताह में 20 बार पेट्रोल के दाम में वृद्धि के बाद पेट्रोल 9.12 रुपये लीटर महंगा हो गया है।
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अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद धड़ाम हुआ कच्चा तेल, ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर से नीचे फिसला

वैश्विक कच्चे तेल बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई भी 87 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत और ईरान के साथ संभावित तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों पर भारी दबाव डाला है।
इस बीच, भारतीय रुपया लगातार पांचवें सत्र में मजबूत हुआ। बुधवार को 94.64 के स्तर पर बंद होने के बाद रुपया गुरुवार को 29 पैसे की बढ़त के साथ 94.35 प्रति डॉलर पर खुला।
बाजार में सबसे बड़ी चिंता रहे पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक जोखिमों का असर अब कम होता दिखाई दे रहा है। निवेशकों का मानना है कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक बढ़त के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ आक्रामक सैन्य रुख अपनाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। इससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है और तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम कम हुआ है।
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.36 प्रतिशत टूटकर 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले दोनों बेंचमार्क बुधवार को 8 प्रतिशत से अधिक टूटे थे और अगस्त के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर पर बंद हुए थे।
इस सप्ताह अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जो हाल के वर्षों की सबसे तेज साप्ताहिक गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देशों के सरकारी हलकों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि ईरान पर बड़े पैमाने के सैन्य हमले की संभावना अब पहले की तुलना में कम हो गई है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान पर तत्काल हमला करने की कोई योजना नहीं है।
इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी युद्ध की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी प्रशासन पर कूटनीतिक समाधान खोजने का दबाव बढ़ सकता है। इसी उम्मीद ने बाजार में भारी बिकवाली को जन्म दिया।
कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिति में भी सुधार के संकेत मिले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लगभग युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बहाल होने के बाद वैश्विक तेल बाजार एक बार फिर अधिशेष (सरप्लस) की स्थिति में पहुंच रहा है। बैंक का अनुमान है कि सितंबर में वैश्विक बाजार में प्रतिदिन लगभग 11 लाख बैरल और अक्टूबर में 14 लाख बैरल अतिरिक्त आपूर्ति रही।
हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को स्थायी मान लेना जल्दबाजी होगी। उनका कहना है कि भू-राजनीतिक हालात तेजी से बदल सकते हैं और अमेरिकी कांग्रेस की नई संरचना जनवरी से प्रभावी होगी, इसलिए तत्काल नीति परिवर्तन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
इसके अलावा, प्रमुख उपभोक्ता देशों में वाणिज्यिक तेल भंडार पिछले 15 वर्षों के निचले स्तर के करीब हैं। अमेरिका में भी पिछले सप्ताह कच्चे तेल, पेट्रोल और डिस्टिलेट के भंडार घटे हैं, जबकि मांग एक वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंची है। ऐसे में कीमतों में तेज गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी, इस पर अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।
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धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना ही जरूरी नहीं, ये 7 चीजें भी घर लाएंगी सुख-समृद्धि

हिंदू धर्म में धनतेरस का त्योहार बेहद खास माना जाता है। इस साल धनतेरस का पावन पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। यही वजह है कि लोग इस दिन सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदना पसंद करते हैं, हालांकि जरूरी नहीं कि धनतेरस पर शुभ खरीदारी के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ें। कुछ ऐसी छोटी-छोटी चीजें भी हैं, जिन्हें घर लाना बेहद शुभ माना जाता है।
अगर आपका बजट सोना-चांदी खरीदने का नहीं है तो आप थोड़े से धनिया के बीज खरीदकर भी इस परंपरा को निभा सकते हैं। कहा जाता है कि इस दिन साबुत धनिया खरीदकर मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करने से उनकी कृपा बनी रहती है।
धनतेरस पर बर्तन खरीदना सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है। इसके पीछे भगवान धन्वंतरि से जुड़ी मान्यता है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से इस दिन नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। खासतौर पर पीतल और तांबे के बर्तन खरीदने की परंपरा है। आप चाहें तो अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से स्टील या कांसे के बर्तन भी खरीद सकते हैं।
दिवाली की पूजा के लिए धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति खरीदना भी शुभ माना जाता है। मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी, जबकि भगवान गणेश को सुख, बुद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मिट्टी की मूर्तियां और पूजा के लिए सुंदर दीये भी खरीद सकते हैं।
घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए धनतेरस पर श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र खरीदने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीयंत्र मां लक्ष्मी से जुड़ा है, जबकि कुबेर यंत्र को धन और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि झाड़ू का संबंध मां लक्ष्मी से होता है। इसे घर लाने से दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है। इसलिए कई लोग इस दिन नई झाड़ू जरूर खरीदते हैं।
धनतेरस पर नमक खरीदना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नमक घर की नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मकता बनाए रखने का प्रतीक है। वहीं साबुत हल्दी को शुभता, खुशहाली और मंगल कार्यों से जोड़कर देखा जाता है।
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ट्रंप की चुनावी हार के बाद कीमती धातुओं में जोरदार उछाल, पलक झपकते ही सोना 3,000 रुपए और चांदी 6,900 रुपए तक चढ़ी

लगातार कई दिनों तक दबाव में रहने के बाद बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव नतीजों, कमजोर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा, जिससे कीमती धातुओं में तेज खरीदारी देखने को मिली।
घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना एक ही दिन में 2.21 प्रतिशत यानी 3,088 रुपए चढ़कर 1,42,540 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी में और अधिक तेजी देखने को मिली तथा इसका भाव 3.84 प्रतिशत यानी 6,902 रुपए बढ़कर 1,86,600 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
वहीं खबर लिखे जाने तक, एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के साथ 1,42,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा, तो वहीं दिसंबर वायदा चांदी 3.71 प्रतिशत की उछाल के साथ 1,86,373 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई।
बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया। चुनाव परिणामों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बढ़त हासिल की, जिसके बाद वैश्विक बाजारों में नई राजनीतिक संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई।
विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने को अतिरिक्त समर्थन दिया। आमतौर पर कमजोर डॉलर और कम बॉन्ड यील्ड सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों को आकर्षक बनाते हैं।
पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं, जिससे निवेशकों को उम्मीद जगी है कि केंद्रीय बैंकों के पास मौद्रिक नीति में कुछ लचीलापन दिखाने की गुंजाइश बन सकती है। सोना ऐसे वातावरण में बेहतर प्रदर्शन करता है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो कॉमेक्स में सोना 2.32 प्रतिशत चढ़कर 4,031.90 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती नजर आई, जबकि चांदी 4.10 प्रतिशत चढ़कर 51.795 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
बाजार की नजर अभी वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी बनी हुई है। रूस ने यूक्रेन और अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय शांति वार्ता के लिए सहमति जताई है, जबकि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.41 लाख के आसपास पहला महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, इसके बाद अगला रेजिस्टेंस जोन 1,43,000 से 1,43,700 रुपए पर है। नीचे की तरफ 1,40,000 रुपए के स्तर पर तत्काल सपोर्ट बना हुआ है, जबकि अगला सपोर्ट बैंड 1,37,500 रुपए से 1,38,300 रुपए पर है।
एक्सपर्ट का कहना है कि रिकवरी के बावजूद, मोमेंटम इंडिकेटर्स अभी भी काफी कमजोर हैं। आरएसआई लगभग 35 के आसपास है, जबकि एमएसीडी हिस्टोग्राम नेगेटिव बना हुआ है और लगातार बढ़ रहा है। इससे पता चलता है कि तकनीकी संरचना में अभी तक सुधार के कोई ठोस संकेत नहीं दिखे हैं।
वहीं चांदी में 1,86,000 रुपए से 1,88,000 रुपए के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस है। अगर कीमतें इस बैंड से ऊपर टिक जाती हैं, तो यह 1,94,000 रुपए से 1,96,000 रुपए के अगले रेजिस्टेंस जोन की ओर बढ़ने का रास्ता खोल सकता है। नीचे की तरफ, 1,78,000 रुपए से 1,80,000 रुपए का स्तर तत्काल सपोर्ट का काम करता है, और इसके बाद अगला सपोर्ट जोन 1,70,000 रुपए से 1,72,000 रुपए पर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक राजनीतिक माहौल आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे।
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